17-04-2026, 01:10 PM
हमारे रोल-प्ले वाले दिन अब खत्म हो चुके थे।
अब जब भी हम दोनों का मूड बनता...
मैं नेहा की पुरानी कहानियाँ सुनता।
बहुत डिटेल में।
ज्यादातर शराब पीते हुए।
और उसकी चूत चाटते हुए।
नेहा सोफे पर बैठती — जैसे कोई रानी हो।
मैं फर्श पर बैठता — जैसे उसका गुलाम।
उसे कभी मजबूर नहीं करना पड़ता।
मुझे ये तरीका बहुत पसंद था।
आज भी वही सीन था।
नेहा सोफे पर आराम से बैठी हुई थी।
उसकी टाँगें थोड़ी फैली हुई थीं।
वो सिर्फ़ एक ढीली शर्ट पहने हुए थी — नीचे कुछ नहीं।
मैं उसके पैरों के बीच फर्श पर बैठा था।
मेरा सिर उसकी जाँघों के बीच में।
मेरी जीभ धीरे-धीरे उसकी चूत को चाट रही थी।
शराब की बोतल साइड में रखी थी।
दोनों के ग्लास आधे भरे हुए थे।
नेहा ने मेरे बालों में उँगलियाँ फिराईं।
धीरे से पूछा —
“क्या मैं आगे जारी रखूँ?”
मैंने बिना सिर उठाए, उसकी चूत पर जीभ रखे हुए ही फुसफुसाया —
“हाँ... जारी रखो।”
जब वो कहानी सुनाती, मैं उसकी चूत चाटता रहता।
हर बार जब वो कोई गंदा वाकया बताती, उसकी चूत और गीली हो जाती।
मुझे हर बार नया थ्रिल मिलता।
धीरे-धीरे उसने सारी डिटेल्स बताईं।
वे लोग हर 6 महीने में एक बार ऐसा करते थे।
पहले सिर्फ अंकल और नेहा थे।
फिर बिल्लू भी शामिल हो गया।
अंकल ने बिल्लू को इसलिए शामिल किया क्योंकि रास्ते में उसका एक सुरक्षित ठिकाना था।
नेहा कहती — “मैं दिखाती थी कि मुझे बिल्लू पसंद नहीं है... लेकिन सच में मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं थी।”
उन्होंने नेहा को धीरे-धीरे सब सिखाया।
पहले बीड़ी... फिर सिगरेट... फिर बीयर।
नेहा हँसते हुए बताती — “पहली बार बीड़ी पीकर मैं बहुत खाँसी थी... लेकिन बाद में मज़ा आने लगा।”
फिर मजेदार हिस्से आए।
पहली बार जब नेहा ने दो लुंड साथ में चूसे।
वो झोपड़ी में थे।
बिल्लू खड़ा था, अंकल बैठा था।
नेहा घुटनों के बल बैठकर दोनों को बारी-बारी चूस रही थी।
“मेरा मुँह भर जाता था... दोनों के प्रीकम से... लेकिन मैं रुक नहीं रही थी।”
एक बार जब कोई उसकी चूत चाट रहा था, तब वो दूसरे का लुंड चूस रही थी।
“मेरा दिमाग उड़ गया था... एक तरफ जीभ अंदर... दूसरी तरफ लुंड मुँह में...”
एक बार दोनों ने उसकी चूत पर लुंड रगड़ा और उसके पूरे शरीर पर झड़ दिया।
“मेरा पेट, स्तन, चेहरा... सब सफेद हो गया था।”
बिल्लू दोनों में ज़्यादा क्रिएटिव था।
वो नई-नई चीजें ट्राई करता... फिर अंकल फॉलो करता।
एक बार दोनों ने नेहा की आर्मपिट (काँख) में लुंड डाला।
जैसे चूत हो।
दोनों ने काँख में चोदा... और फिर उसके स्तनों पर झड़ दिया।
नेहा ये सब सुनाते वक्त बहुत शर्माती भी थी... और बहुत गीली भी हो जाती थी।
मैं चाटता रहता... और वो कहानी आगे बढ़ाती रहती।
“कॉलेज खत्म होने के बाद मुझे जॉब मिल गई।
मैं पार्टी करने लगी... ड्रिंक, स्मोक...
लेकिन कभी भी इतना हाई नहीं हुआ जितना उन सस्ते, गंदे लड़कों के साथ हुआ।”
वो एक पल रुकी।
फिर मुस्कुराई — बहुत प्यारी, लेकिन थोड़ी शर्मीली मुस्कान।
“बिल्लू से आखिरी बार मिली थी जब मैं कॉलेज छोड़ रही थी।
वो बहुत उदास था।
मुझे बार-बार गले लगाया... अनगिनत बार किस किया।
रो रहा था...”
मैंने बिना हिचकिचाहट के कहा — “और अंकल से..."
फिर उसने अपनी उँगली दाँतों में दबाई।
थोड़ा शरमाते हुए बोली —
“और अंकल से... आखिरी बार... हमारी शादी से कुछ दिन पहले मिली थी।”
ने सिर उठाया।
उसकी आँखों में देखा।
नेहा ने मेरी तरफ देखकर पूछा —
“तुम... पक्का जानना चाहते हो?”
मैंने बिना हिचकिचाहट के कहा —
“हाँ... बताओ।”
नेहा ने गहरी साँस ली।
फिर बहुत धीरे से बोली —
“शादी से कुछ दिन पहले... हम एक मूवी हॉल में गए थे।
अंधेरा था... पिछली सीट पर।
मैंने उसे BJ दिया... वहीं... हॉल में।
वो रो रहा था...
मेरी आँखों में भी आँसू थे...
फिर भी मैं उसके लुंड को चूस रही थी।
वो मुझे खुश कर रहा था... मैं उसे।
मैंने उससे मिन्नत की — ‘होटल चलो... मुझे चोद दो...
मैं तैयार हूँ।’
लेकिन वो... जैसे कोई बड़ा भाई... समझाने लगा।
‘तुम्हें अपने पति के लिए वर्जिन रहना चाहिए।
उसका सम्मान कभी मत तोड़ना।
हमारे बारे में कभी मत बताना।’
वो मुझे समझा रहा था...
और मैं... उसके लुंड को मुँह में लिए हुए... आँसू बहा रही थी।”
नेहा की आवाज़ थोड़ी काँप गई।
मैंने अपनी जीभ को और गहराई में डाला।
वो हल्का-सा काँपी।
“वो... हमेशा मुझे अच्छी लड़की बनाए रखना चाहता था...
भले ही मैं खुद कितनी गंदी हो चुकी थी।”
वो सोफे पर बैठी थी, मेरे बालों में उँगलियाँ फिरा रही थी।
उसने गहरी साँस ली और बोली —
“हमने सब कुछ बहुत सावधानी से किया था...
लेकिन फिर भी... कुछ बातें लीक हो गईं।
कॉलेज के कुछ जलन वाले लड़के... जो मुझे कभी हासिल नहीं कर पाए...
उन्होंने अफवाहें फैला दीं।
कुछ लोगों ने उन बातों पर यकीन कर लिया... कुछ ने नहीं।
इसी वजह से... जब तुम्हें मेरी शादी का प्रस्ताव आया...
कुछ लोगों ने तुम्हें मना करने की सलाह दी होगी...
‘इस लड़की से मत शादी करना... इसके बारे में ये-ये बातें हैं...’”
वो थोड़ा रुकी।
फिर मेरे बालों को हल्का-सा खींचते हुए मुस्कुराई —
“तुमने उन बातों को कभी नहीं पूछा...
न कभी मुझे जज किया।
बस... मुझे स्वीकार कर लिया।”
मैंने सिर उठाया।
उसकी आँखों में देखा।
मेरे होंठ अभी भी उसके रस से गीले थे।
“मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था, नेहा।
मुझे सिर्फ़ तुम चाहिए थीं...
जैसी तुम हो... वैसी।
मैंने पूछा —
“तुम्हारा गाँव तो छोटा था...
तुम्हारी शादी में आया था क्या?
क्या मैंने उसे देखा है?”
नेहा थोड़ा शरमा गई।
उसके गाल लाल हो गए।
वो मेरी तरफ देखकर हल्की-सी मुस्कुराई और शर्माते हुए बोली —
“हाँ... वो आया था।
स्टेज पर आकर हमने साथ फोटो भी खिंचवाई थी।
पापा ने तुमसे मिलवाया था...
और पापा ने कहा था — ‘ये नेगी जी हैं’।”
मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गया।
“नेगी जी”
अब जब भी हम दोनों का मूड बनता...
मैं नेहा की पुरानी कहानियाँ सुनता।
बहुत डिटेल में।
ज्यादातर शराब पीते हुए।
और उसकी चूत चाटते हुए।
नेहा सोफे पर बैठती — जैसे कोई रानी हो।
मैं फर्श पर बैठता — जैसे उसका गुलाम।
उसे कभी मजबूर नहीं करना पड़ता।
मुझे ये तरीका बहुत पसंद था।
आज भी वही सीन था।
नेहा सोफे पर आराम से बैठी हुई थी।
उसकी टाँगें थोड़ी फैली हुई थीं।
वो सिर्फ़ एक ढीली शर्ट पहने हुए थी — नीचे कुछ नहीं।
मैं उसके पैरों के बीच फर्श पर बैठा था।
मेरा सिर उसकी जाँघों के बीच में।
मेरी जीभ धीरे-धीरे उसकी चूत को चाट रही थी।
शराब की बोतल साइड में रखी थी।
दोनों के ग्लास आधे भरे हुए थे।
नेहा ने मेरे बालों में उँगलियाँ फिराईं।
धीरे से पूछा —
“क्या मैं आगे जारी रखूँ?”
मैंने बिना सिर उठाए, उसकी चूत पर जीभ रखे हुए ही फुसफुसाया —
“हाँ... जारी रखो।”
जब वो कहानी सुनाती, मैं उसकी चूत चाटता रहता।
हर बार जब वो कोई गंदा वाकया बताती, उसकी चूत और गीली हो जाती।
मुझे हर बार नया थ्रिल मिलता।
धीरे-धीरे उसने सारी डिटेल्स बताईं।
वे लोग हर 6 महीने में एक बार ऐसा करते थे।
पहले सिर्फ अंकल और नेहा थे।
फिर बिल्लू भी शामिल हो गया।
अंकल ने बिल्लू को इसलिए शामिल किया क्योंकि रास्ते में उसका एक सुरक्षित ठिकाना था।
नेहा कहती — “मैं दिखाती थी कि मुझे बिल्लू पसंद नहीं है... लेकिन सच में मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं थी।”
उन्होंने नेहा को धीरे-धीरे सब सिखाया।
पहले बीड़ी... फिर सिगरेट... फिर बीयर।
नेहा हँसते हुए बताती — “पहली बार बीड़ी पीकर मैं बहुत खाँसी थी... लेकिन बाद में मज़ा आने लगा।”
फिर मजेदार हिस्से आए।
पहली बार जब नेहा ने दो लुंड साथ में चूसे।
वो झोपड़ी में थे।
बिल्लू खड़ा था, अंकल बैठा था।
नेहा घुटनों के बल बैठकर दोनों को बारी-बारी चूस रही थी।
“मेरा मुँह भर जाता था... दोनों के प्रीकम से... लेकिन मैं रुक नहीं रही थी।”
एक बार जब कोई उसकी चूत चाट रहा था, तब वो दूसरे का लुंड चूस रही थी।
“मेरा दिमाग उड़ गया था... एक तरफ जीभ अंदर... दूसरी तरफ लुंड मुँह में...”
एक बार दोनों ने उसकी चूत पर लुंड रगड़ा और उसके पूरे शरीर पर झड़ दिया।
“मेरा पेट, स्तन, चेहरा... सब सफेद हो गया था।”
बिल्लू दोनों में ज़्यादा क्रिएटिव था।
वो नई-नई चीजें ट्राई करता... फिर अंकल फॉलो करता।
एक बार दोनों ने नेहा की आर्मपिट (काँख) में लुंड डाला।
जैसे चूत हो।
दोनों ने काँख में चोदा... और फिर उसके स्तनों पर झड़ दिया।
नेहा ये सब सुनाते वक्त बहुत शर्माती भी थी... और बहुत गीली भी हो जाती थी।
मैं चाटता रहता... और वो कहानी आगे बढ़ाती रहती।
“कॉलेज खत्म होने के बाद मुझे जॉब मिल गई।
मैं पार्टी करने लगी... ड्रिंक, स्मोक...
लेकिन कभी भी इतना हाई नहीं हुआ जितना उन सस्ते, गंदे लड़कों के साथ हुआ।”
वो एक पल रुकी।
फिर मुस्कुराई — बहुत प्यारी, लेकिन थोड़ी शर्मीली मुस्कान।
“बिल्लू से आखिरी बार मिली थी जब मैं कॉलेज छोड़ रही थी।
वो बहुत उदास था।
मुझे बार-बार गले लगाया... अनगिनत बार किस किया।
रो रहा था...”
मैंने बिना हिचकिचाहट के कहा — “और अंकल से..."
फिर उसने अपनी उँगली दाँतों में दबाई।
थोड़ा शरमाते हुए बोली —
“और अंकल से... आखिरी बार... हमारी शादी से कुछ दिन पहले मिली थी।”
ने सिर उठाया।
उसकी आँखों में देखा।
नेहा ने मेरी तरफ देखकर पूछा —
“तुम... पक्का जानना चाहते हो?”
मैंने बिना हिचकिचाहट के कहा —
“हाँ... बताओ।”
नेहा ने गहरी साँस ली।
फिर बहुत धीरे से बोली —
“शादी से कुछ दिन पहले... हम एक मूवी हॉल में गए थे।
अंधेरा था... पिछली सीट पर।
मैंने उसे BJ दिया... वहीं... हॉल में।
वो रो रहा था...
मेरी आँखों में भी आँसू थे...
फिर भी मैं उसके लुंड को चूस रही थी।
वो मुझे खुश कर रहा था... मैं उसे।
मैंने उससे मिन्नत की — ‘होटल चलो... मुझे चोद दो...
मैं तैयार हूँ।’
लेकिन वो... जैसे कोई बड़ा भाई... समझाने लगा।
‘तुम्हें अपने पति के लिए वर्जिन रहना चाहिए।
उसका सम्मान कभी मत तोड़ना।
हमारे बारे में कभी मत बताना।’
वो मुझे समझा रहा था...
और मैं... उसके लुंड को मुँह में लिए हुए... आँसू बहा रही थी।”
नेहा की आवाज़ थोड़ी काँप गई।
मैंने अपनी जीभ को और गहराई में डाला।
वो हल्का-सा काँपी।
“वो... हमेशा मुझे अच्छी लड़की बनाए रखना चाहता था...
भले ही मैं खुद कितनी गंदी हो चुकी थी।”
वो सोफे पर बैठी थी, मेरे बालों में उँगलियाँ फिरा रही थी।
उसने गहरी साँस ली और बोली —
“हमने सब कुछ बहुत सावधानी से किया था...
लेकिन फिर भी... कुछ बातें लीक हो गईं।
कॉलेज के कुछ जलन वाले लड़के... जो मुझे कभी हासिल नहीं कर पाए...
उन्होंने अफवाहें फैला दीं।
कुछ लोगों ने उन बातों पर यकीन कर लिया... कुछ ने नहीं।
इसी वजह से... जब तुम्हें मेरी शादी का प्रस्ताव आया...
कुछ लोगों ने तुम्हें मना करने की सलाह दी होगी...
‘इस लड़की से मत शादी करना... इसके बारे में ये-ये बातें हैं...’”
वो थोड़ा रुकी।
फिर मेरे बालों को हल्का-सा खींचते हुए मुस्कुराई —
“तुमने उन बातों को कभी नहीं पूछा...
न कभी मुझे जज किया।
बस... मुझे स्वीकार कर लिया।”
मैंने सिर उठाया।
उसकी आँखों में देखा।
मेरे होंठ अभी भी उसके रस से गीले थे।
“मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था, नेहा।
मुझे सिर्फ़ तुम चाहिए थीं...
जैसी तुम हो... वैसी।
मैंने पूछा —
“तुम्हारा गाँव तो छोटा था...
तुम्हारी शादी में आया था क्या?
क्या मैंने उसे देखा है?”
नेहा थोड़ा शरमा गई।
उसके गाल लाल हो गए।
वो मेरी तरफ देखकर हल्की-सी मुस्कुराई और शर्माते हुए बोली —
“हाँ... वो आया था।
स्टेज पर आकर हमने साथ फोटो भी खिंचवाई थी।
पापा ने तुमसे मिलवाया था...
और पापा ने कहा था — ‘ये नेगी जी हैं’।”
मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गया।
“नेगी जी”


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