15-04-2026, 12:25 PM
वो शायद सपने में भी नहीं सोच सकता था कि एक innocent सी लड़की उसके लुंड को चूसते हुए इतनी गंदी बातें करेगी।
वो सिर्फ़ कराह पा रहा था।
मैंने फिर से उसके लुंड को मुँह में लिया और ऊपर देखकर मीठे-मीठे स्वर में कहा —
“जब तुम झड़ोगे... तो मैं सारा का सारा निगल लूँगी... जैसे एक अच्छी लड़की करती है।
थूकना... बहुत बदतमीजी है।”
अंकल के मुँह से बस एक फुसफुसाहट निकली —
“ओह... नेहा...”
मैंने मुँह से लुंड निकालकर, ऊपर देखते हुए सेक्सी आवाज़ में पूछा —
“तुम्हें पसंद है ना... कि मैं तुम्हारा ये लंबा, मोटा लुंड चूस रही हूँ?”
फिर बिना जवाब का इंतज़ार किए, मैंने जितना हो सके उतना गहरा मुँह में ले लिया।
लुंड मेरे गले तक पहुँच गया।
मैं थोड़ा गैग हुई, लेकिन रुकी नहीं।
अंकल एकदम पागल हो गया।
उसने ज़ोर से चिल्लाकर कहा —
“चूस मेरे लुंड को, साली चूस अच्छे से!”
उसकी गाली सुनकर मेरे शरीर में करंट दौड़ गया।
मैंने और जोर से चूसना शुरू कर दिया — ऊपर-नीचे, तेज़-तेज़, गहराई तक।
अंकल का शरीर काँपने लगा।
उसने मेरे बालों को मुठ्ठी में कस लिया और कराहते हुए बोला —
“ओह ये बहुत अच्छा लग रहा है...
मुझे लगता है... मैं झड़ने वाला हूँ!”
उसने मेरे बालों को बहुत कसकर पकड़ लिया और एक ज़ोर की कराह के साथ झड़ गया।
“आह्ह्ह्ह... नेहा...!”
पहला झटका इतना तेज़ और मोटा था कि मेरे मुँह में तुरंत भर गया।
गाढ़ा, सफेद-पीला, क्रीमी तरल... बहुत ज़्यादा।
उसने महीनों से नहीं झड़ा था, और आज इस उत्तेजना में उसके अंडे पूरी तरह खाली हो गए।
मैंने जितना हो सके निगलने की कोशिश की, लेकिन इतना सारा था कि मेरा मुँह भर गया।
दूसरा, तीसरा और चौथा झटका... और भी ज़्यादा निकला।
मेरे मुँह के कोनों से सफेद तरल बहने लगा।
गर्म-गर्म... मेरी ठोड़ी पर... फिर मेरी शर्ट पर गिरा...
स्कर्ट के ऊपरी हिस्से पर भी फैल गया।
मैं अभी भी उसके लुंड को मुँह में लिए हुए थी।
उसका लुंड फड़क रहा था... आखिरी बूँदें भी निकल रही थीं।
मैंने जितना निगल सकी, निगल लिया... बाकी मेरे होंठों से, ठोड़ी से और कपड़ों पर बह रहा था।
अंकल की साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं।
वो कुर्सी पर पीछे टिका हुआ था, आँखें बंद, जैसे अभी-अभी स्वर्ग से नीचे आया हो।
मैंने ऊपर देखा।
अंकल की आँखें पूरी तरह बंद थीं।
उसका सिर कुर्सी के पीछे टिका हुआ था।
वो जैसे उस पल को अपने अंदर कैद कर रहा हो।
मैंने धीरे से उसका सारा वीर्य निगल लिया।
गला हल्का-सा ऊपर-नीचे हुआ।
मैं चाहती थी कि वो देखे... कि मैंने कितना सारा उसके मुँह में लिया था और निगल लिया।
लेकिन वो आँखें बंद किए हुए था।
मैंने उसके जाँघ पर हल्का-सा थपकी मारी।
“अंकल...”
वो धीरे से आँखें खोली।
मुझे देखा।
मैंने मुस्कुराते हुए पूछा —
“कैसा लगा?”
वो एक पल तक कुछ नहीं बोला।
फिर... बहुत धीमी, थकी हुई आवाज़ में बोला —
“तुम्हें... अच्छा लगा?”
मैंने सिर हिलाया।
मेरे होंठों पर अभी भी उसका वीर्य लगा हुआ था।
“हाँ... बहुत अच्छा लगा।
बहुत... बहुत ज़्यादा।”
मैं अभी भी फर्श पर घुटनों के बल बैठी हुई थी।
शर्ट और स्कर्ट पर उसके वीर्य की सफेद धारियाँ बिखरी हुई थीं।
मैंने अपनी ठोड़ी पर लगे वीर्य को उँगली से पोंछा और उसे देखते हुए मुस्कुराई।
सन्नाटा अच्छा लग रहा था।
अंकल बीयर की बोतल गले से लगाकर बड़े-बड़े घूँट ले रहा था।
मैं अभी भी फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी।
उसका लुंड मेरे हाथ में था — गीला, चिपचिपा, ढीला पड़ चुका था।
मैं धीरे-धीरे उसे सहला रही थी, उँगलियों से खेल रही थी।
तभी... बाहर की आवाज़ें अचानक कम हो गईं।
सामान्य हँसी-मज़ाक की जगह अब कुछ और सुनाई दे रहा था।
चप्पड़... चप्पड़...
“रंडी साली...”
“मादरचोद...”
मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
अचानक पर्दा हटाकर बिल्लू अंदर घुसा — साँस फूली हुई, चेहरा घबराया हुआ।
“साहब... सिक्युरिटी!
सिक्युरिटी आ गई है!
भागो... जल्दी भागो!”
अंकल एक पल में खड़ा हो गया।
उसने फटाफट पैंट ऊपर चढ़ाई, ज़िप लगाई।
मैं भी घबरा गई।
स्कर्ट नीचे की, शर्ट ठीक की।
मेरे मुँह, ठोड़ी और कपड़ों पर अभी भी उसका वीर्य लगा हुआ था।
अंकल ने पीछे की तरफ एक छोटा सा दरवाज़ा दिखाया।
“इधर से... जल्दी!”
सिक्युरिटी उस वक्त दूसरी झोपड़ी में थी — जहाँ वो दूसरा जोड़ा था।
वहाँ से ज़ोर-ज़ोर की चीखें और गालियाँ आ रही थीं।
हम तीनों — मैं, अंकल और बिल्लू — पीछे के दरवाज़े से निकले।
दौड़ते हुए कार की तरफ गए।
बिल्लू भी हमारे साथ दौड़ रहा था।
कार में बैठते ही बिल्लू भी पीछे की सीट पर घुस गया।
वो हाँफ रहा था।
“साहब... यहाँ रह गया तो मुझे भी पकड़ लेंगे...
अंकल ने तुरंत कार स्टार्ट की।
इंजन की आवाज़ हुई और हम तेज़ी से वहाँ से निकल लिए।
कार अब थोड़ी शांत गति से चल रही थी।
हमने पीछे मुड़कर देखा — कोई पीछा नहीं कर रहा था।
राहत की एक लंबी साँस निकली।
बिल्लू आगे वाली सीट पर बैठा था।
उसने मेरी जींस और पर्स को सामने वाली सीट से उठाया।
पर्स खोला, मेरी ID कार्ड निकाला और अच्छे से पढ़ने लगा।
फिर उसने धीरे से सिर घुमाया और मुझे देखा।
उसकी आँखों में हैरानी और एक अजीब सी चमक थी।
बिल्लू ने ID कार्ड को उँगलियों में घुमाते हुए कहा —
कुछ देर तक उसे ध्यान से पढ़ा।
फिर उसने सिर घुमाकर मुझे देखा।
उसकी आँखों में एक गंदी, हैरान और लालची चमक थी।
वो धीरे से, लेकिन बहुत गंदे अंदाज़ में बोला —
“अरे साली... तू तो कॉलेज में पढ़ती है?
पढ़ी-लिखी, ऊँची फैमिली की लड़की...
और अभी कुछ देर पहले झोपड़ी में घुटनों के बल बैठकर ड्राइवर का लुंड चूस रही थी...
मुँह में लेके चूस रही थी... और वो भी इतने शौक से...
बहुत शर्म नहीं आती तुझे?
इतनी पढ़ी-लिखी होकर भी... एक साधारण ड्राइवर के लुंड को चाट रही थी...
और उसका माल भी निगल लिया...
वाह बेटी... तू तो असली रंडी निकली।”
बिल्लू ने मेरी जींस को अपनी गोद में रखा, फिर मेरी तरफ देखकर और गंदे स्वर में बोला —
“नाम क्या है तेरा पूरा?
नेहा... है ना?
हम समझ गए... दोनों को देख लिया था...
दीवार तो पतली थी, छेद भी थे... सब साफ़ दिख रहा था।
अंकल एकदम भड़क गया।
उसने गुस्से में चिल्लाकर कहा —
“भैंचोद... अपना काम कर!
चुपचाप बैठ!”
बिल्लू भी तुरंत गरम हो गया।
उसने मुस्कुराते हुए, लेकिन धमकी भरे स्वर में जवाब दिया —
“अरे... अब जब मैंने तुम्हारी मदद कर दी, तो आँखें दिखा रहे हो?
अगर मैं सिक्युरिटी को न बताता तो क्या होता, पता है ना?
दोनों की हालत खराब हो जाती... खासकर इस पढ़ी-लिखी रंडी की।”
वो एक पल रुका, फिर सीधे मेरी तरफ देखते हुए बोला —
“मैं भी इसका स्वाद चखना चाहता हूँ...”
वाक्य अधूरा छोड़ दिया, लेकिन मतलब बिल्कुल साफ़ था।
अंकल ने गुस्से में लगभग हाथ उठा दिया।
वो चिल्लाया —
“भैंचोद... वो इन लड़कियों जैसी नहीं है!
एक शब्द और बोला तो...”
बिल्लू हँसा।
वो बिल्कुल डरा नहीं था।
उसने मेरी तरफ देखकर फिर कहा —
“तो फिर... क्या करोगे साहब?
मैंने तुम्हें बचाया... अब थोड़ा हिस्सा माँग रहा हूँ।”
कार में सन्नाटा छा गया।
वो धीरे-धीरे, लेकिन साफ़-साफ़ बोला —
“अभी नहीं तो कभी और...
मेरे पास उसका नाम और सारी जानकारी है।
कॉलेज में भी आ सकता हूँ कभी... मिलने।”
मुझे डर लग गया।
मेरा शरीर सिहर गया।
अंकल ने गुस्से में चिल्लाकर कहा —
“मादरचोद... औकात दिखा दी ना अपनी!”
बिल्लू बिल्कुल नहीं डरा।
वो और ज़्यादा मुस्कुराया, अपने गंदे, गटके वाले दाँत दिखाते हुए बोला —
“तो तेरे साथ कौन-सा मर्ज़ी से कर रही है?
तूने भी तो किसी लड़के के साथ पकड़ा होगा तभी तो तुझे करने दे रही है...
वरना तू मुझसे भी काफी बड़ा है ना...
वो हँसा।
बहुत गंदी, बेशर्म हँसी।
“सुन... मैं कुछ ज़्यादा नहीं माँग रहा।
बस एक बार चखना चाहता हूँ इस माल को।
तूने तो पूरा मज़ा ले लिया... अब थोड़ा हिस्सा मुझे भी दे दे।”
अंकल ने अचानक कार साइड में रोकी।
इंजन बंद किया और बाहर निकल गया।
मुझे भी इशारा किया कि मैं भी उतर जाऊँ।
हम दोनों कार से नीचे उतरे और थोड़ा कोने में चले गए।
अंकल ने धीमी, लेकिन गंभीर आवाज़ में कहा —
“ये खतरनाक है... लेकिन सच ये भी है कि उसने हमें बचाया भी है।”
मैंने सिर्फ़ सिर हिलाया।
“हम्म...”
अंकल ने मेरी आँखों में देखा।
“तुम जानती हो वो क्या चाहता है?”
मैंने फिर सिर हिलाया।
“हम्म...”
मेरी आँखें भर आई थीं।
गला रुँध रहा था।
फिर भी मैंने हिम्मत करके कहा —
“मैं हैंडल कर लूँगी...”
अंकल ने एक लंबी साँस ली।
फिर मेरे सिर पर हाथ रखा और बोला —
“ठीक है...”
हम दोनों वापस कार में बैठ गए।
अंकल ने कार स्टार्ट की।
जैसे ही कार चलने लगी, अंकल ने बिल्लू की तरफ देखकर सख्त आवाज़ में कहा —
“जा... पीछे जा के बैठ जा... लड़की के साथ।”
कार अब मेरे कॉलेज की तरफ बढ़ रही थी।
मैं और बिल्लू पीछे की सीट पर बैठे थे।
अंकल आगे ड्राइव कर रहा था।
सन्नाटा था।
बहुत भारी सन्नाटा।
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
मैं डरी हुई थी... और चुपचाप उसके अगले कदम का इंतज़ार कर रही थी।
अचानक बिल्लू ने अपना गंदा हाथ पजामा की जेब में डाला।
कुछ ढूंढा और एक छोटा सा कपड़ा निकाला।
वो मेरी तरफ बढ़ाते हुए बोला —
“ये... तुम झोपड़ी में भूल गई थीं...”
उसने मेरी पैंटी मेरे सामने की।
पहले खुद उसको थोड़ा सूँघा... फिर मुझे थमा दी।
मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गई।
फिर... अचानक हँसी आ गई।
मेरे मुँह से निकल गई —
“हाहा...”
बिल्लू भी हँस पड़ा।
उसकी गंदी, बेशर्म हँसी कार में गूँज गई।
और ठीक उसी पल...
बिल्लू अचानक मेरे ऊपर आ गया।
बिल्लू ने अचानक मुझे कार की पिछली सीट के कोने में लिटा दिया।
उसका भारी, बदबूदार शरीर मेरे ऊपर आ गया।
पसीने, गटके, बीड़ी और पुरानी गंदगी की मिली
सकी आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।
उसके होंठ मेरे होंठों के बहुत करीब थे।
फिर उसने सिर घुमाकर अंकल की तरफ देखा।
एक शैतानी, गंदी मुस्कान दी और धीरे से बोला —
“खबूजा करेगा तो सब में बाँटेगा...”
अंकल पूरी तरह स्तब्ध रह गया।
उसने शायद सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसी गंदी, मजदूरों वाली भाषा इस्तेमाल
लेकिन उससे भी ज़्यादा शॉक उसको इस बात का लगा कि बिल्लू मुझे दोनों के बीच बाँटने की बात कर रहा है।
बिल्लू ने फिर मेरी तरफ मुड़कर मेरे होंठों पर अपना मुँह रख दिया।
पहला किस... बहुत गन्दा और अनाड़ी था।
वो बस मेरे होंठ चूस रहा था, जैसे कभी किस करना नहीं सीखा हो।
मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया।
मेरी आँखें रियर व्यू मिरर में अंकल को देख रही थीं।
अंकल भी मिरर में जितना हो सके हमें देख रहा था।
बिल्लू ने मेरे होंठ छोड़कर फुसफुसाया —
“मुँह खोल ना... जैसा साहब के लिए खोला था...”
मैंने धीरे से अपना मुँह खोल दिया।
बिल्लू का मुँह मेरे मुँह में घुस गया।
उसकी जीभ... गटके से लाल, गंदी और बदबूदार।
वो बहुत जोर से किस कर रहा था।
मैंने आँखें बंद कर लीं।
अंकल के लिए ये देखना और भी शॉकिंग था।
वो जानता था कि बिल्लू का मुँह कितना गंदा है।
उसके दाँत गटके से गहरे लाल और सड़े हुए थे।
यहाँ तक कि जो रंडियाँ वे लोग बुलाते थे, वे भी बिल्लू को किस करने से मना कर देती थीं।
बिल्लू ने किस करते हुए ही फुसफुसाया —
“क्या रंडी है यार...”
मैं अभी भी उसके नीचे दबी हुई थी।
उसका भारी शरीर मुझे दबाए हुए था।
कार तेज़ी से चल रही थी।
मैं पीछे की सीट पर बिल्लू के नीचे दबी हुई थी।
उसका भारी, बदबूदार शरीर मुझे दबाए हुए था।
उसके होंठ मेरे होंठों पर थे — गटके से लाल, गंदे, सड़े हुए दाँतों वाला मुँह।
मैंने पहला झटका महसूस किया जब उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसी।
गटके की कड़वाहट... तंबाकू की तेज़ बदबू... पुरानी सड़ाँध... सब कुछ मेरे मुँह में भर गया।
मेरा दिमाग चकरा गया।
मैंने आँखें बंद कर लीं।
शुरू में तो मैं बस सहन कर रही थी... लेकिन फिर... कुछ हुआ।
एक अजीब सा उन्माद मेरे शरीर में दौड़ गया।
डर... उत्तेजना... और एक नई, अनजानी लालसा।
मैंने खुद को रोकने की कोशिश की... लेकिन मेरे होंठ... खुद-ब-खुद उसकी जीभ से खेलने लगे।
मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी।
उसकी गंदी जीभ से खेलने लगी।
किस... बहुत गहरा... बहुत भूखा... बहुत जंगली हो गया।
बिल्लू हैरान था।
वो उम्मीद कर रहा था कि मैं घृणा से मुँह फेर लूँगी।
लेकिन मैंने नहीं फेरा।
मैंने और जोर से चूसा।
मेरे हाथ उसके कंधों पर चले गए।
उसने भी मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
उसकी खुरदरी हथेलियाँ मेरे गालों पर दब रही थीं।
उसके नाखून मेरी स्किन में गड़ रहे थे।
मैंने एक पल के लिए आँखें खोलीं।
रियर व्यू मिरर में अंकल की आँखें दिख रही थीं।
वो हमें देख रहा था।
उसका चेहरा... सदमे से भर गया था।
वो शायद सोच भी नहीं सकता था कि मैं... इतनी पढ़ी-लिखी, इतनी शालीन लड़की... बिल्लू जैसे गंदे आदमी के साथ... इतने जोश से किस कर रही हूँ।
उसके हाथ मेरी शर्ट के अंदर चले गए।
मेरे स्तनों पर... नरम-नरम दबाव डालते हुए... उँगलियाँ मेरे निप्पल्स के चारों ओर घुमा रहा था।
हर छुअन से मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ रही थी।
उसकी उत्तेजना... उसकी चाहत... साफ़ महसूस हो रही थी।
उसकी साँसें मेरे चेहरे पर गरम-गरम पड़ रही थीं।
फिर... मैंने धीरे से किस तोड़ा।
मेरा चेहरा बिल्लू से थोड़ा दूर किया।
हम दोनों एक पल के लिए एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे।
मैंने उसे देखा — उसकी गंदी, लाल आँखें... गटके से सने दाँत... पसीने से चिपचिपी त्वचा।
मैंने धीरे से मुस्कुराई।
अपना दायाँ अंगूठा उसके गाल पर रखा।
बहुत नरमी से... प्यार से... गाल पर रगड़ा।
बिल्लू की आँखें एक पल के लिए नरम पड़ गईं।
उसके मन में शायद ये ख्याल आया — “कितनी नेक औरत है ये...”
फिर मैंने धीरे से सिर घुमाया।
रियर व्यू मिरर में अंकल की आँखें दिख रही थीं।
वो हमें देख रहा था।
मेरे होंठ अभी भी गीले थे — हमारी लार से... बिल्लू के गटके वाले मुँह की लार से।
मैंने जानबूझकर... बहुत धीरे-धीरे... अपनी जीभ निकाली।
होंठों पर लगी सारी नमी को जीभ से चाट लिया।
अंकल की आँखें और चौड़ी हो गईं।
वो सदमे में था।
उसकी साँस अटक गई।
मैंने धीरे से अपना दायाँ हाथ उठाया।
तर्जनी उँगली से... रियर व्यू मिरर में अंकल को इशारा किया।
“आ जाओ...”
बिना बोले... सिर्फ़ उँगली से।
मैं खुद नहीं समझ पा रही थी कि मैं ये क्यों कर रही हूँ।
मुझे बस... अंकल को अपने पास चाह रही थी।
उसे भी... इस गंदे पल में शामिल करना चाह रही थी।
अंकल की आँखें मिरर में मेरी आँखों से टकराईं।
उसके चेहरे पर जलन साफ़ दिख रही थी।
वो कभी नहीं सोच सकता था कि मैं... बिल्लू जैसे गंदे आदमी के साथ... इतनी जल्दी घुल-मिल जाऊँगी।
उसकी आँखों में गुस्सा... ईर्ष्या... और एक अजीब सी बेचैनी थी।
मैंने उसे देखकर हल्की-सी wink मारी।
अचानक... अंकल ने स्टीयरिंग को तेज़ी से घुमाया।
कार ने तेज़ मोड़ लिया।
रास्ता छोड़कर... सीधे खेत की तरफ।
ऑफ-रोड... मिट्टी उड़ती हुई... झटके लगते हुए।
कार बीच खेत में रुक गई।
चारों तरफ... सिर्फ़ खेत... दूर-दूर तक कोई नहीं।
कोई गाड़ी... कोई इंसान... कोई आवाज़ नहीं।
अंकल ने इंजन बंद किया।
कार में सन्नाटा छा गया।
वो आगे से मुड़ा।
पीछे की सीट की तरफ देखा।
उसकी आँखें... मेरी आँखों में टिकी हुई थीं।
उसके चेहरे पर अब गुस्सा कम था... और कुछ और था — एक अजीब सी चाहत।
बिल्लू अभी भी मेरे ऊपर था।
अंकल ने आगे की सीट से उठकर पीछे आ गया।
कार की पिछली सीट पहले से ही तंग थी।
अब हम तीनों एक साथ बैठे थे — मैं बीच में, बिल्लू मेरी बाईं तरफ, अंकल दाईं तरफ।
सीट पर जगह कम थी... हमारे शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे।
मेरी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं।
दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था — डर, उत्तेजना, शर्म और एक अजीब सी लालसा सब मिलकर।
अंकल बहुत करीब आ गया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुई थीं।
उसकी नज़र में... जलन थी... लेकिन साथ ही बहुत गहरी चाहत भी।
वो मेरे होंठों को देख रहा था — जो अभी भी बिल्लू के गटके वाले किस से गीले और लाल थे।
वो जानता था... मेरे मुँह में अभी भी बिल्लू का स्वाद है।
फिर भी... वो मेरे होंठों पर झुक गया।
उसने मुझे बहुत गहराई से किस किया।
जैसे... बिल्लू के स्वाद को भी अपने अंदर ले लेना चाहता हो।
उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।
बहुत जोश से... बहुत भूख से।
मैंने भी जवाब दिया।
हम तीनों... इतने करीब थे कि बिल्लू की साँसें भी मेरे गाल पर पड़ रही थीं।
मैंने धीरे से किस तोड़ा।
उसकी आँखों में देखा।
फिर... बिल्लू की तरफ देखकर... नॉटी स्माइल के साथ बोली —
“तुम... उससे बेहतर किस करते हो।”
मेरा मतलब साफ़ था — बिल्लू से बेहतर।
अंकल एक पल के लिए स्तब्ध रह गया।
उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।
वो यकीन नहीं कर पा रहा था कि मैंने ये शब्द बोले हैं।
बिल्लू भी हैरान था।
लेकिन वो समझ गया कि मैं उसे चिढ़ा रही हूँ... और साथ ही अंकल की तारीफ कर रही हूँ।
वो सिर्फ़ कराह पा रहा था।
मैंने फिर से उसके लुंड को मुँह में लिया और ऊपर देखकर मीठे-मीठे स्वर में कहा —
“जब तुम झड़ोगे... तो मैं सारा का सारा निगल लूँगी... जैसे एक अच्छी लड़की करती है।
थूकना... बहुत बदतमीजी है।”
अंकल के मुँह से बस एक फुसफुसाहट निकली —
“ओह... नेहा...”
मैंने मुँह से लुंड निकालकर, ऊपर देखते हुए सेक्सी आवाज़ में पूछा —
“तुम्हें पसंद है ना... कि मैं तुम्हारा ये लंबा, मोटा लुंड चूस रही हूँ?”
फिर बिना जवाब का इंतज़ार किए, मैंने जितना हो सके उतना गहरा मुँह में ले लिया।
लुंड मेरे गले तक पहुँच गया।
मैं थोड़ा गैग हुई, लेकिन रुकी नहीं।
अंकल एकदम पागल हो गया।
उसने ज़ोर से चिल्लाकर कहा —
“चूस मेरे लुंड को, साली चूस अच्छे से!”
उसकी गाली सुनकर मेरे शरीर में करंट दौड़ गया।
मैंने और जोर से चूसना शुरू कर दिया — ऊपर-नीचे, तेज़-तेज़, गहराई तक।
अंकल का शरीर काँपने लगा।
उसने मेरे बालों को मुठ्ठी में कस लिया और कराहते हुए बोला —
“ओह ये बहुत अच्छा लग रहा है...
मुझे लगता है... मैं झड़ने वाला हूँ!”
उसने मेरे बालों को बहुत कसकर पकड़ लिया और एक ज़ोर की कराह के साथ झड़ गया।
“आह्ह्ह्ह... नेहा...!”
पहला झटका इतना तेज़ और मोटा था कि मेरे मुँह में तुरंत भर गया।
गाढ़ा, सफेद-पीला, क्रीमी तरल... बहुत ज़्यादा।
उसने महीनों से नहीं झड़ा था, और आज इस उत्तेजना में उसके अंडे पूरी तरह खाली हो गए।
मैंने जितना हो सके निगलने की कोशिश की, लेकिन इतना सारा था कि मेरा मुँह भर गया।
दूसरा, तीसरा और चौथा झटका... और भी ज़्यादा निकला।
मेरे मुँह के कोनों से सफेद तरल बहने लगा।
गर्म-गर्म... मेरी ठोड़ी पर... फिर मेरी शर्ट पर गिरा...
स्कर्ट के ऊपरी हिस्से पर भी फैल गया।
मैं अभी भी उसके लुंड को मुँह में लिए हुए थी।
उसका लुंड फड़क रहा था... आखिरी बूँदें भी निकल रही थीं।
मैंने जितना निगल सकी, निगल लिया... बाकी मेरे होंठों से, ठोड़ी से और कपड़ों पर बह रहा था।
अंकल की साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं।
वो कुर्सी पर पीछे टिका हुआ था, आँखें बंद, जैसे अभी-अभी स्वर्ग से नीचे आया हो।
मैंने ऊपर देखा।
अंकल की आँखें पूरी तरह बंद थीं।
उसका सिर कुर्सी के पीछे टिका हुआ था।
वो जैसे उस पल को अपने अंदर कैद कर रहा हो।
मैंने धीरे से उसका सारा वीर्य निगल लिया।
गला हल्का-सा ऊपर-नीचे हुआ।
मैं चाहती थी कि वो देखे... कि मैंने कितना सारा उसके मुँह में लिया था और निगल लिया।
लेकिन वो आँखें बंद किए हुए था।
मैंने उसके जाँघ पर हल्का-सा थपकी मारी।
“अंकल...”
वो धीरे से आँखें खोली।
मुझे देखा।
मैंने मुस्कुराते हुए पूछा —
“कैसा लगा?”
वो एक पल तक कुछ नहीं बोला।
फिर... बहुत धीमी, थकी हुई आवाज़ में बोला —
“तुम्हें... अच्छा लगा?”
मैंने सिर हिलाया।
मेरे होंठों पर अभी भी उसका वीर्य लगा हुआ था।
“हाँ... बहुत अच्छा लगा।
बहुत... बहुत ज़्यादा।”
मैं अभी भी फर्श पर घुटनों के बल बैठी हुई थी।
शर्ट और स्कर्ट पर उसके वीर्य की सफेद धारियाँ बिखरी हुई थीं।
मैंने अपनी ठोड़ी पर लगे वीर्य को उँगली से पोंछा और उसे देखते हुए मुस्कुराई।
सन्नाटा अच्छा लग रहा था।
अंकल बीयर की बोतल गले से लगाकर बड़े-बड़े घूँट ले रहा था।
मैं अभी भी फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी।
उसका लुंड मेरे हाथ में था — गीला, चिपचिपा, ढीला पड़ चुका था।
मैं धीरे-धीरे उसे सहला रही थी, उँगलियों से खेल रही थी।
तभी... बाहर की आवाज़ें अचानक कम हो गईं।
सामान्य हँसी-मज़ाक की जगह अब कुछ और सुनाई दे रहा था।
चप्पड़... चप्पड़...
“रंडी साली...”
“मादरचोद...”
मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
अचानक पर्दा हटाकर बिल्लू अंदर घुसा — साँस फूली हुई, चेहरा घबराया हुआ।
“साहब... सिक्युरिटी!
सिक्युरिटी आ गई है!
भागो... जल्दी भागो!”
अंकल एक पल में खड़ा हो गया।
उसने फटाफट पैंट ऊपर चढ़ाई, ज़िप लगाई।
मैं भी घबरा गई।
स्कर्ट नीचे की, शर्ट ठीक की।
मेरे मुँह, ठोड़ी और कपड़ों पर अभी भी उसका वीर्य लगा हुआ था।
अंकल ने पीछे की तरफ एक छोटा सा दरवाज़ा दिखाया।
“इधर से... जल्दी!”
सिक्युरिटी उस वक्त दूसरी झोपड़ी में थी — जहाँ वो दूसरा जोड़ा था।
वहाँ से ज़ोर-ज़ोर की चीखें और गालियाँ आ रही थीं।
हम तीनों — मैं, अंकल और बिल्लू — पीछे के दरवाज़े से निकले।
दौड़ते हुए कार की तरफ गए।
बिल्लू भी हमारे साथ दौड़ रहा था।
कार में बैठते ही बिल्लू भी पीछे की सीट पर घुस गया।
वो हाँफ रहा था।
“साहब... यहाँ रह गया तो मुझे भी पकड़ लेंगे...
अंकल ने तुरंत कार स्टार्ट की।
इंजन की आवाज़ हुई और हम तेज़ी से वहाँ से निकल लिए।
कार अब थोड़ी शांत गति से चल रही थी।
हमने पीछे मुड़कर देखा — कोई पीछा नहीं कर रहा था।
राहत की एक लंबी साँस निकली।
बिल्लू आगे वाली सीट पर बैठा था।
उसने मेरी जींस और पर्स को सामने वाली सीट से उठाया।
पर्स खोला, मेरी ID कार्ड निकाला और अच्छे से पढ़ने लगा।
फिर उसने धीरे से सिर घुमाया और मुझे देखा।
उसकी आँखों में हैरानी और एक अजीब सी चमक थी।
बिल्लू ने ID कार्ड को उँगलियों में घुमाते हुए कहा —
कुछ देर तक उसे ध्यान से पढ़ा।
फिर उसने सिर घुमाकर मुझे देखा।
उसकी आँखों में एक गंदी, हैरान और लालची चमक थी।
वो धीरे से, लेकिन बहुत गंदे अंदाज़ में बोला —
“अरे साली... तू तो कॉलेज में पढ़ती है?
पढ़ी-लिखी, ऊँची फैमिली की लड़की...
और अभी कुछ देर पहले झोपड़ी में घुटनों के बल बैठकर ड्राइवर का लुंड चूस रही थी...
मुँह में लेके चूस रही थी... और वो भी इतने शौक से...
बहुत शर्म नहीं आती तुझे?
इतनी पढ़ी-लिखी होकर भी... एक साधारण ड्राइवर के लुंड को चाट रही थी...
और उसका माल भी निगल लिया...
वाह बेटी... तू तो असली रंडी निकली।”
बिल्लू ने मेरी जींस को अपनी गोद में रखा, फिर मेरी तरफ देखकर और गंदे स्वर में बोला —
“नाम क्या है तेरा पूरा?
नेहा... है ना?
हम समझ गए... दोनों को देख लिया था...
दीवार तो पतली थी, छेद भी थे... सब साफ़ दिख रहा था।
अंकल एकदम भड़क गया।
उसने गुस्से में चिल्लाकर कहा —
“भैंचोद... अपना काम कर!
चुपचाप बैठ!”
बिल्लू भी तुरंत गरम हो गया।
उसने मुस्कुराते हुए, लेकिन धमकी भरे स्वर में जवाब दिया —
“अरे... अब जब मैंने तुम्हारी मदद कर दी, तो आँखें दिखा रहे हो?
अगर मैं सिक्युरिटी को न बताता तो क्या होता, पता है ना?
दोनों की हालत खराब हो जाती... खासकर इस पढ़ी-लिखी रंडी की।”
वो एक पल रुका, फिर सीधे मेरी तरफ देखते हुए बोला —
“मैं भी इसका स्वाद चखना चाहता हूँ...”
वाक्य अधूरा छोड़ दिया, लेकिन मतलब बिल्कुल साफ़ था।
अंकल ने गुस्से में लगभग हाथ उठा दिया।
वो चिल्लाया —
“भैंचोद... वो इन लड़कियों जैसी नहीं है!
एक शब्द और बोला तो...”
बिल्लू हँसा।
वो बिल्कुल डरा नहीं था।
उसने मेरी तरफ देखकर फिर कहा —
“तो फिर... क्या करोगे साहब?
मैंने तुम्हें बचाया... अब थोड़ा हिस्सा माँग रहा हूँ।”
कार में सन्नाटा छा गया।
वो धीरे-धीरे, लेकिन साफ़-साफ़ बोला —
“अभी नहीं तो कभी और...
मेरे पास उसका नाम और सारी जानकारी है।
कॉलेज में भी आ सकता हूँ कभी... मिलने।”
मुझे डर लग गया।
मेरा शरीर सिहर गया।
अंकल ने गुस्से में चिल्लाकर कहा —
“मादरचोद... औकात दिखा दी ना अपनी!”
बिल्लू बिल्कुल नहीं डरा।
वो और ज़्यादा मुस्कुराया, अपने गंदे, गटके वाले दाँत दिखाते हुए बोला —
“तो तेरे साथ कौन-सा मर्ज़ी से कर रही है?
तूने भी तो किसी लड़के के साथ पकड़ा होगा तभी तो तुझे करने दे रही है...
वरना तू मुझसे भी काफी बड़ा है ना...
वो हँसा।
बहुत गंदी, बेशर्म हँसी।
“सुन... मैं कुछ ज़्यादा नहीं माँग रहा।
बस एक बार चखना चाहता हूँ इस माल को।
तूने तो पूरा मज़ा ले लिया... अब थोड़ा हिस्सा मुझे भी दे दे।”
अंकल ने अचानक कार साइड में रोकी।
इंजन बंद किया और बाहर निकल गया।
मुझे भी इशारा किया कि मैं भी उतर जाऊँ।
हम दोनों कार से नीचे उतरे और थोड़ा कोने में चले गए।
अंकल ने धीमी, लेकिन गंभीर आवाज़ में कहा —
“ये खतरनाक है... लेकिन सच ये भी है कि उसने हमें बचाया भी है।”
मैंने सिर्फ़ सिर हिलाया।
“हम्म...”
अंकल ने मेरी आँखों में देखा।
“तुम जानती हो वो क्या चाहता है?”
मैंने फिर सिर हिलाया।
“हम्म...”
मेरी आँखें भर आई थीं।
गला रुँध रहा था।
फिर भी मैंने हिम्मत करके कहा —
“मैं हैंडल कर लूँगी...”
अंकल ने एक लंबी साँस ली।
फिर मेरे सिर पर हाथ रखा और बोला —
“ठीक है...”
हम दोनों वापस कार में बैठ गए।
अंकल ने कार स्टार्ट की।
जैसे ही कार चलने लगी, अंकल ने बिल्लू की तरफ देखकर सख्त आवाज़ में कहा —
“जा... पीछे जा के बैठ जा... लड़की के साथ।”
कार अब मेरे कॉलेज की तरफ बढ़ रही थी।
मैं और बिल्लू पीछे की सीट पर बैठे थे।
अंकल आगे ड्राइव कर रहा था।
सन्नाटा था।
बहुत भारी सन्नाटा।
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
मैं डरी हुई थी... और चुपचाप उसके अगले कदम का इंतज़ार कर रही थी।
अचानक बिल्लू ने अपना गंदा हाथ पजामा की जेब में डाला।
कुछ ढूंढा और एक छोटा सा कपड़ा निकाला।
वो मेरी तरफ बढ़ाते हुए बोला —
“ये... तुम झोपड़ी में भूल गई थीं...”
उसने मेरी पैंटी मेरे सामने की।
पहले खुद उसको थोड़ा सूँघा... फिर मुझे थमा दी।
मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गई।
फिर... अचानक हँसी आ गई।
मेरे मुँह से निकल गई —
“हाहा...”
बिल्लू भी हँस पड़ा।
उसकी गंदी, बेशर्म हँसी कार में गूँज गई।
और ठीक उसी पल...
बिल्लू अचानक मेरे ऊपर आ गया।
बिल्लू ने अचानक मुझे कार की पिछली सीट के कोने में लिटा दिया।
उसका भारी, बदबूदार शरीर मेरे ऊपर आ गया।
पसीने, गटके, बीड़ी और पुरानी गंदगी की मिली
सकी आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।
उसके होंठ मेरे होंठों के बहुत करीब थे।
फिर उसने सिर घुमाकर अंकल की तरफ देखा।
एक शैतानी, गंदी मुस्कान दी और धीरे से बोला —
“खबूजा करेगा तो सब में बाँटेगा...”
अंकल पूरी तरह स्तब्ध रह गया।
उसने शायद सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसी गंदी, मजदूरों वाली भाषा इस्तेमाल
लेकिन उससे भी ज़्यादा शॉक उसको इस बात का लगा कि बिल्लू मुझे दोनों के बीच बाँटने की बात कर रहा है।
बिल्लू ने फिर मेरी तरफ मुड़कर मेरे होंठों पर अपना मुँह रख दिया।
पहला किस... बहुत गन्दा और अनाड़ी था।
वो बस मेरे होंठ चूस रहा था, जैसे कभी किस करना नहीं सीखा हो।
मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया।
मेरी आँखें रियर व्यू मिरर में अंकल को देख रही थीं।
अंकल भी मिरर में जितना हो सके हमें देख रहा था।
बिल्लू ने मेरे होंठ छोड़कर फुसफुसाया —
“मुँह खोल ना... जैसा साहब के लिए खोला था...”
मैंने धीरे से अपना मुँह खोल दिया।
बिल्लू का मुँह मेरे मुँह में घुस गया।
उसकी जीभ... गटके से लाल, गंदी और बदबूदार।
वो बहुत जोर से किस कर रहा था।
मैंने आँखें बंद कर लीं।
अंकल के लिए ये देखना और भी शॉकिंग था।
वो जानता था कि बिल्लू का मुँह कितना गंदा है।
उसके दाँत गटके से गहरे लाल और सड़े हुए थे।
यहाँ तक कि जो रंडियाँ वे लोग बुलाते थे, वे भी बिल्लू को किस करने से मना कर देती थीं।
बिल्लू ने किस करते हुए ही फुसफुसाया —
“क्या रंडी है यार...”
मैं अभी भी उसके नीचे दबी हुई थी।
उसका भारी शरीर मुझे दबाए हुए था।
कार तेज़ी से चल रही थी।
मैं पीछे की सीट पर बिल्लू के नीचे दबी हुई थी।
उसका भारी, बदबूदार शरीर मुझे दबाए हुए था।
उसके होंठ मेरे होंठों पर थे — गटके से लाल, गंदे, सड़े हुए दाँतों वाला मुँह।
मैंने पहला झटका महसूस किया जब उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसी।
गटके की कड़वाहट... तंबाकू की तेज़ बदबू... पुरानी सड़ाँध... सब कुछ मेरे मुँह में भर गया।
मेरा दिमाग चकरा गया।
मैंने आँखें बंद कर लीं।
शुरू में तो मैं बस सहन कर रही थी... लेकिन फिर... कुछ हुआ।
एक अजीब सा उन्माद मेरे शरीर में दौड़ गया।
डर... उत्तेजना... और एक नई, अनजानी लालसा।
मैंने खुद को रोकने की कोशिश की... लेकिन मेरे होंठ... खुद-ब-खुद उसकी जीभ से खेलने लगे।
मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी।
उसकी गंदी जीभ से खेलने लगी।
किस... बहुत गहरा... बहुत भूखा... बहुत जंगली हो गया।
बिल्लू हैरान था।
वो उम्मीद कर रहा था कि मैं घृणा से मुँह फेर लूँगी।
लेकिन मैंने नहीं फेरा।
मैंने और जोर से चूसा।
मेरे हाथ उसके कंधों पर चले गए।
उसने भी मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
उसकी खुरदरी हथेलियाँ मेरे गालों पर दब रही थीं।
उसके नाखून मेरी स्किन में गड़ रहे थे।
मैंने एक पल के लिए आँखें खोलीं।
रियर व्यू मिरर में अंकल की आँखें दिख रही थीं।
वो हमें देख रहा था।
उसका चेहरा... सदमे से भर गया था।
वो शायद सोच भी नहीं सकता था कि मैं... इतनी पढ़ी-लिखी, इतनी शालीन लड़की... बिल्लू जैसे गंदे आदमी के साथ... इतने जोश से किस कर रही हूँ।
उसके हाथ मेरी शर्ट के अंदर चले गए।
मेरे स्तनों पर... नरम-नरम दबाव डालते हुए... उँगलियाँ मेरे निप्पल्स के चारों ओर घुमा रहा था।
हर छुअन से मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ रही थी।
उसकी उत्तेजना... उसकी चाहत... साफ़ महसूस हो रही थी।
उसकी साँसें मेरे चेहरे पर गरम-गरम पड़ रही थीं।
फिर... मैंने धीरे से किस तोड़ा।
मेरा चेहरा बिल्लू से थोड़ा दूर किया।
हम दोनों एक पल के लिए एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे।
मैंने उसे देखा — उसकी गंदी, लाल आँखें... गटके से सने दाँत... पसीने से चिपचिपी त्वचा।
मैंने धीरे से मुस्कुराई।
अपना दायाँ अंगूठा उसके गाल पर रखा।
बहुत नरमी से... प्यार से... गाल पर रगड़ा।
बिल्लू की आँखें एक पल के लिए नरम पड़ गईं।
उसके मन में शायद ये ख्याल आया — “कितनी नेक औरत है ये...”
फिर मैंने धीरे से सिर घुमाया।
रियर व्यू मिरर में अंकल की आँखें दिख रही थीं।
वो हमें देख रहा था।
मेरे होंठ अभी भी गीले थे — हमारी लार से... बिल्लू के गटके वाले मुँह की लार से।
मैंने जानबूझकर... बहुत धीरे-धीरे... अपनी जीभ निकाली।
होंठों पर लगी सारी नमी को जीभ से चाट लिया।
अंकल की आँखें और चौड़ी हो गईं।
वो सदमे में था।
उसकी साँस अटक गई।
मैंने धीरे से अपना दायाँ हाथ उठाया।
तर्जनी उँगली से... रियर व्यू मिरर में अंकल को इशारा किया।
“आ जाओ...”
बिना बोले... सिर्फ़ उँगली से।
मैं खुद नहीं समझ पा रही थी कि मैं ये क्यों कर रही हूँ।
मुझे बस... अंकल को अपने पास चाह रही थी।
उसे भी... इस गंदे पल में शामिल करना चाह रही थी।
अंकल की आँखें मिरर में मेरी आँखों से टकराईं।
उसके चेहरे पर जलन साफ़ दिख रही थी।
वो कभी नहीं सोच सकता था कि मैं... बिल्लू जैसे गंदे आदमी के साथ... इतनी जल्दी घुल-मिल जाऊँगी।
उसकी आँखों में गुस्सा... ईर्ष्या... और एक अजीब सी बेचैनी थी।
मैंने उसे देखकर हल्की-सी wink मारी।
अचानक... अंकल ने स्टीयरिंग को तेज़ी से घुमाया।
कार ने तेज़ मोड़ लिया।
रास्ता छोड़कर... सीधे खेत की तरफ।
ऑफ-रोड... मिट्टी उड़ती हुई... झटके लगते हुए।
कार बीच खेत में रुक गई।
चारों तरफ... सिर्फ़ खेत... दूर-दूर तक कोई नहीं।
कोई गाड़ी... कोई इंसान... कोई आवाज़ नहीं।
अंकल ने इंजन बंद किया।
कार में सन्नाटा छा गया।
वो आगे से मुड़ा।
पीछे की सीट की तरफ देखा।
उसकी आँखें... मेरी आँखों में टिकी हुई थीं।
उसके चेहरे पर अब गुस्सा कम था... और कुछ और था — एक अजीब सी चाहत।
बिल्लू अभी भी मेरे ऊपर था।
अंकल ने आगे की सीट से उठकर पीछे आ गया।
कार की पिछली सीट पहले से ही तंग थी।
अब हम तीनों एक साथ बैठे थे — मैं बीच में, बिल्लू मेरी बाईं तरफ, अंकल दाईं तरफ।
सीट पर जगह कम थी... हमारे शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे।
मेरी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं।
दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था — डर, उत्तेजना, शर्म और एक अजीब सी लालसा सब मिलकर।
अंकल बहुत करीब आ गया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुई थीं।
उसकी नज़र में... जलन थी... लेकिन साथ ही बहुत गहरी चाहत भी।
वो मेरे होंठों को देख रहा था — जो अभी भी बिल्लू के गटके वाले किस से गीले और लाल थे।
वो जानता था... मेरे मुँह में अभी भी बिल्लू का स्वाद है।
फिर भी... वो मेरे होंठों पर झुक गया।
उसने मुझे बहुत गहराई से किस किया।
जैसे... बिल्लू के स्वाद को भी अपने अंदर ले लेना चाहता हो।
उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।
बहुत जोश से... बहुत भूख से।
मैंने भी जवाब दिया।
हम तीनों... इतने करीब थे कि बिल्लू की साँसें भी मेरे गाल पर पड़ रही थीं।
मैंने धीरे से किस तोड़ा।
उसकी आँखों में देखा।
फिर... बिल्लू की तरफ देखकर... नॉटी स्माइल के साथ बोली —
“तुम... उससे बेहतर किस करते हो।”
मेरा मतलब साफ़ था — बिल्लू से बेहतर।
अंकल एक पल के लिए स्तब्ध रह गया।
उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।
वो यकीन नहीं कर पा रहा था कि मैंने ये शब्द बोले हैं।
बिल्लू भी हैरान था।
लेकिन वो समझ गया कि मैं उसे चिढ़ा रही हूँ... और साथ ही अंकल की तारीफ कर रही हूँ।


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