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Adultery Adventure of sam and neha
#53
कमरा... छोटा था।

एक पुरानी मेज़... दो टूटी-फूटी कुर्सियाँ... और एक पलंग।

मैट्रेस पर कोई चादर नहीं।

रंग... लगभग काला... गंदगी से... चिकना... ग्रीस से भरा हुआ।

किनारों पर पीले-भूरे दाग... पसीने के... और कुछ और के।

हवा में... पसीने की तेज़ गंध... पुरानी दारू की... और कुछ ऐसा... जो मुझे एक साथ घिन और थ्रिल दे रहा था।

मैंने चारों तरफ देखा।

दीवारें पतली... लकड़ी की... बीच-बीच में छेद।

पर्दा हल्का-सा हिल रहा था—बाहर से हवा आ रही थी।

कभी-कभी... बाहर की फुसफुसाहट... हँसी... ट्रक का हॉर्न... सब सुनाई दे रहा था।

अंकल मेरी तरफ मुड़ा।

उसकी आँखें... अभी भी जल रही थीं।

वो धीरे से बोला—

"नेहा... ये जगह... वैसी नहीं है... जैसी तुम सोच रही होगी।

XXXXXXXXXXXXX


अभी

मेरा सिर नेहा की जांघों के बीच में है।

उसकी पैंटी पहले ही गायब हो चुकी है—कहीं फर्श पर पड़ी होगी, गीली और मुड़ी हुई।

उसकी चूत मेरे मुँह के ठीक सामने है—गीली, गरम, थोड़ी सूजी हुई, उसकी खुशबू मेरी नाक में घुस रही है।

मैं जीभ से उसे चाट रहा हूँ—धीरे-धीरे, लंबे स्ट्रोक में, क्लिट पर हल्का-सा दबाव डालते हुए।

उसकी उँगलियाँ मेरे बालों में हैं—धीरे-धीरे ब्रश कर रही हैं, जैसे कोई बच्चा सहला रहा हो।

वो कराह रही है—बहुत धीमी, बहुत गहरी—

"येस... सैम... ऐसे ही... और गहरा... अपनी जीभ अंदर डालो..."

उसकी आवाज़ मेरे कानों में गूँज रही है।

मैंने जीभ को और अंदर डाला—उसकी दीवारें मेरी जीभ पर कस रही हैं, गीली और गरम।

उसका रस मेरे होंठों पर फैल रहा है—नमकीन, मीठा, बहुत ज्यादा।

मैं... पूरी तरह उसमें डूबा हुआ हूँ।

लेकिन... मेरा दिमाग... कहीं और है।

उसकी कहानी... अभी भी मेरे सिर में घूम रही है।

झोपड़ी... पतली दीवारें... पर्दा... गंदा मैट्रेस... पसीने की गंध...

अंकल... उसका लुंड मेरे दिमाग में है।

बड़ा... मोटा... गरम।


मैंने अपना सिर नेहा की चूत से ऊपर उठाया।

उसका रस मेरे होंठों पर... मेरी ठोड़ी पर... अभी भी चिपका हुआ था।

मैंने उसकी आँखों में देखा।

वो मुझे देख रही थी—आँखें आधी बंद, होंठ थोड़े खुले, साँसें तेज़।


उसकी उँगलियाँ मेरे बालों में अभी भी थीं—धीरे से ब्रश कर रही थीं।

वो जानती थी... मैं क्या चाहता हूँ।

मैं कुछ नहीं बोला।

बस... नज़रों से कहा—कंटिन्यू करो।

वो मुस्कुराई—एक गहरी, सेक्सी मुस्कान।

फिर... धीरे से कहानी फिर से शुरू की—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली चाहत...


"हम... झोपड़ी में थे।

एक-दूसरे को देख रहे थे।

लग रहा था... अब सच में अकेले हैं।

बाहर की आवाज़ें... हल्की-हल्की आ रही थीं... लेकिन अंदर... सिर्फ़ हम दोनों।

समय कम था।

बहुत कम।

हम... जल्दी से एक-दूसरे से लिपट गए।

मेरे स्तन... उसके चौड़े सीने से दब गए।

उसका सीना... बहुत स्ट्रॉन्ग... बहुत गरम।

उसके एक हाथ... मेरी गांड पर... स्कर्ट के ऊपर से।

दूसरा हाथ... मेरे चेहरे पर।

स्कार्फ उतारा।

मेरा चेहरा... उसके सामने।

उसने मेरी ठोड़ी ऊपर की।

हमारे होंठ मिले।

गहरा किस।

बहुत लंबा... बहुत इंटेंस।

जैसे... बहुत पुराने प्रेमी मिले हों।

हमारे शरीर... एक-दूसरे से रगड़ रहे थे।

उसकी उँगलियाँ मेरी गांड पर दबाव डाल रही थीं... मेरे स्तन उसके सीने से दबे हुए... मेरी चूत उसके लुंड से रगड़ रही थी।

हम... एक-दूसरे में खो गए थे।

समय... रुक गया था।

बस... वो पल... वो स्पर्श... वो चाहत।"

मैं... उसकी बातें सुनते हुए... उसकी चूत को फिर से चाटने लगा।

धीरे-धीरे... लंबे स्ट्रोक में।

अंकल ने मुझे दीवार से सटा रखा था।

उसके हाथ... मेरे शरीर पर हर जगह घूम रहे थे।

मेरे स्तनों पर... कमर पर... गांड पर... जांघों पर।

लेकिन... वो कपड़े नहीं खोल रहा था।

स्कर्ट अभी भी नीचे थी... शर्ट के बटन बंद।

उसका दिमाग... बार-बार झोपड़ी के पर्दे की तरफ जा रहा था।

वो हर कुछ सेकंड में सिर घुमाकर देखता था—कोई देख तो नहीं रहा।

पर्दा हल्का-सा हिल रहा था—बाहर से हवा आ रही थी।

उसकी आँखें... सतर्क थीं... लेकिन उसकी उँगलियाँ... अभी भी मेरे शरीर पर खेल रही थीं।

उसकी कॉन्फिडेंस... बढ़ रही थी।

मैं समझ गई—ये उसके लिए भी नया था।

पहली बार... किसी के साथ... इतने खुले में... इतने रिस्क पर।

उसके हाथ... धीरे से मेरी शर्ट के नीचे चले गए।

शर्ट को ऊपर उठाया।

मेरे स्तन... नंगे... उसके सामने।

वो... एक पल के लिए... रुक गया।

उन्हें देखा—जैसे पहली बार देख रहा हो।

फिर... झुका।

एक निप्पल को मुँह में लिया।

चूसा।

धीरे से... फिर गहरा।

उसकी जीभ... मेरे निप्पल पर सर्कल बना रही थी।

मैं... सिहर गई।

"आह्ह...

वो दूसरा स्तन भी चूसने लगा।

फिर... एक पल के लिए... फिर से पर्दे की तरफ देखा।

कोई नहीं था।

वो फिर मेरी तरफ मुड़ा।

मेरी शर्ट को और ऊपर किया।

मेरे स्तन पूरी तरह बाहर।

वो... फिर से चूसने लगा।

बहुत जोर से... बहुत गहराई से।

मैं कराह रही थी—धीमी... लेकिन गहरी।

अंकल ने मेरे स्तनों से मुँह हटाया।

उसकी साँसें मेरे चेहरे पर गरम लग रही थीं।

उसने धीरे से मेरी शर्ट नीचे की।

मेरी साँसें बहुत तेज़ थीं।

छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।

उसकी ऊँचाई... मे गर्दन तक आ रही थी।

मैंने उसकी गर्दन पर होंठ रख दिए।

गर्दन... पसीने से गीली।

नमकीन स्वाद।

मैंने जीभ से चाटा—धीरे से...

उसकी गर्दन पर... उसकी नसें फड़क रही थीं।

मैंने उसके सीने की तरफ मुँह ले जाया।

शर्ट के ऊपर से... उसके निप्पल्स को दाँतों से छुआ।

हल्का-सा काटा।

वो सिहर गया।

एक छोटी सी कराह निकली—बहुत दबी हुई।

वो मुझे देखता रहा।

उसकी आँखें... बहुत गहरी।

उसका एक हाथ... मेरी कमर पर... फिर पेट पर।

उसकी उँगलियाँ... मेरे नाभि में चली गईं।

बहुत गहरी नाभि में... उँगली अंदर।

नाखून... हल्के से अंदर।

वो... नाभि में खेल रहा था—जैसे कुछ निकालना चाहता हो।

उँगली घुमा रहा था... दबा रहा था... फिर हल्का-सा खींच रहा था।

टिकलिंग... बहुत ज्यादा।

शरीर काँप रहा था।

धीरे से बोला—

"तुम्हारी नाभि... इतनी गहरी... इतनी सॉफ्ट... मैं... इसमें खो सकता हूँ।"

"तो... खो जाओ..."

हमारी साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर लग रही थीं।

अंकल का टेंट... मेरे ऊपरी पेट पर दब रहा था—सख्त, गरम, पैंट के कपड़े से भी महसूस हो रहा था।

मेरा हाथ... बिना सोचे... नीचे चला गया।

पैंट की ज़िप पकड़ी... नीचे की।

उसका लुंड बाहर आया—फड़कता हुआ, बड़ा, गर्म।

मैंने चारों तरफ देखा—क्या कोई देख रहा है?

पर्दा हल्का-सा हिल रहा था... बाहर से हल्की आवाज़ें आ रही थीं... लेकिन कोई नहीं था।

अंकल ने मेरी तरफ देखा।

उसकी आँखें... बहुत शांत... लेकिन बहुत भूखी।

वो धीरे से बोला—

"इट्स ओके... हम मर्द हैं... कोई देख ले तो... मैं फाइन हूँ।"

उसने एक झटके में पैंट और अंडअंकलयर दोनों नीचे कर दिए।

अब उसके नीचे... कुछ नहीं।

सिर्फ़ शर्ट।

उसका लुंड... मेरे सामने... पूरी तरह नंगा।

बड़े... भारी... लटकते हुए बैल्स... पहली बार इतने करीब से देख रही थी।

मैंने हाथ बढ़ाया... उन्हें कप किया।

नरम... गरम... भारी।

उसने सिहरकर कराहा—बहुत धीमी।

उसका हाथ... अब मेरी जांघों पर।

धीरे-धीरे... स्कर्ट ऊपर उठाता रहा।

उसकी उँगलियाँ मेरी पैंटी पर पहुँचीं।

धीरे से... पैंटी नीचे सरकाई।

मैंने भी मदद की—कमर उठाकर... पैंटी पैरों से निकाली।

पैंटी फर्श पर गिर गई।

स्कर्ट... वैसी ही रह गई—ऊपर सरकी हुई।

मेरी चूत... अब पूरी तरह नंगी...

अंकल ने मुझे पलंग पर बैठाया।

मैट्रेस गंदा था—काला, चिकना

मैं स्कर्ट और शर्ट में थी—पूरी तरह ड्रेस्ड, लेकिन पैंटी नहीं।

वो मुझे पीठ के बल लिटाया।

मेरे पैरों को बिस्तर पर ऊपर उठाया।

स्कर्ट घुटनों तक सरक गई—मेरी चूत छुपी हुई थी, लेकिन सिर्फ़ स्कर्ट के कारण।


वो जानता था... अगर कोई आ जाए... तो स्कर्ट नीचे खींचकर सब छुपा सकता है।

उसकी जल्दबाज़ी साफ़ दिख रही थी।

वो जल्दी से इसे खत्म करना चाहता था—शायद डर था... शायद ज्यादा समय नहीं था।

मैं जानती थी... वो क्या चाहता है।

और... मैं भी... उतना ही चाहती थी।

उसका हाथ उसके लुंड पर गया।

उसने टिप को मेरी चूत पर एडजस्ट किया।

मैंने महसूस किया—उसके प्रीकम की गर्म बूँद मेरी चूत के मुंह पर लगी।

लेकिन... बहुत टाइट था।

उसका कॉक हेड... बहुत बड़ा

दर्द हुआ—तेज़, गहरा।

मेरे चेहरे पर दर्द साफ़ दिख रहा था।

मैंने कुछ नहीं कहा।

बस... दाँत भींचे... तैयार रही।

वो रुक गया।

मेरी आँखों में देखा।


फिर... धीरे से पूछा—आवाज़ में थोड़ा हैरान, थोड़ा डर—

"कितने लुंड... तुमने पहले लिए हैं?"

मैंने सीधे उसकी आँखों में देखकर कहा—

"कोई नहीं।"

वो स्तब्ध रह गया।

उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।

वो... जैसे यकीन नहीं कर पा रहा था।

तभी... पर्दे के पीछे से आवाज़ आई—

"सर... आपकी बीयर... नमकीन... और..."

वो अंदर आ चुका था।

बिल्लू।

उसकी आँखें... अंकल की नंगी गांड पर टिक गईं।

वो देख रहा था—अंकल मेरे ऊपर... लुंड मेरी चूत के मुंह पर... धक्का देने वाला।

लेकिन... मेरी चूत... दिख नहीं रही थी—अंकल के शरीर ने छुपा रखा था।

वो मेरे चेहरे को देख सकता था।

मेरा दर्द... मेरी आँखें... मेरी साँसें।

अंकल ने झटके से सिर घुमाया।

उसका चेहरा लाल हो गया।

वो चिल्लाया—आवाज़ में गुस्सा और शर्म—

"बाहर निकलो!

क्या देख रहा है?"

बिल्लू हँसा—गंदी, बेशर्म हँसी।

ट्रे हाथ में थी—बीयर की बोतल... नमकीन का पैकेट।

वो बोला—

"सॉरी साहब... बस... सर्व करने आया था।

वो बाहर निकल गया।

पर्दा गिरा।

लेकिन... उसकी हँसी... अभी भी सुनाई दे रही थी।

अंकल तुरंत उठ गया।

उसका लुंड... अभी भी सख्त... मेरी चूत के मुंह पर से हट गया।


वो खड़ा हो गया।

मैंने जल्दी से स्कर्ट नीचे की।

बिस्तर पर बैठ गई।

दोनों पैर बंद किए।

शरीर छुपाया।

अंकल ने बीड़ी निकाली।

जलाई।

कुर्सी पर बैठ गया।

कश लगाया।

कुछ देर चुप रहा।

फिर... धीरे से बोला—आवाज़ में बहुत अफसोस... बहुत गिल्ट—

"मैं... सॉरी... बहुत सॉरी।

मुझे नहीं करना चाहिए था।

मेरी भी एक बेटी है... तुम्हारी उम्र की होगी।

अगर... कुछ हो गया... तुम्हारी इमेज... सब बर्बाद हो जाएगा।"

मैंने फ्रस्ट्रेशन में कहा—

"ओह्ह... कुछ नहीं होगा...

मैं उठी।

उसके पास गई।

उसके बालों में उँगलियाँ फेरीं।

वो नीचे देख रहा था।

फिर... धीरे से बोला—

"तुमने पहले बताया क्यों नहीं... कि तुम वर्जिन हो?"


मैंने हैरानी से कहा—

"क्यों?

ये तो अच्छी बात है ना... कि मैं वर्जिन हूँ?"


वो बीड़ी का कश लिया।

फिर... धीरे से बोला—

"तुम जानती हो... मैं अपनी बीवी के साथ हनीमून पर था... पहली बार... जब मैंने किया... खून आया।

हम... घबरा गए।

हॉस्पिटल भागे।

डॉक्टर ने... बहुत कुछ कहा।

उसके लिए... बहुत दर्द हुआ।

बहुत समय लगा... इस साइज़ को एडजस्ट करने में।

मैं... ये ट्रॉमा... नहीं चाहता... तुम पर।

अगर... कुछ गड़बड़ हुई... डॉक्टर सबसे पहले पूछेगा... कैसे हुआ?

सब जानते हैं कैसे होता है... लेकिन... वो सवाल... तुम्हें... और तुम्हारे परिवार को... बहुत शर्मिंदगी देगा।"


अंकल अब नीचे पूरी तरह नंगा था।

पैंट और अंडअंकलयर फर्श पर पड़े थे।

उसका लुंड अब सॉफ्ट हो चुका था—अभी भी बड़ा... लेकिन अब फड़कन नहीं थी।

वो कुर्सी पर बैठा था... बीड़ी का कश ले रहा था।

धुआँ मेरे चेहरे पर आ रहा था—नमकीन, कड़वा, पुरानी बीड़ी का स्वाद।

मैं उसके सामने खड़ी थी—स्कर्ट नीचे, शर्ट के बटन बंद, लेकिन मेरी साँसें अभी भी तेज़ थीं।

मैंने उसके बालों में उँगलियाँ फेरीं—धीरे-धीरे, प्यार से।

वो मेरी तरफ देखा।

फिर... धीरे से बोला—आवाज़ में बहुत अफसोस... बहुत गिल्ट—

"इट्स ओके... हम फक नहीं करेंगे।"

उसकी बातें... मेरे दिमाग में गूँज रही थीं।

दर्द... रिस्क... हॉस्पिटल... डॉक्टर के सवाल... इमेज... परिवार... सब कुछ।

उसकी हर बात... बहुत मायने रख रही थी।

ये जगह.... बहुत अनजाना था।

अगर दर्द बहुत हुआ... अगर कुछ गड़बड़ हुई... तो क्या होगा?

मैं... अकेली... यहाँ... किसी को नहीं बता सकती थी।

उसकी हर बात... सच्ची लग रही थी।

और... सबसे बड़ी बात—वो ये सब मेरे लिए कर रहा था।

मेरी केयर कर रहा था।

मुझे बचाने की कोशिश कर रहा था।

ये... मुझे बहुत एक्साइट कर रहा था।

उसका प्यार... उसकी फिक्र... उसकी वो ईमानदारी...

मैंने झुककर उसके सॉफ्ट लुंड को हाथ में लिया।

धीरे से सहलाया।

फिर... मुस्कुराकर कहा—

"देखो... तुमने क्या कर दिया उसके साथ... "

अंकल ने मेरी तरफ देखा।

फिर... हँस पड़ा।

एक गहरी, थकी हुई, लेकिन बहुत खुश हँसी।

"तुम... कभी नहीं बदलती... नेहा।"

"तुमने इसे डरा दिया... अभी तक मैंने ठीक से देखा भी नहीं था।"

वो मुस्कुराया—एक थकी हुई, लेकिन खुश मुस्कान।

मैं घुटनों पर बैठ गई।

उसकी कुर्सी के सामने।

उसने अपनी कुर्सी को थोड़ा घुमाया—पीठ पर्दे की तरफ, ताकि अगर कोई आए... तो हमें एडजस्ट करने का समय मिल जाए।

वो अभी भी बीड़ी पी रहा था।

धुआँ मेरे चेहरे पर आ रहा था—नमकीन, कड़वा।

मैंने उसके लुंड को अच्छे से देखा।

पहली बार... इतने करीब से... इतनी अच्छी तरह।

मजबूत... मोटा... बड़ा हेड... पबिक हेयर्स घने, काले।

गंध... बहुत तेज़—पसीना, प्रीकम, पेशाब... सब मिलकर।

एक अजीब सी खुशबू—गंदी, लेकिन मुझे बहुत किक दे रही थी।

मैंने उसे हाथ में लिया।

अपने चेहरे के पास लाया।
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Messages In This Thread
Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-02-2026, 04:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 17-02-2026, 10:06 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 04:47 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 06:31 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 19-02-2026, 10:42 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 10:51 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 02:14 PM
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RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 11:00 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 21-02-2026, 05:29 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 21-02-2026, 05:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 21-02-2026, 07:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 22-02-2026, 11:55 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 22-02-2026, 12:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 24-02-2026, 12:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 25-02-2026, 01:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by BHOG LO - 25-02-2026, 01:21 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 28-02-2026, 02:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 28-02-2026, 04:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:20 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:24 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 07-03-2026, 12:08 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 09-03-2026, 12:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 12-03-2026, 10:56 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 12-03-2026, 11:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 12-03-2026, 01:09 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 14-03-2026, 07:22 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 15-03-2026, 01:35 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Vkpawar - 15-03-2026, 12:53 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 16-03-2026, 02:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 16-03-2026, 05:28 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 17-03-2026, 09:39 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 17-03-2026, 09:49 AM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 17-03-2026, 05:53 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:13 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 03:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 19-03-2026, 05:57 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 25-03-2026, 08:11 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 02-04-2026, 12:57 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:30 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:34 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:58 PM
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RE: Adventure of sam and neha - by Glenlivet - 09-04-2026, 07:33 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 09-04-2026, 07:59 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 12-04-2026, 01:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:02 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:22 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - Yesterday, 12:00 AM



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