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Adultery बदलाव, मजबूरी, सेक्स या जिंदगी.....
#69
अब आगे
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अगली सुबह की धूप रोशनदान से अभी-अभी आरोही के चेहरे पर पड़ ही रही थी जब वह राहुल के फ्लैट में दाखिल हुई। कल की घटनाएं उसके मन में अभी भी ताजा थीं—राहुल की नरमी, उसके प्यार भरे शब्द, लेकिन साथ ही वह लगातार थप्पड़ और मसलना। और वह उसे नंगा करके देखना तो रात भर उसके मन से नहीं गया।


आरोही की योनि अभी भी कल की गीलापन की याद से सिहर उठती थी, और गिल्ट का बोझ उसे भारी कर रहा था। "अमित को पता चलेगा तो क्या होगा? लेकिन कर भी क्या सकती हूँ राहुल... जो कर रहा है, उसकी कीमत वह दे चुका है," वह खुद को समझाती रही।

आज वह समय पर पहुंची थी, चाबी से दरवाजा खोला, और लॉग बुक में एंट्री की। राहुल पहले से तैयार था, लेकिन आज उसका लुक अलग था—कैजुअल शर्ट और जींस में, जैसे बाहर जाने की तैयारी हो।

वह आरोही को देखकर मुस्कुराया और बोला, "आ गई मेरी स्वीटी। आज कुछ स्पेशल प्लान है। काम छोड़ो, आज हम बाहर घूमने चलेंगे।" 


आरोही चौंक गई। "घूमने? लेकिन सर, काम..." वह हकलाते हुए बोली।

राहुल ने उसका हाथ पकड़ लिया, नरमी से। "काम रोज होता है। आज तुम्हें रिलैक्स करवाता हूं। तैयार रहना।" आरोही के मन में मिले-जुले भाव थे। एक तरफ राहत कि आज शायद वह रफ बिहेवियर नहीं होगा, दूसरी तरफ डर कि बाहर क्या होगा। अब इतनी सुबह तो कुछ खुलना नहीं था। तो आरोही ने डरते हुए पूछा, “सर फिर नाश्ता?”



राहुल ने बोला, “अरे हाँ यार 11 बजे के बाद ही कुछ खुलेगा। चल ऐसा कर कुछ ऑर्डर कर लेते हैं। आजा।”


और आजा बोलकर आरोही में अपनी गोद में बैठा लिया और मोबाइल उसे दे दिया। और आरोही को कसकर भींचते हुए बोला, “ले जो मंगाना है मंगा ले। आज तेरी पसंद।” उधर आरोही को समझ को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे।

तब तक राहुल उसके स्तनों को सहलाने लगा। आरोही सिहरने लगी।

“सर.......आह....सीऽऽ.......ऽऽऽऽ........” आरोही सिसकने लगी।


राहुल के हाथ अपने उसके स्तनों के दोनों निप्पलों को हल्के हाथ से सहला रहे थे। आरोही एकदम बेबस सिसकी ले रही थी। कहीं ना कहीं अपने शरीर की गर्माहट से लड़ भी रही थी। फिर राहुल ने ऊपर देखा—क्या ऑर्डर नहीं करना है?”

और इसी के साथ राहुल ने उसके गालों को अपने दोनों हाथों में भरकर चूसना शुरु कर दिया। और आरोही को और भींच लिया। आरोही की मानों सांसें रूक गई हों। राहुल एकदम जोश में आ गया था।

सुबह-सुबह आरोही वैसे ही बहुत प्यारी लग रही थी। और राहुल जैसा कड़क मर्द ऐसी स्थिति में किसी लड़की को पाकर होश तो खो ही देगा। साथ ही यौन भावनाएँ तो मानव में बहुत ही आदिम काल से शिकार जैसी ही भरी हैं। और अक्सर बड़े खूंखार जानवरों के बीच की लड़ाईयाँ, मिलन के सीजन में, यौन आवेग में मादा पर कब्जे के लिए ही तो होती हैं।

तो राहुल एकदम जोश में था।


आरोही के मुँह से फूट रही सिसकियाँ उसे और आनंद दे रही थीं.......सीईईईईईईईईईईईईईईईई......आहहहहहहऽऽ.......ऽऽऽऽ........

थोड़ी देर बाद राहुल रूका और देखा आरोही एकदम लाल सी हो गई थी। राहुल की आँखों में अपने शिकार को फाड़ खाने की तैयारी में नजर गड़ाए बाज की हो रही थी। आज राहुल शायद कुछ अधिक ही जोश में था।


आरोही उसकी आंखों में निरीह बनकर देख रही थी। लेकिन आरोही की शरीर की गर्माहट भी उसकी आंखों की मस्ती बनकर झांक रही थी। आरोही एक तरह की मासूमियत और मस्त लड़की का कॉकटेल बन गई थी। राहुल उसकी आँखों मे देखते हुए उसे अपनी ओर करके डीप किस करने लगता है।

उउहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहंहं...................पुचचचचचचचचच....................उम्ममममममममममम

राहुल, आरोही के दोनों ओठों को चूसते हुए........ अब अपनी जीभ को उसकी मुँह की गहराइयों से मिठास तलाशने लगता है। आरोही में मुँह के कोने-कोने में राहुल की जीभ किसी मालिक की तरह से जा रही थी।


कुछ देर बाद राहुल किस तोड़ता है... तो आरोही...........हफफफफफफफफफफफफफफफफफफ..... करके सांस खींचती है।

राहुल आरोही को फिर से खींचता है और बोलता है—अपनी जीभ बाहर करो। आरोही जीभ निकालती है। और राहुल उसे अपने दांतों से पकड़कर चूसने लगता है। आरोही को अजीब लग रहा था। लेकिन मस्ती भी आने लगती है। उसके स्तन कड़े होने लगते हैं। योनि में गीलापन तो पहले ही था।

राहुल फिर किस तोड़ता है। और आरोही की ओर देखकर बोलता है—ऑर्डर कर ले यार। लेकिन उसका ध्यान आरोही की तने स्तनों पर जाता है, और बोलता है, “पहले जरा यह अपना कुर्ता उतार आज मेरा नाश्ता तेरी चूचियों से होगा। मैं जरा मूतकर आता हूँ”

आरोही की तो मानों सांसे ही रूक गईं थीं। आज राहुल उसे ऊपर से नंगा करेगा। अब आरोही असमंजस में थी क्योंकि राहुल का आदेश तो मानना ही था और यही सब करने की ही शर्त तो थी। तो यह होना ही था। लेकिन आरोही एक भोली मासूम लड़की और पत्नी थी। अचानक कैसे वह अपने स्तन खोल दे।

और राहुल के उठते और मूतने जैसे शब्द को बोलने पर आरोही का ध्यान उसके जाँघों के जोड़ पर जाता है। जहाँ वह जगह काफी फूली ही थी। आरोही की नजरें वहाँ अटकने लगती हैं लेकिन राहुल बाथरूम चला जाता है।

यहाँ आरोही सोचती हुई झिझक रही थी।

आरोही—यह मुझसे क्यों उतरवा रहा है, खुद भी तो उतार सकता है ना। क्यों मुझे और शर्मिंदा करना चाहता है।


आरोही अब भी झिझक रही थी, हल्के-हल्के कुर्ते के फोल्ड को ऊपर कर रही थी। इतने धीमे मानों कई सदियाँ यही करती रह जाएगी और कुर्ता फिर भी शरीर पर ही रहेगा।

इतनी देर में राहुल बाथरूम से वापस आता है और बोलता है।

“अरे ऊतार ना या फिर मैं सजा दूँ?” राहुल ने गुर्राते हुए कहा।

राहुल की गुर्राहट से आरोही का रहा-सहा दम भी निकल गया। और वह कुर्ता उतारने लगी लेकिन इस कुर्ते की चेन पीछे की ओर लगी थी। आरोही के हाथ हड़बड़ाहट में उलझ रहे थे।

राहुल आगे आकर उसे नरमाहट से बोला। “कोई नहीं पहले नाश्ता ऑर्डर कर ले फिर उतार ले”

यह बोलते हुए आरोही को फिर अपनी गोद में बैठा लेता है और कहता है, “पहले नाश्ता ही ऑर्डर कर, कुर्ता तो मैं भी उतार दूँगा, और हाँ बाद में तू नाश्ता कहाँ ऑर्डर कर पाएगी”

आरोही एकदम हक्की-बक्की रह जाती है। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। तभी राहुल अपना एक हाथ पीछे से उसकी जाँघों पर रखता है। और जाँघों को जोर से सहलाते हुए पूछता है, “क्या हुआ?”

आरोही डर के मारे जल्दी से फूड वाला ऐप खोलकर कुछ ढूँढने लगती है। उसे मानों कुछ समझ नहीं आ रहा था।

“ला इधर, तू तो ऐसे बुत बनकर बैठी रहेगी मुझे तेरी चूचियाँ भी चूसनी हैं।”

राहुल ने आरोही के हाथ से मोबाइल ले लिया और उसके गाल पर एक लव बाइट दे दी। और राहुल ने आरोही से पूछकर पूरी सब्जी और जलेबी का नाश्ता ऑर्डर कर दिया। और फोन को ऐसे फेंका मानों को सीमा पर दुश्मन को हरा दिया। और सीधा उसने आरोही के स्तनों को अपने कब्जे में लेकर मसला।

सीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई........................नाआआआआआआआआआआआआआआ..........आरोही के मुँह से एक सीत्कार निकल गई। राहुल ने अब देर ना करते हुए पीछे से आरोही के कुर्ते की जिप खोली और कुर्ते को ऊपर खिसका कर खींचा ना चाहते हुए भी आरोही को हाथ ऊपर करने पड़े।


अब आरोही ऊपर से नंगी थी बस एक ब्रा थी। राहुल तो मानों सनक सा गया,.................वाह यार क्या मस्त चूचियाँ हैं।

आरोही ने मारे शर्म के अपने स्तनों को हाथ मोड़कर ढंक लिया। लेकिन कहाँ छिप सकती थीं, राहुल से अपने हाथों से उसके हाथों को जबरिया ऐसे झटक दिया जैसा वह इन सुंदर अमृत कलशों का असली मालिक हो। वैसे मालिक तो वह था। तो अब राहुल ब्रा में कसे आरोही के स्तनों को देख रहा था।

और फौरन ही वह आरोही को खींचता है और उसकी क्लीवेज को चाटता है।.........उम्ममममममम.......आहहहहहहह...... मत करो.... 

आरोही के मुँह से आवाज निकलती है। फिर राहुल उसकी ब्रा को खोलने के लिए हाथ बढ़ाता है और एक झटके में खोल देता है, और आरोही का हाथ अचानक से इस हमले की प्रतिक्रिया में फिर से अपने स्तनों को ढंकने के लिए चल पढ़ता है..........कि तभी...फोन की घंटी बजती है.....

और राहुल देखता, वैसे उसका मूड ऑफ हो गया, क्योंकि आरोही के स्तन पास थे। उसने आरोही को अपनी ओर खींचा और अपने से सटाते हुए फोन उठाया। वह डिलीवरी वाले का फोन था। वैसे राहुल का मन नहीं था लेकिन डिलीवरी लेना पड़ेगा।

आरोही धीरे से अपने ब्रॉ का हुक लगाने लगती है। तभी राहुल बोलता है।

“अरे हुक क्यों लगा रही हो, अभी तो खोलना ही है, ऐसे ही रहो।” और फिर आरोही को खींचकर एक और किस कर देता है। आज राहुल पता नहीं क्यों जंगली सा हुआ जा रहा था। आरोही उसका शिकार लग रही थी। जबकि आरोही तो अब उसके कब्जे में थी।

तभी घंटी बजती है। और राहुल आरोही को लिए हुए गेट पर जाता है। आरोही घबराती है, “अरे यह कहीं ऐसी हालत में गेट ना खोल दे।”

लेकिन राहुल ऐन मौके पर उसे गेट के किनारे करके गेट खोलता है और सामान लेकर उसे टिप भी दे देता है। वैसे डिलीवरी वाला राहुल को पहचानता था। और पहचाने भी क्यों ना पैसे से पहचान हो ही जाती है। राहुल जब भी सामान मंगाता तो टिप देता था।

गेट बंद होते आरोही चैन की सांस लेती है। फिर राहुल उसे पैकेट देता है और बोलता है चलो खा लो।


आरोही घबराई सी एक हाथ से ब्रॉ पकड़े और दूसरे हाथ से पैकेट लेकर आगे चलती है।

अब कल्पना कीजिए एक खूबसूरत लड़की जिसका कुर्ता उतरा पड़ा हो और ब्रॉ खुली हो और हिरणी सी तरह से मासूमियत से चल रही हो, तो राहुल जो एक शिकारी की तरह रहा है। वह क्यों नहीं झटका खाए।

आगे जाती आरोही को राहुल ने हा पीछे खींचा और एक हाथ से उसके नितंबों पर कस लिया और दूसरे से उसके एक स्तन पर हाथ रखा और उस मुलायम मगर ठोस अहसास को महसूस करने के बाद कस के मसला और आरोही चीखे की पहले उसका मुँह अपने होंठो से बंद कर दिया।

........उंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउंउं......... आरोही गूंगी सी बोलती रही।


इसके बाद राहुल ने आरोही को छोड़ा, “जा जल्दी से नाश्ता कर ले, ऐसे ही तू रही तो आज ही चोद डालूँगा। कमाल लग रही है।”

राहुल की बात सुनकर आरोही एकदम सन्नाटे में आ गई। अपमान तो महसूस हो रहा था। लेकिन बदन में एक सनसनाहट थी। आंखों में आंसू थे लेकिन जाँघों के बीच का जोड़ भी गीला था। आरोही को समझ नहीं आ रहा था कि क्या महसूस हो रहा है।

वह भीतर आई और अपनी ब्रॉ बंद की लेकिन कुर्ती तो वहीं थी। अब क्या करे, वहाँ जाए तो फिर राहुल ना पकड़ ले। इसी दुविधा में उसने एक टीशर्ट निकाली और पहन ली। लेकिन आरोही को नहीं पता था कि इस टी-शर्ट से उसकी मासूम शिकार वाली सुंदरता को और बढ़ा दिया था। बिखरे बाल एकदम अंगार लग रहे थे।

उसने सामान निकाला और प्लेट लेकर आई और राहुल को दी। और जैसा होना था। राहुल उसका यह रूप देखकर पागल सा होने लगा।


उसने आरोही को अपनी गोद में बिठा लिया ठीक अपने उभरे हुए लिंग पर। आरोही तो मानों कांप सी गई। यह उसके और राहुल के कपड़े बदन पर थे। लेकिन लिंग का स्पर्श वह भी  इस स्थिति में आरोही के लिए 11 हजार वोल्ट की लाइन से कम नहीं था।

राहुल ने कस के उसके दोनों स्तनों को मसला की आरोही चीख पड़ी ,,,,,,,,,आहहहहहहहहहहहहहह..........माँआआआआआआआआआआ.........दर्द हो रहा है......धीमे....

इन्हें कस के ही दबाते हैं मैडम, अभी तो यह धीमा ही है। अभी तो सबकुछ दबाऊगा और फाडू़ँगा। बोल दबवाएगी और फड़वाएगी ना?—राहुल ने बोला।


अब आरोही क्या जवाब देती वह चुप रही, तो राहुल ने आगे हाथ बढ़ाकर उसकी योनी को कसकर भींच दिया। आरोही दर्द से और एक अजीब से नशे से गनगना उठी...................................आहहहहहहहहहहहहहहहह.........................मर गई....

“चूत और चूची दबाने से कोई नहीं मरता जानेमन ऐसा होता तो सारी रंडियाँ कब की मर गई होतीं।” राहुल ने आरोही की तुलना रंडियों से कर दी। लेकिन शायद दर्द में आरोही का ध्यान नहीं गया।

”बोलो नहीं तो अभी ही सब दबा डालूँगा।” राहुल फिर से अपने दोनों हाथ उसके स्तनों पर ले गया।

“जी....” घबराते हुए जल्दी से आरोही बोली।

जी, क्या?—पूरा बोल

—जी, वही जो आपने क्या कहा।

“ठीक से नहीं बोलेगी तू,” यह कहते हुए आरोही ने अपने हाथ फिर से कस दिए। और आरोही को दर्द सहना पड़ा।

इस बार राहुल ने आरोही के स्तनों की घुंडियों को अपनी उंगलियों में कसकर दबाया। आरोही फिर चीखी......आहहहहहहहहहहह...

“हाँ दबवाऊँगी और फड़वाऊंगी” आरोही ने जल्दी से बोलकर जैसे मुक्ति पानी चाही।

गुड गर्ल—यह कहकर राहुल ने आरोही के गालों पर जोर से पप्पी ली और उसे नाश्ता करने को कहा।

मन ही डरती हुई आरोही किसी तरह से खाना खाती रही। लेकिन छाती और नीचे जाँघों के जोड़ पर दर्द की टीस महसूस हो रही थी। पर एक नशा सा भी महसूस हो रहा था। आरोही की योनि में गीलापन तेज हो गया था। आरोही भी चौंक रही थी कि यह क्यों हो रहा है।

अभी तो सब शांत ही था।
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RE: बदलाव, मजबूरी, सेक्स या जिंदगी..... - by ramlal_chalu - 12-06-2026, 08:55 PM



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