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Incest खेल ससुर बहु का
"आप सोच भी नही सकते सोढी साहब, मेरे दिल पे क्या गुज़री थी! कैसे-कैसे ख़याल आ रहे थे मेरे मन मे। पूरा हफ़्ता मैं इसी उधेड़बुन मे रहा और फिर से शनिवार आ गया। मैने सोच लिया कि इस बार इस मामले की तह तक ज़रूर पहुँचुँगा।"

"...इस बार माँ निकली तो मैने माँ का पीछा किया और पहुँच गया एक शहर के सबसे पॉश इलाक़े मे एक आलीशान कोठी के सामने। माँ कार मे बैठ अंदर चली गयी थी और गेट पे गार्ड्स खड़े थे। मैं वही कोने मे छिप कर बैठ अंदर जाने का रास्ता सोचता रहा। घड़ी देखी तो पाया कि 9 बज रहे थे। मैने कोठी का एक चक्कर लगाया और एक जगह पाया कि दीवार पर चढ़ा जा सकता है।"

"...फिर सोढी साहब मैं जैसे-तैसे करके उस कोठी मे दाखिल हो गया और सावधानी से हर कमरे मे झाँकने लगा। एक कमरे से खिलखिलाने की आवाज़ आई तो मैं लपक कर वहा पहुँचा। दरवाज़ा बंद था पर तभी मेरा ध्यान उस कमरे की बाल्कनी पे गया तो मैं किसी तरह उसपे पहुँच गया। वहा एक रोशनदान था,मैने पास पड़ी एक कुर्सी पे चढ़ उस रोशनदान से झाँकने लगा।"

"अंदर हमारे दिवंगत राजा यशवीर के पिता पूरे नंगे घुटनो के बल बिस्तर पे खड़े थे। उनके एक हाथ मे फोन का रिसीवर था जिस से वो किसी से बात कर रहे थे और दूसरे हाथ मे मेरी माँ का सर जो कि उनके लंड पे उपर-नीचे हो रहा था। मैं तो सकते मे आ गया,कुछ होश नही रहे। अपनी माँ को उस हाल मे देख मुझे शरम  कर हट जाना चाहिए था पर मेरा तो दिमाग़ सुन्न हो गया था।"

"...तभी उन्होने रिसीवर रख दिया और दोनो हाथों से मेरी माँ के सर को पकड़ अपनी कमर हिला उसके मुँह को चोदने लगे।"
मैत्री की रचना.

"ऐसी कौन सी ज़रूरी बात थी कि मुझ से भी ध्यान हटा दिया था?,माँ उनसे पूछ रही थी।"

"वो राजकुमार की पढ़ाई के बारे मे कुछ बात थी।"

"एक राजकुमार तो आपका शहर मे भी है,हुज़ूर।माँ ने उनके लंड को हिलाते हुए कहा।"

"कौन?,राजा सहब ने पूछा"

"मेरा बेटा जब्बार भी तो आप ही का खून है तो वो भी तो राजकुमार हुआ। माँ ने लंड को दोनो हाथों मे भर अपने गाल से रगड़ा।"

"राजा ने इतनी ज़ोर का थप्पड़ माँ को मारा कि माँ पलंग से नीचे गिर गयी,उसके होठ के कोने से खून बह रहा था।"

"कान खोल के सुन ले, तू हमारी रखैल है और तेरा बेटा एक रखैल का बेटा। कभी सपने मे भी उसकी बराबरी हमारे राजकुमार से नही करना,समझी!,कह कर वो पलंग से नीचे उतरे और मेरी माँ को उल्टा कर उसकी कमर पकड़ कर अपना लंड उसकी गांड मे पेल दिया।"

"..बस उस दिन से मैने सोच लिया था कि राजकुल का विनाश कर दूँगा।"

"बहुत दर्द भरी कहानी है,जब्बार साहब। चलिए राजा को उसके किए की सज़ा मिली। पूरा खानदान अपनेआप ही मौत के मुँह मे समाता चला गया।"

"ग़लत,सोढी साहब। राजा यशवीर केवल अपनी मौत मरा है। उसकी दोनो औलादो को मैने उपरवाले के पास पहुँचाया है।"

"क्या?"

"जी,बड़े लड़के यूधवीर की कार के ब्रेक्स फैल कर दिए थे। बहुत पापड बेलने पड़े थे तब जा के कार से छेड़-खानी का मौका मिला था। लोगो को लगा कि आक्सिडेंट है और मेरा काम हो गया। और दूसरा लड़का विश्वजीत-उसको तो ऐसी ड्रग्स की लत लगाई की पुछो मत। राजा ने उसे हमारे चंगुल से निकल ही लिया था पर मैने उसे भी नही छोडा। मार कर ही दम लिया।"


जब्बार की शराब से खुलती ज़ुबान ने मलिका को चौकन्ना कर दिया,"डार्लिंग,अब बस करो,महल जाना है ना, डील साइन करने। इस हालत मे तो खड़े भी नही हो पायोगे।"उसने ग्लास उसकी गिरफ़्त से अलग कर दिया।

"ओके,जानेमन,आज तो मैं तुम्हे महल की सैर कारवंगा। तुम मेरी रानी, अब महल की रानी बनोगी। चलो,जाके तुम भी रानियो की तरह साडी पहन लो,जाओ!"

"पर मैं जा के क्या करूँगी?"
मैत्री की प्रस्तुति है.

"पर-बर कुछ नही,तुम भी जाओगी। तुम रानी हो। जाओ साडी पहन कर आओ, ओके!"

सोढी ने मलिका को उसकी बात मान ने का इशारा किया। बस कुछ ही देर मे उन्हे मेनका से मिलने महल पहुँचना था।

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बने रहिये दोस्तों................

क्रमश:
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - Yesterday, 12:11 PM



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