16-04-2026, 03:34 PM
"कमाल हो गया! ये आजकल हो क्या रहा है? पहले राजा अपने आप मर जाता है,अब उसकी बहू मुझ से मिलना चाहती है!",जब्बार अपना मोबाइल बंद कर मलिका की चूचिया फिर से मसलने लगा। जब सेशाद्री का फोन आया तो वो मलिका को चोद रहा था,वो ज़मीन पे बिछे कालीन पे लेटी थी और जब्बार उस पर चढ़ कर उसकी चूत को अपने मोटे लंड से पेल रहा था।
"अकेले जाओगे या उस सरदार को भी ले जाओगे?",मलिका ने उसका मुँह अपनी छातियो पे दबाया।
"अभी नही,मेरी जान पहले खुद तो बात कर लू।",उसने उसके निपल को काट लिया।
"आ..ह..",जब्बार ने उसकी निपल चूस्ते हुए अपने धक्के तेज़ कर दिए।
"जब मिल्स खरीदोगे तो उसमे मुझे भी पार्ट्नरशिप चाहिए। ऊऊ...ऊओवव्व!",जब्बार अब घुटनो पे बैठ कर उसे चोद रहा था और एक हाथ से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा था। मैत्री की पेशकश.
"ले लेना मेरी जान! जो चाहिए वो ले लेना।",उसने अपने हाथ और कमर की रफ़्तार तेज़ कर दी। मलिका अपनी चूत पे इस दोहरी मार को ज़्यादा देर तक नही झेल पाई और तुरंत झड़ गयी और उसके थोड़ी देर बाद जब्बार ने अभी अपना लंड उसके अंदर खाली कर दिया।
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राजकुल शुगर मिल के पीछे एक खाली ज़मीन का टुकड़ा था जहा लोग कम ही आते-जाते थे।दोपहर के एक बजे मेनका सेशाद्री और अपने ड्राइवर के साथ कार मे बैठी जब्बार का इंतेज़ार कर रही थी।
"काफ़ी देर हो गयी है,पता नही ये कम्बख़्त कब आएगा।",सेशाद्री अपनी घड़ी देखते हुए बोले। ये आदमी बिल्कुल भी भरोसे के लायक नही है,रानी साहिबा। आप उस से इस वीरान जगह मिलने को क्यू तैयार हो गयी?"
मेनका कुछ कहती उस से पहले ही जब्बार की कार आती दिखाई दी। जब्बार कार से उतर कर मेनका के पास आया,"नमस्ते।",वो उसके सीने की तरफ देख रहा था।
"नमस्ते।"
"मुझ से क्या काम आन पड़ा आपको?"
"अभी जो मिल मे स्ट्राइक हुई थी उसी के बारे मे बात करनी थी।",मेनका कार से उतर कर खड़ी हो गयी,सेशाद्री भी उसके साथ खड़े थे।
"उस के बारे मे अपने वर्कर्स से बात कीजिए,मुझ से क्या बात करेंगी? मेरा उस स्ट्राइक से कोई वास्ता नही था।",वो मेनका के जिस्म को उपर से नीचे तक घूर रहा था।
"देखिए मिस्टर जब्बार,मैं घूमा-फिरा कर बात करने नही आई हू। सभी जानते है कि स्ट्राइक के पीछे आपका हाथ था। आप यही चाहते हैं ना कि हम मिल्स का अपना शेर आपको या आपके किसी आदमी को बेच दे?"
"खूबसूरत होने के साथ-साथ आप समझदार भी हैं। सीधा मुद्दे पे आ गयी।",जब्बार बदतमीज़ी से बोला।
"अपनी ज़बान सम्भालो!",सेशाद्री गुस्से मे बोले। मैत्री रचित.
"एक मिनिट अंकल,हा, तो मिस्टर जब्बार, आप ये बताइए कि कैसे ख़रीदेंगे आप हमारा हिस्सा? आपके लिए हमारे वर्कर्स बस मोहरे हैं जिन्हे आप अपना उल्लू सीधा करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं,पर हुमारे लिए ये वो नमकहलाल लोग हैं जिनके बिना हमारी तरक्की नामुमकिन थी। हम अपना हिस्सा तभी बेचेंगे जब हमे ये तसल्ली हो जाएगी की हमारे वर्कर्स सही हाथों मे जा रहे हैं।"
अब जब्बार भी संजीदा होकर उसकी तरफ देखने लगा," ये लड़की तो काम की बात कर रही है!",उसने सोचा।
"हम आपके बारे मे भी अच्छी तरह से जानते हैं। आपकी इतनी औकात है नही कि आप अकेले मिल्स खरीद सके,तो फिर कैसे ख़रीदेंगे ज़रा हमे भी बताइए।"
"अकेला नही एक और शख्स है मेरे साथ। एक एनआरआइ है।"
"अच्छा! तो मिलवाए उस से हमे।"
"रानी साहिबा,ये आप क्या कर रही हैं! इस इंसान को आप राजकुल की विरासत बेचेगी!"
"सेशाद्री साहब,चुप रहिए,मालिक की बात तभी काटिए जब कुछ बहुत ज़रूरी कहना हो।"
सेशाद्री साहब हैरत से उसे देखने लगे। आज तक उन्हे ऐसे तो राजासाहब ने भी बेइज़्ज़त नही किया था।
"ठीक है,मैं उस इंसान से आपको कल ही मिलवाता हू।"
"ठीक है,हम भी चाहते हैं कि दशहरे के त्योहार तक ये काम पूरा हो जाए।"
"ओके,तो मैं चलता हू। कल इसी वक़्त आपको उस से मिलवाऊंगा।",जब्बार कार मे बैठा और चला गया।
"हमे माफ़ कर दीजिए अंकल,हमने बहुत बदतमीज़ी की आपके साथ।"
सेशाद्री साहब को अब और ज़्यादा हैरत हो गयी!,"पर ये सब हमने जब्बार को बेवकूफ़ बनाने के लिए किया।"
"अंकल,ये इंसान हमे सपरू साहब के साथ डील करने नही देगा और शराफ़त की भाषा ये समझता नही। तो हमने सोचा की इसको इसी की भाषा मे जवाब दें। सपरू साहब ही हमारे हिस्से को ख़रीदेंगे और ये डील हमलोग अगले 4 दिनो मे ही कर लेंगे। मैने उनसे भी कहा है कि वो इस बात को अपने तक ही रखें।"
दोनो कार मे बैठ कर वापस ऑफीस जा रहे थे,”इस डील के बारे मे हमारे जर्मन पार्ट्नर्स,सपरू साहब और उनका लड़का और हम और आप जानते हैं। डील तो अगले 4-5 दीनो मे हो जाएगी पर इसकी अनाउन्स्मेंट दशहरे के अगले दिन होगी।"
"पर इस जब्बार के साथ क्या करेंगी?" मैत्री की लेखनी.
"इसे हम तब तक बातों मे उलझाए रखेंगे। एक बार हमारी डील हो जाए,फिर सपरू साहब ने कहा है कि वो इस से निपट लेंगे।"
"मान गये,रानी साहिबा आपकी सोच को।"
"थॅंक यू,अंकल।"
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
बने रहिये .................................
"अकेले जाओगे या उस सरदार को भी ले जाओगे?",मलिका ने उसका मुँह अपनी छातियो पे दबाया।
"अभी नही,मेरी जान पहले खुद तो बात कर लू।",उसने उसके निपल को काट लिया।
"आ..ह..",जब्बार ने उसकी निपल चूस्ते हुए अपने धक्के तेज़ कर दिए।
"जब मिल्स खरीदोगे तो उसमे मुझे भी पार्ट्नरशिप चाहिए। ऊऊ...ऊओवव्व!",जब्बार अब घुटनो पे बैठ कर उसे चोद रहा था और एक हाथ से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा था। मैत्री की पेशकश.
"ले लेना मेरी जान! जो चाहिए वो ले लेना।",उसने अपने हाथ और कमर की रफ़्तार तेज़ कर दी। मलिका अपनी चूत पे इस दोहरी मार को ज़्यादा देर तक नही झेल पाई और तुरंत झड़ गयी और उसके थोड़ी देर बाद जब्बार ने अभी अपना लंड उसके अंदर खाली कर दिया।
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राजकुल शुगर मिल के पीछे एक खाली ज़मीन का टुकड़ा था जहा लोग कम ही आते-जाते थे।दोपहर के एक बजे मेनका सेशाद्री और अपने ड्राइवर के साथ कार मे बैठी जब्बार का इंतेज़ार कर रही थी।
"काफ़ी देर हो गयी है,पता नही ये कम्बख़्त कब आएगा।",सेशाद्री अपनी घड़ी देखते हुए बोले। ये आदमी बिल्कुल भी भरोसे के लायक नही है,रानी साहिबा। आप उस से इस वीरान जगह मिलने को क्यू तैयार हो गयी?"
मेनका कुछ कहती उस से पहले ही जब्बार की कार आती दिखाई दी। जब्बार कार से उतर कर मेनका के पास आया,"नमस्ते।",वो उसके सीने की तरफ देख रहा था।
"नमस्ते।"
"मुझ से क्या काम आन पड़ा आपको?"
"अभी जो मिल मे स्ट्राइक हुई थी उसी के बारे मे बात करनी थी।",मेनका कार से उतर कर खड़ी हो गयी,सेशाद्री भी उसके साथ खड़े थे।
"उस के बारे मे अपने वर्कर्स से बात कीजिए,मुझ से क्या बात करेंगी? मेरा उस स्ट्राइक से कोई वास्ता नही था।",वो मेनका के जिस्म को उपर से नीचे तक घूर रहा था।
"देखिए मिस्टर जब्बार,मैं घूमा-फिरा कर बात करने नही आई हू। सभी जानते है कि स्ट्राइक के पीछे आपका हाथ था। आप यही चाहते हैं ना कि हम मिल्स का अपना शेर आपको या आपके किसी आदमी को बेच दे?"
"खूबसूरत होने के साथ-साथ आप समझदार भी हैं। सीधा मुद्दे पे आ गयी।",जब्बार बदतमीज़ी से बोला।
"अपनी ज़बान सम्भालो!",सेशाद्री गुस्से मे बोले। मैत्री रचित.
"एक मिनिट अंकल,हा, तो मिस्टर जब्बार, आप ये बताइए कि कैसे ख़रीदेंगे आप हमारा हिस्सा? आपके लिए हमारे वर्कर्स बस मोहरे हैं जिन्हे आप अपना उल्लू सीधा करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं,पर हुमारे लिए ये वो नमकहलाल लोग हैं जिनके बिना हमारी तरक्की नामुमकिन थी। हम अपना हिस्सा तभी बेचेंगे जब हमे ये तसल्ली हो जाएगी की हमारे वर्कर्स सही हाथों मे जा रहे हैं।"
अब जब्बार भी संजीदा होकर उसकी तरफ देखने लगा," ये लड़की तो काम की बात कर रही है!",उसने सोचा।
"हम आपके बारे मे भी अच्छी तरह से जानते हैं। आपकी इतनी औकात है नही कि आप अकेले मिल्स खरीद सके,तो फिर कैसे ख़रीदेंगे ज़रा हमे भी बताइए।"
"अकेला नही एक और शख्स है मेरे साथ। एक एनआरआइ है।"
"अच्छा! तो मिलवाए उस से हमे।"
"रानी साहिबा,ये आप क्या कर रही हैं! इस इंसान को आप राजकुल की विरासत बेचेगी!"
"सेशाद्री साहब,चुप रहिए,मालिक की बात तभी काटिए जब कुछ बहुत ज़रूरी कहना हो।"
सेशाद्री साहब हैरत से उसे देखने लगे। आज तक उन्हे ऐसे तो राजासाहब ने भी बेइज़्ज़त नही किया था।
"ठीक है,मैं उस इंसान से आपको कल ही मिलवाता हू।"
"ठीक है,हम भी चाहते हैं कि दशहरे के त्योहार तक ये काम पूरा हो जाए।"
"ओके,तो मैं चलता हू। कल इसी वक़्त आपको उस से मिलवाऊंगा।",जब्बार कार मे बैठा और चला गया।
"हमे माफ़ कर दीजिए अंकल,हमने बहुत बदतमीज़ी की आपके साथ।"
सेशाद्री साहब को अब और ज़्यादा हैरत हो गयी!,"पर ये सब हमने जब्बार को बेवकूफ़ बनाने के लिए किया।"
"अंकल,ये इंसान हमे सपरू साहब के साथ डील करने नही देगा और शराफ़त की भाषा ये समझता नही। तो हमने सोचा की इसको इसी की भाषा मे जवाब दें। सपरू साहब ही हमारे हिस्से को ख़रीदेंगे और ये डील हमलोग अगले 4 दिनो मे ही कर लेंगे। मैने उनसे भी कहा है कि वो इस बात को अपने तक ही रखें।"
दोनो कार मे बैठ कर वापस ऑफीस जा रहे थे,”इस डील के बारे मे हमारे जर्मन पार्ट्नर्स,सपरू साहब और उनका लड़का और हम और आप जानते हैं। डील तो अगले 4-5 दीनो मे हो जाएगी पर इसकी अनाउन्स्मेंट दशहरे के अगले दिन होगी।"
"पर इस जब्बार के साथ क्या करेंगी?" मैत्री की लेखनी.
"इसे हम तब तक बातों मे उलझाए रखेंगे। एक बार हमारी डील हो जाए,फिर सपरू साहब ने कहा है कि वो इस से निपट लेंगे।"
"मान गये,रानी साहिबा आपकी सोच को।"
"थॅंक यू,अंकल।"
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
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