15-04-2026, 02:31 PM
"..ऊओ....ऊउउउछ्ह्ह्ह....!",मलिका बिस्तर पे पीठ के बल लेटी थी, उसकी गांड के नीचे एक कुशन लगा था और अभी जब्बार ने उसकी टांगो के बीच बैठकर उसकी गांड के छेद मे अपना लंड पेला था।
"...एयेए....अहह...क्या फायदा होगा...उस सरदार का नौकर बनके?...आ...ईइय्य्य...ययईए"
"नौकर कौन बन रहा है,मेरी जान।",उसने उसकी गांड मारते हुए चूत मे दो उंगलिया घुसा दी और अंदर-बाहर करने लगा,"ये तो बस उसको बोतल मे उतारने के लिए मैने कहा है पर कुछ ही दीनो मे मैं मालिक बन जाऊँगा और वो सरदार अपना लंड थामे खड़ा रह जाएगा।",उसने दूसरे हाथ से उसके एक निपल को मसल दिया।
"....हा....अनन्न..और ज़ोर से मार ...फाड़ दे मेरी गा....आंदड़ड़....सा....आले...आआ...आहह....मज़ा आ .....गा...याअ....याअ...अहह...!",जब्बार के धक्के तेज़ हो गये,मलिका की बातें उसे मस्त किए जा रही थी और वो उसके बदन पे झुक उसकी चूचिया चूमने-चूसने लगा। मैत्री की पेशकश.
"मुझे लग ही रहा था कि सा....आअला....तू तो पैदाइशी ह...रा...अमि है। उस सरदार की भी ज़रूर लेगा...एयाया....आअहह...,छोड़ दरिंदे।"
जब्बार ने अपने दाँत उसकी चूची मे गाड़ा दिए थे और मलिका ने उसके बाल पकड़ उसका सर अपने सीने से अलग कर दिया।
"साली,रांड़ तुझे कितनी बार कहा है कि मेरी पैदाइश या मा के बारे मे कुछ मत बोला कर।ये ले।",उसने उसकी चूत के दाने पे चिकोटी काट ली।
"ऊओ.... उऊउककच...!",जवाब ने उसने भी अपने दाँत जब्बार की कलाई पे गाड़ा दिए और दोनो जंगलियो की तरह अपनी हवस मिटाने लगे।
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मेनका पूरी नंगी अपने बिस्तर पे पड़ी थी और वो अजनबी उसकी खुली टांगो के बीच उसकी चिकनी चूत को चाट रहा था और उसके हाथ उसकी चूचियो को दबा रहे थे।
"...आ....आह...",मेनका के बदन को इस तरह का मज़ा मिले एक महीने से भी ज़्यादा हो गया था। उसने उसका सर अपनी भारी जाँघो मे भींच लिया और अपने हाथो से उसके मुँह को चूत पे और दबाने लगी। उसकी आँहे और उस अजनबी की जीभ की लपलपहट की आवाज़े कमरे के सन्नाटे को दूर कर रही थी। मैत्री रचित कहानी.
मेनका का बदन उस अजनबी की जीभ की हरकतों को बर्दाश्त नही कर पाया और वो झड़ गयी। वो इंसान उसकी चूत से बहते सारे पानी को चाट गया। अब उसकी बारी थी,वो उठा और अपना लंड अपने हाथ मे ले मेनका के सीने के दोनो तरफ अपने घुटनो को बेड पे टीका कर बैठ गया,उसका लंड बिल्कुल मेनका की आँखों के सामने था। उसने एक और तकिया अपने सर के नीचे लगाया और उस अजनबी के झांटो से घिरे लंड को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी। और उस लंड के पसीनोवाली स्मेल क अपने फेफ्सा में भरने लगी।
उसके हाथ उसके बालो भरे अंडो को हौले-हौले दबा रहे थे। उस इंसान की आँखे बंद हो गयी और उसने अपने हाथों से उसका सर पकड़ लिया और उसके मुँह को चोदने लगा। थोड़ी देर तक वो ऐसे ही उसके मुँह का मज़ा लेता रहा पर जैसे ही उसके अंडो मे उबलता हुआ सैलाब बाहर आने को हुआ उसने अपना लंड बाहर खींच लिया। मेनका ने ऐसे देखा जैसे कह रही हो कि ये बात उसे बिल्कुल पसंद नही आई।
बने रहिये.........................
"...एयेए....अहह...क्या फायदा होगा...उस सरदार का नौकर बनके?...आ...ईइय्य्य...ययईए"
"नौकर कौन बन रहा है,मेरी जान।",उसने उसकी गांड मारते हुए चूत मे दो उंगलिया घुसा दी और अंदर-बाहर करने लगा,"ये तो बस उसको बोतल मे उतारने के लिए मैने कहा है पर कुछ ही दीनो मे मैं मालिक बन जाऊँगा और वो सरदार अपना लंड थामे खड़ा रह जाएगा।",उसने दूसरे हाथ से उसके एक निपल को मसल दिया।
"....हा....अनन्न..और ज़ोर से मार ...फाड़ दे मेरी गा....आंदड़ड़....सा....आले...आआ...आहह....मज़ा आ .....गा...याअ....याअ...अहह...!",जब्बार के धक्के तेज़ हो गये,मलिका की बातें उसे मस्त किए जा रही थी और वो उसके बदन पे झुक उसकी चूचिया चूमने-चूसने लगा। मैत्री की पेशकश.
"मुझे लग ही रहा था कि सा....आअला....तू तो पैदाइशी ह...रा...अमि है। उस सरदार की भी ज़रूर लेगा...एयाया....आअहह...,छोड़ दरिंदे।"
जब्बार ने अपने दाँत उसकी चूची मे गाड़ा दिए थे और मलिका ने उसके बाल पकड़ उसका सर अपने सीने से अलग कर दिया।
"साली,रांड़ तुझे कितनी बार कहा है कि मेरी पैदाइश या मा के बारे मे कुछ मत बोला कर।ये ले।",उसने उसकी चूत के दाने पे चिकोटी काट ली।
"ऊओ.... उऊउककच...!",जवाब ने उसने भी अपने दाँत जब्बार की कलाई पे गाड़ा दिए और दोनो जंगलियो की तरह अपनी हवस मिटाने लगे।
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मेनका पूरी नंगी अपने बिस्तर पे पड़ी थी और वो अजनबी उसकी खुली टांगो के बीच उसकी चिकनी चूत को चाट रहा था और उसके हाथ उसकी चूचियो को दबा रहे थे।
"...आ....आह...",मेनका के बदन को इस तरह का मज़ा मिले एक महीने से भी ज़्यादा हो गया था। उसने उसका सर अपनी भारी जाँघो मे भींच लिया और अपने हाथो से उसके मुँह को चूत पे और दबाने लगी। उसकी आँहे और उस अजनबी की जीभ की लपलपहट की आवाज़े कमरे के सन्नाटे को दूर कर रही थी। मैत्री रचित कहानी.
मेनका का बदन उस अजनबी की जीभ की हरकतों को बर्दाश्त नही कर पाया और वो झड़ गयी। वो इंसान उसकी चूत से बहते सारे पानी को चाट गया। अब उसकी बारी थी,वो उठा और अपना लंड अपने हाथ मे ले मेनका के सीने के दोनो तरफ अपने घुटनो को बेड पे टीका कर बैठ गया,उसका लंड बिल्कुल मेनका की आँखों के सामने था। उसने एक और तकिया अपने सर के नीचे लगाया और उस अजनबी के झांटो से घिरे लंड को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी। और उस लंड के पसीनोवाली स्मेल क अपने फेफ्सा में भरने लगी।
उसके हाथ उसके बालो भरे अंडो को हौले-हौले दबा रहे थे। उस इंसान की आँखे बंद हो गयी और उसने अपने हाथों से उसका सर पकड़ लिया और उसके मुँह को चोदने लगा। थोड़ी देर तक वो ऐसे ही उसके मुँह का मज़ा लेता रहा पर जैसे ही उसके अंडो मे उबलता हुआ सैलाब बाहर आने को हुआ उसने अपना लंड बाहर खींच लिया। मेनका ने ऐसे देखा जैसे कह रही हो कि ये बात उसे बिल्कुल पसंद नही आई।
बने रहिये.........................


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