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Incest खेल ससुर बहु का
वो उसकी टांगो के बीच बैठ गया और अपना लंड उसकी चूत पे लगा कर एक धक्का मारा," आ....हह..हा,अन्न्‍णणन्!",मेनका की आँखे खुशी से बंद हो गयी और वो लेटी,आँहे भरती हुई उसके धक्को का मज़ा लेने लगी। वो वैसे ही घुटनो पे बैठा कभी उसकी चूचियो को मसलता,कभी उसके खूबसूरत चेहरे को सहलाता तो कभी उसकी जांघे सहलाता उसे चोद्ता रहा।


फिर उसने मेनका की दाई जाँघ को पकड़ कर उसे उसकी बाई जाँघ पे इस तरह कर दिया कि अब उसका उपरी बदन तो सीधा था पर निचला हिस्सा मानो करवट लिए था और उसका लंड उसकी चूत चोद्ते हुए उसकी भारी गांड से भी टकरा रहा था। वो लंड पूरा बाहर निकलता और फिर जड़ तक अंदर घुसेड देता। मैत्री द्वारा रचित.

मेनका अब तक दो बार झड़ चुकी थी और उसकी पानी से सराबोर चूत मे लंड फूच-फूच करता अंदर-बाहर हो रहा था। वो अजनबी झुक कर उसके होठ चूमने लगा और उसकी छातिया दबाने लगा। मेनका का जोश दुगुना हो गया था। वो उसके होंठो को छोड़ कर उठा और बिना लंड निकाले उसके बदन को घुमा कर उसे डॉगी पोज़िशन मे ले आया और उसके उपर इस तरह झुक गया कि उसका पेट और सीना मेनका की पीठ और कमर से पूरा चिपक गया।
अब  मेनका घुटनो के बल थी और उसका चेहरा तकिये मे छुपा था और वो अजनबी पीछे से उस से चिपक उसकी मस्त चूचियो को दबाते हुए और उसके गालों और कानो मे जीभ फिराते हुए उसे चोद रहा था। उसने थोड़ी देर तक उसे ऐसे ही चोदा,फिर एक हाथ उसकी बोबले से अलग किया और उसकी चूत के दाने पे लगा रगड़ने लगा। मेनका अपनी चूत पे इस दोहरे हमले से पागल हो गयी और आँहे भरते हुए अपनी कमर हिलाने लगी और झड़ गयी। उसके झड़ते ही उस इंसान ने भी ज़ोरदार धक्के लगा लगा कर उसकी चूत मे अपना पानी छोड़ दिया।

झड़ते ही मेनका बिस्तर पर निढाल हो गिर पड़ी और वो भी वैसे ही उसकी पीठ पे गिर उसकी गर्दन मे मुँह छुपाये अपनी साँसे संभालने लगा।

अगले करीब 2 घंटो तक दोनो ऐसे ही अलग-अलग तरीक़ो से एक दूसरे के बदन से खेलते रहे।आख़िर कौन है ये अजनबी जिस से मेनका इतनी बेताकल्लूफ़ी से चुद रही है? अरे वो क्या,मेनका बिस्तर से उठ गयी है और कही जा रही है। चलिए देखे कहा जा रही है!

ये तो राजासाहब की स्टडी रूम मे जा रही है,और,और ये क्या,वो तिजोरी खोल रही है! सारे इल्लीगल प्रॉपर्टीस वाले पेपर्स निकाल लिए है उसने और अब वापस अपने कमरे मे आ गयी है जहा वो अजनबी कपड़े पहन रहा है।,"ये लो।।"

"सारे हैं ना?"

"हां।"


क्या कर रही है मेनका? क्या इसके चेहरे के पीछे भी कोई नया चेहरा है? क्या वो उतनी शरीफ सच मे है या एक बहुत गहरा नाटक खेल रही है? उफ़फ! मेरा तो सर चकरा रहा है! पर परेशान ना हो दोस्तो,कहानी के अंत तक ये राज़ भी खुल जाएगा।

उसने पेपर्स लेकर नंगी मेनका को बाहों मे भर लिया और उसे कुछ बहुत धीमी आवाज़ मे समझाने लगा जिसे मेनका पूरे ध्यान से सुनती रही। इसके बाद दोनो करीब 5 मिनिट तक एक दूसरे को सहलाते हुए चूमते रहे। फिर वो अजनबी जैसे आया था वैसे ही चला गया।

"सेशाद्री अंकल,मुझे जब्बार सिंग से मिलना है?"
मैत्री की रचना है.

"ये आप क्या कह रही है? रानी साहिबा!"

"जी,अंकल,मुझे उस से मिलना ही है।"

"आख़िर क्यों?"

"वो मैं आपको बाद मे बताउंगी। पहले आप उस से मेरी मुलाकात करवाईए।"

"ठीक है,जैसा आप कहें।"

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आज के लिए बस यही तक दोस्तों.

फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ. तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत.
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 15-04-2026, 02:35 PM



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