18-04-2026, 12:29 AM
मौशुमी की आँखें सामने थीं, लेकिन उसका मन कहीं और भटक रहा था। कौशिक की हरकतें, उसकी आँखों की प्यास, उसके हाथों का स्पर्श – ये सब उसके दिमाग में घूम रहे थे। ऑफिस पहुँचकर, वह अपनी कुर्सी पर बैठ गई। सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर आंकड़ों और प्रेजेंटेशन की भरमार थी, लेकिन उसकी आँखें उन पर टिक नहीं पा रही थीं। उसका दिमाग बार-बार कौशिक की तरफ जा रहा था।
उसे याद आया कि कैसे आज सुबह लिफ्ट में कौशिक ने उसका हाथ पकड़ा था, कैसे उसके होंठ उसके होंठों के करीब आ गए थे। एक अजीब सी गर्मी उसकी नसों में दौड़ गई। वह अपनी कुर्सी पर हिल गई, खुद को सामान्य करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन कौशिक का युवा, गठीला शरीर उसके दिमाग में बार-बार कौंध रहा था। वह कल्पना करने लगी कि कौशिक उसे कैसे अपनी बाहों में भरता, कैसे उसके होंठ उसके होठों पर उतरते, कैसे उसके हाथ उसकी साड़ी को हटाते हुए उसके शरीर पर सरकते। उसकी चूत में एक हल्की सी गुदगुदी महसूस हुई, और वह अपनी जांघों को एक साथ दबाने लगी।
उधर, कॉलेज में कौशिक की हालत भी कुछ अलग नहीं थी। लेक्चर हॉल में प्रोफेसर की आवाज़ उसके कानों में पड़ रही थी, लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ मौशुमी का चेहरा घूम रहा था। उसकी सांवली रंगत, उसके बड़े-बड़े मम्मे, उसके होंठ, उसकी गहरी आँखें – सब कुछ उसे पागल कर रहा था। उसे याद आया कि कैसे आज सुबह लिफ्ट में मौशुमी ने सीसीटीवी का बहाना बनाया था, लेकिन उसकी आँखों में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सी उत्तेजना थी। उसे लगा जैसे मौशुमी भी उसे चाहती है, बस सामाजिक बंधनों की वजह से वह खुलकर सामने नहीं आ पा रही है।
उसने कल्पना की कि मौशुमी उसके सामने बिलकुल नंगी खड़ी है, उसके विशाल बूब्स उसके सामने उछल रही है, उसके निप्पल्स कड़े और गहरे भूरे रंग के। उसके हाथ उसके शरीर पर सरक रहे हैं, उसकी चूत को छू रहे हैं, जहाँ से रस टपक रहा है। वह अपनी पैंट के भीतर अपने लण्ड की बढ़ती हुई कठोरता को महसूस कर रहा था, और उसे दबाने की कोशिश कर रहा था। दिन भर दोनों इसी कशमकश में उलझे रहे, काम और पढ़ाई में उनका मन बिल्कुल नहीं लग रहा था।
शाम को, मौशुमी अपनी कार लेकर कौशिक को लेने कॉलेज पहुँची। जैसे ही उसने कौशिक को कॉलेज गेट पर देखा, उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक आ गई। कौशिक कार में आकर बैठा, और मौशुमी ने उसकी ओर एक पल के लिए देखा।
"कैसा रहा दिन?" मौशुमी ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक उत्सुकता थी।
"ठीक था," कौशिक ने जवाब दिया, उसकी आँखें मौशुमी के होंठों पर टिकी हुई थीं।


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