17-04-2026, 12:51 PM
उसने गंदी हँसी हँसी और बोला —
“रंडी साली...
तुझे तो गंदे मुँह से भी मज़ा आ गया।
रंडियाँ भी मेरे गंदे मुँह को नहीं चूमतीं...
लेकिन तूने तो मेरे होंठ ऐसे चाटे जैसे मैंने कभी चूमे ही नहीं हों...
तो मैं तो बहुत खुश हूँ।”
अंकल को झटका लगा।
उसने बिल्लू को घूरा।
“भैंचोद... क्या बोला तूने?”
लेकिन अंकल की नज़र मुझ पर थी।
वो मेरी प्रतिक्रिया देखना चाहता था।
मैं... बिल्लू की बात सुनकर हँस पड़ी।
बहुत हल्की, शरारती हँसी।
मैंने अपना बायाँ हाथ अंकल के होंठों पर रखा।
धीरे से थपकी मारी — जैसे उसे चुप करा रही हूँ।
फिर... मुस्कुराते हुए बोली —
“चुप करो... उसे चिढ़ाने दो।
वो खुश है... मैं भी खुश हूँ... तुम भी खुश हो ना?”
अंकल चुप हो गया।
उसकी आँखें अभी भी सदमे में थीं।
वो बोल नहीं पा रहा था।
बिल्लू ने फिर मेरी जाँघ पर हाथ फेरा।
धीरे से ऊपर की तरफ।
बिल्लू का चेहरा एक पल के लिए सख्त हो गया।
फिर... वो हँस पड़ा — गंदी, भारी हँसी।
मैंने अपना सिर अंकल के चेहरे के और करीब ले जाया।
हमारे होंठ मिलीमीटर भर दूर थे।
उसकी साँस मेरे होंठों पर पड़ रही थी।
वो समझ गया कि मैं क्या चाहती हूँ।
अंकल ने झपट्टा मारा।
उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए।
एक बार फिर... बहुत गहरा, बहुत जोशीला किस।
उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।
हम दोनों एक-दूसरे में खो गए थे।
साथ ही... मैंने अपना बायाँ हाथ, जो बिल्लू के कंधे पर था... उसके बालों में डाल दिया।
उँगलियाँ उसके बालों में फँसा कर... उसे अपनी गर्दन की तरफ खींचा।
इशारा साफ़ था — “मैं तुम्हें भी नहीं भूली हूँ।”
बिल्लू ने तुरंत समझ लिया।
वो मेरी गर्दन पर झुक गया।
उसकी जीभ मेरी गर्दन पर सरकने लगी।
वो चाट रहा था... चूम रहा था... और बीच-बीच में हल्का-सा काट रहा था।
उसका दायाँ हाथ मेरे स्तनों पर था — शर्ट के अंदर... दबा रहा था, मसल रहा था।
बायाँ हाथ मेरी जाँघ पर... ऊपर-नीचे... दबाव डाल रहा था।
मैं बीच में थी — अंकल के साथ किस कर रही थी... बिल्लू मेरी गर्दन चाट रहा था... दोनों के हाथ मेरे शरीर पर।
मेरी कराहें... अंकल के मुँह में दब रही थीं।
“म्म्म्ह्ह... आह्ह...”
बिल्लू ने मेरी गर्दन पर एक गहरा काट लिया।
मैंने सिहरकर कराहा।
बिल्लू ने मेरी गर्दन छोड़ी।
उसने मेरी शर्ट के बटन और खोल दिए।
मेरे स्तन पूरी तरह बाहर आ गए।
वो उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर मसलने लगा।
उसकी खुरदरी हथेलियाँ... मेरी नरम स्किन पर रगड़ रही थीं।
बिल्लू घुटनों के बल नीचे बैठ गया।
उसने मेरी स्कर्ट को घुटनों तक सरकाया।
फिर दोनों हाथों से स्कर्ट पकड़कर ऊपर की तरफ खींचने लगा — मेरी इनर थाइज़ तक।
मेरा बायाँ हाथ खुद-ब-खुद आगे बढ़ गया।
मैंने स्कर्ट को पकड़ लिया — नीचे खींचकर रोकने की कोशिश की।
मेरी चूत... अभी भी छुपी हुई थी।
मैंने किस तोड़ा।
नीचे देखा।
बिल्लू मेरी स्कर्ट को ऊपर खींच रहा था... लेकिन मेरा बायाँ हाथ उसे रोक रहा था।
उसने मेरी तरफ देखा — सवाल भरी नज़रें।
“क्या हुआ...?”
मैंने एक पल के लिए शर्म महसूस की।
मेरा शरीर... अभी भी वो पुरानी आदत में था — अच्छी लड़की वाली आदत।
एक अजनबी के सामने कपड़े उतारने से पहले... स्कर्ट पकड़ लेना... सम्मान बचाना।
मैं थोड़ी शर्मिंदा हो गई।
कितनी दूर आ गई हूँ मैं... प्यार से... अब इस हालत में।
बिल्लू ने मेरी शर्म देख ली।
वो मेरे दाएँ कान के पास मुँह ले आया।
धीरे से, लेकिन बहुत गंदे लहजे में फुसफुसाया —
“रंडियाँ कपड़े उतारने में झिझकती नहीं हैं...”
वो बोला और अपने दाएँ हाथ से मेरे बाएँ हाथ को पकड़ लिया।
ज़ोर से खींचा।
मेरा हाथ स्कर्ट से हट गया।
स्कर्ट अब पूरी तरह ऊपर सरक गई।
मेरी चूत... अब उसके सामने नंगी थी।
उसी बीच बिल्लू ने और समय बर्बाद नहीं किया।
उसने मेरी स्कर्ट को पूरी तरह ऊपर सरका दिया।
स्कर्ट अब मेरी कमर तक पहुँच चुकी थी।
मेरी चूत... अब पूरी तरह नंगी... उसके सामने थी।
बिल्लू घुटनों के बल कार की तंग जगह में नीचे बैठ गया।
उसकी स्थिति बहुत असहज थी — कार का सीट छोटा था, जगह कम थी — लेकिन वो रुका नहीं।
उसने ऊपर देखा... और मेरे नंगे शरीर को घूरकर देखा।
उसकी आँखें मेरे चेहरे पर टिकीं।
मेरी आँखें आधी बंद थीं — प्लेजर से... अंकल के किस से।
मेरी लंबी काली पलकें फड़फड़ा रही थीं।
मेरे होंठ... अंकल के होंठों में बंद... बहुत सॉफ्ट, गुलाबी... धीरे-धीरे हिल रहे थे।
हमारा किस... बहुत इंटेंस था।
मेरे गाल लाल हो चुके थे — उत्तेजना और मेहनत से।
बिल्लू की आँखें नीचे सरकीं — मेरे स्तन... मेरी कमर... मेरी नंगी चूत।
उसकी आँखों में एक अजीब सा विस्मय था।
जैसे वो कभी सोच भी नहीं सकता था कि इतनी पढ़ी-लिखी, इतनी सुंदर लड़की... उसके सामने... इस हालत में होगी।
मेरी पीठ थोड़ी पीछे झुक गई थी, कमर हल्की-सी उठी हुई थी, कूल्हे आगे की तरफ धकेल रहे थे।
मेरे कंधे रिलैक्स थे, पूरा शरीर अब खुले में... पूरी तरह समर्पित हो चुका था।
वो अब और खुद को रोक नहीं पा रहा था।
अंकल और मेरे किस को देखकर उसकी चाहत और बढ़ गई थी।
उसने एक शैतानी मुस्कान दी।
फिर... मेरी बाईं टाँग को हल्का-सा ऊपर उठाने का इशारा किया।
मैंने समझ लिया।
बिना रुके... मैंने अपनी बाईं टाँग थोड़ी ऊपर उठा दी।
कार की तंग जगह में... मेरी टाँगें अब और फैल गईं।
बिल्लू ने तुरंत मेरी दाईं टाँग पर अपना बायाँ हाथ रखा।
हल्के-हल्के थपथपाया — इशारा साफ़ था: “खोल अपनी टाँगें।”
मैंने धीरे से दाईं टाँग भी थोड़ी और फैला दी।
अब मेरी चूत... पूरी तरह उसके सामने थी।
कार की सीट पर... हम तीनों इतने सटे हुए थे कि जगह नहीं थी।
लेकिन... बिल्लू को जगह मिल गई।
वो पहले मेरी खुशबू को सूँघ रहा था — जैसे कोई कीमती चीज़ को परख रहा हो।
फिर... धीरे-धीरे... उसकी जीभ मेरी चूत की तरफ बढ़ी।
सबसे पहले हल्का-सा दबाव... क्लिट के पास।
धीरे-धीरे... दबाव बढ़ता गया।
मैंने एक जोरदार कराह छोड़ी —
“आआह्ह्ह्ह...!”
अंकल अभी भी मेरे होंठ चूस रहा था।
मैंने एक साथ दोनों को महसूस किया — अंकल के होंठ मेरे होंठों पर... बिल्लू की जीभ मेरी चूत पर।
मेरा शरीर काँप रहा था।
जाँघें खुशी से थरथरा रही थीं।
बिल्लू पहला मर्द था... जिसने मेरी चूत को जीभ से चखा।
उसकी जीभ... मेरी हर सिलवट में घूम रही थी।
हर कोने को... हर जगह को... अच्छे से चाट रही थी।
जब भी वो मेरे सबसे सेंसिटिव स्पॉट पर पहुँचता... वो रुक जाता।
वहाँ ज़ोर से चाटता... साफ़ करता... फिर आगे बढ़ता।
मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठने लगी।
मेरे कूल्हे आगे-पीछे हिलने लगे।
मेरी साँसें बहुत तेज़ और भारी हो गईं।
बिल्लू अब और गहराई में जाना चाहता था।
उसने इस बार मेरी दाहिनी जाँघ पर थपकी मारी।
मैंने तुरंत समझ लिया।
बिना सोचे... मैंने दाहिनी टाँग थोड़ी ऊपर उठा दी।
बिल्लू ने मेरी दाहिनी जाँघ को नीचे से पकड़ा।
उसने उसे अपनी कंधे पर रख लिया।
मेरी टाँग अब उसके कंधे पर टिकी हुई थी।
मेरी चूत... और भी खुलकर उसके सामने आ गई।
वो फिर से मेरी क्लिट पर लगा।
इस बार उसकी जीभ रुक-रुक कर नहीं... लगातार... बहुत तेज़ी से काम कर रही थी।
वो मेरी चूत को बिना रुके चाट रहा था।
हर स्ट्रोक... और गहरा... और तेज़।
मेरा शरीर अब पूरी तरह समर्पित हो चुका था।
उत्तेजना इतनी ज़्यादा थी कि मेरी चूत से चिपचिपा रस बहने लगा।
जाँघों पर लकीरें बनने लगीं।
बिल्लू ने तुरंत नीचे झुका।
उसने मेरी जाँघों पर बहते रस को चाटा।
सब कुछ... जीभ से साफ़ कर दिया।
उसकी जीभ मेरी जाँघों पर सरक रही थी।
अंकल अब मेरी गर्दन पर किस कर रहा था।
उसने अपना स्थान थोड़ा बदला।
अब उसके होंठ मेरी इनर थाइ पर थे।
वो भी चाटने लगा।
फिर... बिना रुके... उसने दो उँगलियाँ मेरी चूत में गहराई तक डाल दीं।
मैंने एक जोरदार कराह छोड़ी —
“आआह्ह्ह...!”
उसकी उँगलियाँ अंदर थीं — गर्म, खुरदरी, मोटी।
वो धीरे-धीरे उन्हें अंदर-बाहर कर रहा था।
साथ ही... उसने अपना मुँह मेरी क्लिट पर रख दिया।
जीभ से चाटना शुरू कर दिया — तेज़, गोल-गोल, लगातार।
मेरा शरीर काँपने लगा।
जाँघें थरथराने लगीं।
मेरा सिर पीछे झुक गया।
आँखें बंद हो गईं।
मुँह थोड़ा खुला हुआ था।
अंकल नीचे देखा — बिल्लू मेरी चूत चाट रहा था, उँगलियाँ अंदर-बाहर कर रहा था।
अंकल को जलन हुई।
वो मेरे चेहरे को देख रहा था — मेरी आँखें बंद, मुँह खुला, चेहरा पूरी तरह एक्स्टसी में डूबा हुआ।
अंकल ने अपना लुंड पैंट से बाहर निकाला।
वो सख्त था।
उसने दाहिने हाथ से उसे सहलाना शुरू कर दिया।
उसका लुंड मेरी पीठ से रगड़ रहा था।
“रंडी साली...
तुझे तो गंदे मुँह से भी मज़ा आ गया।
रंडियाँ भी मेरे गंदे मुँह को नहीं चूमतीं...
लेकिन तूने तो मेरे होंठ ऐसे चाटे जैसे मैंने कभी चूमे ही नहीं हों...
तो मैं तो बहुत खुश हूँ।”
अंकल को झटका लगा।
उसने बिल्लू को घूरा।
“भैंचोद... क्या बोला तूने?”
लेकिन अंकल की नज़र मुझ पर थी।
वो मेरी प्रतिक्रिया देखना चाहता था।
मैं... बिल्लू की बात सुनकर हँस पड़ी।
बहुत हल्की, शरारती हँसी।
मैंने अपना बायाँ हाथ अंकल के होंठों पर रखा।
धीरे से थपकी मारी — जैसे उसे चुप करा रही हूँ।
फिर... मुस्कुराते हुए बोली —
“चुप करो... उसे चिढ़ाने दो।
वो खुश है... मैं भी खुश हूँ... तुम भी खुश हो ना?”
अंकल चुप हो गया।
उसकी आँखें अभी भी सदमे में थीं।
वो बोल नहीं पा रहा था।
बिल्लू ने फिर मेरी जाँघ पर हाथ फेरा।
धीरे से ऊपर की तरफ।
बिल्लू का चेहरा एक पल के लिए सख्त हो गया।
फिर... वो हँस पड़ा — गंदी, भारी हँसी।
मैंने अपना सिर अंकल के चेहरे के और करीब ले जाया।
हमारे होंठ मिलीमीटर भर दूर थे।
उसकी साँस मेरे होंठों पर पड़ रही थी।
वो समझ गया कि मैं क्या चाहती हूँ।
अंकल ने झपट्टा मारा।
उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए।
एक बार फिर... बहुत गहरा, बहुत जोशीला किस।
उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।
हम दोनों एक-दूसरे में खो गए थे।
साथ ही... मैंने अपना बायाँ हाथ, जो बिल्लू के कंधे पर था... उसके बालों में डाल दिया।
उँगलियाँ उसके बालों में फँसा कर... उसे अपनी गर्दन की तरफ खींचा।
इशारा साफ़ था — “मैं तुम्हें भी नहीं भूली हूँ।”
बिल्लू ने तुरंत समझ लिया।
वो मेरी गर्दन पर झुक गया।
उसकी जीभ मेरी गर्दन पर सरकने लगी।
वो चाट रहा था... चूम रहा था... और बीच-बीच में हल्का-सा काट रहा था।
उसका दायाँ हाथ मेरे स्तनों पर था — शर्ट के अंदर... दबा रहा था, मसल रहा था।
बायाँ हाथ मेरी जाँघ पर... ऊपर-नीचे... दबाव डाल रहा था।
मैं बीच में थी — अंकल के साथ किस कर रही थी... बिल्लू मेरी गर्दन चाट रहा था... दोनों के हाथ मेरे शरीर पर।
मेरी कराहें... अंकल के मुँह में दब रही थीं।
“म्म्म्ह्ह... आह्ह...”
बिल्लू ने मेरी गर्दन पर एक गहरा काट लिया।
मैंने सिहरकर कराहा।
बिल्लू ने मेरी गर्दन छोड़ी।
उसने मेरी शर्ट के बटन और खोल दिए।
मेरे स्तन पूरी तरह बाहर आ गए।
वो उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर मसलने लगा।
उसकी खुरदरी हथेलियाँ... मेरी नरम स्किन पर रगड़ रही थीं।
बिल्लू घुटनों के बल नीचे बैठ गया।
उसने मेरी स्कर्ट को घुटनों तक सरकाया।
फिर दोनों हाथों से स्कर्ट पकड़कर ऊपर की तरफ खींचने लगा — मेरी इनर थाइज़ तक।
मेरा बायाँ हाथ खुद-ब-खुद आगे बढ़ गया।
मैंने स्कर्ट को पकड़ लिया — नीचे खींचकर रोकने की कोशिश की।
मेरी चूत... अभी भी छुपी हुई थी।
मैंने किस तोड़ा।
नीचे देखा।
बिल्लू मेरी स्कर्ट को ऊपर खींच रहा था... लेकिन मेरा बायाँ हाथ उसे रोक रहा था।
उसने मेरी तरफ देखा — सवाल भरी नज़रें।
“क्या हुआ...?”
मैंने एक पल के लिए शर्म महसूस की।
मेरा शरीर... अभी भी वो पुरानी आदत में था — अच्छी लड़की वाली आदत।
एक अजनबी के सामने कपड़े उतारने से पहले... स्कर्ट पकड़ लेना... सम्मान बचाना।
मैं थोड़ी शर्मिंदा हो गई।
कितनी दूर आ गई हूँ मैं... प्यार से... अब इस हालत में।
बिल्लू ने मेरी शर्म देख ली।
वो मेरे दाएँ कान के पास मुँह ले आया।
धीरे से, लेकिन बहुत गंदे लहजे में फुसफुसाया —
“रंडियाँ कपड़े उतारने में झिझकती नहीं हैं...”
वो बोला और अपने दाएँ हाथ से मेरे बाएँ हाथ को पकड़ लिया।
ज़ोर से खींचा।
मेरा हाथ स्कर्ट से हट गया।
स्कर्ट अब पूरी तरह ऊपर सरक गई।
मेरी चूत... अब उसके सामने नंगी थी।
उसी बीच बिल्लू ने और समय बर्बाद नहीं किया।
उसने मेरी स्कर्ट को पूरी तरह ऊपर सरका दिया।
स्कर्ट अब मेरी कमर तक पहुँच चुकी थी।
मेरी चूत... अब पूरी तरह नंगी... उसके सामने थी।
बिल्लू घुटनों के बल कार की तंग जगह में नीचे बैठ गया।
उसकी स्थिति बहुत असहज थी — कार का सीट छोटा था, जगह कम थी — लेकिन वो रुका नहीं।
उसने ऊपर देखा... और मेरे नंगे शरीर को घूरकर देखा।
उसकी आँखें मेरे चेहरे पर टिकीं।
मेरी आँखें आधी बंद थीं — प्लेजर से... अंकल के किस से।
मेरी लंबी काली पलकें फड़फड़ा रही थीं।
मेरे होंठ... अंकल के होंठों में बंद... बहुत सॉफ्ट, गुलाबी... धीरे-धीरे हिल रहे थे।
हमारा किस... बहुत इंटेंस था।
मेरे गाल लाल हो चुके थे — उत्तेजना और मेहनत से।
बिल्लू की आँखें नीचे सरकीं — मेरे स्तन... मेरी कमर... मेरी नंगी चूत।
उसकी आँखों में एक अजीब सा विस्मय था।
जैसे वो कभी सोच भी नहीं सकता था कि इतनी पढ़ी-लिखी, इतनी सुंदर लड़की... उसके सामने... इस हालत में होगी।
मेरी पीठ थोड़ी पीछे झुक गई थी, कमर हल्की-सी उठी हुई थी, कूल्हे आगे की तरफ धकेल रहे थे।
मेरे कंधे रिलैक्स थे, पूरा शरीर अब खुले में... पूरी तरह समर्पित हो चुका था।
वो अब और खुद को रोक नहीं पा रहा था।
अंकल और मेरे किस को देखकर उसकी चाहत और बढ़ गई थी।
उसने एक शैतानी मुस्कान दी।
फिर... मेरी बाईं टाँग को हल्का-सा ऊपर उठाने का इशारा किया।
मैंने समझ लिया।
बिना रुके... मैंने अपनी बाईं टाँग थोड़ी ऊपर उठा दी।
कार की तंग जगह में... मेरी टाँगें अब और फैल गईं।
बिल्लू ने तुरंत मेरी दाईं टाँग पर अपना बायाँ हाथ रखा।
हल्के-हल्के थपथपाया — इशारा साफ़ था: “खोल अपनी टाँगें।”
मैंने धीरे से दाईं टाँग भी थोड़ी और फैला दी।
अब मेरी चूत... पूरी तरह उसके सामने थी।
कार की सीट पर... हम तीनों इतने सटे हुए थे कि जगह नहीं थी।
लेकिन... बिल्लू को जगह मिल गई।
वो पहले मेरी खुशबू को सूँघ रहा था — जैसे कोई कीमती चीज़ को परख रहा हो।
फिर... धीरे-धीरे... उसकी जीभ मेरी चूत की तरफ बढ़ी।
सबसे पहले हल्का-सा दबाव... क्लिट के पास।
धीरे-धीरे... दबाव बढ़ता गया।
मैंने एक जोरदार कराह छोड़ी —
“आआह्ह्ह्ह...!”
अंकल अभी भी मेरे होंठ चूस रहा था।
मैंने एक साथ दोनों को महसूस किया — अंकल के होंठ मेरे होंठों पर... बिल्लू की जीभ मेरी चूत पर।
मेरा शरीर काँप रहा था।
जाँघें खुशी से थरथरा रही थीं।
बिल्लू पहला मर्द था... जिसने मेरी चूत को जीभ से चखा।
उसकी जीभ... मेरी हर सिलवट में घूम रही थी।
हर कोने को... हर जगह को... अच्छे से चाट रही थी।
जब भी वो मेरे सबसे सेंसिटिव स्पॉट पर पहुँचता... वो रुक जाता।
वहाँ ज़ोर से चाटता... साफ़ करता... फिर आगे बढ़ता।
मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठने लगी।
मेरे कूल्हे आगे-पीछे हिलने लगे।
मेरी साँसें बहुत तेज़ और भारी हो गईं।
बिल्लू अब और गहराई में जाना चाहता था।
उसने इस बार मेरी दाहिनी जाँघ पर थपकी मारी।
मैंने तुरंत समझ लिया।
बिना सोचे... मैंने दाहिनी टाँग थोड़ी ऊपर उठा दी।
बिल्लू ने मेरी दाहिनी जाँघ को नीचे से पकड़ा।
उसने उसे अपनी कंधे पर रख लिया।
मेरी टाँग अब उसके कंधे पर टिकी हुई थी।
मेरी चूत... और भी खुलकर उसके सामने आ गई।
वो फिर से मेरी क्लिट पर लगा।
इस बार उसकी जीभ रुक-रुक कर नहीं... लगातार... बहुत तेज़ी से काम कर रही थी।
वो मेरी चूत को बिना रुके चाट रहा था।
हर स्ट्रोक... और गहरा... और तेज़।
मेरा शरीर अब पूरी तरह समर्पित हो चुका था।
उत्तेजना इतनी ज़्यादा थी कि मेरी चूत से चिपचिपा रस बहने लगा।
जाँघों पर लकीरें बनने लगीं।
बिल्लू ने तुरंत नीचे झुका।
उसने मेरी जाँघों पर बहते रस को चाटा।
सब कुछ... जीभ से साफ़ कर दिया।
उसकी जीभ मेरी जाँघों पर सरक रही थी।
अंकल अब मेरी गर्दन पर किस कर रहा था।
उसने अपना स्थान थोड़ा बदला।
अब उसके होंठ मेरी इनर थाइ पर थे।
वो भी चाटने लगा।
फिर... बिना रुके... उसने दो उँगलियाँ मेरी चूत में गहराई तक डाल दीं।
मैंने एक जोरदार कराह छोड़ी —
“आआह्ह्ह...!”
उसकी उँगलियाँ अंदर थीं — गर्म, खुरदरी, मोटी।
वो धीरे-धीरे उन्हें अंदर-बाहर कर रहा था।
साथ ही... उसने अपना मुँह मेरी क्लिट पर रख दिया।
जीभ से चाटना शुरू कर दिया — तेज़, गोल-गोल, लगातार।
मेरा शरीर काँपने लगा।
जाँघें थरथराने लगीं।
मेरा सिर पीछे झुक गया।
आँखें बंद हो गईं।
मुँह थोड़ा खुला हुआ था।
अंकल नीचे देखा — बिल्लू मेरी चूत चाट रहा था, उँगलियाँ अंदर-बाहर कर रहा था।
अंकल को जलन हुई।
वो मेरे चेहरे को देख रहा था — मेरी आँखें बंद, मुँह खुला, चेहरा पूरी तरह एक्स्टसी में डूबा हुआ।
अंकल ने अपना लुंड पैंट से बाहर निकाला।
वो सख्त था।
उसने दाहिने हाथ से उसे सहलाना शुरू कर दिया।
उसका लुंड मेरी पीठ से रगड़ रहा था।


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