22-04-2026, 10:10 AM
ज़िंदगी अब अच्छी चल रही थी।
सेक्स लाइफ अपने पीक पर थी — एरोटिक, इंटेंस, और हर रात नई।
नेहा की पुरानी कहानियाँ सुनते-सुनते हम दोनों और करीब आ गए थे।
लेकिन सोशल लाइफ भी तो थी।
एक शाम कॉलोनी का पार्टी था — सिर्फ़ मर्दों का।
हम सब क्लब में बैठे थे, ग्रुप में।
हँसी-मज़ाक, शराब, गप्पें।
मैं भी हँस रहा था, लेकिन अंदर से कुछ अजीब सा अहसास हो रहा था।
गुप्ता जी वहाँ थे।
जब से उस दिन उन्होंने मुझे दरवाज़े पर घुटनों के बल, लगभग नंगा देखा था...
मैं कभी भी उनसे अकेले नहीं मिला।
हमेशा बचता रहा।
आज पार्टी में मैंने ज़्यादा ड्रिंक कर ली।
नेहा ऑफिस टूर पर थी, तो मैंने कहा — “आज तो पी सकता हूँ, नेहा नहीं है।”
गुप्ता जी ने मुझे ध्यान से देखा।
उनकी नज़र में वो पुरानी बात साफ़ झलक रही थी।
पार्टी खत्म होने के बाद मैं घर आ गया।
10 मिनट बाद दरवाज़े की बेल बजी।
दरवाज़ा खोला तो सामने गुप्ता जी खड़े थे।
“आ सकता हूँ?”
उनकी आवाज़ में वो पुरानी मुस्कान थी।
मैं एक पल के लिए फ्रीज हो गया।
दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
मेरा दिमाग तुरंत उस दिन पर चला गया — जब उन्होंने मुझे घुटनों के बल देखा था।
मैंने दरवाज़ा थोड़ा और खोला।
“जी... आइए।”
गुप्ता जी अंदर आए।
मैंने दरवाज़ा बंद किया।
वो सोफे पर बैठ गए।वे थोड़े नशे में थे, लेकिन संभले हुए।
मैं भी पी रखा था।
वे सोफे पर बैठ गए।
मैं उनके सामने बैठ गया।
गुप्ता जी ने सीधे पॉइंट पर आते हुए कहा —
“उस दिन... मैंने तुम्हें देख लिया था।”
मैंने बस “हम्म” कर दिया।
वे आगे बोले —
“सॉरी... तुम्हें ये देखना पड़ा... हम बस खेल रहे थे।”
गुप्ता जी मुस्कुराए।
उनकी आँखों में वो पुरानी चमक थी।
“मैं जानता हूँ तुम क्या कर रहे थे।
मैं उम्रदराज़ हूँ... अनुभव है... बहुत कुछ देखा है।”
मैंने फिर कहा —
“हम्म... लेकिन वो हमारा पर्सनल मैटर है।”
गुप्ता जी ने शराब का घूँट लिया।
“देखो बेटा... तुम्हारी बीवी बहुत अच्छी लड़की है।
खूबसूरत... सेक्सी...”
उन्होंने “सेक्सी” शब्द को पूरा करने में थोड़ा रुकावट ली, जैसे शब्द को सही से बोलने में हिचकिचा रहे हों।
“लेकिन मेरा तुम दोनों को एक सलाह है...
उसे बिगाड़ मत।
मैं जानता हूँ, जवानी में लोग ऐसे खेल खेलते हैं... सेक्स लाइफ में मसाला डालने के लिए।
लेकिन इसे ज़्यादा मत बढ़ाओ।
उसे इस तरह मत बना दो।”
वे थोड़ा रुके, फिर आगे बोले —
“हमारी बीवियाँ हमारी प्रॉपर्टी की तरह होती हैं।
प्रॉपर्टी का ख्याल रखना चाहिए।
हम उसके सिर में ऐसे आइडिया नहीं डालना चाहिए।”
फिर उन्होंने मर्दाना अंदाज़ में, थोड़े शोख स्वर में कहा —
“तुम्हें अपनी ज़िंदगी की कमान अपनी बीवी के हाथ में नहीं देनी चाहिए।
क्या पता... वो और माँगे...
क्या पता... वो और एक्सपेरिमेंट करना चाहे...
तुम समझ रहे हो ना क्या मतलब है मेरा?”
गुप्ता जी ने शराब का घूँट लिया और अपनी क्रोच को एडजस्ट किया।
उन्होंने हाथ से हल्का-हल्का रगड़ा, जैसे कुछ असहज हो।
फिर मेरी तरफ देखकर बोले —
“समझ रहे हो ना मैं क्या कह रहा हूँ?”
इस बार उनकी आवाज़ थोड़ी ऊँची और सख्त थी।
मैंने बस “हम्म” कर दिया।
वे आगे बढ़े, अब और सीधे —
“क्या पता... वो एक और मर्द ले आए... फिर क्या करोगे?
तुम जानते हो... मैंने देखा है... मेरा बेटा तुम्हारी बीवी को शॉर्ट कपड़ों में देखकर...
वो क्या कर रहा था?
हाथ हिला रहा था... जर्क कर रहा था...
तुम बेवकूफ... मैं अपने बेटे को रोक नहीं सकता... वो 19 साल का है...
लेकिन तुम... अपनी बीवी को रोक सकते हो... भैंचोद।”
उनका आखिरी शब्द “भैंचोद” इतना अचानक और कड़क आया कि मैं चौंक गया।
गुप्ता जी ने फिर अपनी क्रोच को रगड़ा।
उनकी आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।
गुप्ता जी की आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।
वे इंतज़ार कर रहे थे।
मैंने शराब का एक और घूँट लिया।
गला सूख रहा था।
मैंने धीरे से कहा —
“गुप्ता जी... वो... सिर्फ़ एक रोल-प्ले था।
हम दोनों का... प्राइवेट।
नेहा को... कभी-कभी... ऐसे खेल पसंद आ जाते हैं।
मैं... बस... उसे खुश रखने के लिए...”
गुप्ता जी ने बीच में ही हाथ उठाकर मुझे रोक दिया।
उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन आँखें सख्त थीं।
“रोल-प्ले?
अच्छा।
लेकिन बेटा... मैंने देखा था।
तुम घुटनों के बल थे... लगभग नंगे...
और नेहा खड़ी थी... जैसे कमांड दे रही हो।
ये रोल-प्ले नहीं... ये पावर शिफ्ट था।”
वे आगे झुके।
आवाज़ अब और धीमी, लेकिन और साफ़ थी —
“मैं तुम्हें कुछ नहीं बताऊँगा।
न किसी को।
लेकिन सुन लो...
अगर तुमने अपनी बीवी को ये सब सिखा दिया...
तो एक दिन वो तुमसे ज़्यादा माँगेगी।
एक और मर्द... फिर एक और...
फिर तुम क्या करोगे?
तुम्हें लगता है कि तुम कंट्रोल में हो...
लेकिन असल में... वो कंट्रोल में आ जाएगी।”
मैं चुप रहा।
गुप्ता जी ने फिर अपनी क्रोच को हल्का-सा रगड़ा और बोले —
“मैंने देखा है... कितनी सुंदर है तुम्हारी बीवी।
कितनी क्लासी लगती है।
लेकिन अगर तुमने उसे ये गंदा खेल सिखा दिया...
तो वो क्लासी बीवी... एक दिन... किसी और के सामने घुटनों के बल बैठ जाएगी।
समझे?”
मैंने गुप्ता जी को पहले कभी इस रूप में नहीं देखा था।
वे हमेशा शांत, सभ्य और एलीगेंट दिखते थे — कॉलोनी के रेस्पेक्टेड आदमी।
लेकिन आज... शराब के नशे में... वे बिल्कुल अलग लग रहे थे।
वे मेरे सामने बैठे थे, आँखें लाल, आवाज़ भारी।
उन्होंने फिर से अपनी क्रोच को रगड़ा — इस बार और ज़ोर से।
“समझ रहे हो ना...
अगर एक दिन तुम अपनी बीवी को किसी और के सामने घुटनों के बल देख लो...
क्या करोगे?
वो किसी और का लुंड चूस रही हो...
तुम क्या करोगे, सैम?”
मेरा गला सूख गया।
मैंने हल्का-सा सिर हिलाया और बोला —
“गुप्ता जी... मैं... सोच लूँगा।
और... ये सब... फिर से मत कीजिए।”
वे हँसे।
हँसी में शराब और गुस्सा दोनों थे।
“सोच लूँगा?
अच्छा।
सोच लेना।
लेकिन याद रखना...
जब वो दिन आएगा... तब सोचने का समय नहीं मिलेगा।
तुम्हारी बीवी... अभी अच्छी है... लेकिन अगर तुमने उसे ये रास्ता दिखा दिया...
तो वो रास्ता कभी खत्म नहीं होता।”
शराब का नशा उनके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था, लेकिन उनकी आवाज़ अभी भी सख्त थी।
“एक आखिरी सलाह...
नेहा को बालकनी में प्रोवोकेटिव कपड़े पहनने के लिए मत कहना।
मेरा बेटा... पढ़ाई से ध्यान हट गया है।
वो अब ठीक से चल भी नहीं पा रहा...
सब तुम्हारी बीवी की वजह से।”
वे दरवाज़े की तरफ बढ़े।
मैं भी उनके साथ उठा।
वे थोड़े लड़खड़ा रहे थे।
मैंने अपना कंधा दिया।
“चलिए... मैं आपको आपके फ्लैट तक छोड़ देता हूँ।”
गुप्ता जी मेरे कंधे का सहारा लेकर चलने लगे।
हम दोनों धीरे-धीरे गलियारे में बढ़ रहे थे।
तभी... मैंने महसूस किया।
उनका शरीर मेरे शरीर से सटा हुआ था।
उनका... हार्ड-ऑन... मेरी कमर पर दब रहा था।
मैं चौंक गया।
लेकिन कुछ नहीं बोला।
वे नशे में थे... या जानबूझकर... पता नहीं।
गुप्ता जी ने दरवाज़े पर रुककर एक बार फिर मुड़कर मुझे देखा।
उनकी आँखें अब थोड़ी और गहरी हो गई थीं।
वे धीरे से बोले —
“और हाँ... मेरे बेटे की पढ़ाई का भी ध्यान रखना।
वो 19 साल का है... अभी 12th में है... लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसकी पढ़ाई पूरी तरह बिगड़ गई है।
रात को देर तक जागता है... दिन में नींद में रहता है... टेस्ट में मार्क्स गिर गए हैं।”
वे एक पल रुके, फिर थोड़ा और आगे बढ़कर बोले —
“मैंने पूछा तो उसने कुछ नहीं बताया... लेकिन मैं जानता हूँ क्या चल रहा है।
वो बालकनी में तुम्हारी बीवी को देखता रहता है... जब वो शॉर्ट कपड़ों में या टाइट टॉप में होती है।
उसकी नज़रें... घंटों बालकनी की तरफ लगी रहती हैं।
पढ़ाई छूट गई... सब कुछ छूट गया।
मैं उसे डाँटता हूँ... लेकिन वो कहता है — ‘पापा, आप नहीं समझोगे।’”
गुप्ता जी ने अपनी क्रोच को फिर हल्का-सा रगड़ा और आगे कहा —
“मैं जानता हूँ... युवा लड़के हैं... हॉर्मोन चल रहे हैं।
लेकिन तुम्हारी बीवी... इतनी खूबसूरत और आकर्षक है कि वो खुद को रोक नहीं पा रहा।
तुम समझ रहे हो ना... मैं क्या कह रहा हूँ?
अगर तुम अपनी बीवी को बालकनी में या घर के बाहर ऐसे कपड़े पहनने के लिए कहते रहोगे...
तो मेरे बेटे जैसा और भी बहुत से लड़के... तुम्हारी बीवी को देखकर अपना भविष्य बर्बाद कर लेंगे।”
वे थोड़ा रुके, फिर आखिरी वाक्य बोले —
“मैं तुम्हें दोष नहीं दे रहा... लेकिन सोचो...
तुम्हारी बीवी की एक छोटी-सी लापरवाही... कितने घरों में तूफान ला सकती है।
अपनी बीवी को संभालो... वरना... बाद में पछताना पड़ेगा।”
गुप्ता जी ने आखिरी बार मुझे देखा।
फिर मुड़कर अपने फ्लैट में चले गए।
फिर मुड़कर अपने फ्लैट में चले गए।
मैं दरवाज़ा बंद करके सोफे पर बैठ गया।
मेरा दिमाग पूरी तरह उलझ गया था।
गुप्ता जी चले गए थे, लेकिन उनके शब्द अभी भी मेरे दिमाग में गूँज रहे थे।
मैं समझ नहीं पा रहा था कि वे असल में क्या चाहते थे।
क्या वे मुझे "समझाने" आए थे?
क्या वे मुझे "जागरूक" करना चाहते थे कि उनका बेटा नेहा को देखकर पढ़ाई छोड़ रहा है?
या... वे बस मेरी बीवी के बारे में गंदी बातें सुनना चाहते थे?
सबसे अजीब बात ये थी कि उन्होंने सारी "सलाह" देते हुए अपनी क्रोच को बार-बार रगड़ा था।
मैंने सोचा —
वे मुझे "चेतावनी" दे रहे हैं कि नेहा को बिगाड़ मत, लेकिन खुद उनका लुंड सख्त हो रहा था जब वे नेहा के बारे में बात कर रहे थे।
क्या वे खुद नेहा को देखकर उत्तेजित हो रहे हैं?
क्या वे अपने बेटे के माध्यम से नेहा के बारे में कल्पना कर रहे हैं?
या वे चाहते हैं कि मैं उन्हें और डिटेल्स बताऊँ — कि नेहा क्या-क्या करती है?
सबसे अजीब ये था कि वे "सलाह" देते समय बार-बार "भैंचोद", "किसी और के सामने घुटनों के बल बैठ जाएगी", "सेक्सी" जैसे शब्द इस्तेमाल कर रहे थे।
जो व्यक्ति "प्रॉपर्टी" और "सम्मान" की बात कर रहा हो, वो इतनी गंदी भाषा क्यों इस्तेमाल कर रहा है?
मैंने शराब का ग्लास उठाया।
एक घूँट लिया।
मैंने आँखें बंद कीं।
कल्पना में... गुप्ता जी का बेटा... बालकनी में खड़ा... नेहा को शॉर्ट कपड़ों में देख रहा है... और हाथ हिला रहा है।
मेरा लुंड... अनजाने में... हल्का-सा सख्त हो गया।
मैंने खुद को झिड़का — “क्या सोच रहा है तू...?”
लेकिन मन में एक सवाल बार-बार घूम रहा था —
“क्या नेहा को पता है कि गुप्ता जी का बेटा उसे इस तरह देखता है?”
सेक्स लाइफ अपने पीक पर थी — एरोटिक, इंटेंस, और हर रात नई।
नेहा की पुरानी कहानियाँ सुनते-सुनते हम दोनों और करीब आ गए थे।
लेकिन सोशल लाइफ भी तो थी।
एक शाम कॉलोनी का पार्टी था — सिर्फ़ मर्दों का।
हम सब क्लब में बैठे थे, ग्रुप में।
हँसी-मज़ाक, शराब, गप्पें।
मैं भी हँस रहा था, लेकिन अंदर से कुछ अजीब सा अहसास हो रहा था।
गुप्ता जी वहाँ थे।
जब से उस दिन उन्होंने मुझे दरवाज़े पर घुटनों के बल, लगभग नंगा देखा था...
मैं कभी भी उनसे अकेले नहीं मिला।
हमेशा बचता रहा।
आज पार्टी में मैंने ज़्यादा ड्रिंक कर ली।
नेहा ऑफिस टूर पर थी, तो मैंने कहा — “आज तो पी सकता हूँ, नेहा नहीं है।”
गुप्ता जी ने मुझे ध्यान से देखा।
उनकी नज़र में वो पुरानी बात साफ़ झलक रही थी।
पार्टी खत्म होने के बाद मैं घर आ गया।
10 मिनट बाद दरवाज़े की बेल बजी।
दरवाज़ा खोला तो सामने गुप्ता जी खड़े थे।
“आ सकता हूँ?”
उनकी आवाज़ में वो पुरानी मुस्कान थी।
मैं एक पल के लिए फ्रीज हो गया।
दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
मेरा दिमाग तुरंत उस दिन पर चला गया — जब उन्होंने मुझे घुटनों के बल देखा था।
मैंने दरवाज़ा थोड़ा और खोला।
“जी... आइए।”
गुप्ता जी अंदर आए।
मैंने दरवाज़ा बंद किया।
वो सोफे पर बैठ गए।वे थोड़े नशे में थे, लेकिन संभले हुए।
मैं भी पी रखा था।
वे सोफे पर बैठ गए।
मैं उनके सामने बैठ गया।
गुप्ता जी ने सीधे पॉइंट पर आते हुए कहा —
“उस दिन... मैंने तुम्हें देख लिया था।”
मैंने बस “हम्म” कर दिया।
वे आगे बोले —
“सॉरी... तुम्हें ये देखना पड़ा... हम बस खेल रहे थे।”
गुप्ता जी मुस्कुराए।
उनकी आँखों में वो पुरानी चमक थी।
“मैं जानता हूँ तुम क्या कर रहे थे।
मैं उम्रदराज़ हूँ... अनुभव है... बहुत कुछ देखा है।”
मैंने फिर कहा —
“हम्म... लेकिन वो हमारा पर्सनल मैटर है।”
गुप्ता जी ने शराब का घूँट लिया।
“देखो बेटा... तुम्हारी बीवी बहुत अच्छी लड़की है।
खूबसूरत... सेक्सी...”
उन्होंने “सेक्सी” शब्द को पूरा करने में थोड़ा रुकावट ली, जैसे शब्द को सही से बोलने में हिचकिचा रहे हों।
“लेकिन मेरा तुम दोनों को एक सलाह है...
उसे बिगाड़ मत।
मैं जानता हूँ, जवानी में लोग ऐसे खेल खेलते हैं... सेक्स लाइफ में मसाला डालने के लिए।
लेकिन इसे ज़्यादा मत बढ़ाओ।
उसे इस तरह मत बना दो।”
वे थोड़ा रुके, फिर आगे बोले —
“हमारी बीवियाँ हमारी प्रॉपर्टी की तरह होती हैं।
प्रॉपर्टी का ख्याल रखना चाहिए।
हम उसके सिर में ऐसे आइडिया नहीं डालना चाहिए।”
फिर उन्होंने मर्दाना अंदाज़ में, थोड़े शोख स्वर में कहा —
“तुम्हें अपनी ज़िंदगी की कमान अपनी बीवी के हाथ में नहीं देनी चाहिए।
क्या पता... वो और माँगे...
क्या पता... वो और एक्सपेरिमेंट करना चाहे...
तुम समझ रहे हो ना क्या मतलब है मेरा?”
गुप्ता जी ने शराब का घूँट लिया और अपनी क्रोच को एडजस्ट किया।
उन्होंने हाथ से हल्का-हल्का रगड़ा, जैसे कुछ असहज हो।
फिर मेरी तरफ देखकर बोले —
“समझ रहे हो ना मैं क्या कह रहा हूँ?”
इस बार उनकी आवाज़ थोड़ी ऊँची और सख्त थी।
मैंने बस “हम्म” कर दिया।
वे आगे बढ़े, अब और सीधे —
“क्या पता... वो एक और मर्द ले आए... फिर क्या करोगे?
तुम जानते हो... मैंने देखा है... मेरा बेटा तुम्हारी बीवी को शॉर्ट कपड़ों में देखकर...
वो क्या कर रहा था?
हाथ हिला रहा था... जर्क कर रहा था...
तुम बेवकूफ... मैं अपने बेटे को रोक नहीं सकता... वो 19 साल का है...
लेकिन तुम... अपनी बीवी को रोक सकते हो... भैंचोद।”
उनका आखिरी शब्द “भैंचोद” इतना अचानक और कड़क आया कि मैं चौंक गया।
गुप्ता जी ने फिर अपनी क्रोच को रगड़ा।
उनकी आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।
गुप्ता जी की आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।
वे इंतज़ार कर रहे थे।
मैंने शराब का एक और घूँट लिया।
गला सूख रहा था।
मैंने धीरे से कहा —
“गुप्ता जी... वो... सिर्फ़ एक रोल-प्ले था।
हम दोनों का... प्राइवेट।
नेहा को... कभी-कभी... ऐसे खेल पसंद आ जाते हैं।
मैं... बस... उसे खुश रखने के लिए...”
गुप्ता जी ने बीच में ही हाथ उठाकर मुझे रोक दिया।
उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन आँखें सख्त थीं।
“रोल-प्ले?
अच्छा।
लेकिन बेटा... मैंने देखा था।
तुम घुटनों के बल थे... लगभग नंगे...
और नेहा खड़ी थी... जैसे कमांड दे रही हो।
ये रोल-प्ले नहीं... ये पावर शिफ्ट था।”
वे आगे झुके।
आवाज़ अब और धीमी, लेकिन और साफ़ थी —
“मैं तुम्हें कुछ नहीं बताऊँगा।
न किसी को।
लेकिन सुन लो...
अगर तुमने अपनी बीवी को ये सब सिखा दिया...
तो एक दिन वो तुमसे ज़्यादा माँगेगी।
एक और मर्द... फिर एक और...
फिर तुम क्या करोगे?
तुम्हें लगता है कि तुम कंट्रोल में हो...
लेकिन असल में... वो कंट्रोल में आ जाएगी।”
मैं चुप रहा।
गुप्ता जी ने फिर अपनी क्रोच को हल्का-सा रगड़ा और बोले —
“मैंने देखा है... कितनी सुंदर है तुम्हारी बीवी।
कितनी क्लासी लगती है।
लेकिन अगर तुमने उसे ये गंदा खेल सिखा दिया...
तो वो क्लासी बीवी... एक दिन... किसी और के सामने घुटनों के बल बैठ जाएगी।
समझे?”
मैंने गुप्ता जी को पहले कभी इस रूप में नहीं देखा था।
वे हमेशा शांत, सभ्य और एलीगेंट दिखते थे — कॉलोनी के रेस्पेक्टेड आदमी।
लेकिन आज... शराब के नशे में... वे बिल्कुल अलग लग रहे थे।
वे मेरे सामने बैठे थे, आँखें लाल, आवाज़ भारी।
उन्होंने फिर से अपनी क्रोच को रगड़ा — इस बार और ज़ोर से।
“समझ रहे हो ना...
अगर एक दिन तुम अपनी बीवी को किसी और के सामने घुटनों के बल देख लो...
क्या करोगे?
वो किसी और का लुंड चूस रही हो...
तुम क्या करोगे, सैम?”
मेरा गला सूख गया।
मैंने हल्का-सा सिर हिलाया और बोला —
“गुप्ता जी... मैं... सोच लूँगा।
और... ये सब... फिर से मत कीजिए।”
वे हँसे।
हँसी में शराब और गुस्सा दोनों थे।
“सोच लूँगा?
अच्छा।
सोच लेना।
लेकिन याद रखना...
जब वो दिन आएगा... तब सोचने का समय नहीं मिलेगा।
तुम्हारी बीवी... अभी अच्छी है... लेकिन अगर तुमने उसे ये रास्ता दिखा दिया...
तो वो रास्ता कभी खत्म नहीं होता।”
शराब का नशा उनके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था, लेकिन उनकी आवाज़ अभी भी सख्त थी।
“एक आखिरी सलाह...
नेहा को बालकनी में प्रोवोकेटिव कपड़े पहनने के लिए मत कहना।
मेरा बेटा... पढ़ाई से ध्यान हट गया है।
वो अब ठीक से चल भी नहीं पा रहा...
सब तुम्हारी बीवी की वजह से।”
वे दरवाज़े की तरफ बढ़े।
मैं भी उनके साथ उठा।
वे थोड़े लड़खड़ा रहे थे।
मैंने अपना कंधा दिया।
“चलिए... मैं आपको आपके फ्लैट तक छोड़ देता हूँ।”
गुप्ता जी मेरे कंधे का सहारा लेकर चलने लगे।
हम दोनों धीरे-धीरे गलियारे में बढ़ रहे थे।
तभी... मैंने महसूस किया।
उनका शरीर मेरे शरीर से सटा हुआ था।
उनका... हार्ड-ऑन... मेरी कमर पर दब रहा था।
मैं चौंक गया।
लेकिन कुछ नहीं बोला।
वे नशे में थे... या जानबूझकर... पता नहीं।
गुप्ता जी ने दरवाज़े पर रुककर एक बार फिर मुड़कर मुझे देखा।
उनकी आँखें अब थोड़ी और गहरी हो गई थीं।
वे धीरे से बोले —
“और हाँ... मेरे बेटे की पढ़ाई का भी ध्यान रखना।
वो 19 साल का है... अभी 12th में है... लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसकी पढ़ाई पूरी तरह बिगड़ गई है।
रात को देर तक जागता है... दिन में नींद में रहता है... टेस्ट में मार्क्स गिर गए हैं।”
वे एक पल रुके, फिर थोड़ा और आगे बढ़कर बोले —
“मैंने पूछा तो उसने कुछ नहीं बताया... लेकिन मैं जानता हूँ क्या चल रहा है।
वो बालकनी में तुम्हारी बीवी को देखता रहता है... जब वो शॉर्ट कपड़ों में या टाइट टॉप में होती है।
उसकी नज़रें... घंटों बालकनी की तरफ लगी रहती हैं।
पढ़ाई छूट गई... सब कुछ छूट गया।
मैं उसे डाँटता हूँ... लेकिन वो कहता है — ‘पापा, आप नहीं समझोगे।’”
गुप्ता जी ने अपनी क्रोच को फिर हल्का-सा रगड़ा और आगे कहा —
“मैं जानता हूँ... युवा लड़के हैं... हॉर्मोन चल रहे हैं।
लेकिन तुम्हारी बीवी... इतनी खूबसूरत और आकर्षक है कि वो खुद को रोक नहीं पा रहा।
तुम समझ रहे हो ना... मैं क्या कह रहा हूँ?
अगर तुम अपनी बीवी को बालकनी में या घर के बाहर ऐसे कपड़े पहनने के लिए कहते रहोगे...
तो मेरे बेटे जैसा और भी बहुत से लड़के... तुम्हारी बीवी को देखकर अपना भविष्य बर्बाद कर लेंगे।”
वे थोड़ा रुके, फिर आखिरी वाक्य बोले —
“मैं तुम्हें दोष नहीं दे रहा... लेकिन सोचो...
तुम्हारी बीवी की एक छोटी-सी लापरवाही... कितने घरों में तूफान ला सकती है।
अपनी बीवी को संभालो... वरना... बाद में पछताना पड़ेगा।”
गुप्ता जी ने आखिरी बार मुझे देखा।
फिर मुड़कर अपने फ्लैट में चले गए।
फिर मुड़कर अपने फ्लैट में चले गए।
मैं दरवाज़ा बंद करके सोफे पर बैठ गया।
मेरा दिमाग पूरी तरह उलझ गया था।
गुप्ता जी चले गए थे, लेकिन उनके शब्द अभी भी मेरे दिमाग में गूँज रहे थे।
मैं समझ नहीं पा रहा था कि वे असल में क्या चाहते थे।
क्या वे मुझे "समझाने" आए थे?
क्या वे मुझे "जागरूक" करना चाहते थे कि उनका बेटा नेहा को देखकर पढ़ाई छोड़ रहा है?
या... वे बस मेरी बीवी के बारे में गंदी बातें सुनना चाहते थे?
सबसे अजीब बात ये थी कि उन्होंने सारी "सलाह" देते हुए अपनी क्रोच को बार-बार रगड़ा था।
मैंने सोचा —
वे मुझे "चेतावनी" दे रहे हैं कि नेहा को बिगाड़ मत, लेकिन खुद उनका लुंड सख्त हो रहा था जब वे नेहा के बारे में बात कर रहे थे।
क्या वे खुद नेहा को देखकर उत्तेजित हो रहे हैं?
क्या वे अपने बेटे के माध्यम से नेहा के बारे में कल्पना कर रहे हैं?
या वे चाहते हैं कि मैं उन्हें और डिटेल्स बताऊँ — कि नेहा क्या-क्या करती है?
सबसे अजीब ये था कि वे "सलाह" देते समय बार-बार "भैंचोद", "किसी और के सामने घुटनों के बल बैठ जाएगी", "सेक्सी" जैसे शब्द इस्तेमाल कर रहे थे।
जो व्यक्ति "प्रॉपर्टी" और "सम्मान" की बात कर रहा हो, वो इतनी गंदी भाषा क्यों इस्तेमाल कर रहा है?
मैंने शराब का ग्लास उठाया।
एक घूँट लिया।
मैंने आँखें बंद कीं।
कल्पना में... गुप्ता जी का बेटा... बालकनी में खड़ा... नेहा को शॉर्ट कपड़ों में देख रहा है... और हाथ हिला रहा है।
मेरा लुंड... अनजाने में... हल्का-सा सख्त हो गया।
मैंने खुद को झिड़का — “क्या सोच रहा है तू...?”
लेकिन मन में एक सवाल बार-बार घूम रहा था —
“क्या नेहा को पता है कि गुप्ता जी का बेटा उसे इस तरह देखता है?”


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