14-04-2026, 02:33 PM
"उपरवाले का भी अजीब ढंग है,जब्बार साहब। पहले तो इंसान के दिल मे किसी चीज़ की चाह जगाता है और जब इंसान मेहनत-मशक्कत के बाद उस चीज़ को पाने के काबिल हो जाता है तो उपरवाला उस चीज़ का वजूद ही मिटा देता है। पिछले 26 सालों से मैं बस एक ही मक़सद के लिए काम कर रहा था और आज जब उसे पूरा करने आया तो.... ।"
"तो क्या,सोढी साहब? मैत्री की पेशकश.
"छोडिये। आप राजपुरा से हैं ना?"
"जी।"
"तो आपको मेरी बात बुरी लग सकती है।"
"क्यू?"
"क्यूकी जिस ख़ानदान की बात मे कर रहा हू, उसे आपके गाव मे भगवान की तरह पूजा जाता है।"
"आप राजकुल की बात कर रहे हैं?"
"जी,हाँ। राजकुल! जिसने मेरी ज़िंदगी का रुख़ मोड़ दिया।"
"सोढी साहब,यकीन मानिए,जितनी नफ़रत आपके दिल मे उस परिवार के लिए है,उस से कही ज़्यादा मेरे सीने मे है।"
"क्या?"
"जी,हाँ। सोढी साहब और अगर आप मुझे इतने भरोसे के काबिल समझते हैं कि आपका दर्द बाँट साकु तो मैं आपको अभी भी उस परिवार से बदला लेने की तरकीब बता सकता हू।"
"ठीक है,जब्बार साहब। वैसे भी ये कोई बहुत गहरा राज़ नही है। आज से 26 साल पहले मैं राजपुरा आया था। मैं एक बहुत ग़रीब परिवार से हू। पॉलिटेक्निक से पढ़ने के बाद मेरी नौकरी राजकुल शुगर मिल मे लगी। रहने के लिए वही गाव मे एक फ़ौजी के घर मे एक कमरा ले लिया। फ़ौजी कभी-कभार ही घर आता था और यहा केवल उसकी बीवी रहती थी। वो बला की खूबसूरत थी। मैं नौजवान था और वो भी मर्द के जिस्म के लिए तड़पति रहती थी। थोड़े ही दीनो मे हुमारे ताल्लुक़ात बन गये। बात केवल जिस्मो की आग बुझाने से शुरू हुई थी पर जल्द ही हम एक दूसरे को दिल-ओ-जान से चाहने लगे।",उसने ग्लास खाली कर दिया। मैत्री रचित कहानी.
"..कहते हैं ना कि इश्क़ और मुश्क छुपाये नही छुपते। हमारे इश्क़ की खबर भी फैल गयी और जब फ़ौजी आया तो उसने हंगमा शुरू कर दिया। उसकी बीवी मेरे साथ जाना चाहती थी और मैं भी उसे ले जाने को तैयार था। पर बात फ़ौजी की आन की थी,वो सीधा राजा यशवीर के बाप राजा सूर्यप्रताप के पास फ़रियाद लेकर पहुँच गया और उसने अपना हुक्म सुना दिया। मुझे नौकरी से निकाल कर गाव से बाहर फिकवा दिया। इतना ही नही,मुझे आवारा घोषित कर दिया और इस वजह से मुझे कही और नौकरी नही मिली।"
"काई महीनो तक मैं खाक छानता रहा और फिर किसी ने मुझे जमैका मे एक नौकरी दिलवाई। वहा पहुँच कर मैने अपने आप को हर तरह से मज़बूत कर लिया केवल एक बात के लिए,मुझे सूर्यपरताप के बेटे यशवीर को उसके बाप के किए की सज़ा देनी थी,पर आया तो पता चला कि वो कार आक्सिडेंट मे मारा गया।"
"अब बताइए अपनी तरकीब?"
"सोढी साहब, आप राजकुल की मिल्स क्यू नही खरीद लेते? आप पैसे लगाइए मैं उसे यहा चलाऊँगा। पार्ट्नरशिप कर लेते हैं और हर महीने आपको मुनाफ़े की रकम मिलती जाएगी। मेरे दिल को तो इसी बात से सुकून मिलता रहेगा कि राजा की मिल्स मेरे हाथों मे हैं।"
"पर क्या मिल्स बिकाउ हैं?"
"अगर नही हैं तो हो जाएँगी। उसकी आप फ़िक्र मत करो।"
"जब्बार भाई,आपने अभी तक अपनी कहानी नही सुनाई।"
"सुनाऊंगा,सोढी साहब,ज़रूर सुनाऊंगा, वक़्त आने दीजिए। आपने हमे अपना राज़दार बनाया है तो मैं भी वादा निभाऊँगा।"
"ठीक है। मैं भी आप पे भरोसा करता हू।",दोनो ने हाथ मिलाया।
-------------------------------------------------------------------------------
बने रहिये दोस्तों..................
कहानी अभी जारी है......
"तो क्या,सोढी साहब? मैत्री की पेशकश.
"छोडिये। आप राजपुरा से हैं ना?"
"जी।"
"तो आपको मेरी बात बुरी लग सकती है।"
"क्यू?"
"क्यूकी जिस ख़ानदान की बात मे कर रहा हू, उसे आपके गाव मे भगवान की तरह पूजा जाता है।"
"आप राजकुल की बात कर रहे हैं?"
"जी,हाँ। राजकुल! जिसने मेरी ज़िंदगी का रुख़ मोड़ दिया।"
"सोढी साहब,यकीन मानिए,जितनी नफ़रत आपके दिल मे उस परिवार के लिए है,उस से कही ज़्यादा मेरे सीने मे है।"
"क्या?"
"जी,हाँ। सोढी साहब और अगर आप मुझे इतने भरोसे के काबिल समझते हैं कि आपका दर्द बाँट साकु तो मैं आपको अभी भी उस परिवार से बदला लेने की तरकीब बता सकता हू।"
"ठीक है,जब्बार साहब। वैसे भी ये कोई बहुत गहरा राज़ नही है। आज से 26 साल पहले मैं राजपुरा आया था। मैं एक बहुत ग़रीब परिवार से हू। पॉलिटेक्निक से पढ़ने के बाद मेरी नौकरी राजकुल शुगर मिल मे लगी। रहने के लिए वही गाव मे एक फ़ौजी के घर मे एक कमरा ले लिया। फ़ौजी कभी-कभार ही घर आता था और यहा केवल उसकी बीवी रहती थी। वो बला की खूबसूरत थी। मैं नौजवान था और वो भी मर्द के जिस्म के लिए तड़पति रहती थी। थोड़े ही दीनो मे हुमारे ताल्लुक़ात बन गये। बात केवल जिस्मो की आग बुझाने से शुरू हुई थी पर जल्द ही हम एक दूसरे को दिल-ओ-जान से चाहने लगे।",उसने ग्लास खाली कर दिया। मैत्री रचित कहानी.
"..कहते हैं ना कि इश्क़ और मुश्क छुपाये नही छुपते। हमारे इश्क़ की खबर भी फैल गयी और जब फ़ौजी आया तो उसने हंगमा शुरू कर दिया। उसकी बीवी मेरे साथ जाना चाहती थी और मैं भी उसे ले जाने को तैयार था। पर बात फ़ौजी की आन की थी,वो सीधा राजा यशवीर के बाप राजा सूर्यप्रताप के पास फ़रियाद लेकर पहुँच गया और उसने अपना हुक्म सुना दिया। मुझे नौकरी से निकाल कर गाव से बाहर फिकवा दिया। इतना ही नही,मुझे आवारा घोषित कर दिया और इस वजह से मुझे कही और नौकरी नही मिली।"
"काई महीनो तक मैं खाक छानता रहा और फिर किसी ने मुझे जमैका मे एक नौकरी दिलवाई। वहा पहुँच कर मैने अपने आप को हर तरह से मज़बूत कर लिया केवल एक बात के लिए,मुझे सूर्यपरताप के बेटे यशवीर को उसके बाप के किए की सज़ा देनी थी,पर आया तो पता चला कि वो कार आक्सिडेंट मे मारा गया।"
"अब बताइए अपनी तरकीब?"
"सोढी साहब, आप राजकुल की मिल्स क्यू नही खरीद लेते? आप पैसे लगाइए मैं उसे यहा चलाऊँगा। पार्ट्नरशिप कर लेते हैं और हर महीने आपको मुनाफ़े की रकम मिलती जाएगी। मेरे दिल को तो इसी बात से सुकून मिलता रहेगा कि राजा की मिल्स मेरे हाथों मे हैं।"
"पर क्या मिल्स बिकाउ हैं?"
"अगर नही हैं तो हो जाएँगी। उसकी आप फ़िक्र मत करो।"
"जब्बार भाई,आपने अभी तक अपनी कहानी नही सुनाई।"
"सुनाऊंगा,सोढी साहब,ज़रूर सुनाऊंगा, वक़्त आने दीजिए। आपने हमे अपना राज़दार बनाया है तो मैं भी वादा निभाऊँगा।"
"ठीक है। मैं भी आप पे भरोसा करता हू।",दोनो ने हाथ मिलाया।
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कहानी अभी जारी है......


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