18-04-2026, 12:57 PM
कूरियर वाले ने अपना लन्ड चैताली की चूत के प्रवेश द्वार पर रखा। उसका लन्ड चैताली की चूत के होंठों को सहला रहा था, और चैताली के शरीर में एक अजीब सी बेचैनी फैल गई।
कूरियर वाले ने एक धक्का दिया। उसका लन्ड चैताली की चूत के भीतर सरक गया। इस बार, चैताली को उतनी पीड़ा नहीं हुई, क्योंकि उसकी चूत पहले से ही गीली थी। उसका लन्ड चैताली के भीतर कसकर फँस गया।
कूरियर वाले ने धीरे-धीरे अपने धक्के शुरू किए। हर धक्के के साथ, चैताली के शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उसका लन्ड चैताली की चूत की दीवारों को रगड़ रहा था, और चैताली के शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना फैल रही थी।
"अहह... उहह..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, जो अब दर्द से ज़्यादा सुख की थीं।
कूरियर वाले ने अपनी गति बढ़ाई। उसके धक्के तेज़ और गहरे होते गए। चैताली के चुत्तड़ हिल रहे थे, और उसके बाल मेज़ पर फैले हुए थे। उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होंठ खुले हुए थे।
"और तेज़... आह..." चैताली की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी थी।
कूरियर वाले ने अपनी गति और तेज़ कर दी। उसके धक्के इतने तेज़ थे कि मेज़ हल्की सी हिल रही थी। चैताली के शरीर में एक अजीब सी ऐंठन हो रही थी, और उसे लगा जैसे वह किसी और दुनिया में जा रही हो।
"आहहह... हाँ... हाँ..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, जो अब बेकाबू थीं।
कूरियर वाले ने एक गहरा धक्का दिया, और उसका शरीर चैताली के शरीर पर गिर गया। उसके लन्ड ने चैताली की चूत के भीतर दोबारा अपना पानी छोड़ दिया। चैताली थरथरा गई, और उसके शरीर में एक अजीब सी शांति फैल गई।
"वाह, मैडम," उसने फुसफुसाया। "आप तो कमाल की हैं।"
चैताली ने कोई जवाब नहीं दिया। वह अभी भी अपनी साँसों को सामान्य करने की कोशिश कर रही थी। उसका शरीर थक गया था, लेकिन उसके मन में एक अजीब सी शांति थी।
कूरियर वाला धीरे से चैताली के ऊपर से हटा। उसने अपने लन्ड को चैताली की चूत से बाहर निकाला।
कूरियर वाले ने अपने लन्ड को चैताली के ब्लाउज से साफ़ किया, फिर उसने अपनी पैंट ऊपर की। कूरियर वाले ने अपनी शर्ट पहनी, और फिर अपना कूरियर बैग उठाया। उसने एक बार फिर चैताली की ओर देखा।
"अगली बार, मैडम," उसने मुस्कुराया। "मैं आपको एक और डील दूँगा।"
चैताली ने कोई जवाब नहीं दिया। पेट के बल लेटी हुई थी, उसकी गांड हवा में थी, उसकी आँखें बंद थीं। कूरियर वाला कमरे से बाहर निकल गया, और दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई।
चैताली धीरे से मेज़ से उतरी। उसका शरीर दर्द कर रहा था, लेकिन उसके मन में एक अजीब सी शांति थी। उसने अपनी साड़ी उठाई, और उसे पहनने लगी। उसके शरीर पर कूरियर वाले के वीर्य की गंध थी, और उसके होंठों पर उसके चुंबन का स्वाद।
उसने अपने कपड़े पहने, और फिर उसने अपने बालों को सँवारा। उसने एक बार फिर कमरे को देखा। मेज़ पर अभी भी उसके शरीर के निशान थे, और हवा में एक अजीब सी गंध थी।
चैताली कमरे से बाहर निकली, और उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। वह लिफ़्ट की ओर बढ़ी, और फिर नीचे उतर गई। लॉबी में पहुँचकर, उसने अपनी डेस्क पर बैठी। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी।
उसने अपने कंप्यूटर को उठाया, और फिर अपने काम में लग गई। उसके मन में अभी भी कूरियर वाले की आवाज़ गूँज रही थी, "आप तो कमाल की हैं।"
चैताली ने एक गहरी साँस ली, और फिर उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसे पता था कि यह उसकी ज़िंदगी का एक हिस्सा था, और उसे इसे स्वीकार करना होगा। वह एक वेश्या थी, और उसे इसे स्वीकार करना होगा।


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