14-04-2026, 02:35 PM
(This post was last modified: 14-04-2026, 02:36 PM by maitripatel. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
देखते है उधर मेनका क्या कर रही है.................
मेनका का दिल अब कही भी नही लगता था। ऑफीस मे उसने मन लगाने की बहुत कोशिश की पर उसमे कामयाब नही हुई। ऑफीस आते हुए 15-20 दिन गुज़र गये थे पर उसे सब बोझ जैसा लगता था। वो ऐसे ही कुर्सी पे बैठी काग़ज़ उलट-पलट रही थी और बीते दीनो को याद कर रही थी। वो जब डील साइन करने उनके साथ गयी थी तो उनकी बहू बनकर और लौटी उनके दिल की रानी बनकर। वो होटेल के कमरे मे दोनो की पहली रात....फिर यहा....और तभी उसके दिमाग़ मे एरपोर्ट पे सपरू साहब से हुई मुलाकात का ख़याल आया।
सपरू साहब! हाँ! क्यू ना वो मिल्स मे अपना हिस्सा उन्हे बेच दे। फिर वो यहा से शहर रहने चली जाएगी। राजपुरा तो अब उसे काटने को दौड़ता था। उसने तुरंत सेशाद्री साहब से बात की। उन्हे भी ख़याल अच्छा लगा। मेनका काम पे ठीक से ध्यान दे नही रही थी और इस से अभी तक तो नुकसान नही हुआ पर आगे हो सकता था। दोनो ने जर्मन पार्ट्नर्स से बात की तो वो भी राज़ी हो गये। मैत्री रचित.
मेनका फ़ौरन अपनी माँ के साथ देल्ही रवाना हो गयी। वहा सपरू साहब के सामने जब उसने अपना प्रपोज़ल रखा तो मानो उन्हे मुँह माँगी मुराद मिल गयी। देल्ही से वापस आते हुए मेनका की माँ अपने घर चली गयी और मेनका शाम ढले राजपुरा पहुँची।
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मेनका का दिल अब कही भी नही लगता था। ऑफीस मे उसने मन लगाने की बहुत कोशिश की पर उसमे कामयाब नही हुई। ऑफीस आते हुए 15-20 दिन गुज़र गये थे पर उसे सब बोझ जैसा लगता था। वो ऐसे ही कुर्सी पे बैठी काग़ज़ उलट-पलट रही थी और बीते दीनो को याद कर रही थी। वो जब डील साइन करने उनके साथ गयी थी तो उनकी बहू बनकर और लौटी उनके दिल की रानी बनकर। वो होटेल के कमरे मे दोनो की पहली रात....फिर यहा....और तभी उसके दिमाग़ मे एरपोर्ट पे सपरू साहब से हुई मुलाकात का ख़याल आया।
सपरू साहब! हाँ! क्यू ना वो मिल्स मे अपना हिस्सा उन्हे बेच दे। फिर वो यहा से शहर रहने चली जाएगी। राजपुरा तो अब उसे काटने को दौड़ता था। उसने तुरंत सेशाद्री साहब से बात की। उन्हे भी ख़याल अच्छा लगा। मेनका काम पे ठीक से ध्यान दे नही रही थी और इस से अभी तक तो नुकसान नही हुआ पर आगे हो सकता था। दोनो ने जर्मन पार्ट्नर्स से बात की तो वो भी राज़ी हो गये। मैत्री रचित.
मेनका फ़ौरन अपनी माँ के साथ देल्ही रवाना हो गयी। वहा सपरू साहब के सामने जब उसने अपना प्रपोज़ल रखा तो मानो उन्हे मुँह माँगी मुराद मिल गयी। देल्ही से वापस आते हुए मेनका की माँ अपने घर चली गयी और मेनका शाम ढले राजपुरा पहुँची।
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