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Adultery बुरा ना मानो होली है-Bura na mano holi hai
#5
राजबीर तुरंत उसके पास आया। "क्या हुआ चैताली जी? तबीयत ठीक नहीं लग रही?" उसके चेहरे पर बनावटी चिंता थी।

"पता नहीं... चक्कर आ रहे हैं... और नींद भी आ रही है।" चैताली की पलकें भारी होने लगीं।

राजबीर ने आर्यन और आकाश को फिर से इशारा किया। "लगता है गर्मी लग गई है आपको। आइए, आपको अंदर किसी ठंडी जगह ले चलते हैं।"

वह चैताली को सहारा देने के लिए आगे बढ़ा। चैताली का शरीर अब पूरी तरह से ढीला पड़ चुका था। उसके पैर लड़खड़ा रहे थे, और उसने राजबीर का सहारा ले लिया। राजबीर ने एक हाथ उसके कमर पर रखा, और उसके हाथ का स्पर्श चैताली को अजीब सा लगा, लेकिन उसके पास विरोध करने की शक्ति नहीं बची थी।

"चलो आर्यन, आकाश, मदद करो।" राजबीर ने कहा।

आर्यन और आकाश दोनों चैताली के दूसरी तरफ आए और उन्हें पकड़ लिया। चैताली का भारी शरीर उसके कंधों पर लटक गया। उसके चोली और घाघरा अब रंगों से और पसीने से गीला हो चुका था। उसके बालों की लटें उसके चेहरे पर चिपक गई थीं। उसके आँखें अब लगभग बंद थीं।

"किस क्लासरूम में ले चलें सर?" आकाश ने फुसफुसाते हुए पूछा।

"सबसे आखिर वाला, जहाँ कोई नहीं जाता।" राजबीर ने कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी ठंडक थी।

तीनों चैताली को घसीटते हुए कॉलेज के गलियारों से होते हुए, सबसे आखिर वाले, खाली क्लासरूम की ओर बढ़ चले। गलियारे में सन्नाटा था, क्योंकि सारे बच्चे और शिक्षक पार्टी के शोरगुल में मग्न थे। चैताली का शरीर हर कदम पर झूल रहा था, उसके घघरे का कपड़ा ज़मीन पर घिसट रहा था।

खाली क्लासरूम का दरवाज़ा खुला। अंदर धूल और बंद हवा की गंध थी। खिड़कियों से हल्की रोशनी आ रही थी, जिससे कमरे में एक धुंधला सा माहौल था। उसने चैताली को ज़मीन पर गिरा दिया, उसके कमर और कूल्हों पर एक हल्की सी चोट आई, लेकिन वह इतनी बेहोश थीं कि उन्हें महसूस नहीं हुआ।

राजबीर ने दरवाज़ा बंद किया और अंदर से कुंडी लगा दी। कमरे में अंधेरा और बढ़ गया।

"तो... अब क्या सर?" आकाश ने पूछा, उसकी आवाज़ में थोड़ी घबराहट थी।

राजबीर ने एक मुस्कान दी। "अब वही जो करना है।" उसकी आँखें चैताली के अर्ध-बेहोश शरीर पर टिकी थीं। चैताली की साँसें तेज़ हो रही थीं, उसके होंठ हल्के से खुले थे, और उसके चूची हर साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
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RE: बुरा ना मानो होली है-Bura na mano holi hai - by MohdIqbal - 13-04-2026, 01:51 AM



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