22-04-2026, 11:25 AM
रात के 3 बजे थे।
नेहा अचानक बिस्तर से उठ गई।
बिना कुछ बोले वो कमरे से बाहर चली गई।
मैं भी उठकर बैठ गया — ध्यान से।
कुछ मिनट बाद वो वापस आई... फोन लेकर।
वो मेरे पास बैठ गई और फोन स्क्रॉल करने लगी।
उसने हमारी शादी की एक ग्रुप फोटो खोली।
फिर उँगली से एक आदमी की तरफ़ इशारा किया और पूछा —
“ये अविनाश कौन है इस फोटो में?”
मैंने उँगली बढ़ाकर एक अच्छे कद-काठी वाले पंजाबी लड़के की तरफ़ इशारा किया —
तुरबन बाँधे, दाढ़ी, मजबूत शरीर।
नेहा ने फोटो ज़ूम की।
कुछ देर तक उसे ध्यान से देखा।
फिर पूछा —
“अब वो कहाँ है?”
“कनाडा में,” मैंने जवाब दिया।
“अभी भी contact में हो?”
“हाँ... सोशल मीडिया पर।”
नेहा ने मेरी तरफ़ हाथ बढ़ाया।
“अपना फोन दो।”
मैंने फोन उसे दे दिया — इंस्टा पहले से ओपन था।
वो अविनाश के प्रोफाइल पर गई।
पहले उसकी फैमिली फोटोज़ देखीं।
एक फोटो में उसकी माँ थीं — अब थोड़ी बूढ़ी दिख रही थीं, लेकिन अभी भी सुंदर।
फिर उसकी पत्नी अमाया की फोटोज़ — गोरी, लंबे बाल, फिट बॉडी।
एक फोटो में अविनाश और अमाया फ्लोरिडा बीच पर थे।
अविनाश शर्टलेस — 6 पैक एब्स, अच्छी बॉडी।
अमाया शॉर्ट्स और बिकिनी टॉप में।
नेहा ने फोटो ज़ूम की — सबसे पहले अमाया के बड़े स्तनों पर।
फिर... अनजाने में... अविनाश के क्रॉच एरिया पर ज़ूम कर दिया।
वो एक पल के लिए रुकी।
फिर मेरी तरफ़ मुड़ी... हल्की-सी शरारती मुस्कान के साथ बोली —
“ओप्स...”
उसकी आँखों में अब एक अलग चमक थी।
वो फोन अभी भी हाथ में था, लेकिन नजर मेरी तरफ़ थी।
“तुमने अविनाश के साथ ये सब... कितने समय तक किया?”
मैंने साँस ली और जवाब दिया —
“जब तक हम होस्टल में थे... लगभग आखिरी साल तक।
उसके बाद... हमने वो सब बंद कर दिया।”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा और अगला सवाल पूछा —
“क्या उसने तुम्हें जबरदस्ती हैंडजॉब करने को मजबूर किया था?”
मैंने सिर हिलाया।
“नहीं... जबरदस्ती नहीं।
लेकिन वो... डोमिनेंट बनना पसंद करता था।
वो मुझे ऑर्डर देता था...
मुझे भी वो फीलिंग अच्छी लगती थी।
मैं खुद से नहीं रोक पाता था।”
नेहा ने “हम्म...” कहा।
उसकी आवाज़ में अब कुछ और था — जैसे वो मेरे बारे में कुछ सोच रही हो।
उसकी नजर मेरे चेहरे पर घूम रही थी, जैसे वो मेरी सबमिशन को, मेरे बेड पर वाले व्यवहार को समझने की कोशिश कर रही हो।
नेहा धीरे से बोली —
“सच बताओ... क्या उसने कभी...?”
वो वाक्य अधूरा छोड़ दिया।
लेकिन मुझे समझ आ गया कि वो क्या पूछना चाहती है।
मैंने उसकी आँखों में देखकर कहा —
“तुम्हारा मतलब... एनल? या ब्लोजॉब... है ना?”
नेहा ने बस “हम्म...” कहा।
उसकी आवाज़ में अब एक अजीब सी उत्सुकता थी — जैसे वो मेरे दिमाग को पढ़ रही हो।
मैंने सिर हिलाया।
“नहीं... उसने कभी-कभी ऑर्डर दिया था।
‘मुँह में ले’, ‘चूस’... ऐसे बोलता था।
लेकिन मैंने कभी नहीं किया।
मैं बस उसका लंड हाथ से हिलाता था।
बाकी कुछ नहीं।
मैंने कभी मुँह नहीं लगाया... और एनल की तो बात ही नहीं हुई।”
नेहा कुछ देर चुप रही।
नेहा अभी भी फोन की स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए थी।
वो अविनाश की तस्वीरें स्क्रॉल कर रही थी — बीच-बीच में ज़ूम करके देख रही थी।
उसकी आँखें फोन पर थीं, लेकिन सवाल मेरी तरफ़ थे।
“तो... सिर्फ़ उसका लंड ही तुमने छुआ था?”
मैंने सिर हिलाया — “नहीं।”
नेहा ने फोन से नजर हटाकर मेरी तरफ़ देखा।
उसके चेहरे पर हैरानी थी।
“फिर... किसका?
कितने...?”
मैंने उसकी आँखों में नहीं देखा।
शर्म से मेरी गर्दन झुक गई।
आवाज़ में खुद पर दया और शर्म का मिश्रण था —
“क्या तुम सच में जानना चाहती हो कि तुम्हारे नाकारा पति ने कितने लंड छुए हैं?”
“हाँ... अगर तुम कम्फर्टेबल हो तो बताओ।
लेकिन मैं तुम्हें पहले बता दूँ — ये कुछ भी हमारे बीच नहीं बदलेगा।
हमारा बॉन्ड हमारे पास्ट से कहीं ज़्यादा बड़ा है।”
मैंने गहरी साँस ली और बोला —
“अविनाश के बाद... मैं कई और लड़कों से मिला।
घर के आसपास रहने वाले... पड़ोस के, कॉलेज के, कॉलेज के।
उन्होंने मुझसे सिर्फ़ इसलिए दोस्ती की... क्योंकि मैं गार्गी का भाई था।
मुझे पहले से पता था — उनकी नजर गार्गी पर थी।
गंदी नजर।
फिर भी... मैंने उन लोगों को दोस्त बनाया।
मुझे एक अजीब सी आदत पड़ गई थी।
अगर कोई गार्गी के बारे में गंदी बातें करता था
तभी मुझे वो एरोटिकनेस महसूस होती थी।
ये जानते हुए कि ये गलत है... मैंने उनको दोस्त बनाया।
और उनके साथ... वही सब किया जो अविनाश के साथ किया।
नेहा ने पूछा —
“तो... कितने लोग थे?”
मैंने सिर हिलाया, शर्म से आवाज़ कम हो गई —
“मुझे ठीक से याद नहीं... मगर चार-पाँच से ज़्यादा तो रहे होंगे।”
हा अभी भी फोन में अविनाश की तस्वीर देख रही थी।
उसने ज़ूम किया — उसकी छाती, बाँहें, फिर नीचे...
फिर मेरी तरफ़ मुड़ी —
“उन सबकी कद-काठी अविनाश जैसी ही थी?”
मैंने सिर हिलाया —
“सबकी तो नहीं... कुछ अविनाश जैसे थे — मोटे, मजबूत, लंबे।
कुछ पतले-दुबले भी थे... मगर...”
नेहा ने फोन साइड रखा और पूछा —
“मगर क्या?”
मैंने गहरी साँस ली... और बोला —
“मगर उन सबमें एक बात थी...
उन सबका लंड... कम से कम मुझसे तो बड़ा ही था।
अविनाश जितना नहीं... तो अविनाश से थोड़ा कम...
मगर मुझसे ज़्यादा बड़ा।
“पता नहीं... उन्होंने मुझे कैसे ढूँढ लिया।
पहले एक से मिला... फिर दूसरे से... फिर दो से... फिर चार से।
शायद मैं उन ग्रुप में मशहूर हो गया था —
'वो लड़का जिसका नाम है... जो हाथ से लंड हिलाता है...
और वो भी अपनी बहन को सोचकर।'
मैंने आगे कहा —
“उनकी एक जगह थी... जैसे कोई अड्डा।
एक पुराना, खाली कमरा... जहाँ कोई नहीं आता था।
वो सब वहाँ बैठते थे — चार-पाँच लड़के।
मुझे भी बुलाते थे।
वहाँ वो बीयर पीते, माल फूकते...
फिर अपनी-अपनी कल्पनाओं में खो जाते।
मैं भी... अपनी कल्पना में खो जाता।
मेरे पास सिर्फ़ एक ही ड्यूटी थी।
मैं एक-एक के पास जाता...
उनका लंड निकालता... खड़ा करता... और हिलाता।
और वो... मेरे कान में फुसफुसाते...
जो वो गार्गी के साथ कल्पना में कर रहे थे।
बहुत गंदी-गंदी बातें...
बहुत शर्मनाक...
‘गार्गी की चूत कितनी टाइट होगी...’
‘मैं गार्गी को दीवार से लगाकर चोदूँगा...’
‘गार्गी मेरे लंड को चूसते हुए रोएगी...’
मुझे गुस्सा आना चाहिए था...
लेकिन मुझे... और मज़ा आता था।
मैं अच्छे से उनका लंड रगड़ता था...
जोर से... तेज़...
जब तक वो झड़ न जाए।
“उस समय तक मोबाइल आ चुके थे।
मेरे पास नोकिया 6600 था — वो छोटा सा, ब्लैक एंड व्हाइट वाला।
वो लड़के मुझे बोलते — 'गार्गी की तस्वीर ला... दिखा...'
मैं कभी वो तस्वीर दिखाता जो मैंने खुद गार्गी को बताकर खींची थी — वो मुस्कुराती हुई, घर में नॉर्मल कपड़ों में।
कभी-कभी... मैं वो तस्वीर लेके आता...
जिसमें वो सो रही होती थी।
उसके कपड़े अस्त-व्यस्त... टॉप थोड़ा ऊपर सरका हुआ...
पैर फैले हुए...
मैं उस टाइम पर चुपके से खींच लेता था।
फिर उन लड़कों के पास ले जाता।
वो तस्वीर देखकर... सब आहें भरते।
'देख... गार्गी कितनी सुंदर सो रही है...
उसकी चूत कितनी टाइट लग रही होगी...
मैं तो इसे ऐसे ही चोद दूँगा...'
“वही तस्वीरें... मैं ईमेल करके अविनाश को भी भेजता था।
उस टाइम हम याहू पर चैट करते थे।
मैं उसे गार्गी की फोटोज़ भेजता — सोती हुई, कपड़े अस्त-व्यस्त वाली, या मुस्कुराती हुई।
वो मुझे रिप्लाई करता —
‘गार्गी बहुत सुंदर है यार...
एक दिन मैं उससे शादी करूँगा।
और जब मैं उसे चोदगा, तो तुझे देखने दूँगा सब कुछ।
तुम देखना... मैं गार्गी को कैसे चोदता हूँ...’
धीरे-धीरे... सबकी चाहत सिर्फ़ सेक्स से बहुत आगे बढ़ गई थी।
नेहा अचानक बिस्तर से उठ गई।
बिना कुछ बोले वो कमरे से बाहर चली गई।
मैं भी उठकर बैठ गया — ध्यान से।
कुछ मिनट बाद वो वापस आई... फोन लेकर।
वो मेरे पास बैठ गई और फोन स्क्रॉल करने लगी।
उसने हमारी शादी की एक ग्रुप फोटो खोली।
फिर उँगली से एक आदमी की तरफ़ इशारा किया और पूछा —
“ये अविनाश कौन है इस फोटो में?”
मैंने उँगली बढ़ाकर एक अच्छे कद-काठी वाले पंजाबी लड़के की तरफ़ इशारा किया —
तुरबन बाँधे, दाढ़ी, मजबूत शरीर।
नेहा ने फोटो ज़ूम की।
कुछ देर तक उसे ध्यान से देखा।
फिर पूछा —
“अब वो कहाँ है?”
“कनाडा में,” मैंने जवाब दिया।
“अभी भी contact में हो?”
“हाँ... सोशल मीडिया पर।”
नेहा ने मेरी तरफ़ हाथ बढ़ाया।
“अपना फोन दो।”
मैंने फोन उसे दे दिया — इंस्टा पहले से ओपन था।
वो अविनाश के प्रोफाइल पर गई।
पहले उसकी फैमिली फोटोज़ देखीं।
एक फोटो में उसकी माँ थीं — अब थोड़ी बूढ़ी दिख रही थीं, लेकिन अभी भी सुंदर।
फिर उसकी पत्नी अमाया की फोटोज़ — गोरी, लंबे बाल, फिट बॉडी।
एक फोटो में अविनाश और अमाया फ्लोरिडा बीच पर थे।
अविनाश शर्टलेस — 6 पैक एब्स, अच्छी बॉडी।
अमाया शॉर्ट्स और बिकिनी टॉप में।
नेहा ने फोटो ज़ूम की — सबसे पहले अमाया के बड़े स्तनों पर।
फिर... अनजाने में... अविनाश के क्रॉच एरिया पर ज़ूम कर दिया।
वो एक पल के लिए रुकी।
फिर मेरी तरफ़ मुड़ी... हल्की-सी शरारती मुस्कान के साथ बोली —
“ओप्स...”
उसकी आँखों में अब एक अलग चमक थी।
वो फोन अभी भी हाथ में था, लेकिन नजर मेरी तरफ़ थी।
“तुमने अविनाश के साथ ये सब... कितने समय तक किया?”
मैंने साँस ली और जवाब दिया —
“जब तक हम होस्टल में थे... लगभग आखिरी साल तक।
उसके बाद... हमने वो सब बंद कर दिया।”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा और अगला सवाल पूछा —
“क्या उसने तुम्हें जबरदस्ती हैंडजॉब करने को मजबूर किया था?”
मैंने सिर हिलाया।
“नहीं... जबरदस्ती नहीं।
लेकिन वो... डोमिनेंट बनना पसंद करता था।
वो मुझे ऑर्डर देता था...
मुझे भी वो फीलिंग अच्छी लगती थी।
मैं खुद से नहीं रोक पाता था।”
नेहा ने “हम्म...” कहा।
उसकी आवाज़ में अब कुछ और था — जैसे वो मेरे बारे में कुछ सोच रही हो।
उसकी नजर मेरे चेहरे पर घूम रही थी, जैसे वो मेरी सबमिशन को, मेरे बेड पर वाले व्यवहार को समझने की कोशिश कर रही हो।
नेहा धीरे से बोली —
“सच बताओ... क्या उसने कभी...?”
वो वाक्य अधूरा छोड़ दिया।
लेकिन मुझे समझ आ गया कि वो क्या पूछना चाहती है।
मैंने उसकी आँखों में देखकर कहा —
“तुम्हारा मतलब... एनल? या ब्लोजॉब... है ना?”
नेहा ने बस “हम्म...” कहा।
उसकी आवाज़ में अब एक अजीब सी उत्सुकता थी — जैसे वो मेरे दिमाग को पढ़ रही हो।
मैंने सिर हिलाया।
“नहीं... उसने कभी-कभी ऑर्डर दिया था।
‘मुँह में ले’, ‘चूस’... ऐसे बोलता था।
लेकिन मैंने कभी नहीं किया।
मैं बस उसका लंड हाथ से हिलाता था।
बाकी कुछ नहीं।
मैंने कभी मुँह नहीं लगाया... और एनल की तो बात ही नहीं हुई।”
नेहा कुछ देर चुप रही।
नेहा अभी भी फोन की स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए थी।
वो अविनाश की तस्वीरें स्क्रॉल कर रही थी — बीच-बीच में ज़ूम करके देख रही थी।
उसकी आँखें फोन पर थीं, लेकिन सवाल मेरी तरफ़ थे।
“तो... सिर्फ़ उसका लंड ही तुमने छुआ था?”
मैंने सिर हिलाया — “नहीं।”
नेहा ने फोन से नजर हटाकर मेरी तरफ़ देखा।
उसके चेहरे पर हैरानी थी।
“फिर... किसका?
कितने...?”
मैंने उसकी आँखों में नहीं देखा।
शर्म से मेरी गर्दन झुक गई।
आवाज़ में खुद पर दया और शर्म का मिश्रण था —
“क्या तुम सच में जानना चाहती हो कि तुम्हारे नाकारा पति ने कितने लंड छुए हैं?”
“हाँ... अगर तुम कम्फर्टेबल हो तो बताओ।
लेकिन मैं तुम्हें पहले बता दूँ — ये कुछ भी हमारे बीच नहीं बदलेगा।
हमारा बॉन्ड हमारे पास्ट से कहीं ज़्यादा बड़ा है।”
मैंने गहरी साँस ली और बोला —
“अविनाश के बाद... मैं कई और लड़कों से मिला।
घर के आसपास रहने वाले... पड़ोस के, कॉलेज के, कॉलेज के।
उन्होंने मुझसे सिर्फ़ इसलिए दोस्ती की... क्योंकि मैं गार्गी का भाई था।
मुझे पहले से पता था — उनकी नजर गार्गी पर थी।
गंदी नजर।
फिर भी... मैंने उन लोगों को दोस्त बनाया।
मुझे एक अजीब सी आदत पड़ गई थी।
अगर कोई गार्गी के बारे में गंदी बातें करता था
तभी मुझे वो एरोटिकनेस महसूस होती थी।
ये जानते हुए कि ये गलत है... मैंने उनको दोस्त बनाया।
और उनके साथ... वही सब किया जो अविनाश के साथ किया।
नेहा ने पूछा —
“तो... कितने लोग थे?”
मैंने सिर हिलाया, शर्म से आवाज़ कम हो गई —
“मुझे ठीक से याद नहीं... मगर चार-पाँच से ज़्यादा तो रहे होंगे।”
हा अभी भी फोन में अविनाश की तस्वीर देख रही थी।
उसने ज़ूम किया — उसकी छाती, बाँहें, फिर नीचे...
फिर मेरी तरफ़ मुड़ी —
“उन सबकी कद-काठी अविनाश जैसी ही थी?”
मैंने सिर हिलाया —
“सबकी तो नहीं... कुछ अविनाश जैसे थे — मोटे, मजबूत, लंबे।
कुछ पतले-दुबले भी थे... मगर...”
नेहा ने फोन साइड रखा और पूछा —
“मगर क्या?”
मैंने गहरी साँस ली... और बोला —
“मगर उन सबमें एक बात थी...
उन सबका लंड... कम से कम मुझसे तो बड़ा ही था।
अविनाश जितना नहीं... तो अविनाश से थोड़ा कम...
मगर मुझसे ज़्यादा बड़ा।
“पता नहीं... उन्होंने मुझे कैसे ढूँढ लिया।
पहले एक से मिला... फिर दूसरे से... फिर दो से... फिर चार से।
शायद मैं उन ग्रुप में मशहूर हो गया था —
'वो लड़का जिसका नाम है... जो हाथ से लंड हिलाता है...
और वो भी अपनी बहन को सोचकर।'
मैंने आगे कहा —
“उनकी एक जगह थी... जैसे कोई अड्डा।
एक पुराना, खाली कमरा... जहाँ कोई नहीं आता था।
वो सब वहाँ बैठते थे — चार-पाँच लड़के।
मुझे भी बुलाते थे।
वहाँ वो बीयर पीते, माल फूकते...
फिर अपनी-अपनी कल्पनाओं में खो जाते।
मैं भी... अपनी कल्पना में खो जाता।
मेरे पास सिर्फ़ एक ही ड्यूटी थी।
मैं एक-एक के पास जाता...
उनका लंड निकालता... खड़ा करता... और हिलाता।
और वो... मेरे कान में फुसफुसाते...
जो वो गार्गी के साथ कल्पना में कर रहे थे।
बहुत गंदी-गंदी बातें...
बहुत शर्मनाक...
‘गार्गी की चूत कितनी टाइट होगी...’
‘मैं गार्गी को दीवार से लगाकर चोदूँगा...’
‘गार्गी मेरे लंड को चूसते हुए रोएगी...’
मुझे गुस्सा आना चाहिए था...
लेकिन मुझे... और मज़ा आता था।
मैं अच्छे से उनका लंड रगड़ता था...
जोर से... तेज़...
जब तक वो झड़ न जाए।
“उस समय तक मोबाइल आ चुके थे।
मेरे पास नोकिया 6600 था — वो छोटा सा, ब्लैक एंड व्हाइट वाला।
वो लड़के मुझे बोलते — 'गार्गी की तस्वीर ला... दिखा...'
मैं कभी वो तस्वीर दिखाता जो मैंने खुद गार्गी को बताकर खींची थी — वो मुस्कुराती हुई, घर में नॉर्मल कपड़ों में।
कभी-कभी... मैं वो तस्वीर लेके आता...
जिसमें वो सो रही होती थी।
उसके कपड़े अस्त-व्यस्त... टॉप थोड़ा ऊपर सरका हुआ...
पैर फैले हुए...
मैं उस टाइम पर चुपके से खींच लेता था।
फिर उन लड़कों के पास ले जाता।
वो तस्वीर देखकर... सब आहें भरते।
'देख... गार्गी कितनी सुंदर सो रही है...
उसकी चूत कितनी टाइट लग रही होगी...
मैं तो इसे ऐसे ही चोद दूँगा...'
“वही तस्वीरें... मैं ईमेल करके अविनाश को भी भेजता था।
उस टाइम हम याहू पर चैट करते थे।
मैं उसे गार्गी की फोटोज़ भेजता — सोती हुई, कपड़े अस्त-व्यस्त वाली, या मुस्कुराती हुई।
वो मुझे रिप्लाई करता —
‘गार्गी बहुत सुंदर है यार...
एक दिन मैं उससे शादी करूँगा।
और जब मैं उसे चोदगा, तो तुझे देखने दूँगा सब कुछ।
तुम देखना... मैं गार्गी को कैसे चोदता हूँ...’
धीरे-धीरे... सबकी चाहत सिर्फ़ सेक्स से बहुत आगे बढ़ गई थी।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)