17-04-2026, 12:54 PM
बिल्लू ने मेरी चूत में उँगलियाँ और गहराई तक डालीं।
वो मेरे G-स्पॉट को ढूंढ रहा था।
मुझे खुद नहीं पता था कि मेरा G-स्पॉट कहाँ है।
लेकिन बिल्लू को पता था।
उसने उँगलियाँ थोड़ा मोड़ा... एक खास जगह पर दबाव डाला।
मेरा शरीर एक झटके से काँप उठा।
मैंने जोर से चीखा —
“आआआह्ह्ह्ह... वहाँ... हाँ... वही...!”
मेरी चूत से रस और तेज़ बहने लगा।
बिल्लू ने उँगलियाँ तेज़ कीं।
उसकी जीभ क्लिट पर और तेज़ हो गई।
मेरा शरीर काँप रहा था, जाँघें थरथरा रही थीं।
मैं आँखें बंद किए कराह रही थी।
तभी अंकल ने मेरे कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया —
“रंडी... मुझे भी तेरे रस पीने दे...”
पहली बार... अंकल ने मुझे “रंडी” कहा।
हमेशा “नेहा” या “बेटी” कहता था।
उस शब्द ने मेरे शरीर में एक झटका लगा दिया।
शर्म... बहुत तेज़ शर्म आई।
लेकिन साथ ही... एक गहरी, गंदी उत्तेजना भी।
मेरा पूरा शरीर सिहर गया।
मैंने धीरे से आँखें खोलीं।
बिल्लू की जीभ अभी भी काम कर रही थी।
मैंने अंकल की तरफ देखा।
मेरे चेहरे पर नॉटी स्माइल थी... आँखें आधी बंद... होंठ काँप रहे थे।
मैं कराहते हुए ही बोली —
“क्या... पीना चाहते हो...?”
अंकल ने अपना दायाँ हाथ मेरे बाएँ स्तन पर रखा।
उसे मसलने लगा... निप्पल को पिंच किया।
बहुत जोर से... दर्द और मज़ा एक साथ।
फिर... मेरे कान में फुसफुसाया —
“यहाँ से... तेरे दूध को पीना चाहता हूँ...”
उसने मेरे स्तन को और ज़ोर से दबाया।
मैंने जोर से कराहा —
“आआह्ह्ह... अंकल...”
बिल्लू ने मेरी चूत से मुँह हटाया नहीं।
वो और तेज़ चाटने लगा।
उसकी जीभ अब मेरी चूत के अंदर तक जा रही थी।
मैंने अंकल की आँखों में देखा... और कराहते हुए ही बोली —
“मुझे... बदले में... क्या मिलेगा?”
अंकल ने एक शैतानी मुस्कान दी।
उसने अपना सख्त लुंड मेरी कमर पर दबाया — जो पैंट से बाहर निकला हुआ था।
फिर... मेरे कान में फुसफुसाया —
“तू मेरे दूध को पी सकती है।”
मैंने उसकी आँखों में देखा।
उसके लुंड को महसूस किया — गरम, सख्त, फड़कता हुआ।
मैंने अपना चेहरा आगे बढ़ाया... उसके कान के पास जाकर फुसफुसाई —
“डील!”
अंकल ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।
उसने मेरे दोनों हाथ पकड़े।
मेरी शर्ट पहले से ही अनहुक थी।
उसने ज़ोर से खींचा।
मैंने अपने हाथ ऊपर उठा दिए — मदद करने के लिए।
शर्ट पूरी तरह उतर गई।
अब सिर्फ़ ब्रा बची थी — जो बिल्लू ने पहले ही अनहुक कर दी थी जब वो मेरी गर्दन चाट रहा था।
अंकल ने ब्रा को दाहिने हाथ से पकड़ा।
बाएँ कंधे से ऊपर से निकाला... फिर दाहिने कंधे से।
ब्रा फर्श पर गिर गई।
अब मैं ऊपर से पूरी तरह नंगी थी।
सिर्फ़ स्कर्ट बची थी — जो अब मेरी चूत तक सरकी हुई थी।
अंकल एक पल के लिए रुक गया।
उसने मुझे घूरकर देखा।
मेरे नंगे स्तन... पूरी तरह उसके सामने।
मेरी स्किन — क्रीमी, स्मूद, बिना किसी दाग के।
मेरे स्तन... भरे हुए, गोल, युवा... थोड़े से उठे हुए।
निप्पल्स सख्त... गुलाबी।
वो... बस देखता रहा।
उसकी आँखों में... विस्मय था... चाहत थी... और एक गहरी भूख।
अंकल का मुँह मेरे स्तनों के ठीक सामने था।
वो अब पहली बार इतने करीब से... इतने बिना जल्दबाज़ी के... मुझे देख रहा था।
उसकी आँखें मेरे एरोला पर टिक गईं।
गुलाबी... हल्का-हल्का गुलाबी... मेरी गोरी स्किन के मुकाबले बहुत नाज़ुक और खूबसूरत।
एरोला थोड़ा उठा हुआ था — उत्तेजना की वजह से।
निप्पल्स सख्त... छोटे... परफेक्ट शेप में।
जैसे कोई नाज़ुक फूल... जो अभी खिला हो।
अंकल पहले कभी इतने करीब से नहीं देख पाया था।
हमेशा जल्दबाज़ी में... डर में... रिस्क में... बस छूता-दबाता चला जाता था।
लेकिन आज... वो बेखौफ था।
शायद मेरी खूबसूरती ने उसे बेखौफ कर दिया था।
या... बिल्लू की मौजूदगी ने।
बिल्लू के सामने... अब वो डर नहीं रहा था।
वो बस... मुझे... पूरी तरह महसूस करना चाहता था।
वो धीरे से मेरे बाएँ स्तन पर होंठ रखे।
सिर्फ़ एरोला पर... हल्का-सा चूमा।
फिर... जीभ से घेरा बनाया।
धीरे-धीरे... गोल-गोल... निप्पल के चारों ओर।
मैं सिहर गई।
मेरी साँसें रुक गईं।
“आह्ह... अंकल...”
वो मेरे निप्पल को मुँह में ले लिया।
धीरे से चूसा।
फिर... थोड़ा ज़ोर से।
उसकी जीभ निप्पल पर घूम रही थी।
मैंने उसका सिर पकड़ लिया।
उसके बालों में उँगलियाँ फँसाईं।
उसे और करीब खींचा।
वो उन्हें ऐसे छू रहा था जैसे पहली बार महसूस कर रहा हो।
उसकी उँगलियाँ मेरी स्किन पर सरक रही थीं — बहुत नरम... बहुत कोमल।
मेरे स्तन उसके हाथों में दब रहे थे, फिर भी सख्त... भरे हुए... पूरी तरह जवाब दे रहे थे।
उसकी नज़र मेरे स्तनों की कर्व्स पर टिकी हुई थी।
वो मेरी कमर तक जाती हुई लाइन को देख रहा था — पतली कमर... फिर मेरी पीठ का हल्का-सा घुमाव।
उसकी आँखें मेरे दाहिने स्तन के ऊपरी हिस्से पर रुक गईं।
वहाँ... एक छोटा-सा तिल था।
काला... नन्हा... लेकिन बहुत खास।
वो उसे देखकर मुस्कुराया।
जैसे ये तिल... मेरी खूबसूरती का एक गुप्त निशान हो।
वो धीरे से मेरे दाहिने स्तन पर झुका।
उसने उस तिल को चूमा।
फिर... जीभ से घेरा बनाया।
उसका मुँह मेरे निप्पल के बहुत करीब आ गया।
वो उसे मुँह में ले लिया।
धीरे से चूसा।
फिर... थोड़ा ज़ोर से।
उसकी जीभ निप्पल पर घूम रही थी — गोल-गोल... बहुत प्यार से... बहुत भूख से।
मैंने उसका सिर पकड़ लिया।
वो मेरे G-स्पॉट को ढूंढ रहा था।
मुझे खुद नहीं पता था कि मेरा G-स्पॉट कहाँ है।
लेकिन बिल्लू को पता था।
उसने उँगलियाँ थोड़ा मोड़ा... एक खास जगह पर दबाव डाला।
मेरा शरीर एक झटके से काँप उठा।
मैंने जोर से चीखा —
“आआआह्ह्ह्ह... वहाँ... हाँ... वही...!”
मेरी चूत से रस और तेज़ बहने लगा।
बिल्लू ने उँगलियाँ तेज़ कीं।
उसकी जीभ क्लिट पर और तेज़ हो गई।
मेरा शरीर काँप रहा था, जाँघें थरथरा रही थीं।
मैं आँखें बंद किए कराह रही थी।
तभी अंकल ने मेरे कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया —
“रंडी... मुझे भी तेरे रस पीने दे...”
पहली बार... अंकल ने मुझे “रंडी” कहा।
हमेशा “नेहा” या “बेटी” कहता था।
उस शब्द ने मेरे शरीर में एक झटका लगा दिया।
शर्म... बहुत तेज़ शर्म आई।
लेकिन साथ ही... एक गहरी, गंदी उत्तेजना भी।
मेरा पूरा शरीर सिहर गया।
मैंने धीरे से आँखें खोलीं।
बिल्लू की जीभ अभी भी काम कर रही थी।
मैंने अंकल की तरफ देखा।
मेरे चेहरे पर नॉटी स्माइल थी... आँखें आधी बंद... होंठ काँप रहे थे।
मैं कराहते हुए ही बोली —
“क्या... पीना चाहते हो...?”
अंकल ने अपना दायाँ हाथ मेरे बाएँ स्तन पर रखा।
उसे मसलने लगा... निप्पल को पिंच किया।
बहुत जोर से... दर्द और मज़ा एक साथ।
फिर... मेरे कान में फुसफुसाया —
“यहाँ से... तेरे दूध को पीना चाहता हूँ...”
उसने मेरे स्तन को और ज़ोर से दबाया।
मैंने जोर से कराहा —
“आआह्ह्ह... अंकल...”
बिल्लू ने मेरी चूत से मुँह हटाया नहीं।
वो और तेज़ चाटने लगा।
उसकी जीभ अब मेरी चूत के अंदर तक जा रही थी।
मैंने अंकल की आँखों में देखा... और कराहते हुए ही बोली —
“मुझे... बदले में... क्या मिलेगा?”
अंकल ने एक शैतानी मुस्कान दी।
उसने अपना सख्त लुंड मेरी कमर पर दबाया — जो पैंट से बाहर निकला हुआ था।
फिर... मेरे कान में फुसफुसाया —
“तू मेरे दूध को पी सकती है।”
मैंने उसकी आँखों में देखा।
उसके लुंड को महसूस किया — गरम, सख्त, फड़कता हुआ।
मैंने अपना चेहरा आगे बढ़ाया... उसके कान के पास जाकर फुसफुसाई —
“डील!”
अंकल ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।
उसने मेरे दोनों हाथ पकड़े।
मेरी शर्ट पहले से ही अनहुक थी।
उसने ज़ोर से खींचा।
मैंने अपने हाथ ऊपर उठा दिए — मदद करने के लिए।
शर्ट पूरी तरह उतर गई।
अब सिर्फ़ ब्रा बची थी — जो बिल्लू ने पहले ही अनहुक कर दी थी जब वो मेरी गर्दन चाट रहा था।
अंकल ने ब्रा को दाहिने हाथ से पकड़ा।
बाएँ कंधे से ऊपर से निकाला... फिर दाहिने कंधे से।
ब्रा फर्श पर गिर गई।
अब मैं ऊपर से पूरी तरह नंगी थी।
सिर्फ़ स्कर्ट बची थी — जो अब मेरी चूत तक सरकी हुई थी।
अंकल एक पल के लिए रुक गया।
उसने मुझे घूरकर देखा।
मेरे नंगे स्तन... पूरी तरह उसके सामने।
मेरी स्किन — क्रीमी, स्मूद, बिना किसी दाग के।
मेरे स्तन... भरे हुए, गोल, युवा... थोड़े से उठे हुए।
निप्पल्स सख्त... गुलाबी।
वो... बस देखता रहा।
उसकी आँखों में... विस्मय था... चाहत थी... और एक गहरी भूख।
अंकल का मुँह मेरे स्तनों के ठीक सामने था।
वो अब पहली बार इतने करीब से... इतने बिना जल्दबाज़ी के... मुझे देख रहा था।
उसकी आँखें मेरे एरोला पर टिक गईं।
गुलाबी... हल्का-हल्का गुलाबी... मेरी गोरी स्किन के मुकाबले बहुत नाज़ुक और खूबसूरत।
एरोला थोड़ा उठा हुआ था — उत्तेजना की वजह से।
निप्पल्स सख्त... छोटे... परफेक्ट शेप में।
जैसे कोई नाज़ुक फूल... जो अभी खिला हो।
अंकल पहले कभी इतने करीब से नहीं देख पाया था।
हमेशा जल्दबाज़ी में... डर में... रिस्क में... बस छूता-दबाता चला जाता था।
लेकिन आज... वो बेखौफ था।
शायद मेरी खूबसूरती ने उसे बेखौफ कर दिया था।
या... बिल्लू की मौजूदगी ने।
बिल्लू के सामने... अब वो डर नहीं रहा था।
वो बस... मुझे... पूरी तरह महसूस करना चाहता था।
वो धीरे से मेरे बाएँ स्तन पर होंठ रखे।
सिर्फ़ एरोला पर... हल्का-सा चूमा।
फिर... जीभ से घेरा बनाया।
धीरे-धीरे... गोल-गोल... निप्पल के चारों ओर।
मैं सिहर गई।
मेरी साँसें रुक गईं।
“आह्ह... अंकल...”
वो मेरे निप्पल को मुँह में ले लिया।
धीरे से चूसा।
फिर... थोड़ा ज़ोर से।
उसकी जीभ निप्पल पर घूम रही थी।
मैंने उसका सिर पकड़ लिया।
उसके बालों में उँगलियाँ फँसाईं।
उसे और करीब खींचा।
वो उन्हें ऐसे छू रहा था जैसे पहली बार महसूस कर रहा हो।
उसकी उँगलियाँ मेरी स्किन पर सरक रही थीं — बहुत नरम... बहुत कोमल।
मेरे स्तन उसके हाथों में दब रहे थे, फिर भी सख्त... भरे हुए... पूरी तरह जवाब दे रहे थे।
उसकी नज़र मेरे स्तनों की कर्व्स पर टिकी हुई थी।
वो मेरी कमर तक जाती हुई लाइन को देख रहा था — पतली कमर... फिर मेरी पीठ का हल्का-सा घुमाव।
उसकी आँखें मेरे दाहिने स्तन के ऊपरी हिस्से पर रुक गईं।
वहाँ... एक छोटा-सा तिल था।
काला... नन्हा... लेकिन बहुत खास।
वो उसे देखकर मुस्कुराया।
जैसे ये तिल... मेरी खूबसूरती का एक गुप्त निशान हो।
वो धीरे से मेरे दाहिने स्तन पर झुका।
उसने उस तिल को चूमा।
फिर... जीभ से घेरा बनाया।
उसका मुँह मेरे निप्पल के बहुत करीब आ गया।
वो उसे मुँह में ले लिया।
धीरे से चूसा।
फिर... थोड़ा ज़ोर से।
उसकी जीभ निप्पल पर घूम रही थी — गोल-गोल... बहुत प्यार से... बहुत भूख से।
मैंने उसका सिर पकड़ लिया।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)