15-04-2026, 12:22 PM
मैं घुटनों पर बैठी थी।
अंकल की कुर्सी के सामने।
उसका लुंड... अभी भी सॉफ्ट था... लेकिन भारी, गरममैंने उसे दोनों हाथों में लिया।
धीरे से... अपने चेहरे पर रख दिया।
उसका गर्म, भारी लुंड... मेरे चेहरे पर फैल गया।
बॉल्स मेरी ठोड़ी पर... हेड मेरे माथे तक।
मैंने उसे अपनी स्किन पर दबाया—गाल पर, नाक पर, होंठों पर।
उसकी गंध... पसीना, प्रीकम, पेशाब... सब मिलकर... मेरे नाक में घुस गई।
बहुत तेज़... बहुत गंदी... लेकिन मुझे बहुत किक दे रही थी।अंकल... मुझे देख रहा था।
बीड़ी का कश ले रहा था।
धुआँ मेरे चेहरे पर आ रहा था।
उसकी आँखें... हैरान... एक्साइटेड... थोड़ा शर्मिंदा।
"क्या कर रही हो?"उसकी आवाज़ में एक्साइटमेंट था।
मैंने होंठ उसके लुंड पर रखे हुए ही... धीरे से कहा—
मेरे होंठ... उसके लुंड से टच होते हुए... हर शब्द उसके लुंड पर कंपन पैदा कर रहा था।
"कैसी लग रही हूँ?"
वो बीड़ी का कश लेता रहा।
धुआँ छोड़ते हुए... मुझे घूरता रहा।
फिर... धीरे से बोला—आवाज़ काँप रही थी—
"बहुत... बहुत सेक्सी लग रही हो।
मेरे लुंड को... अपने चेहरे पर... इस तरह... जैसे कोई ट्रॉफी हो।
नेहा... तुम... सच में... पागल हो।
लेकिन... मुझे... ये बहुत अच्छा लग रहा है।"
मैंने मुस्कुराकर उसके लुंड को अपने चेहरे पर और दबाया।
गाल पर... नाक पर... माथे पर... फिर होंठों पर।
उसके प्रीकम से मेरा माथा गीला हो रहा था।
मैंने छोटे-छोटे किस करने शुरू किए—उसकी पूरी लंबाई पर।
उसकी आँखें... हैरानी, एक्साइटमेंट और थोड़ा शॉक से भरी हुई थीं।
फिर... हँसते हुए बोला—
"तुम... मुझे पागल कर दोगी।
ये आइडिया... कहाँ से मिला तुम्हें?
मैंने हँसकर कहा—जैसे ये सबसे नॉर्मल बात हो—
"हर लड़की ये करती है।"
वो और ज्यादा हैरान हो गया।
उसने बीड़ी का कश लिया।
फिर... धीरे से बोला—
"क्या??"
मैंने उसकी आँखों में देखा।
फिर... मुस्कुराकर कहा—
"क्या?
क्यों?
क्या गलत कहा मैंने?"
वो कुछ नहीं बोला।
बस... मुझे देखता रहा।
उसके चेहरे पर... एक अजीब सा मिक्स था—मज़ा... शॉक... और थोड़ा डर।
मैंने उसके लुंड पर छोटे-छोटे किस जारी रखे।
फिर... टिप पर वापस आकर... हल्का-सा चूमा।
"ये... गंदा है..." उसने कहा—आवाज़ में थोड़ी हिचकिचाहट।
मैंने हँसकर कहा—
"नहीं... गंदा नहीं है।"
फिर... मैंने उसके हेड को होंठों से चूमा।
धीरे से... जीभ से छुआ।
वो और ज्यादा उत्तेजित हो गया।
उसने बीयर की बोतल उठाई।
एक बड़ा घूँट लिया।
फिर... मुझे देखते हुए बोला—
"तुमने... कभी किसी को... चूसा है?"
मैंने हँसकर... अपनी गिगल वाली आवाज़ में कहा—
"नहीं... लेकिन... आज... ट्राई कर रही हूँ।"
वो बीयर का घूँट और लिया।
उसकी आँखें... अब पूरी तरह जल रही थीं।
मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ में शरारत और क्यूरियोसिटी—
"क्या किसी ने... कभी तुम्हारा लुंड चूसा है?"
वो एक पल के लिए रुका।
बीड़ी का कश लिया।
फिर... धीरे से बोला—
"सच में... कभी नहीं।
मतलब... मेरी बीवी ने... एक बार... सिर्फ़ कुछ सेकंड के लिए... और वो भी... हमारे शादी के पूरे जीवन में सिर्फ़ एक बार।"
मैंने दुखी चेहरा बनाया।
"वाह... ये तो बहुत बुरा है।"
वो हँसा—थोड़ा शर्माते हुए।
"नहीं... बुरा नहीं है।
यही समस्या है... मैंने कभी शिकायत नहीं की।"
मैंने मुस्कुराकर उसके लुंड का फोरस्किन धीरे से पीछे सरकाया।
पर्पल हेड... पूरी तरह बाहर आ गया।
मैंने जीभ की नोक से... सिर्फ़ टिप को छुआ।
धीरे से... हल्का-सा चाटा।
फिर... जीभ को थोड़ा और इस्तेमाल करते हुए... और अच्छे से चाटा।
"मम्म्म्ह्ह्ह..."
वो बस इतना ही कह पाया।
उसकी साँस रुक गई।
मैंने ऊपर देखा।
उसकी आँखों में देखकर मुस्कुराई।
"कम्फर्टेबल हो?"
फिर... बिना जवाब का इंतज़ार किए... अपने होंठ उसके लुंड पर रख दिए।
धीरे से... ऊपर-नीचे... सहलाने लगी।
मेरा मुँह... उसके लुंड को गर्म और गीला कर रहा था।
वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरता रहा।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
वो बस कराह रहा था—बहुत गहरी, बहुत दबी हुई कराह।
मैं... धीरे-धीरे... और गहराई से... उसे चूसने लगी।
अंकल ने कराहते हुए कहा—
"तुम्हे पता है, अगर तुम नहीं चाहते तो आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं है।"
मैंने मुस्कुराकर ऊपर देखा।
उसकी आँखों में देखकर बोली—
"मुझे बिलकुल भी आपत्ति नहीं है."
मैंने फिर से उसके लुंड को मुँह में लिया।
धीरे-धीरे... गहराई में।
ये मेरा पहला लुंड था।
गर्म... मोटा... नमकीन... और मेरे मुँह में... बहुत अलग... बहुत अच्छा लग रहा था।
मैंने पहली बार एक्सपीरियंस किया था... और मुझे तुरंत पसंद आ गया।
मैंने और जोर से चूसना शुरू कर दिया।
ऊपर-नीचे... तेज़... गहरा।
सिर पीछे की तरफ झुक गया।
वो लगभग चिल्लाया—
"ओह... यह तुम्हारी चूत से बेहतर है!"
उसके हाथ मेरे कानों को सहलाने लगे।
बहुत प्यार से... लेकिन उत्तेजित होकर।
मैंने और तेज़ चूसना शुरू कर दिया।
मेरा सिर ऊपर-नीचे हो रहा था।
उसका लुंड... मेरे मुँह में पूरी तरह गर्म और फड़क रहा था।
मैंने पहली बार महसूस किया... कि लुंड चूसना... कितना पावरफुल फीलिंग देता है।
मैं... पूरी तरह उसमें खो गई थी।
मेरा मुंह... उसके लुंड को गीला और चमकदार बना रहा था।
अंकल... बार-बार कराह रहा था... जैसे स्वर्ग में हो।
"नेहा... तुम... बहुत अच्छा... कर रही हो...
आह्ह... ये... स्वर्ग जैसा है..."
मेरी जीभ उसके बड़े, मोटे हेड के चारों ओर घुमा रही थी — धीरे-धीरे, गोल-गोल, बहुत प्यार से।
एक हाथ से मैं उसके लुंड को ऊपर-नीचे सहला रही थी, जबकि दूसरा हाथ... बहुत नरम तरीके से... उसके भारी अंडों को दबा रहा था।
पूरा दिमाग सिर्फ़ एक जगह पर था — मेरी जीभ।
हर चक्कर... हर चाट... हर छोटा-सा चूसना... अजीब सा रोमांच दे रहा था।
मैं महसूस कर रही थी कि वो करीब आ रहा है।
उसके अंडे मेरे हाथ में सिकुड़ने लगे थे।
उसके लुंड से और ज़्यादा प्रीकम निकल रहा था — गाढ़ा, नमकीन, गरम।
मैं उसे चख रही थी।
हर बूँद मेरी जीभ पर।
अंकल की साँसें बहुत तेज़ और बेतरतीब हो गई थीं।
वो बार-बार फुसफुसा रहा था, जैसे खुद से बात कर रहा हो —
“ये सच है... या मैं सपना देख रहा हूँ?
क्या दूसरों के साथ भी ऐसा होता है... जो किस्मत वाले होते हैं?”
मैंने ऊपर देखा।उसकी आँखों में देखकर... मुस्कुराई।
फिर... एक शरारती आँख मारी।
मुझे अचानक एहसास हुआ कि वो इस वक्त खुद को राजा समझ रहा होगा।
एक साधारण ड्राइवर... जिसकी उम्र मेरे पापा के बराबर है... और मैं — पढ़ी-लिखी, जवान, सुंदर लड़की... जिसके बारे में मेरी उम्र के लड़के सपने देखते हैं... उसके पैरों के बीच फर्श पर बैठी हुई... उसका लुंड चूस रही हूँ।
मैंने सारी वो चीजें कीं जो मैंने पोर्न में देखी थीं — अपनी पहली बार में ही।
जीभ से हेड घुमाया, ऊपर-नीचे चूसा, हाथ से सहलाया।
फिर मैंने नीचे झुककर उसके अंडों को चाटना शुरू कर दिया।
वे बालों से भरे थे... पसीने और गंदगी से सने हुए... लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
मैंने पूरी जीभ से उन्हें चाटा।
अंकल ने झटके से कराहते हुए चिल्लाया —
“ओह्ह... प्लीज... ये गंदा है...”
मैंने ऊपर देखा, उसकी आँखों में देखकर सेक्सी मुस्कान दी और बोली —
“अरे... तुम्हें अपने लुंड का ख्याल रखना चाहिए... इसे काफी ध्यान देना चाहिए... तुम्हारे पास इतना मोटा और तगड़ा लुंड है...”
मैंने उसकी आँखों में देखते हुए मुस्कुराकर कहा —
“ओह गॉड नेहा... तुम कितनी गंदी हो...”
मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया —
“तुम्हें ये पसंद है ना... कि मेरे मुँह में तुम्हारा गरम, सख्त लुंड हो... और मैं गंदी-गंदी बातें कर रही हूँ...”
अंकल जैसे उड़ गया।
उसकी साँसें रुक गईं।
अंकल की कुर्सी के सामने।
उसका लुंड... अभी भी सॉफ्ट था... लेकिन भारी, गरममैंने उसे दोनों हाथों में लिया।
धीरे से... अपने चेहरे पर रख दिया।
उसका गर्म, भारी लुंड... मेरे चेहरे पर फैल गया।
बॉल्स मेरी ठोड़ी पर... हेड मेरे माथे तक।
मैंने उसे अपनी स्किन पर दबाया—गाल पर, नाक पर, होंठों पर।
उसकी गंध... पसीना, प्रीकम, पेशाब... सब मिलकर... मेरे नाक में घुस गई।
बहुत तेज़... बहुत गंदी... लेकिन मुझे बहुत किक दे रही थी।अंकल... मुझे देख रहा था।
बीड़ी का कश ले रहा था।
धुआँ मेरे चेहरे पर आ रहा था।
उसकी आँखें... हैरान... एक्साइटेड... थोड़ा शर्मिंदा।
"क्या कर रही हो?"उसकी आवाज़ में एक्साइटमेंट था।
मैंने होंठ उसके लुंड पर रखे हुए ही... धीरे से कहा—
मेरे होंठ... उसके लुंड से टच होते हुए... हर शब्द उसके लुंड पर कंपन पैदा कर रहा था।
"कैसी लग रही हूँ?"
वो बीड़ी का कश लेता रहा।
धुआँ छोड़ते हुए... मुझे घूरता रहा।
फिर... धीरे से बोला—आवाज़ काँप रही थी—
"बहुत... बहुत सेक्सी लग रही हो।
मेरे लुंड को... अपने चेहरे पर... इस तरह... जैसे कोई ट्रॉफी हो।
नेहा... तुम... सच में... पागल हो।
लेकिन... मुझे... ये बहुत अच्छा लग रहा है।"
मैंने मुस्कुराकर उसके लुंड को अपने चेहरे पर और दबाया।
गाल पर... नाक पर... माथे पर... फिर होंठों पर।
उसके प्रीकम से मेरा माथा गीला हो रहा था।
मैंने छोटे-छोटे किस करने शुरू किए—उसकी पूरी लंबाई पर।
उसकी आँखें... हैरानी, एक्साइटमेंट और थोड़ा शॉक से भरी हुई थीं।
फिर... हँसते हुए बोला—
"तुम... मुझे पागल कर दोगी।
ये आइडिया... कहाँ से मिला तुम्हें?
मैंने हँसकर कहा—जैसे ये सबसे नॉर्मल बात हो—
"हर लड़की ये करती है।"
वो और ज्यादा हैरान हो गया।
उसने बीड़ी का कश लिया।
फिर... धीरे से बोला—
"क्या??"
मैंने उसकी आँखों में देखा।
फिर... मुस्कुराकर कहा—
"क्या?
क्यों?
क्या गलत कहा मैंने?"
वो कुछ नहीं बोला।
बस... मुझे देखता रहा।
उसके चेहरे पर... एक अजीब सा मिक्स था—मज़ा... शॉक... और थोड़ा डर।
मैंने उसके लुंड पर छोटे-छोटे किस जारी रखे।
फिर... टिप पर वापस आकर... हल्का-सा चूमा।
"ये... गंदा है..." उसने कहा—आवाज़ में थोड़ी हिचकिचाहट।
मैंने हँसकर कहा—
"नहीं... गंदा नहीं है।"
फिर... मैंने उसके हेड को होंठों से चूमा।
धीरे से... जीभ से छुआ।
वो और ज्यादा उत्तेजित हो गया।
उसने बीयर की बोतल उठाई।
एक बड़ा घूँट लिया।
फिर... मुझे देखते हुए बोला—
"तुमने... कभी किसी को... चूसा है?"
मैंने हँसकर... अपनी गिगल वाली आवाज़ में कहा—
"नहीं... लेकिन... आज... ट्राई कर रही हूँ।"
वो बीयर का घूँट और लिया।
उसकी आँखें... अब पूरी तरह जल रही थीं।
मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ में शरारत और क्यूरियोसिटी—
"क्या किसी ने... कभी तुम्हारा लुंड चूसा है?"
वो एक पल के लिए रुका।
बीड़ी का कश लिया।
फिर... धीरे से बोला—
"सच में... कभी नहीं।
मतलब... मेरी बीवी ने... एक बार... सिर्फ़ कुछ सेकंड के लिए... और वो भी... हमारे शादी के पूरे जीवन में सिर्फ़ एक बार।"
मैंने दुखी चेहरा बनाया।
"वाह... ये तो बहुत बुरा है।"
वो हँसा—थोड़ा शर्माते हुए।
"नहीं... बुरा नहीं है।
यही समस्या है... मैंने कभी शिकायत नहीं की।"
मैंने मुस्कुराकर उसके लुंड का फोरस्किन धीरे से पीछे सरकाया।
पर्पल हेड... पूरी तरह बाहर आ गया।
मैंने जीभ की नोक से... सिर्फ़ टिप को छुआ।
धीरे से... हल्का-सा चाटा।
फिर... जीभ को थोड़ा और इस्तेमाल करते हुए... और अच्छे से चाटा।
"मम्म्म्ह्ह्ह..."
वो बस इतना ही कह पाया।
उसकी साँस रुक गई।
मैंने ऊपर देखा।
उसकी आँखों में देखकर मुस्कुराई।
"कम्फर्टेबल हो?"
फिर... बिना जवाब का इंतज़ार किए... अपने होंठ उसके लुंड पर रख दिए।
धीरे से... ऊपर-नीचे... सहलाने लगी।
मेरा मुँह... उसके लुंड को गर्म और गीला कर रहा था।
वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरता रहा।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
वो बस कराह रहा था—बहुत गहरी, बहुत दबी हुई कराह।
मैं... धीरे-धीरे... और गहराई से... उसे चूसने लगी।
अंकल ने कराहते हुए कहा—
"तुम्हे पता है, अगर तुम नहीं चाहते तो आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं है।"
मैंने मुस्कुराकर ऊपर देखा।
उसकी आँखों में देखकर बोली—
"मुझे बिलकुल भी आपत्ति नहीं है."
मैंने फिर से उसके लुंड को मुँह में लिया।
धीरे-धीरे... गहराई में।
ये मेरा पहला लुंड था।
गर्म... मोटा... नमकीन... और मेरे मुँह में... बहुत अलग... बहुत अच्छा लग रहा था।
मैंने पहली बार एक्सपीरियंस किया था... और मुझे तुरंत पसंद आ गया।
मैंने और जोर से चूसना शुरू कर दिया।
ऊपर-नीचे... तेज़... गहरा।
सिर पीछे की तरफ झुक गया।
वो लगभग चिल्लाया—
"ओह... यह तुम्हारी चूत से बेहतर है!"
उसके हाथ मेरे कानों को सहलाने लगे।
बहुत प्यार से... लेकिन उत्तेजित होकर।
मैंने और तेज़ चूसना शुरू कर दिया।
मेरा सिर ऊपर-नीचे हो रहा था।
उसका लुंड... मेरे मुँह में पूरी तरह गर्म और फड़क रहा था।
मैंने पहली बार महसूस किया... कि लुंड चूसना... कितना पावरफुल फीलिंग देता है।
मैं... पूरी तरह उसमें खो गई थी।
मेरा मुंह... उसके लुंड को गीला और चमकदार बना रहा था।
अंकल... बार-बार कराह रहा था... जैसे स्वर्ग में हो।
"नेहा... तुम... बहुत अच्छा... कर रही हो...
आह्ह... ये... स्वर्ग जैसा है..."
मेरी जीभ उसके बड़े, मोटे हेड के चारों ओर घुमा रही थी — धीरे-धीरे, गोल-गोल, बहुत प्यार से।
एक हाथ से मैं उसके लुंड को ऊपर-नीचे सहला रही थी, जबकि दूसरा हाथ... बहुत नरम तरीके से... उसके भारी अंडों को दबा रहा था।
पूरा दिमाग सिर्फ़ एक जगह पर था — मेरी जीभ।
हर चक्कर... हर चाट... हर छोटा-सा चूसना... अजीब सा रोमांच दे रहा था।
मैं महसूस कर रही थी कि वो करीब आ रहा है।
उसके अंडे मेरे हाथ में सिकुड़ने लगे थे।
उसके लुंड से और ज़्यादा प्रीकम निकल रहा था — गाढ़ा, नमकीन, गरम।
मैं उसे चख रही थी।
हर बूँद मेरी जीभ पर।
अंकल की साँसें बहुत तेज़ और बेतरतीब हो गई थीं।
वो बार-बार फुसफुसा रहा था, जैसे खुद से बात कर रहा हो —
“ये सच है... या मैं सपना देख रहा हूँ?
क्या दूसरों के साथ भी ऐसा होता है... जो किस्मत वाले होते हैं?”
मैंने ऊपर देखा।उसकी आँखों में देखकर... मुस्कुराई।
फिर... एक शरारती आँख मारी।
मुझे अचानक एहसास हुआ कि वो इस वक्त खुद को राजा समझ रहा होगा।
एक साधारण ड्राइवर... जिसकी उम्र मेरे पापा के बराबर है... और मैं — पढ़ी-लिखी, जवान, सुंदर लड़की... जिसके बारे में मेरी उम्र के लड़के सपने देखते हैं... उसके पैरों के बीच फर्श पर बैठी हुई... उसका लुंड चूस रही हूँ।
मैंने सारी वो चीजें कीं जो मैंने पोर्न में देखी थीं — अपनी पहली बार में ही।
जीभ से हेड घुमाया, ऊपर-नीचे चूसा, हाथ से सहलाया।
फिर मैंने नीचे झुककर उसके अंडों को चाटना शुरू कर दिया।
वे बालों से भरे थे... पसीने और गंदगी से सने हुए... लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
मैंने पूरी जीभ से उन्हें चाटा।
अंकल ने झटके से कराहते हुए चिल्लाया —
“ओह्ह... प्लीज... ये गंदा है...”
मैंने ऊपर देखा, उसकी आँखों में देखकर सेक्सी मुस्कान दी और बोली —
“अरे... तुम्हें अपने लुंड का ख्याल रखना चाहिए... इसे काफी ध्यान देना चाहिए... तुम्हारे पास इतना मोटा और तगड़ा लुंड है...”
मैंने उसकी आँखों में देखते हुए मुस्कुराकर कहा —
“ओह गॉड नेहा... तुम कितनी गंदी हो...”
मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया —
“तुम्हें ये पसंद है ना... कि मेरे मुँह में तुम्हारा गरम, सख्त लुंड हो... और मैं गंदी-गंदी बातें कर रही हूँ...”
अंकल जैसे उड़ गया।
उसकी साँसें रुक गईं।


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