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Adultery अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play)
करीम का दुस्साहस -2
 
राज अभी रसोई की दहलीज पर ही खड़े थे और अपनी उलझन में डूबे थे, तभी कोने से करीम अपनी वही चिर-परिचित, ढीठ मुस्कान लिए बाहर निकला। उसके चेहरे पर अब भी अनीता के बदन के रस और पसीने की चमक थी, जिसे उसने बड़ी चतुराई से अपनी आस्तीन से पोंछ लिया था।
 
अनीता का कलेजा धक से रह गया।
 
करीम (राज की ओर देखते हुए, आवाज़ में बनावटी वफादारी लिए): "अरे साहब, आप कौन सी फाइल की बात कर रहे हैं? काहे परेशान हो रहे हैं? कहिए तो हम अनीता बेटी की मदद करें फाइल ढूँढने में? आखिर हमें तो पता ही रहता है कि घर की कौन सी चीज़ कहाँ 'दबी' पड़ी है।"
 
करीम ने 'मदद' और 'दबी' शब्दों पर इतना ज़ोर दिया कि अनीता के बदन में सिहरन दौड़ गई। वह अपनी जांघों के बीच उस गीलेपन को महसूस कर रही थी जो करीम की ज़ुबान की देन थी।
 
राज (थोड़ा झल्लाते हुए): "अरे वही ब्लू वाली फाइल करीम, कल रात स्टडी टेबल पर ही तो थी। पता नहीं कहाँ गायब हो गई।"
 
करीम (अनीता की आँखों में सीधे झाँकते हुए और एक टेढ़ी मुस्कान देते हुए): "साहब, आपको याद है आपने वो फाइल आखिरी बार कहाँ रखी थी? कहीं ऐसा तो नहीं कि आपने उसे कहीं 'गहराई' में रख दिया हो और अब मिल न रही हो? मालकिन... आपको तो पता होगा न? "
 
अनीता का चेहरा शर्म और खौफ से सफेद पड़ गया। उसे लगा कि करीम सबके सामने उसके चरित्र की धज्जियां उड़ा रहा है।
 
अनीता (कांपती आवाज़ में): "राज... आप... आप चलिए, मैं आती हूँ। करीम को क्या पता होगा फाइलों के बारे में। यह तो बस... बस सफ़ाई करना जानता है।"
 
करीम ने एक ठंडी हंसी।
 
करीम (अपनी लुंगी को कमर पर थोड़ा कसते हुए और चेहरे पर एक अजीब सी मासूमियत लाते हुए): "राज साहब, आप बेकार परेशान हो रहे हैं। हो सकता है कल रात काम करते-करते फाइल आपके बेडरूम के मखमली बिस्तर के नीचे या दराजों में दब गई हो। आप ऐसा कीजिए, आप स्टडी रूम के रैक देख लीजिए, तब तक मैं अनीता बेटी के साथ आपके बेडरूम में जाकर फाइल ढूँढता हूँ। दो लोग साथ होंगे तो 'गहराई' तक तलाश कर पाएंगे, क्यों मालकिन?"
 
अनीता का चेहरा डर के मारे सफेद पड़ गया। उसे साफ दिख रहा था कि करीम अब राज के ही घर में, उनके सामने ही उसके बेडरूम पर धावा बोलने की तैयारी कर रहा था।
 
अनीता (हकलाते हुए): "नहीं... राज! इसकी क्या ज़रूरत है? मैं अकेले देख लूँगी। करीम को... करीम को रसोई साफ़ करने दो।"
 
राज (अनीता के कंधे पर हाथ रखते हुए): "अरे नहीं अनीता, करीम सही कह रहा है। मुझे वो फाइल तुरंत चाहिए, खन्ना जी का फिर से फोन आ जाएगा। तुम और करीम ऊपर बेडरूम देख लो, मैं स्टडी रूम चेक करता हूँ। करीम, ज़रा ढंग से देखना।"
 
करीम (एक कुटिल मुस्कान के साथ अनीता की आँखों में झाँकते हुए): "जी साहब, आप फिक्र न करें। चलिए मालकिन... साहब का काम ज़रूरी है।"
 
राज तेज़ी से स्टडी रूम की ओर मुड़ गए। अनीता वहीं बुत बनी खड़ी रही। उसकी जांघों के बीच करीम की लार की वह चिपचिपाहट अभी भी मौजूद थी, जो उसे याद दिला रही थी कि वह इस वक्त कितनी बेबस है।
 
करीम ने अपनी गर्दन टेढ़ी की और अनीता के कान के बिल्कुल पास आकर फुसफुसाया।
 
करीम (ज़हरीली आवाज़ में): "का हुआ बेटी? पैर काहे रुक गए? राज भैया ने खुद ई 'मुझ' को अपने बेडरूम तक पहुँचने का रास्ता दिया है। अब चलिए... साटन का ई पीला गाउन उस बिस्तर पर और भी खिलेगा जहाँ राज भैया चैन की नींद सोते हैं।"
 
अनीता ने बेबसी में सीढ़ियों की ओर कदम बढ़ाए।
 
उसके साटन के गाउन के नीचे उसके सुडौल कूल्हे डर और उत्तेजना के मारे थरथरा रहे थे। उसे महसूस हो रहा था कि करीम सीढ़ियाँ चढ़ते वक्त ठीक उसके पीछे है, और उसकी भूखी नज़रें उसके उन हिलते हुए उभारों को कच्चा चबा जाने के लिए बेताब हैं।
 
बेडरूम का भारी सागवान का दरवाज़ा एक मद्धम सी चरमराहट के साथ बंद हुआ। राज नीचे स्टडी रूम में फाइलों के अंबार में उलझे हुए थे, और ऊपर, अनीता और करीम अकेले थे।
 
अनीता जल्दी से अलमारी के पास खड़ी होकर कांपते हाथों से कपड़े इधर-उधर कर रही थी, जैसे वाकई कुछ ढूँढ रही हो। वह अपने और करीम के बीच दूरी बनाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन करीम दबे पांव उसके ठीक पीछे आकर खड़ा हो गया।
 
करीम (गहरी और भारी आवाज़ में): "का हुआ मालकिन? फाइल अलमारी के कपड़ों में नहीं, इस मखमली बिस्तर की सिलवटों में छिपी है। और उसे ढूँढने के लिए नज़र नहीं... जिस्म की गर्मी चाहिए।"
 
अनीता (मुड़े बिना, फुसफुसाते हुए): "करीम... खुदा का खौफ करो। राज बस नीचे ही हैं। अगर वो ऊपर आ गए तो तुम सोच भी नहीं सकते कि क्या होगा। तुम... तुम वापस चले जाओ।"
 
करीम (अनीता के कंधों पर अपने भारी हाथ टिकाते हुए): "राज भैया तो स्टडी रूम में खाक छान रहे हैं बेटी। उन्हें क्या पता कि उनके बेडरूम के इस बंद दरवाज़े के पीछे उनकी मालकिन का ई साटन का पीला गाउन कइसे इस काले साये की उंगलियों में फँसा है।"
 
करीम ने अपनी पकड़ मज़बूत की और अनीता को झटके से अपनी ओर घुमाया। अनीता की पीठ अलमारी से सट गई। करीम ने अपने घुटने से अनीता की जांघों को थोड़ा और फैला दिया।
 
अनीता (हाँफते हुए): "तुम... तुम इतने निडर कैसे हो गए? क्या तुम्हें ज़रा भी डर नहीं लगता?"
 
करीम (एक मुस्कान के साथ): "डर तो उन्हें लगता है मालकिन जिनके पास खोने को कुछ हो। हमारे पास तो बस ई 10 इंच का लंड है, जो आपकी इन गोरी गहराइयों को चीरने के लिए बेताब है।" यह कहते हुए उसने अपना लंड कपड़ों के ऊपर से ही उसकी योनि के ठीक बीचों-बीच दबा दिया।"
 
अनीता के मुँह से एक सिसकी निकल गई, "करीम पागल मत बनो, तुम हद से आगे बढ़ रहे हो।"
 
उसकी आवाज़ में जहाँ एक तरफ़ डर था, वहीं दूसरी तरफ़ वह कमज़ोर पड़ती जा रही थी। करीम के भारी और सख्त वजूद का दबाव उसकी कोमल देह पर ऐसा पड़ रहा था कि उसके कदम डगमगा रहे थे।
 
करीम ने अपनी पकड़ और मज़बूत करते हुए अनीता के कान के पास फुसफुसाया, "मालकिन, हदें तो अभी टूटनी हैं।"
 
करीम ने अपने हाथ साटन के गाउन के ऊपर से ही अनीता के उन पुष्ट स्तनों पर जमा दिए। उसने उन्हें इतनी बेरहमी से भींचा कि अनीता के मुँह से एक सिसकी निकल गई।
 
अनीता (सिसकते हुए): "उह्ह... करीम... नहीं... राज सुन लेंगे..."
 
करीम (अनीता के होंठों के बिल्कुल करीब): "सुनने दीजिए... उन्हें भी तो पता चले कि उनकी मालकिन का ई गोरा खजाना किस 'काले' जादू के नीचे पिघल रहा है। आज इसी बिस्तर पर, जहाँ आप राज भैया के साथ सोती हैं, वहाँ ई करीम अपनी मर्दानगी की मुहर लगाएगा।"
 
करीम ने अपनी कमर का ज़ोर लगाया और अपना सख्त और तना हुआ १० इंच का लंड अनीता की उस गीली और थरथराती हुई चूत पर, साटन के गाउन के ऊपर से ही रगड़ना शुरू किया।
 
अनीता (आँखें मूँदते हुए): "तुम... तुम एक जानवर हो करीम... एक नीच जानवर..."
 
करीम (हँसते हुए): "जी मालकिन... और आज ई जानवर अपनी मालकिन को फाड़कर रख देगा। चलिए, ज़रा राज भैया के इस बिस्तर की 'मुलायमियत' चखते हैं।"
 
करीम ने अनीता का हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर की ओर धकेल दिया।
 
करीम ने अनीता को उस विशाल मखमली बिस्तर पर गिरा दिया था, जहाँ कुछ घंटों पहले वह राज के साथ सोई थी।
 
करीम के काले और खुरदरे हाथ अनीता के पीले साटन गाउन की डोरी पर थे। वह बहुत ही धीमी और ज़हरीली रफ़्तार से उस रेशमी गाँठ को खोल रहा था।
 
अनीता (बदहवासी में हाथ पैर मारते हुए): "करीम... नहीं! छोड़ो मुझे... राज बस नीचे ही हैं। ये नीच हरकत बंद करो!"
 
करीम (एक मुस्कान के साथ): "चुप रहिए बेटी... राज भैया नीचे कागज़ों में खोए हैं, और यहाँ हम इस साटन के नीचे छिपी असली 'फाइल' को खोलने जा रहे हैं। ई गोरा बदन आज इस काले साये की आग में झुलसेगा।"
 
तभी, बिस्तर के बगल वाली मेज़ पर रखा अनीता का मोबाइल ज़ोर-ज़ोर से बज उठा। स्क्रीन पर 'राज' का नाम चमक रहा था। अनीता का चेहरा डर के मारे सफ़ेद पड़ गया, लेकिन करीम ने ज़रा भी परवाह नहीं की।
 
उसने झपटकर फ़ोन उठाया और अनीता के हाथ में थमा दिया, जबकि उसका दूसरा हाथ अनीता के गाउन को उसके कंधों से नीचे सरका रहा था।
 
करीम (फुसफुसाते हुए, अनीता के कान के पास): "उठाइए बेटी... राज भैया पूछ रहे होंगे। बात कीजिए उनसे, जबकि हम आपकी इस मलाई जैसी देह को चखते हैं।"
 
अनीता ने काँपते हाथों से फ़ोन कान से लगाया।
 
राज (फ़ोन पर, थोड़ा परेशान): "अनीता? क्या हुआ? कुछ मिला? मुझे वो ब्लू फाइल कहीं नहीं दिख रही। तुम लोग वहाँ क्या कर रहे हो?"
 
अनीता (अपनी आवाज़ स्थिर करने की कोशिश करते हुए, जबकि करीम उसके गाउन के अंदर हाथ डालकर उसके नंगे स्तनों को भींच रहा था): "अह्ह... राज... नहीं... अभी तक तो कुछ नहीं मिला। हम... हम अलमारी के पीछे और बेड के नीचे देख रहे हैं। करीम भी... यहाँ मेरी मदद कर रहा है।"
 
उसी पल, करीम ने गाउन को पूरी तरह कमर तक उतार दिया। अनीता के पुष्ट और नंगे स्तन अब पूरी तरह बेपर्दा थे। करीम ने अपना मुँह झुकाया और एक गुलाबी चोटी को अपने दाँतों के बीच भरकर हल्का सा काट लिया।
 
अनीता (मुँह से एक सिसकी निकलते-निकलते बची): "उफ़... राज... मैं... मैं ढूँढ रही हूँ। थोड़ा वक़्त लगेगा। आप... आप स्टडी रूम में ही देखिए।"
 
राज (फ़ोन पर): "ठीक है, पर जल्दी करो। मुझे निकलना है।"
 
जैसे ही अनीता फ़ोन बंद करने लगी, करीम ने उसे म्यूट करने को कहा। करीम ने उससे कहा, "राज को कहो फ़ोन चालू रखे ताकि वह हमें बता सके कि फ़ाइल मिली कि नहीं; अगर हमें मिलेगी तो हम बता देंगे।" करीम इस तरकीब का इस्तेमाल इसलिए करना चाहता था ताकि उसे राज की लोकेशन का पता चल सके।
 
अनीता ने थरथराते हुए राज से कहा, "राज, तुम फोन चालू ही रखो और मुझे बताते रहो कि फाइल कहाँ मिल सकती है, ताकि जैसे ही मुझे मिले मैं तुम्हें फौरन खबर कर सकूँ।"
 
वह पकड़े जाने के डर से इस कदर घबराई हुई थी कि उसे अहसास भी नहीं हुआ कि वह अनजाने में करीम के हर इशारे पर नाच रही है।
 
अनीता ने कहा, "तुम तब तक नीचे भी तलाश जारी रखो।" वह फ़ोन पर राज को निर्देश दे रही थी, जबकि उसका अपना शरीर करीम की नज़दीकी के कारण वासना से भीग रहा था।
 
उसकी आवाज़ में घबराहट साफ़ थी, लेकिन वह करीम के कहे अनुसार ही बोल रही थी।
 
करीम अब पूरी तरह पागल हो चुका था। उसने अपना चेहरा अनीता के गोरे नंगे पेट और गहरी नाभि पर गाड़ दिया और उसे पागलों की तरह चाटने लगा। वह उसे ऐसे चाट रहा था जैसे कोई सदियों का भूखा हो। हर चाट के साथ अनीता का शरीर कांप रहा था और उसके नंगे चूचे उछल रहे थे।
 
अनीता का आधा ध्यान करीम की हरकतों पर था और आधा फोन पर अपने पति की आवाज़ सुनने पर लगा था।
 
करीम (हवस भरी आवाज़ में): "देखा मालकिन? राज भैया को लगा कि आप फाइल ढूँढ रही हैं, जबकि यहाँ ई काला कुत्ता आपकी दूधिया जांघों के बीच जन्नत ढूँढ रहा है। ई जो साटन की फिसलन है ना, उससे ज़्यादा फिसलन तो आपकी इस भीगी हुई चूत में है।"
 
करीम ने साटन के गाउन को एक झटके में अनीता के बदन से अलग कर दिया। अनीता अब राज के बिस्तर पर सिर्फ अपनी पीली रेशमी पैंटी में नग्न पड़ी थी, जो पूरी गीली हो चुकी थी और करीम का 10 इंच का लंड उसकी जांघों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए बेताब था।
 
बेडरूम के बंद दरवाज़े के पीछे का मंज़र अब पूरी तरह से करीम के कब्ज़े में था।
 
राज नीचे स्टडी रूम में फाइलों के अंबार में उलझे हुए थे, और ऊपर उनके ही बिस्तर पर उनकी पत्नी एक काले साये के नीचे बेबस और नग्न पड़ी थी।
 
अब अनीता राज के बिस्तर पर सिर्फ अपनी पीली रेशमी पैंटी में थी, उसके पुष्ट और गोरे स्तन  खिड़की से आती रोशनी में और भी उभर कर दिख रहे थे।
 
करीम ने अनीता का चेहरा अपनी ओर घुमाया और उसकी आँखों में झांकते हुए बहुत ही ज़हरीली आवाज़ में फुसफुसाया।
 
करीम (हवस भरी भारी आवाज़ में): "देखा बेटी? राज भैया नीचे फाइलों में माथा मार रहे हैं और आप यहाँ हमारे इस काले फौलाद के नीचे पिघल रही हैं। फोन काटिए मत... उसे खुला रखिए ताकि आपको पता चलता रहे कि राज मालिक कब ऊपर आ रहे हैं।"
 
करीम ने अपनी बड़ी और खुरदरी उंगलियां अनीता की पीली पैंटी के इलास्टिक में फँसाईं और उसे धीरे-धीरे नीचे की ओर छीलना शुरू किया।
 
अनीता (कांपते हुए और हाँफते हुए): "करीम... बस करो... राज किसी भी पल ऊपर आ जाएंगे। वो आवाज़ देंगे... मैं... मैं जवाब नहीं दे पाऊंगी।"
 
करीम (एक क्रूर मुस्कान के साथ, अनीता के कान के पास): "जवाब तो देना ही पड़ेगा मालकिन। पर याद रखिएगा... अपनी इन सिसकियों को रोककर रखिए। अगर एक भी 'आह' बाहर राज भैया के कानों तक पहुँची, तो उन्हें पता चल जाएगा कि उनकी मेमसाहब के साथ इस बिस्तर पर कोई और भी 'फाइल' ढूँढ रहा है।"
 
करीम ने अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी अनीता की गोरी और बेदाग जांघों को अपने मज़बूत हाथों से फैला दिया। उसने अपना १० इंच का काला और सख्त लंड अनीता की उस गीली और थरथराती हुई चूत पर रगड़ना शुरू किया।
 
अनीता (सिसकते हुए, तकिये को अपनी मुट्ठी में भींचते हुए): "उफ़... करीम... तुम... तुम पागल हो गए हो... राज... राज..."
 
करीम (नीचे से ऊपर की ओर देखते हुए): "चुप! आवाज़ मत निकालिए। बस सुनिए... नीचे राज भैया की आवाज़ सुनिए। वो सीढ़ियों की ओर बढ़ेंगे और यहाँ ई काला कुत्ता आपकी इस रईस मलाई को चाटेगा। अगर आपने शोर मचाया, तो राज भैया को ई मंज़र देखना पड़ेगा कि उनकी मालकिन कइसे इस नौकर की जांघों पर झूल रही हैं।"
 
करीम ने अपना चेहरा झुकाया और अनीता की उस गुलाबी कली पर अपनी ज़ुबान का पहला प्रहार किया। अनीता ने अपना मुँह तकिये में दबा लिया ताकि उसकी सिसकी बाहर न जा सके।
 
राज नीचे फोन पर चिल्लाया, "अनीता! क्या हुआ? ब्लू फाइल मिली या नहीं? क्या मैं ऊपर आऊँ?"
 
अनीता का पूरा शरीर थरथरा उठा। करीम ने अपनी भारी और काली जांघों से अनीता की दूधिया सफेद जांघों को पूरी तरह फैला दिया।
 
करीम ने अपना १० इंच का काला और फौलादी लंड अनीता की उस गीली और थरथराती हुई चूत के मुहाने पर टिकाया।
 
करीम (दांत पीसते हुए, दबी और वहशी आवाज़ में): "बात कीजिए राज भैया से... रुकिए मत। उन्हें लगना चाहिए कि आप अभी भी अलमारी खंगाल रही हैं। और याद रखिएगा, अगर एक भी सिसकी गले से बाहर निकली, तो सारा राज खुल जाएगा।"
 
अनीता ने उसके निर्देशों का पालन किया और कहा, "नहीं, अभी नहीं मिली।" वह अपनी आवाज़ को स्थिर रखने की पूरी कोशिश कर रही थी, जबकि उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
 
करीम ने अपनी कमर का एक ज़बरदस्त झटका दिया। १० इंच का वह मोटा और सख्त अंग एक ही प्रहार में अनीता की गुलाबी गहराइयों को चीरता हुआ अंदर तक धँस गया।
 
करीम के उस भीमकाय प्रहार ने अनीता के अस्तित्व को हिलाकर रख दिया था। जैसे ही वह १० इंच का फौलादी अंग उसकी देह की गहराइयों में समाया, अनीता को लगा कि उसके भीतर बिजली का कोई नंगा तार छू गया हो। रसोई के स्लैब पर जिस तरह करीम ने उसे पिछले आधे घंटे से अपनी उंगलियों और जुबान की कलाकारी से तपाया था, उसकी देह किसी बारूद के ढेर की तरह दहक रही थी।
 
करीम के पहले ही धक्के ने उस बारूद में चिंगारी लगा दी। अनीता ने आज तक ऐसा अनुभव नहीं किया था—मात्र एक प्रहार और उसकी देह चरमसुख की उन ऊँचाइयों से जा टकराई जहाँ पहुँचने में उसे घंटों लग जाते थे। उसकी जांघें कांपने लगीं और योनि की दीवारें करीम के उस मोटे अंग को पागलों की तरह भींचने लगीं।
 
करीम (एक गहरी और भारी आवाज़ में, जिसमें एक अजीब सा देहाती रौब था):
"अरे मेमसाब... अभी तो बस दहलीज पार करी है। अभी से पिघल गईं का? हम त सोचे थे कि आप शहर की मेमसाब हैं, बड़ी कड़क होंगी... पर आप तो एकदम मलाई निकलीं।"
 
अनीता (आँखें फटी की फटी रह गईं, मुँह से एक चीख निकलने ही वाली थी जिसे उसने अपने होंठों को काटकर रोक लिया): "अह्ह्ह... उफ़... रा... राज... हाँ... मैं... मैं देख रही हूँ।"
 
फोन पर राज की आवाज़ फिर आई, "अनीता, तुम्हारी आवाज़ इतनी भारी क्यों लग रही है? सब ठीक तो है?"
 
उसकी  बात सुनकर अनीता के हाथ-पांव ठंडे पड़ गए।
 
उधर करीम ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी जीभ उसकी मम्मे की नोक के ऊपर ही फेर दी, जिससे अनीता की आँखों के आगे अंधेरा छा गया। नीचे करीम का लंड एक रिदम के साथ अंदर-बाहर हो रहा था, वह अनीता की योनि को चीर रहा था , और ऊपर से पकड़े जाने का डर अनीता को सता रहा था।
 
उसने अपना गला साफ करते हुए किसी तरह जवाब दिया, "हाँ राज... सब ठीक है, बस अलमारी के भारी डिब्बे हटाने की वजह से साँस फूल रही है। तुम नीचे देखो, मैं यहाँ ढूँढ रही हूँ।"
 
करीम ने अब अपनी कमर को एक लय में चलाना शुरू किया। हर धक्के के साथ वह १० इंच का लोहा अनीता की कोख को छू रहा था।
 
अनीता (साँसें उखड़ने लगी थीं, पर उसे बोलना था): "आप... आप बस दो मिनट रुकिए... मैं... मैं बस नीचे... आ ही रही हूँ।"
 
करीम को अनीता की इस बेबसी में एक क्रूर आनंद मिल रहा था। उसने अपने हाथों से अनीता के नंगे और पुष्ट स्तनों को बेरहमी से भींचा और अपने धक्कों की रफ्तार और तेज़ कर दी।
 
करीम (अनीता के कान के पास, हवस भरी फुसफुसाहट में): "शाबाश बेटी... ऐसे ही बात करती रहिए। राज भैया को क्या पता कि जिस बिस्तर पर वो आपको सहलाते थे, आज वहां ई काला कुत्ता आपकी चूलें हिला रहा है। देखिए तो, कइसे आपकी ई रईस योनि हमारे इस काले लंड को जकड़ रही है।"
 
अनीता ने बिस्तर की चादर को अपनी मुट्टियों में इतनी ज़ोर से भींच लिया कि उसके नाखून सफेद पड़ गए।
 
हर धक्के के साथ अनीता का बदन बिस्तर पर उछल रहा था, लेकिन उसे अपनी आवाज़ को सामान्य रखना था। वह नफरत और हवस के उस दोराहे पर थी जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था।
 
फोन पर राज की आवाज़ आ रही थी, वह नीचे फ़ाइल ढूँढ रहा था। हर आहट अनीता के दिल में खौफ का एक नया खंजर उतार रही थी। उसे लग रहा था कि राज किसी भी पल सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर आ सकता है, जबकि करीम का वहशीपन हर बीतते पल के साथ बढ़ता ही जा रहा था।
 
करीम का १० इंच का काला फौलाद अब अनीता की गहराइयों में किसी पागल मशीन की तरह चल रहा था। हर धक्के के साथ अनीता का गोरा और सुडौल बदन राज के मखमली बिस्तर पर ऊपर-नीचे उछल रहा था।
 
राज (फ़ोन पे): "अनीता? क्या हुआ, फाइल मिली?"
 
अनीता के गले में जैसे शब्द ही फंस गए थे। नीचे करीम का वहशी प्रहार उसे चरम सीमा तक धकेल रहा था, जबकि कान पर लगा फोन उसे अपनी वफादारी और राज के भरोसे की याद दिला रहा था। उसने अपने होंठों को दांतों तले दबाया ताकि कोई आह न निकल जाए"
 
करीम ने अपने मज़बूत हाथों से अनीता के नंगे और पुष्ट स्तनों को भींच लिया और अपनी कमर की रफ़्तार और तेज़ कर दी। हर धक्के के साथ अनीता का शरीर बिस्तर पर उछल रहा था, लेकिन वह फ़ोन पर राज की मौजूदगी के कारण अपनी चीखें दबाने पर मजबूर थी। पसीने से तरबतर उसकी देह करीम के वहशीपन और पकड़े जाने के डर के बीच बुरी तरह पिस रही थी।
 
करीम (अनीता के कान में फुसफुसाते हुए, पसीने से तर-बतर आवाज़ में): "बोलिए बेटी... जवाब दीजिए अपने 'मालिक' को। कहिए कि आप अभी बहुत 'गहराई' में ढूँढ रही हैं। और याद रखिएगा, सिसकी बाहर गई तो राज भैया को आपकी ई नंगी सच्चाई देखनी पड़ेगी।"
 
अनीता (कांपती और उखड़ी हुई साँसों के साथ, मुँह से सिसकी दबाते हुए): "रा... राज... हाँ... बस एक मिनट। आप... आप नीचे हॉल में बैठिए, मैं... मैं आती हूँ। हमें फ़ाइल ऊपर नहीं मिली।"
 
राज (फ़ोन पे): "अनीता, तुम्हारी आवाज़ इतनी अजीब क्यों आ रही है? तुम हाँफ क्यों रही हो?"
 
राज के इस सवाल ने अनीता के रोंगटे खड़े कर दिए। करीम ने अब अपनी दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। उसने अनीता की दोनों गोरी जांघों को अपने कंधों पर रख लिया और अपना १० इंच का लंड पूरी ताक़त से अनीता की कोख तक धँसा दिया।
 
जिससे अनीता की आँखें पथरा गईं। उसने अपने हाथ से अपना ही मुँह जोर से भींच लिया ताकि उसकी चीख फ़ोन में न चली जाए। पसीने की बूंदें उसके माथे से टपक कर तकिये पर गिर रही थीं, और वह किसी तरह अपनी आवाज़ बटोरते हुए लड़खड़ाकर बोली, "वो... वो कुछ नहीं राज, अलमारी का ऊपर वाला दराज बहुत जाम था... उसे खींचने में ज़ोर लग गया, बस इसीलिए।"
 
करीम (मन ही मन, एक वहशी जीत के साथ): "राज भैया... आप नीचे खड़े रहिए। आपकी ई रईस मलाई आज इस काले नौकर के लंड पर झूल रही है। आपकी बीवी का दराज बहुत जाम था, आज पूरा ज़ोर लगा के खोल दिया है।"
 
अनीता का संयम अब जवाब दे रहा था। करीम के लंड की मोटाई और लंबाई उसकी योनि की चूलें हिला रही थी। उसे महसूस हो रहा था कि करीम अब अपने चरम पर पहुँच चुका है। डर और सेक्स के इस जानलेवा मेल की वजह से वह खुद भी दो बार झड़ चुकी थी। करीम के बदन की नसें तन गई थीं और उसकी पकड़ अनीता के भारी कूल्हों पर और भी खूँखार हो गई थी।
 
वह अब किसी जानवर की तरह अनीता के जिस्म को रौंद रहा था। अनीता ने फोन को कसकर पकड़ा हुआ था, जबकि उसका दूसरा हाथ चादर को बुरी तरह मरोड़ रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इस वहशी सुख का आनंद ले रही है या अपने पति के साथ हो रहे इस भयानक धोखे के बोझ तले दब रही है।
 
करीम (एक गहरी और जंगली सिसकी के साथ): "आह्ह... बेटी... ई रईसी का स्वाद... अब संभालिए ई काले करीम का तोहफा!"
 
करीम ने एक आखिरी और जानलेवा धक्का लगाया और अपना सारा गर्म और गाढ़ा वीर्य अनीता की कोख के सबसे गहरे कोने में उड़ेल दिया। अनीता का पूरा शरीर बिजली के झटके की तरह थरथरा उठा। उसने अपनी मुट्ठी अपने मुँह में इतनी ज़ोर से काट ली कि खून निकल आया, ताकि उसकी चीख फोन के ज़रिए राज तक न पहुँचे।
 
करीम का भारी शरीर अनीता के ऊपर ही ढह गया, उसकी तेज़ साँसें अनीता की गर्दन पर आग की तरह लग रही थीं। अनीता की आँखों से आँसू बहकर तकिये को भिगो रहे थे, जबकि फोन अब भी उसके कान के पास था, जहाँ से राज की बेचैन आवाज़ अब भी आ रही थी। वह अपनी ज़िदगी के सबसे बड़े गुनाह और सबसे गहरे डर के बीच सुन्न पड़ी थी।
 
करीम का गर्म रस अनीता के भीतर भर रहा था। अनीता नंगी बेड पे निढाल हो के लेटी हुई थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह रोए या चिल्लाए करीम पे।
 
उसका पूरा शरीर पसीने और थकान से चूर था, लेकिन मन में ग्लानि और डर का बवंडर उठा हुआ था। करीम का भारी वजूद अभी भी उसके ऊपर था, और उसकी धड़कनें अनीता की छाती से टकरा रही थीं। वह बस शून्य में ताकती रह गई, जबकि उसका हाथ अब भी उस फोन को पकड़े हुए था जो उसके और राज के बीच की इकलौती और सबसे कमज़ोर कड़ी बची थी।
 
करीम धीरे से अनीता के ऊपर से हटा। उसकी आँखों में एक ज़हरीला गुरूर था। उसने फर्श से अनीता का पीला साटन गाउन उठाया और उसके चेहरे पर फेंक दिया।
 
बेडरूम के भीतर करीम ने अपना खेल मुकम्मल कर लिया था। अनीता के भीतर अभी भी वह गर्म चिपचिपाहट महसूस हो रही थी, अनीता बदहवासी में अपना पीला साटन गाउन संभाल रही थी।
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RE: अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play) - by Deepak.kapoor - 19-04-2026, 08:40 AM



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