13-04-2026, 08:42 PM
(This post was last modified: 13-04-2026, 10:31 PM by Pramod_Bhasin. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
धीरे-धीरे, कौषिक उसके और करीब आया। उसने अपना दूसरा हाथ मौशुमीके गाल पर रखा, और उसे अपनी ओर झुकाया। मौशुमीने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसकी ओर और झुक गई। उनके होंठ एक-दूसरे से मिले, पहले हल्के से, फिर एक तीव्र आवेग के साथ। यह एक साधारण चुंबन नहीं था; यह एक प्यास थी, एक भूख थी। मौशुमी के होंठों पर कौषिक के होंठों का दबाव बढ़ा, और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, जैसे वह इस पल में पूरी तरह डूब जाना चाहती हो।
कौषिक ने उसके ऊपरी होंठ को अपने होंठों में भर लिया, उसे धीरे से चूसा, फिर नीचे वाले होंठ पर अपनी जीभ फेरी। मौशुमी ने अपने होंठ खोल दिए, और कौषिक की जीभ उसके मुँह में अंदर चली गई। उनकी जीभें एक-दूसरे से टकराईं, एक उत्तेजक नृत्य में उलझ गईं। मौशुमी ने भी अपनी जीभ से कौषिक की जीभ को छूना शुरू किया, उसकी हर हरकत का जवाब देती हुई। उनके मुँह में लार का आदान-प्रदान हो रहा था, एक मीठा, नमकीन स्वाद जो उनके हर रोम को झकझोर रहा था।
जैसे-जैसे चुंबन गहरा होता गया, कौषिकका हाथ मौशुमी की कमर की ओर बढ़ा। उसने धीरे से उसकी साड़ी के पल्लू को हटाया, और उसकी कमर को अपनी उँगलियों से सहलाया। मौशुमी ने एक गहरी आह भरी, उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपने हाथ कौषिक के बालों में फँसा दिए, उसकी उँगलियाँ उसके घने बालों में उलझ गईं, उसे और करीब खींचती हुईं।
कौषिक ने चुंबन तोड़ दिया, उसकी साँसें तेज़ी से चल रही थीं। उसकी आँखें मौशुमी की आँखों में गहराई से झाँक रही थीं, उनमें एक आग जल रही थी। मौशुमी का चेहरा लाल हो चुका था, उसके होंठ सूजे हुए थे, और उसकी आँखें चमक रही थीं।
"माँ..." कौषिक ने काहा, उसकी आवाज़ भारी हो चुकी थी।
मौशुमी ने कोई जवाब नहीं दिया, बस उसकी आँखों में देखती रही। उसके भीतर की आग अब पूरी तरह से भड़क चुकी थी। कौषिक का हाथ उसकी साड़ी के ऊपर से, उसके ब्लाउज के बटनों की ओर बढ़ा। उसकी उँगलियों ने पहला बटन खोला, फिर दूसरा, फिर तीसरा। मौशुमी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी। कौषिकने धीरे से उसके ब्लाउज के फांकों को अलग किया, और फिर उसके साधारण सूती ब्रा के कप्स को निचे की तरफ खींचा। ब्रा के हटते ही, मौशुमी के भरे हुए बूब्स आज़ाद हो गए, हवा में साँस लेते हुए।
कौषिक ने एक गहरी साँस ली, उसकी नज़रें उसके बूब्स पर टिकी थीं। वे गोल, भारी, और हल्के सांवले रंग के थे, उनके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे और और उसके निप्पल्स उत्तेजना से कड़े हो चुके थे। उसने धीरे से अपना मुँह उसके एक बूब्स पर रखा, और उसके निप्पल को अपने होंठों में भर लिया। उसने धीरे-धीरे उसे चूसना शुरू किय। मौशुमी ने एक ज़ोरदार आह भरी, उसकी कमर बिस्तर पर से थोड़ी ऊपर उठ गई। उसने अपने हाथ कौषिक के सिर पर रखे, उसे अपने बूब्स पर और कसती हुई।
कौषिक ने निप्पल को अपनी जीभ से गोल-गोल घुमाया, फिर उसे अपने दाँतों से धीरे से काटा। मौशुमी की साँसें तेज़ी से चलने लगीं, उसके मुँह से धीमी, उत्तेजित आवाज़ें निकल रही थीं। कौषिकने एक बूब्स को चूसना बंद किया, और दूसरे पर अपना मुँह रखा, उसे भी उसी शिद्दत से चूसने लगा। उसके मुँह में मौशुमी के बूब्स का कोमल मांस और उसके निप्पल का कड़ापन, एक अद्भुत एहसास पैदा कर रहा था। उसकी जीभ की हर हरकत, उसके होंठों का हर दबाव, मौशुमी के शरीर में बिजली दौड़ा रहा था।
"आह... मागो..." मौशुमी ने काहा, उसकी आवाज़ में दर्द और आनंद का मिश्रण था।
कौषिक ने उसके बूब्स को छोड़ दिया, उसके होंठ गीले और चमकीले थे। उसने मौशुमी की ओर देखा, उसकी आँखों में एक जंगलीपन था। उसने धीरे से उसे बिस्तर पर घुटनों के बल आने का इशारा किया। मौशुमी ने बिना किसी सवाल के उसकी बात मानी। वह धीरे से बिस्तर पर घुटनों के बल आ गई, उसकी पीठ कौषिक की ओर थी।


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