5 hours ago
पार्ट -17 लास्ट
गतान्क से आगे…………………….
10 दिन बाद
मेनका की वसीयत पढ़ी जा रही थी। राजासाहब की मौत के बाद सारी जयदाद की वो अकेली मालकिन थी और सभी लोगो को बहुत इच्छा थी ये जानने कि उसने अपनी वसीयत मे क्या लिखा था।
मेनका ने सारी जयदाद दान कर दी थी-अनाथ बच्चों,विधवा उद्धार और धार्मिक काम और ऐसे ही काई चीज़ों के लिए। उसके माता-पिता बड़ी मुश्किल से अपने दुख को झेल पा रहे थे पर अब शायद वसीयत पढ़े जाने के बाद उन्होने ने भी इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया था कि उनकी बेटी अब इस दुनिया मे नही है।
सेशाद्री साहब भी अब शांत थे पर उनकी आखों के आगे अभी भी वो दशहरा की काली रात घूम जाती थी। जब पोलीस और फायर ब्रिगेड वाले पहुँचे तब तक महल का एक बड़ा हिस्सा जल चुका था। पोलीस को अंदर से एक औरत की बुरी तरह जली हुई लाश मिली थी जिसे मेनका के पिता ने शिनाख्त करके अपनी बेटी की बताया। बाहर जब्बार भी मरा पड़ा था।
छान-बीन के बात पोलीस को जब पता चला कि आग पेट्रोल से लगाई गयी थी तो उनका ये शक़ पुख़्ता हो गया कि ये जब्बार की हरकत थी। पोलीस ने सेशाद्री साहब से भी पूछताछ की और अंत मे जिस नतीजे पे पहुँची वो ये था:
जब्बार राजासाहब से बेइंतहा नफ़रत करता था और सभी जानते थे कि उनकी मिल्स को हड़पने के लिए वो पागल था। राजासाहब की मौत के बाद जब मेनका ने मिल्स को सपरू साहब को बेचने का फ़ैसला किया तो उसने मेनका को धमका कर उसे ऐसा करने से रोकने की कोशिश की पर जब मेनका नही मानी तो वो गुस्से मे पागल हो के दशहरे की रात महल पहुँचा और वहा उसने जो भयानक खेल खेला उसमे उसकी खुद की भी जान चली गयी। मैत्रीपटेल की रचना है.
राजकुल की कहानी यही ख़तम हो गयी और लोगो के लिए राजपरिवार अब बस उनके दान किए गये पैसों से बनी समाज सेवा के कामो और इमारतो पे लिखा नाम रह गया।
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वहा बहमास में.....
एरपोर्ट पे मियामी से आई फ्लाइट से उतरे मुसाफिर सेक्यूरिटी चॅनेल से बाहर निकल रहे थे। ज़्यादातर अमेरिकन थे या फिर बेहेमीयन, एक लड़की के सिवा। वो कातिल फिगर वाली लड़की एक पीले रंग की घुटनो तक की फ्लॉरल ड्रेस पहने थी। कंधो पे डोरियाँ स्ट्रॅप्स का काम कर रही थी और ड्रेस के गले मे से उसके बड़े क्लीवेज का हिस्सा एरपोर्ट पे मौजूद मर्दों की निगाहों को अपनी तरफ ललचा रहा था और औरतों को जला रहा था।
"मिस.अनितासिंग?" कस्टम ऑफीसर ने उसके पासपोर्ट पे लगे फोटो से उसका चेहरा मिलाया। मैत्री द्वारा रचित कहानी पढ़ रहे है
"यस!"
"वेलकम तो बहामास, मॅ'म,एंजाय योर स्टे।"उसने पासपोर्ट उसे वापस थमा दिया और एक आखरी भर नज़र भर कर उसके सीने की दरार का दीदार किया।
"थॅंक यू।"
बाहर निकलते ही उसने देखा कि एक लंबा-चौड़ा नीग्रो उसके नाम का बोर्ड लेकर खड़ा है,वो उसके पास जा पहुँची और थोड़ी ही देर बाद एक कार मे पीछे की सीट मे बैठी अपनी मंज़िल की तरफ रवाना हो गयी। थोड़ी देर बाद कार ने उसे जेटी पे उतार दिया।
"धीस बोट विल टेक यू टू योर डेस्टिनेशन,मॅ'म।" उस नीग्रो ने उसका सारा समान एक बड़ी सी योच मे चढ़ा कर उस से कहा।
"ओके,थॅंक्स।" मैत्री की प्रस्तुति और रचित.
शाम ढल रही थी और आसमान सिंदूरी हो गया था। वो बस अब जल्द से जल्द अपनी मंज़िल तक पहुँचना चाहती थी। 45 मिनिट बाद याच एक आइलॅंड पे रुकी। उतरते ही एक और नीग्रो ने उसका समान लिया,
"वेलकम,मॅ'म।मिस्टर.विजयसिंग ईज़ वेटिंग फॉर यू इन ध विला।" उसने एक बड़े-से शानदार घर की तरफ इशारा किया। वो भागती हुई उस घर तक पहुँची और गेट मे दाखिल हो गयी। चारो तरफ तरह-तरह के पौधे लगे थे,एक बड़ा सा स्विमिंग पूल भी था। वो उस नीग्रो के पीछे चलती हुई विला के अंदर दाखिल हो गयी। सब कुछ बहुत शानदार था और वैसा ही जैसा उसे पसंद था।
वो नीग्रो उसका समान ले पता नही विला मे कहा गायब हो गया कि तभी 2 मज़बूत बाज़ुओं ने उसे पीछे से अपनी गिरफ़्त मे जाकड़ लिया। वो घूम कर उस इंसान के सामने हो गयी और उस से लिपट गयी। दोनो एक दूसरे से चिपके एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे।
"ओह....मेनका....आख़िरकार।"
"हाँ,यश आख़िरकार हम फिर मिल गये।" वो अनितासिंग और कोई नही बल्कि अपनी मेनका थी और ये विजयसिंग है राजासाहब।
दोनो एक दूसरे को बाहों मे भरे वहा बड़े से सोफे पे बैठ गये और फिर से एक दूसरे के होठ का रस पीने लगे। मैत्री की प्रस्तुति.
जब अलग हुए तो मेनका ने सवाल किया, "ये सब तुमने कैसे सोचा यश?”
"सब बताते हैं,मेरी जान।" राजासाहब ने उसे अपनी गोद मे उठा लिया और एक बेडरूम मे ले जाकर बिस्तर पे लिटा दिया। दरवाज़ा बंद कर वो घूमे तो मेनका ने उन्हे नज़र भर के देखा। वो एक टी-शर्ट और हाफ-पॅंट मे थे। दाढ़ी-मूँछछ साफ करा ली थी और बहामा के सूरज ने उनके रंग को काँसे जैसा निखार दिया था। उसकी चूत गीली होने लगी। कितने दीनो बाद वो अपने प्रेमी के साथ अकेली थी पर मन मे कई सवाल घूम रहे थे और उसे उनका जवाब भी चाहिए था।
bane rahiye dosto................
गतान्क से आगे…………………….
10 दिन बाद
मेनका की वसीयत पढ़ी जा रही थी। राजासाहब की मौत के बाद सारी जयदाद की वो अकेली मालकिन थी और सभी लोगो को बहुत इच्छा थी ये जानने कि उसने अपनी वसीयत मे क्या लिखा था।
मेनका ने सारी जयदाद दान कर दी थी-अनाथ बच्चों,विधवा उद्धार और धार्मिक काम और ऐसे ही काई चीज़ों के लिए। उसके माता-पिता बड़ी मुश्किल से अपने दुख को झेल पा रहे थे पर अब शायद वसीयत पढ़े जाने के बाद उन्होने ने भी इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया था कि उनकी बेटी अब इस दुनिया मे नही है।
सेशाद्री साहब भी अब शांत थे पर उनकी आखों के आगे अभी भी वो दशहरा की काली रात घूम जाती थी। जब पोलीस और फायर ब्रिगेड वाले पहुँचे तब तक महल का एक बड़ा हिस्सा जल चुका था। पोलीस को अंदर से एक औरत की बुरी तरह जली हुई लाश मिली थी जिसे मेनका के पिता ने शिनाख्त करके अपनी बेटी की बताया। बाहर जब्बार भी मरा पड़ा था।
छान-बीन के बात पोलीस को जब पता चला कि आग पेट्रोल से लगाई गयी थी तो उनका ये शक़ पुख़्ता हो गया कि ये जब्बार की हरकत थी। पोलीस ने सेशाद्री साहब से भी पूछताछ की और अंत मे जिस नतीजे पे पहुँची वो ये था:
जब्बार राजासाहब से बेइंतहा नफ़रत करता था और सभी जानते थे कि उनकी मिल्स को हड़पने के लिए वो पागल था। राजासाहब की मौत के बाद जब मेनका ने मिल्स को सपरू साहब को बेचने का फ़ैसला किया तो उसने मेनका को धमका कर उसे ऐसा करने से रोकने की कोशिश की पर जब मेनका नही मानी तो वो गुस्से मे पागल हो के दशहरे की रात महल पहुँचा और वहा उसने जो भयानक खेल खेला उसमे उसकी खुद की भी जान चली गयी। मैत्रीपटेल की रचना है.
राजकुल की कहानी यही ख़तम हो गयी और लोगो के लिए राजपरिवार अब बस उनके दान किए गये पैसों से बनी समाज सेवा के कामो और इमारतो पे लिखा नाम रह गया।
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वहा बहमास में.....
एरपोर्ट पे मियामी से आई फ्लाइट से उतरे मुसाफिर सेक्यूरिटी चॅनेल से बाहर निकल रहे थे। ज़्यादातर अमेरिकन थे या फिर बेहेमीयन, एक लड़की के सिवा। वो कातिल फिगर वाली लड़की एक पीले रंग की घुटनो तक की फ्लॉरल ड्रेस पहने थी। कंधो पे डोरियाँ स्ट्रॅप्स का काम कर रही थी और ड्रेस के गले मे से उसके बड़े क्लीवेज का हिस्सा एरपोर्ट पे मौजूद मर्दों की निगाहों को अपनी तरफ ललचा रहा था और औरतों को जला रहा था।
"मिस.अनितासिंग?" कस्टम ऑफीसर ने उसके पासपोर्ट पे लगे फोटो से उसका चेहरा मिलाया। मैत्री द्वारा रचित कहानी पढ़ रहे है
"यस!"
"वेलकम तो बहामास, मॅ'म,एंजाय योर स्टे।"उसने पासपोर्ट उसे वापस थमा दिया और एक आखरी भर नज़र भर कर उसके सीने की दरार का दीदार किया।
"थॅंक यू।"
बाहर निकलते ही उसने देखा कि एक लंबा-चौड़ा नीग्रो उसके नाम का बोर्ड लेकर खड़ा है,वो उसके पास जा पहुँची और थोड़ी ही देर बाद एक कार मे पीछे की सीट मे बैठी अपनी मंज़िल की तरफ रवाना हो गयी। थोड़ी देर बाद कार ने उसे जेटी पे उतार दिया।
"धीस बोट विल टेक यू टू योर डेस्टिनेशन,मॅ'म।" उस नीग्रो ने उसका सारा समान एक बड़ी सी योच मे चढ़ा कर उस से कहा।
"ओके,थॅंक्स।" मैत्री की प्रस्तुति और रचित.
शाम ढल रही थी और आसमान सिंदूरी हो गया था। वो बस अब जल्द से जल्द अपनी मंज़िल तक पहुँचना चाहती थी। 45 मिनिट बाद याच एक आइलॅंड पे रुकी। उतरते ही एक और नीग्रो ने उसका समान लिया,
"वेलकम,मॅ'म।मिस्टर.विजयसिंग ईज़ वेटिंग फॉर यू इन ध विला।" उसने एक बड़े-से शानदार घर की तरफ इशारा किया। वो भागती हुई उस घर तक पहुँची और गेट मे दाखिल हो गयी। चारो तरफ तरह-तरह के पौधे लगे थे,एक बड़ा सा स्विमिंग पूल भी था। वो उस नीग्रो के पीछे चलती हुई विला के अंदर दाखिल हो गयी। सब कुछ बहुत शानदार था और वैसा ही जैसा उसे पसंद था।
वो नीग्रो उसका समान ले पता नही विला मे कहा गायब हो गया कि तभी 2 मज़बूत बाज़ुओं ने उसे पीछे से अपनी गिरफ़्त मे जाकड़ लिया। वो घूम कर उस इंसान के सामने हो गयी और उस से लिपट गयी। दोनो एक दूसरे से चिपके एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे।
"ओह....मेनका....आख़िरकार।"
"हाँ,यश आख़िरकार हम फिर मिल गये।" वो अनितासिंग और कोई नही बल्कि अपनी मेनका थी और ये विजयसिंग है राजासाहब।
दोनो एक दूसरे को बाहों मे भरे वहा बड़े से सोफे पे बैठ गये और फिर से एक दूसरे के होठ का रस पीने लगे। मैत्री की प्रस्तुति.
जब अलग हुए तो मेनका ने सवाल किया, "ये सब तुमने कैसे सोचा यश?”
"सब बताते हैं,मेरी जान।" राजासाहब ने उसे अपनी गोद मे उठा लिया और एक बेडरूम मे ले जाकर बिस्तर पे लिटा दिया। दरवाज़ा बंद कर वो घूमे तो मेनका ने उन्हे नज़र भर के देखा। वो एक टी-शर्ट और हाफ-पॅंट मे थे। दाढ़ी-मूँछछ साफ करा ली थी और बहामा के सूरज ने उनके रंग को काँसे जैसा निखार दिया था। उसकी चूत गीली होने लगी। कितने दीनो बाद वो अपने प्रेमी के साथ अकेली थी पर मन मे कई सवाल घूम रहे थे और उसे उनका जवाब भी चाहिए था।
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