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Adultery बुरा ना मानो होली है-Bura na mano holi hai
#4
पी.टी. टीचर राजबीर राणा, एक मजबूत कद-काठी का आदमी, अपनी मूंछों पर ताव देते हुए, एक कोने में खड़ा था। उसकी पैनी निगाहें चैताली पर टिक गईं, जब वह अपनी एक्टिवा से उतरी थीं। उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान तैर गई। चैताली की चाल में एक खास मटकन थी, उसके कमर की हर लहर उसके दिमाग में एक अलग ही तस्वीर बना रही थी। राजबीर ने अपनी जेब में हाथ डाला और एक छोटी सी पुड़िया टटोली। आज उसका इरादा कुछ और ही था, सिर्फ रंगों से होली खेलने का नहीं।

"अरे चैताली जी! आइए, आइए! कहाँ रह गईं आप?" राजबीर ने एक मीठी आवाज़ में बुलाया, उसकी आँखें चैताली के भरे हुए जिस्म पर ठहर गईं।

चैताली ने देखा, राजबीर उन्हें बुला रहा था। वह उसके पास गईं। "बस आ ही रही थी राजबीर जी। आप लोगों ने तो रंग खेलना भी शुरू कर दिया।"

"हाँ, तो होली है! रंग तो चलेंगे ही।" राजबीर ने एक स्टील का गिलास उसकी ओर बढ़ाया। "एकदम ठंडा शरबत बनाया है, ख़ास आपके लिए। आज की गर्मी में इससे बेहतर कुछ नहीं।"

चैताली ने गिलास लिया। "वाह! क्या बात है। बहुत-बहुत शुक्रिया।" उसने एक घूँट भरा। शरबत मीठा और ताज़ा था, लेकिन उसमें एक हल्का सा कड़वापन था, जिसे चैताली ने गर्मी और अन्य स्वादों के कारण नज़रअंदाज़ कर दिया।

राजबीर ने दूर खड़े आर्यन और आकाश को आँख के इशारे से बुलाया। आर्यन, बारहवीं का छात्र, उन्नीस साल का था। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, और वह अक्सर कॉलेज की लड़कियों को घूरता रहता था। आकाश यादव, अठारह साल का, आर्यन का दोस्त, थोड़ा शांत था, लेकिन आर्यन के साथ रहकर उसकी शरारतें भी बढ़ गई थीं। दोनों राजबीर के इशारे को समझ गए।

आर्यन राजबीर के पास आया। "सर, क्या बात है?"

राजबीर ने अपनी आवाज़ धीमी की। "काम हो गया। शरबत में मिला दिया है। बस इंतज़ार करो।"

आर्यन की आँखों में हैवानियत की चमक उभरी। "ठीक है सर।"


चैताली ने एक और घूँट लिया। शरबत का स्वाद अब थोड़ा अजीब लगने लगा था, लेकिन वह खुद को समझा रही थी कि शायद यह होली के माहौल की वजह से है। वह कुछ देर तक बच्चों के साथ होली खेलती रहीं, उसके गालों पर गुलाल लगातीं, और उसके हँसी में शामिल होती रहीं।

धीरे-धीरे, एक अजीब सी सुस्ती उसके शरीर में फैलने लगी। उसके सिर में हल्का सा भारीपन महसूस हुआ, जैसे कोई उन्हें धीरे-धीरे नींद की गहरी खाई में धकेल रहा हो। रंगों की चकाचौंध धुंधली पड़ने लगी, और ढोल की थाप दूर से आती हुई सुनाई देने लगी।

"मुझे... मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है," चैताली ने अपने सिर पर हाथ फेरते हुए कहा। उसके आवाज़ लड़खड़ाने लगी थी।
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RE: बुरा ना मानो होली है-Bura na mano holi hai - by MohdIqbal - 12-04-2026, 10:31 PM



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