22-04-2026, 10:40 AM
नेहा ने मेरे लिंग को छोड़ दिया।
बिना कुछ बोले उठी और सीधे किचन चली गई।
मैं सोफे पर अकेला बैठा रह गया।
मेरा लंड अभी भी शॉर्ट्स से बाहर निकला हुआ था, धीरे-धीरे नरम पड़ रहा था।
मुझे बहुत बुरा लग रहा था।
मैंने उसे सब कुछ नहीं बताया, वो नाराज़ हो गई।
या शायद डिसअपॉइंटमेंट हो गई कि मैं अभी भी कुछ छुपा रहा हूँ।
कुछ देर बाद नेहा ने खाना तैयार कर लिया।
वो चुपचाप प्लेटें लगाने लगी।
मैं उठा और टेबल पर बैठ गया।
हम दोनों चुपचाप खाना खा रहे थे।
कोई बात नहीं हो रही थी।
नेहा का चेहरा साधारण था, लेकिन मैं जानता था कि वो अंदर से upset है।
उसकी आँखें मेरी तरफ़ नहीं आ रही थीं।
खाना खाते वक्त भी वो सिर्फ़ प्लेट देख रही थी।
मैंने बीच-बीच में उसकी तरफ़ देखा।
वो लंबी टी-शर्ट में थी, नीचे सिर्फ़ काली पैंटी।
बाल खुले हुए थे।
नॉर्मल हालात में ये सीन मुझे बहुत उत्तेजित करता, लेकिन आज माहौल भारी था।
खाना खत्म होने के बाद नेहा ने प्लेटें उठाईं और बिना कुछ कहे किचन में रख दीं।
रात के ठीक दो बजे थे।
कमरे में सिर्फ़ बेडसाइड लैंप की हल्की पीली रोशनी थी।
नेहा मेरे बगल में लेटी हुई थी।
उसकी साँसें मेरे कंधे पर गर्म-गर्म पड़ रही थीं।
मैं आँखें बंद किए लेटा था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी।
अचानक नेहा ने अपना हाथ मेरी छाती पर रखा।
धीरे-धीरे नाखूनों से खींचा।
मैं हिल गया।
“क्या हुआ?” मैंने नींद भरी आवाज़ में पूछा।
नेहा ने मेरी ठोड़ी पकड़ी और मेरा चेहरा अपनी तरफ़ घुमा दिया।
उसकी आँखें सीधे मेरी आँखों में थीं।
ठंडी, लेकिन गहरी।
“तुम मुझसे कुछ छुपा रहे हो,” उसने धीरे से कहा।
मैं हँसने की कोशिश की। “क्या बात है, जासूस बन गई?”
नेहा ने मेरी कमर पर हाथ फेरा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ़ ले गई।
उसकी उँगलियाँ मेरे शॉर्ट्स के अंदर घुस गईं।
मैंने गहरी साँस ली और धीरे से बोला —
“नेहा... सुनो।
कॉलेज के दिनों में... मैं बहुत मस्तरबेट करता था।
रोज़... कभी-कभी तो दिन में दो-तीन बार भी।”
“हम्म... और?”
मैंने जारी रखा, आवाज़ थोड़ी काँप रही थी —
“मेरा एक दोस्त था... अविनाश।
हम दोनों कॉलेज में एक ही रूम में रहते थे।
वो लोकल था, लेकिन घर जाने की बजाय मेरे साथ ही रहता था।
शायद वो बहुत शरारती था तो उसके पेटेंट्स उसे हॉस्टल में ही रखते थे
उन्हें लगता था की वो यंहा रहकर सुधर जाएगा
उसके पास कुछ पुरानी इरॉटिक किताबें थीं — ‘रसवंती’, , ‘ब्लैक लेडी’ जैसी...पुरानी वाली, वो जो कवर पर लड़की की तस्वीर होती थी
उस टाइम मोबाइल और पॉर्न इतना आसानी से नहीं मिलता था।
तो वो किताबें लाकर मुझे देता था।”
नेहा ने मेरे लिंग को अपनी उँगलियों से पकड़कर उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
“फिर?” उसने पूछा, आवाज़ में गर्मी थी।
“हम दोनों रात को लाइट ऑफ करके उन किताबों को पढ़ते थे।
कभी कोई स्टोरी, कभी बस तस्वीरें।
कभी-कभी एक-दूसरे को पढ़कर सुनाते थे।
जब कोई गंदा सीन आता... तो हम दोनों चुप हो जाते।
फिर... मैं देखता कि अविनाश अपना लंड निकालकर मुठ मार रहा है।
मैं भी... शर्माते हुए अपना निकाल लेता।
हम दोनों बगल-बगल में लेटे... किताब पढ़ते हुए... एक साथ मुठ मारते।
कभी-कभी वो मुझे अपनी किताब देता और कहता — ‘सम, ये वाली पढ़... बहुत हॉट है’।”
मैंने साँस लेते हुए कहा —
“एक बार... हम एक बहुत गंदी स्टोरी पढ़ रहे थे।
वॉइस एक्स वाली किताब थी।
उसमें एक 45 साल की मिडिल एज औरत थी... नाम था ‘मालती’।
उसका पति सुबह ऑफिस चला जाता था।
फिर वो अपने चार-पाँच यंग लड़कों को घर बुलाती थी।
सब 21-22 साल के... कॉलेज के लड़के।”
उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
“फिर?” उसने पूछा, आवाज़ में उत्सुकता थी।
नेहा अब पूरी तरह तेज़ हो चुकी थी।
उसके स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे।
मैंने साँस लेते हुए कहानी आगे बढ़ाई —
“जब हम वो स्टोरी पढ़ रहे थे... तब हम दोनों ने आँखें बंद कर ली थीं।
किताब एक तरफ़ रख दी थी।
हम दोनों बगल-बगल में लेटे हुए थे... अपने लंड निकाले हुए... और तेज़-तेज़ मुठ मार रहे थे।
कमरे में सिर्फ़ हमारी साँसों की आवाज़ आ रही थी।
हम दोनों एज पर थे... बहुत पास थे...”
नेहा ने मेरे निप्पल को अपने दाँतों से हल्का-सा काटा और हाँफते हुए पूछा, “फिर?”
मैंने जारी रखा —
“तभी... जब हम दोनों बहुत तेज़ कर रहे थे... अचानक अविनाश के मुँह से निकला —
‘ओह.. सिमरन... हाँ... .. सिमरन...’
मैं एकदम चौंक गया।
मेरा हाथ रुक गया।
सिमरन... वो कॉलेज की एक आंटी का नाम था।
बहुत बार कॉलेज आती थीं — PTM, फंक्शन या कुछ काम से।
लंबी-चौड़ी पंजाबी औरत... काला चश्मा लगाती थीं, छोटे बाल, गोरी स्किन, भारी भरकम शरीर।
उम्र शायद 44-45 के आसपास रही होगी।
बहुत सुंदर और मटौर लगती थीं।
अविनाश की मम्मी थीं
और उस वक्त... जब वो पूरी तरह एस्केलेट कर रहा था... झड़ने के बिलकुल किनारे पर था... उसके मुँह से ‘सिमरन’ निकला।
मुझे तुरंत समझ आ गया कि वो उस स्टोरी की मालती की जगह सिमरन आंटी को इमेजिन कर रहा है।
उसकी कल्पना में वो 45 वाली औरत नहीं... बल्कि सिमरन आंटी ही चार-पाँच लड़कों के बीच नंगी पड़ी हुई थी।”
“तो... अविनाश अपनी मम्मी के बारे में सोचकर मुठ मार रहा था?
उसी को वो कल्पना में चोद रहा था?”
“हाँ... और मुझे ये जानकर बहुत शॉक लगा था।
नेहा ने मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया और मेरी आँखों में देखकर तेज़-तेज़ हिलते हुए बोली —
“फिर क्या हुआ?
"मुझे लगा... वो उस स्टोरी की औरत को नहीं, सिमरन आंटी को इमेजिन कर रहा है। वो चार-पाँच लड़कों के बीच में... सिमरन।
उसका नाम बोलते हुए वो और तेज़ हो गया। मैंने भी... बस उसकी आवाज़ सुनकर... कल्पना कर ली।
सिमरन का चश्मा उतरता, उसके बाल खुलते, और वो हँसती हुई... सबके साथ।"
तुमने मेरे कान में फुसफुसाया, "और तुम? तुमने क्या सोचा?"
"मैंने सोचा—अगर सिमरन आंटी सच में ऐसा करती... तो क्या मैं भी वहाँ होता?
मैंने साँस लेते हुए कहानी आगे बढ़ाई —
“जब हम दोनों झड़ गए... तब कमरे में बस हमारी तेज़ साँसों की आवाज़ आ रही थी।
हम दोनों ने अपने लंड साफ़ किए और अलग-अलग बिस्तर पर लेट गए।
लाइट ऑफ थी।
कुछ मिनट तक कोई कुछ नहीं बोला।
फिर अचानक मैंने अविनाश से पूछ लिया —
‘यार... तुमने “सिमरन” का नाम क्यों लिया?
ऐसा क्यों किया तुमने?’
अविनाश पहले तो चुप रहा।
फिर उसने हल्की-सी हँसी मारी और बोला —
‘बस... यार... वो स्टोरी पढ़ते हुए... अचानक मम्मी का चेहरा आ गया दिमाग में।
“मैंने अविनाश से पूछा —
‘यार... वो तो तुम्हारी मम्मी है ना?
तुम उसके बारे में ऐसा कैसे सोच सकते हो?’
अविनाश ने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुरा दिया।
एक शरारती, लेकिन थोड़ी शर्मीली स्माइल।
फिर बोला —
‘अरे यार... हम कुछ असली में तो कर थोड़ी रहे हैं।
हम तो सिर्फ इमेजिन कर रहे हैं ना।
इमेजिनेशन में तो कुछ भी हो सकता है।
सच बताऊँ... मुझे खुद नहीं पता क्यों, लेकिन जब भी मैं किसी नई मिडिल एज महिला की स्टोरी पढ़ता हूँ... तो मेरे दिमाग में सबसे पहले मम्मी का चेहरा आ जाता है।
वो मेरे लिए सबसे सुंदर, सबसे हॉट और सबसे सेक्सी औरत हैं।
फिर मैं उनके बारे में सोचता हूँ... उनकी भारी गांड, बड़े स्तन, और मैं बहुत ज्यादा हार्ड हो जाता हूँ।
मुठ मारने में भी तब बहुत ज्यादा मज़ा आता है।’”
नेहा ने हाँफते हुए पूछा —
“तो... अविनाश अपनी मम्मी को... अपनी फैंटसी की क्वीन बना चुका था?
फिर बोला —
“धीरे-धीरे हम दोनों इस स्टोरी पढ़ने के तरीके को बदलने लगे।
जब भी कोई नई इरॉटिक स्टोरी पढ़ते... तो अविनाश शुरू से ही उस औरत का नाम ‘सिमरन’ रख देता।
जैसे... ‘सिमरन ने उस लड़के का लंड हाथ में पकड़ा और उसे अच्छे से सहलाया...’
‘सिमरन का पति अभी ऑफिस में था, इसलिए वो यंग लड़के के साथ खेल रही थी...’
‘सिमरन अपने पति के सामने बैठी हुई थी और एक यंग लड़के का लंड चूस रही थी...’
शुरू-शुरू में वो सिर्फ़ पढ़ते-पढ़ते नाम बदल देता था।
धीरे-धीरे वो खुल गया।
अब वो खुलकर बोलता था — ‘सिमरन ने उस लड़के को चोदा...’, ‘सिमरन आंटी की गांड में लंड घुसा दिया...’
एक दिन मैंने भी झिझकते हुए नाम रिप्लेस किया।
मैंने कहा — ‘सिमरन आंटी... चार लड़कों के बीच नंगी पड़ी हुई है... और सब उसके शरीर पर अपना माल छोड़ रहे हैं...’
मैंने अविनाश का रिएक्शन देखना चाहा था।
लेकिन उसने कोई खास रिएक्शन नहीं दिया।
बल्कि और ज़्यादा इरोटिक फील करने लगा।
उसने अपना लंड और जोर से रगड़ना शुरू कर दिया और बोला —
‘हाँ यार... मम्मी बहुत हॉट हैं... कल्पना करो... वो चार-पाँच लड़कों के बीच...’
“धीरे-धीरे हमने स्टोरी पढ़ने के साथ-साथ एरॉटिक पिक्चर्स भी देखना शुरू कर दिया।
अविनाश कुछ पुरानी मैगज़ीन लाता था — जिसमें बहुत सारी सुंदर, नंगी लड़कियाँ होती थीं।
बड़े-बड़े स्तन, मोटी गांड, अलग-अलग पोज़ में... पूरी तरह नंगी।
हम उन पिक्चर्स को देखते और स्टोरी पढ़ते।
फिर हम दोनों का नाम बदल देते — हर औरत को ‘सिमरन आंटी’ बना देते।
‘देख यार... सिमरन आंटी इस पोज़ में कितनी हॉट लग रही हैं...’
‘सिमरन आंटी का लंड मुँह में ले रही हैं...’
ये नाम बदलने से हमें और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा था।”
नेहा ने पूछा —
“और तुम दोनों... जब मुठ मारते थे... तो क्या करते थे?”
मैंने शर्माते हुए लेकिन सच बताया —
“हम दोनों बगल-बगल में लेटे रहते थे।
हमारी बॉडी एक-दूसरे को छूती रहती थी — कंधा, जाँघ, कभी-कभी हाथ भी।
हम एक-दूसरे को देखते हुए मुठ मारते थे।
मैं गे नहीं हूँ... ये बात मैं अभी भी स्पष्ट करना चाहता हूँ... लेकिन उस वक्त... जब हम साथ मुठ मारते थे... मुझे अच्छा लगता था।
खासकर जब अविनाश सिमरन आंटी का नाम लेता था... तो मुझे बहुत ज़्यादा उत्तेजना होती थी।
धीरे-धीरे हम दोनों खुल गए और जब भी मुठ मारते... तो ‘सिमरन आंटी’ का नाम लेकर बोलते —
‘सिमरन आंटी... तुम्हारी गांड बहुत मोटी है...’
“हम दोनों ने एक-दूसरे का लंड भी देखा हुआ था।
अविनाश मुझसे बहुत बेहतर था साइज़ में।
मेरा पतला और साढ़े चार इंच का था... जबकि अविनाश का सात इंच का, बहुत मोटा और तगड़ा था।
उस उम्र में भी वो बहुत बड़ा था।
मुझे कई बार जलन होती थी कि भगवान ने उसे इतना बड़ा क्यों दिया।
लेकिन फिर भी... जब हम साथ मुठ मारते... मुझे अच्छा लगता था।”
“एक दिन हम बहुत ही इरॉटिक स्टोरी पढ़ रहे थे।
उसमें 45-50 साल की एक औरत थी, जो दो जवान लड़कों के साथ खेल रही थी।
स्टोरी में वो धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार रही थी... उन दोनों के सामने।
फिर हँसी-मजाक में बोली — ‘तुम दोनों एक-दूसरे का लंड हाथ में लो और मेरे लिए हिलाओ...’
हम दोनों स्टोरी पढ़ते हुए कल्पना करने लगे कि ये सब सिमरन आंटी कह रही हैं।
हमने एक-दूसरे की तरफ देखा।
पहली बार हमें ऐसा लगा कि शायद हमें एक-दूसरे को टच करना चाहिए।
मैंने थोड़ा झिझकते हुए अपना हाथ बढ़ाया।
मेरा हाथ अविनाश के लंड की तरफ गया।
जब मैंने उसे हाथ में थामा... तो मुझे बहुत अजीब सा लगा।
बहुत मोटा, बहुत गरम... और भारी।
मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।
मैंने हिम्मत करके उसे धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया।”
नेहा ने मेरे लंड को अपनी चूत में और गहराई तक लेते हुए हाँफते हुए पूछा —
“फिर... अविनाश ने क्या किया?”
मैंने जारी रखा —
“अविनाश पहले तो चौंक गया।
फिर उसने मेरी तरफ देखा और बोला — ‘अरे हिला ना भाई... जैसे तू अपना हिलाता है...’
उसने भी अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया।
उसका हाथ मुझसे ज़्यादा मोटा और मजबूत था।
वो मुझे धीरे-धीरे हिलाने लगा।
जैसे ही मैंने ये बात कही कि मैंने अविनाश का लंड हाथ में लिया था, उसका शरीर एकदम सख्त हो गया।
उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।
वो shock में थी — साफ़ दिख रहा था उसके चेहरे पर।
उसका हाथ मेरे लंड पर और कस गया।
वो मेरे लंड को बहुत टाइट पकड़े हुए थी।
मैं महसूस कर रहा था कि वो अंदर से प्रोसेस कर रही है — कि मैंने किसी दूसरे लड़के का लंड हाथ में पकड़ा था।
कुछ सेकंड तक वो चुप रही।
फिर धीरे से, थोड़ी भारी आवाज़ में बोली —
“कंटिन्यू करो...
बताओ आगे क्या हुआ।”
मैंने साँस लेते हुए आगे बताया —
“जैसे-जैसे कहानी और इरॉटिक होती गई... वैसे-वैसे मैं अविनाश के लंड को हिलाता रहा।
वो बहुत कड़क और मोटा था।
मुझे उसे हिलाने में बहुत अजीब सा, लेकिन अलग तरह का मज़ा आ रहा था।
अंदर से गर्मी हो रही थी।
मैंने उसे अच्छे से हिलाया — ऊपर से नीचे, धीरे-धीरे फिर तेज़।
बीच-बीच में अविनाश भी मुँह से निकाल रहा था — ‘और तेज़... हाँ... ऐसे...’
वो भी बहुत एंजॉय कर रहा था।
उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।
अब मैं दोनों हाथों से उसे हिला रहा था — एक हाथ से अपना लंड, दूसरे हाथ से अविनाश का।
दोनों को एक ही रिदम में... ऊपर-नीचे...
“हमारा वो रिदम तीन-चार महीने तक लगातार चलता रहा।
हर रात स्टोरी पढ़ते समय हम एक-दूसरे का लंड हाथ में पकड़कर हिलाते।
मैं जब अविनाश का लंड हाथ में लेता... तो अंदर से बहुत गर्मी होती थी।
कई बार तो मैं उसकी मम्मी — सिमरन आंटी — को याद करके और तेज़ हिलाता।
फिर हमारी छुट्टियाँ हो गईं।
एक-डेढ़ महीने बाद जब हम वापस मिले... मेरी फॅमिली मुझे छोड़ने आया था।
मेरी कार में मेरी बड़ी सिस्टर गार्गी भी थी।"
हम तीन भाई बहन है। .. में सांसे छोटा। .. फिर मेरा भाई। .. और सबसे बड़ी मेरी बहन। .. हम में 8 साल गैप है
और... अविनाश — सिमरन आंटी भी साथ में आई हुई थीं।
जैसे ही मैंने सिमरन आंटी को देखा... मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।
आज वो बहुत सुंदर लग रही थीं — हल्का मेकअप, साड़ी में उनकी भारी छाती और मोटी कमर साफ़ दिख रही थी।
मैंने अविनाश की तरफ़ देखा।
उसने भी गार्गी की तरफ़ देखकर कुछ सोचा, लेकिन मुझे कुछ नहीं बताया।
रात को हम वापस होस्टल पहुँचे।
मैं पूरे दिन से रात का इंतज़ार कर रहा था।
बिना कुछ बोले उठी और सीधे किचन चली गई।
मैं सोफे पर अकेला बैठा रह गया।
मेरा लंड अभी भी शॉर्ट्स से बाहर निकला हुआ था, धीरे-धीरे नरम पड़ रहा था।
मुझे बहुत बुरा लग रहा था।
मैंने उसे सब कुछ नहीं बताया, वो नाराज़ हो गई।
या शायद डिसअपॉइंटमेंट हो गई कि मैं अभी भी कुछ छुपा रहा हूँ।
कुछ देर बाद नेहा ने खाना तैयार कर लिया।
वो चुपचाप प्लेटें लगाने लगी।
मैं उठा और टेबल पर बैठ गया।
हम दोनों चुपचाप खाना खा रहे थे।
कोई बात नहीं हो रही थी।
नेहा का चेहरा साधारण था, लेकिन मैं जानता था कि वो अंदर से upset है।
उसकी आँखें मेरी तरफ़ नहीं आ रही थीं।
खाना खाते वक्त भी वो सिर्फ़ प्लेट देख रही थी।
मैंने बीच-बीच में उसकी तरफ़ देखा।
वो लंबी टी-शर्ट में थी, नीचे सिर्फ़ काली पैंटी।
बाल खुले हुए थे।
नॉर्मल हालात में ये सीन मुझे बहुत उत्तेजित करता, लेकिन आज माहौल भारी था।
खाना खत्म होने के बाद नेहा ने प्लेटें उठाईं और बिना कुछ कहे किचन में रख दीं।
रात के ठीक दो बजे थे।
कमरे में सिर्फ़ बेडसाइड लैंप की हल्की पीली रोशनी थी।
नेहा मेरे बगल में लेटी हुई थी।
उसकी साँसें मेरे कंधे पर गर्म-गर्म पड़ रही थीं।
मैं आँखें बंद किए लेटा था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी।
अचानक नेहा ने अपना हाथ मेरी छाती पर रखा।
धीरे-धीरे नाखूनों से खींचा।
मैं हिल गया।
“क्या हुआ?” मैंने नींद भरी आवाज़ में पूछा।
नेहा ने मेरी ठोड़ी पकड़ी और मेरा चेहरा अपनी तरफ़ घुमा दिया।
उसकी आँखें सीधे मेरी आँखों में थीं।
ठंडी, लेकिन गहरी।
“तुम मुझसे कुछ छुपा रहे हो,” उसने धीरे से कहा।
मैं हँसने की कोशिश की। “क्या बात है, जासूस बन गई?”
नेहा ने मेरी कमर पर हाथ फेरा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ़ ले गई।
उसकी उँगलियाँ मेरे शॉर्ट्स के अंदर घुस गईं।
मैंने गहरी साँस ली और धीरे से बोला —
“नेहा... सुनो।
कॉलेज के दिनों में... मैं बहुत मस्तरबेट करता था।
रोज़... कभी-कभी तो दिन में दो-तीन बार भी।”
“हम्म... और?”
मैंने जारी रखा, आवाज़ थोड़ी काँप रही थी —
“मेरा एक दोस्त था... अविनाश।
हम दोनों कॉलेज में एक ही रूम में रहते थे।
वो लोकल था, लेकिन घर जाने की बजाय मेरे साथ ही रहता था।
शायद वो बहुत शरारती था तो उसके पेटेंट्स उसे हॉस्टल में ही रखते थे
उन्हें लगता था की वो यंहा रहकर सुधर जाएगा
उसके पास कुछ पुरानी इरॉटिक किताबें थीं — ‘रसवंती’, , ‘ब्लैक लेडी’ जैसी...पुरानी वाली, वो जो कवर पर लड़की की तस्वीर होती थी
उस टाइम मोबाइल और पॉर्न इतना आसानी से नहीं मिलता था।
तो वो किताबें लाकर मुझे देता था।”
नेहा ने मेरे लिंग को अपनी उँगलियों से पकड़कर उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
“फिर?” उसने पूछा, आवाज़ में गर्मी थी।
“हम दोनों रात को लाइट ऑफ करके उन किताबों को पढ़ते थे।
कभी कोई स्टोरी, कभी बस तस्वीरें।
कभी-कभी एक-दूसरे को पढ़कर सुनाते थे।
जब कोई गंदा सीन आता... तो हम दोनों चुप हो जाते।
फिर... मैं देखता कि अविनाश अपना लंड निकालकर मुठ मार रहा है।
मैं भी... शर्माते हुए अपना निकाल लेता।
हम दोनों बगल-बगल में लेटे... किताब पढ़ते हुए... एक साथ मुठ मारते।
कभी-कभी वो मुझे अपनी किताब देता और कहता — ‘सम, ये वाली पढ़... बहुत हॉट है’।”
मैंने साँस लेते हुए कहा —
“एक बार... हम एक बहुत गंदी स्टोरी पढ़ रहे थे।
वॉइस एक्स वाली किताब थी।
उसमें एक 45 साल की मिडिल एज औरत थी... नाम था ‘मालती’।
उसका पति सुबह ऑफिस चला जाता था।
फिर वो अपने चार-पाँच यंग लड़कों को घर बुलाती थी।
सब 21-22 साल के... कॉलेज के लड़के।”
उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
“फिर?” उसने पूछा, आवाज़ में उत्सुकता थी।
नेहा अब पूरी तरह तेज़ हो चुकी थी।
उसके स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे।
मैंने साँस लेते हुए कहानी आगे बढ़ाई —
“जब हम वो स्टोरी पढ़ रहे थे... तब हम दोनों ने आँखें बंद कर ली थीं।
किताब एक तरफ़ रख दी थी।
हम दोनों बगल-बगल में लेटे हुए थे... अपने लंड निकाले हुए... और तेज़-तेज़ मुठ मार रहे थे।
कमरे में सिर्फ़ हमारी साँसों की आवाज़ आ रही थी।
हम दोनों एज पर थे... बहुत पास थे...”
नेहा ने मेरे निप्पल को अपने दाँतों से हल्का-सा काटा और हाँफते हुए पूछा, “फिर?”
मैंने जारी रखा —
“तभी... जब हम दोनों बहुत तेज़ कर रहे थे... अचानक अविनाश के मुँह से निकला —
‘ओह.. सिमरन... हाँ... .. सिमरन...’
मैं एकदम चौंक गया।
मेरा हाथ रुक गया।
सिमरन... वो कॉलेज की एक आंटी का नाम था।
बहुत बार कॉलेज आती थीं — PTM, फंक्शन या कुछ काम से।
लंबी-चौड़ी पंजाबी औरत... काला चश्मा लगाती थीं, छोटे बाल, गोरी स्किन, भारी भरकम शरीर।
उम्र शायद 44-45 के आसपास रही होगी।
बहुत सुंदर और मटौर लगती थीं।
अविनाश की मम्मी थीं
और उस वक्त... जब वो पूरी तरह एस्केलेट कर रहा था... झड़ने के बिलकुल किनारे पर था... उसके मुँह से ‘सिमरन’ निकला।
मुझे तुरंत समझ आ गया कि वो उस स्टोरी की मालती की जगह सिमरन आंटी को इमेजिन कर रहा है।
उसकी कल्पना में वो 45 वाली औरत नहीं... बल्कि सिमरन आंटी ही चार-पाँच लड़कों के बीच नंगी पड़ी हुई थी।”
“तो... अविनाश अपनी मम्मी के बारे में सोचकर मुठ मार रहा था?
उसी को वो कल्पना में चोद रहा था?”
“हाँ... और मुझे ये जानकर बहुत शॉक लगा था।
नेहा ने मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया और मेरी आँखों में देखकर तेज़-तेज़ हिलते हुए बोली —
“फिर क्या हुआ?
"मुझे लगा... वो उस स्टोरी की औरत को नहीं, सिमरन आंटी को इमेजिन कर रहा है। वो चार-पाँच लड़कों के बीच में... सिमरन।
उसका नाम बोलते हुए वो और तेज़ हो गया। मैंने भी... बस उसकी आवाज़ सुनकर... कल्पना कर ली।
सिमरन का चश्मा उतरता, उसके बाल खुलते, और वो हँसती हुई... सबके साथ।"
तुमने मेरे कान में फुसफुसाया, "और तुम? तुमने क्या सोचा?"
"मैंने सोचा—अगर सिमरन आंटी सच में ऐसा करती... तो क्या मैं भी वहाँ होता?
मैंने साँस लेते हुए कहानी आगे बढ़ाई —
“जब हम दोनों झड़ गए... तब कमरे में बस हमारी तेज़ साँसों की आवाज़ आ रही थी।
हम दोनों ने अपने लंड साफ़ किए और अलग-अलग बिस्तर पर लेट गए।
लाइट ऑफ थी।
कुछ मिनट तक कोई कुछ नहीं बोला।
फिर अचानक मैंने अविनाश से पूछ लिया —
‘यार... तुमने “सिमरन” का नाम क्यों लिया?
ऐसा क्यों किया तुमने?’
अविनाश पहले तो चुप रहा।
फिर उसने हल्की-सी हँसी मारी और बोला —
‘बस... यार... वो स्टोरी पढ़ते हुए... अचानक मम्मी का चेहरा आ गया दिमाग में।
“मैंने अविनाश से पूछा —
‘यार... वो तो तुम्हारी मम्मी है ना?
तुम उसके बारे में ऐसा कैसे सोच सकते हो?’
अविनाश ने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुरा दिया।
एक शरारती, लेकिन थोड़ी शर्मीली स्माइल।
फिर बोला —
‘अरे यार... हम कुछ असली में तो कर थोड़ी रहे हैं।
हम तो सिर्फ इमेजिन कर रहे हैं ना।
इमेजिनेशन में तो कुछ भी हो सकता है।
सच बताऊँ... मुझे खुद नहीं पता क्यों, लेकिन जब भी मैं किसी नई मिडिल एज महिला की स्टोरी पढ़ता हूँ... तो मेरे दिमाग में सबसे पहले मम्मी का चेहरा आ जाता है।
वो मेरे लिए सबसे सुंदर, सबसे हॉट और सबसे सेक्सी औरत हैं।
फिर मैं उनके बारे में सोचता हूँ... उनकी भारी गांड, बड़े स्तन, और मैं बहुत ज्यादा हार्ड हो जाता हूँ।
मुठ मारने में भी तब बहुत ज्यादा मज़ा आता है।’”
नेहा ने हाँफते हुए पूछा —
“तो... अविनाश अपनी मम्मी को... अपनी फैंटसी की क्वीन बना चुका था?
फिर बोला —
“धीरे-धीरे हम दोनों इस स्टोरी पढ़ने के तरीके को बदलने लगे।
जब भी कोई नई इरॉटिक स्टोरी पढ़ते... तो अविनाश शुरू से ही उस औरत का नाम ‘सिमरन’ रख देता।
जैसे... ‘सिमरन ने उस लड़के का लंड हाथ में पकड़ा और उसे अच्छे से सहलाया...’
‘सिमरन का पति अभी ऑफिस में था, इसलिए वो यंग लड़के के साथ खेल रही थी...’
‘सिमरन अपने पति के सामने बैठी हुई थी और एक यंग लड़के का लंड चूस रही थी...’
शुरू-शुरू में वो सिर्फ़ पढ़ते-पढ़ते नाम बदल देता था।
धीरे-धीरे वो खुल गया।
अब वो खुलकर बोलता था — ‘सिमरन ने उस लड़के को चोदा...’, ‘सिमरन आंटी की गांड में लंड घुसा दिया...’
एक दिन मैंने भी झिझकते हुए नाम रिप्लेस किया।
मैंने कहा — ‘सिमरन आंटी... चार लड़कों के बीच नंगी पड़ी हुई है... और सब उसके शरीर पर अपना माल छोड़ रहे हैं...’
मैंने अविनाश का रिएक्शन देखना चाहा था।
लेकिन उसने कोई खास रिएक्शन नहीं दिया।
बल्कि और ज़्यादा इरोटिक फील करने लगा।
उसने अपना लंड और जोर से रगड़ना शुरू कर दिया और बोला —
‘हाँ यार... मम्मी बहुत हॉट हैं... कल्पना करो... वो चार-पाँच लड़कों के बीच...’
“धीरे-धीरे हमने स्टोरी पढ़ने के साथ-साथ एरॉटिक पिक्चर्स भी देखना शुरू कर दिया।
अविनाश कुछ पुरानी मैगज़ीन लाता था — जिसमें बहुत सारी सुंदर, नंगी लड़कियाँ होती थीं।
बड़े-बड़े स्तन, मोटी गांड, अलग-अलग पोज़ में... पूरी तरह नंगी।
हम उन पिक्चर्स को देखते और स्टोरी पढ़ते।
फिर हम दोनों का नाम बदल देते — हर औरत को ‘सिमरन आंटी’ बना देते।
‘देख यार... सिमरन आंटी इस पोज़ में कितनी हॉट लग रही हैं...’
‘सिमरन आंटी का लंड मुँह में ले रही हैं...’
ये नाम बदलने से हमें और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा था।”
नेहा ने पूछा —
“और तुम दोनों... जब मुठ मारते थे... तो क्या करते थे?”
मैंने शर्माते हुए लेकिन सच बताया —
“हम दोनों बगल-बगल में लेटे रहते थे।
हमारी बॉडी एक-दूसरे को छूती रहती थी — कंधा, जाँघ, कभी-कभी हाथ भी।
हम एक-दूसरे को देखते हुए मुठ मारते थे।
मैं गे नहीं हूँ... ये बात मैं अभी भी स्पष्ट करना चाहता हूँ... लेकिन उस वक्त... जब हम साथ मुठ मारते थे... मुझे अच्छा लगता था।
खासकर जब अविनाश सिमरन आंटी का नाम लेता था... तो मुझे बहुत ज़्यादा उत्तेजना होती थी।
धीरे-धीरे हम दोनों खुल गए और जब भी मुठ मारते... तो ‘सिमरन आंटी’ का नाम लेकर बोलते —
‘सिमरन आंटी... तुम्हारी गांड बहुत मोटी है...’
“हम दोनों ने एक-दूसरे का लंड भी देखा हुआ था।
अविनाश मुझसे बहुत बेहतर था साइज़ में।
मेरा पतला और साढ़े चार इंच का था... जबकि अविनाश का सात इंच का, बहुत मोटा और तगड़ा था।
उस उम्र में भी वो बहुत बड़ा था।
मुझे कई बार जलन होती थी कि भगवान ने उसे इतना बड़ा क्यों दिया।
लेकिन फिर भी... जब हम साथ मुठ मारते... मुझे अच्छा लगता था।”
“एक दिन हम बहुत ही इरॉटिक स्टोरी पढ़ रहे थे।
उसमें 45-50 साल की एक औरत थी, जो दो जवान लड़कों के साथ खेल रही थी।
स्टोरी में वो धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार रही थी... उन दोनों के सामने।
फिर हँसी-मजाक में बोली — ‘तुम दोनों एक-दूसरे का लंड हाथ में लो और मेरे लिए हिलाओ...’
हम दोनों स्टोरी पढ़ते हुए कल्पना करने लगे कि ये सब सिमरन आंटी कह रही हैं।
हमने एक-दूसरे की तरफ देखा।
पहली बार हमें ऐसा लगा कि शायद हमें एक-दूसरे को टच करना चाहिए।
मैंने थोड़ा झिझकते हुए अपना हाथ बढ़ाया।
मेरा हाथ अविनाश के लंड की तरफ गया।
जब मैंने उसे हाथ में थामा... तो मुझे बहुत अजीब सा लगा।
बहुत मोटा, बहुत गरम... और भारी।
मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।
मैंने हिम्मत करके उसे धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया।”
नेहा ने मेरे लंड को अपनी चूत में और गहराई तक लेते हुए हाँफते हुए पूछा —
“फिर... अविनाश ने क्या किया?”
मैंने जारी रखा —
“अविनाश पहले तो चौंक गया।
फिर उसने मेरी तरफ देखा और बोला — ‘अरे हिला ना भाई... जैसे तू अपना हिलाता है...’
उसने भी अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया।
उसका हाथ मुझसे ज़्यादा मोटा और मजबूत था।
वो मुझे धीरे-धीरे हिलाने लगा।
जैसे ही मैंने ये बात कही कि मैंने अविनाश का लंड हाथ में लिया था, उसका शरीर एकदम सख्त हो गया।
उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।
वो shock में थी — साफ़ दिख रहा था उसके चेहरे पर।
उसका हाथ मेरे लंड पर और कस गया।
वो मेरे लंड को बहुत टाइट पकड़े हुए थी।
मैं महसूस कर रहा था कि वो अंदर से प्रोसेस कर रही है — कि मैंने किसी दूसरे लड़के का लंड हाथ में पकड़ा था।
कुछ सेकंड तक वो चुप रही।
फिर धीरे से, थोड़ी भारी आवाज़ में बोली —
“कंटिन्यू करो...
बताओ आगे क्या हुआ।”
मैंने साँस लेते हुए आगे बताया —
“जैसे-जैसे कहानी और इरॉटिक होती गई... वैसे-वैसे मैं अविनाश के लंड को हिलाता रहा।
वो बहुत कड़क और मोटा था।
मुझे उसे हिलाने में बहुत अजीब सा, लेकिन अलग तरह का मज़ा आ रहा था।
अंदर से गर्मी हो रही थी।
मैंने उसे अच्छे से हिलाया — ऊपर से नीचे, धीरे-धीरे फिर तेज़।
बीच-बीच में अविनाश भी मुँह से निकाल रहा था — ‘और तेज़... हाँ... ऐसे...’
वो भी बहुत एंजॉय कर रहा था।
उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।
अब मैं दोनों हाथों से उसे हिला रहा था — एक हाथ से अपना लंड, दूसरे हाथ से अविनाश का।
दोनों को एक ही रिदम में... ऊपर-नीचे...
“हमारा वो रिदम तीन-चार महीने तक लगातार चलता रहा।
हर रात स्टोरी पढ़ते समय हम एक-दूसरे का लंड हाथ में पकड़कर हिलाते।
मैं जब अविनाश का लंड हाथ में लेता... तो अंदर से बहुत गर्मी होती थी।
कई बार तो मैं उसकी मम्मी — सिमरन आंटी — को याद करके और तेज़ हिलाता।
फिर हमारी छुट्टियाँ हो गईं।
एक-डेढ़ महीने बाद जब हम वापस मिले... मेरी फॅमिली मुझे छोड़ने आया था।
मेरी कार में मेरी बड़ी सिस्टर गार्गी भी थी।"
हम तीन भाई बहन है। .. में सांसे छोटा। .. फिर मेरा भाई। .. और सबसे बड़ी मेरी बहन। .. हम में 8 साल गैप है
और... अविनाश — सिमरन आंटी भी साथ में आई हुई थीं।
जैसे ही मैंने सिमरन आंटी को देखा... मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।
आज वो बहुत सुंदर लग रही थीं — हल्का मेकअप, साड़ी में उनकी भारी छाती और मोटी कमर साफ़ दिख रही थी।
मैंने अविनाश की तरफ़ देखा।
उसने भी गार्गी की तरफ़ देखकर कुछ सोचा, लेकिन मुझे कुछ नहीं बताया।
रात को हम वापस होस्टल पहुँचे।
मैं पूरे दिन से रात का इंतज़ार कर रहा था।


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