18-04-2026, 12:49 PM
"हमें तो लगा था कि बस छेड़ने के लिए ले आए हैं," आकाश ने कहा।
"छेड़ना? नहीं, आकाश। आज चैताली जी की होली कुछ अलग तरीके से मनेगी।" राजबीर ने अपनी कमीज़ के बटन खोले। "आज तुम दोनों की भी होली मनेगी।"
आर्यन की आँखें चमक उठीं। उसने कभी सोचा नहीं था कि उसे ऐसा मौका मिलेगा। उसने चैताली को कई बार देखा था, उसके चाल, उसके मुस्कान, और उसके भरे हुए जिस्म ने उसे हमेशा आकर्षित किया था।
राजबीर ने चैताली के पास घुटने टेके। उसका हाथ उसके चोली पर गया। चैताली ने एक हल्की सी सिसकी भरी, उसके आँखें आधी खुलीं, लेकिन वह कुछ भी समझ नहीं पाईं। उसके पुतलियाँ फैली हुई थीं।
"क्या हुआ चैताली जी? नींद आ रही है?" राजबीर ने उसके गाल पर थपकी दी। "अभी तो पार्टी शुरू हुई है।"
उसने चैताली की चोली के हुक खोलने शुरू किए। एक-एक करके हुक खुलने लगे, और चैताली की साँसें और तेज़ हो गईं। उसके चूची, जो अब तक कसकर बंधी थीं, आज़ाद होने लगीं। उसके लाल रंग की ब्रा साफ दिखने लगी, जो उसके भरे हुए स्तनों को मुश्किल से संभाले हुए थी।


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