20-04-2026, 03:21 PM
बाबा: “बेटी, आज के लिए बस इतना ही। असली शुद्धिकरण की रस्म कल शुरू होगी। अब, कल समय पर ज़रूर आ जाना। और हाँ, अपनी शर्म-हया को एक तरफ़ रखकर आना, और इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अपने मन और तन को पूरी तरह तैयार करके आना।”
पूजा: “जैसा आप कहें, बाबाजी।” और पूजा फिर से बाथरूम में गई और अपने ओरिजिनल कपड़े पहनकर बाहर आई। और बाबाजी को प्रणाम करने के बाद, उसने दरवाज़ा खोला और उसी सुनसान सड़क पर अपने घर की ओर चल पड़ी।
बाबा बस उसकी थिरकती और मटकती हुई गांड को अपनी आँखों के सामने ओझल होते देखते रहे, और उनका एक हाथ वापस अपनी धोती की तरफ़ चला गया।
अगले दिन जब पूजा आई तो बाबा जी ने पूछा: "किसी ने देखा तो नहीं?"
पूजा: नहीं बाबाजी, किसी ने नहीं देखा। आप मुझे आज्ञा दे।” मैत्री रचित कहानी.
बाबा: “पुत्री, तुम्हें पूरी तरह शुद्ध होना होगा। सबसे पहले तुम्हें कच्चे दूध का स्नान करना होगा। शुद्ध वस्त्र पहनने होंगे, और थोडा शृंगार करना होगा।”
पूजा: “लेकिन बाबाजी, क्या एक विधवा का शृंगार करना सही रहेगा।?”
बाबा: पुत्री, शुद्धि-क्रिया के लिए कोई भी काम किया जा सकता है। विधवा तो तुम इस समाज के लिए हो। तुम्हारे पति तो अभी भी तुम्हारे पास है, मतलब की तुम सही तरीके से विधवा नहीं हुई हो। और जैसा मैं कहूँ बस वैसा करती जाओ, बेटी।“
पूजा: “जो आज्ञा बाबाजी।”
बाबा: “अब तुम स्नान-गृह में जा के कच्चे दूध का स्नान करो। मैने वहाँ पर कच्चा दूध रख दिया है क्यूंकी तुम्हारे लिए कच्चा दूध घर से लाना मुश्किल है और हाँ, तुम्हारे वस्त्र भी स्नान-गृह (बाथरूम) में ही रखें हैं।”
बाबा ने ऑरेंज कलर का ब्लाउस और पेटिकोट बाथरूम में रखा था। बाबा ने ब्लाउस के हुक निकाल दिए थे। हुक्स पीठ की साइड पर थे।
पूजा दूध से नहा कर आई। सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में उसे बाबा के सामने जाने में शरम आ रही थी।
पूजा: “बाबाजी!”
बाबा: “आ गयी।” लेखिका मैत्री है.
पूजा: “बाबाजी, मुझे इन वस्त्रों में शरम आ रही है। यह वस्त्र कुछ अजीब ढंग के बने हुए है। उसमे मैं ठीक से फिट नहीं हो रही हूँ।”
बाबा: “नहीं पुत्री, ऐसा ना बोलो। यह जोगिया वस्त्र शुद्ध हैं। यदि तुम शुद्ध नहीं होगी तो उपरवाला प्रसन्न कदापि नहीं होंगे।”
पूजा: “लेकिन बाबाजी, इस... स...ब्ला... ब्लाउस में हुक्स नहीं हैं।”
बाबा: “ओह! मैने देखा ही नहीं। वैसे तो पूजा केवल दो घंटे की ही है। लेकिन यदि तुम ब्लाउस के कारण पूजा नहीं कर सकती तो हम कल से पूजा कर लेंगे। लेकिन शायद यह विलम्ब अच्छा ना हो। मैं तो यह चाहता हूँ की मुज से शरम ना रख के बिना हुक्स ब्लाउज पहन कर पूजा को समाप्त किया जाए। बाकी तुम्हारी मर्जी। जैसा तुम चाहो।“
पूजा: “नहीं बाबाजी, शुद्धि-क्रिया शुरू कीजिए।”
बाबा: “पहले तुम उस शीशे पर जाकर शृंगार कर लो। शृंगार की सामग्री वहीं है।”
पूजा ने लाल लिपस्टिक लगाई। थोडा काजल और थोडा पर्फ्यूम। वह सब मेकअप का समान था सभी का उपयोग किया। शृंगार करके वह बाबा के पास आई।
बाबा: “अति सुंदर, पुत्री, तुम बहुत सुंदर लग रही हो। तुम पर हर प्रकार का शृंगार दीपक जैसा लगता है।”
पूजा शरमाने लगी। यह फीलिंग्स उसने पहली बार एक्सपीरियेन्स की थी।
बाबा: “चलो, अब शुरू करें।”
वो दोनों बैठ गये। मैत्री की प्रस्तुति.
*************************
बने रहिये....................
पूजा: “जैसा आप कहें, बाबाजी।” और पूजा फिर से बाथरूम में गई और अपने ओरिजिनल कपड़े पहनकर बाहर आई। और बाबाजी को प्रणाम करने के बाद, उसने दरवाज़ा खोला और उसी सुनसान सड़क पर अपने घर की ओर चल पड़ी।
बाबा बस उसकी थिरकती और मटकती हुई गांड को अपनी आँखों के सामने ओझल होते देखते रहे, और उनका एक हाथ वापस अपनी धोती की तरफ़ चला गया।
अगले दिन जब पूजा आई तो बाबा जी ने पूछा: "किसी ने देखा तो नहीं?"
पूजा: नहीं बाबाजी, किसी ने नहीं देखा। आप मुझे आज्ञा दे।” मैत्री रचित कहानी.
बाबा: “पुत्री, तुम्हें पूरी तरह शुद्ध होना होगा। सबसे पहले तुम्हें कच्चे दूध का स्नान करना होगा। शुद्ध वस्त्र पहनने होंगे, और थोडा शृंगार करना होगा।”
पूजा: “लेकिन बाबाजी, क्या एक विधवा का शृंगार करना सही रहेगा।?”
बाबा: पुत्री, शुद्धि-क्रिया के लिए कोई भी काम किया जा सकता है। विधवा तो तुम इस समाज के लिए हो। तुम्हारे पति तो अभी भी तुम्हारे पास है, मतलब की तुम सही तरीके से विधवा नहीं हुई हो। और जैसा मैं कहूँ बस वैसा करती जाओ, बेटी।“
पूजा: “जो आज्ञा बाबाजी।”
बाबा: “अब तुम स्नान-गृह में जा के कच्चे दूध का स्नान करो। मैने वहाँ पर कच्चा दूध रख दिया है क्यूंकी तुम्हारे लिए कच्चा दूध घर से लाना मुश्किल है और हाँ, तुम्हारे वस्त्र भी स्नान-गृह (बाथरूम) में ही रखें हैं।”
बाबा ने ऑरेंज कलर का ब्लाउस और पेटिकोट बाथरूम में रखा था। बाबा ने ब्लाउस के हुक निकाल दिए थे। हुक्स पीठ की साइड पर थे।
पूजा दूध से नहा कर आई। सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में उसे बाबा के सामने जाने में शरम आ रही थी।
पूजा: “बाबाजी!”
बाबा: “आ गयी।” लेखिका मैत्री है.
पूजा: “बाबाजी, मुझे इन वस्त्रों में शरम आ रही है। यह वस्त्र कुछ अजीब ढंग के बने हुए है। उसमे मैं ठीक से फिट नहीं हो रही हूँ।”
बाबा: “नहीं पुत्री, ऐसा ना बोलो। यह जोगिया वस्त्र शुद्ध हैं। यदि तुम शुद्ध नहीं होगी तो उपरवाला प्रसन्न कदापि नहीं होंगे।”
पूजा: “लेकिन बाबाजी, इस... स...ब्ला... ब्लाउस में हुक्स नहीं हैं।”
बाबा: “ओह! मैने देखा ही नहीं। वैसे तो पूजा केवल दो घंटे की ही है। लेकिन यदि तुम ब्लाउस के कारण पूजा नहीं कर सकती तो हम कल से पूजा कर लेंगे। लेकिन शायद यह विलम्ब अच्छा ना हो। मैं तो यह चाहता हूँ की मुज से शरम ना रख के बिना हुक्स ब्लाउज पहन कर पूजा को समाप्त किया जाए। बाकी तुम्हारी मर्जी। जैसा तुम चाहो।“
पूजा: “नहीं बाबाजी, शुद्धि-क्रिया शुरू कीजिए।”
बाबा: “पहले तुम उस शीशे पर जाकर शृंगार कर लो। शृंगार की सामग्री वहीं है।”
पूजा ने लाल लिपस्टिक लगाई। थोडा काजल और थोडा पर्फ्यूम। वह सब मेकअप का समान था सभी का उपयोग किया। शृंगार करके वह बाबा के पास आई।
बाबा: “अति सुंदर, पुत्री, तुम बहुत सुंदर लग रही हो। तुम पर हर प्रकार का शृंगार दीपक जैसा लगता है।”
पूजा शरमाने लगी। यह फीलिंग्स उसने पहली बार एक्सपीरियेन्स की थी।
बाबा: “चलो, अब शुरू करें।”
वो दोनों बैठ गये। मैत्री की प्रस्तुति.
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