12-04-2026, 05:58 PM
ठीक 12:45 पर पूजा बाबा के बताए हुए रास्ते से उसके कमरे के दरवाज़े पर गयी और डोर खटखटाया।
बाबा: “आओ पुत्री, समय पर आ गई हो तुम, मैं बस हवन की तैयारी ही कर रहा था।”
पूजा ने पहले बाबा के पेर छुए। मैत्री की पेशकश.
बाबा: “पुत्री,किसी को ख़बर तो नहीं हुई! किसी को बता के तो नहीं आई न।”
पूजा: “नहीं बाबाजी, मेरे पापा-मम्मी जा चुके हैं। और जो रास्ता आपने बताया था, मैं उसी रास्ते से आई हूँ। किसी ने नहीं देखा।”
बाबा ने दरवाज़ा बंद किया।
बाबा: “चलो फिर शुद्धि क्रिया आरंभ करें!”
बाबा का कमरा ज़्यादा बड़ा ना था। उसमें एक खाट थी । बड़ा शीशा था। कमरे में सिर्फ़ एक 40 वॉट का बल्ब ही जल रहा था। बाबा ने टिपिकल स्टाइल में आग जलाई, और सामग्री लेके दोनों बैठ गये। पूजा ने वही सुबेह वाली साडी और ब्लाउस पहना था ।
बाबा: “यह पत्ता दोनों हाथों में लो।”
पूजा और बाबा साथ-साथ बैठे थे । दोनों चौकड़ी मार के बैठे थे। दोनों की टाँगें एक दूसरे को टच कर रही थी।
पूजा ने दोनों हाथ आगे कर के पत्ता ले लिया। । बाबा ने फिर उस पत्ते में थोड़े चावल डाले। फिर थोड़ी चीनी। फिर थोडा दूध। ....फिर उसने पूजा से कहा:
बाबा: “पुत्री, अब तुम अपने हाथ मेरे हाथ में रखों। तुम अपने पति का ध्यान करना।”
पूजा ने अपने हाथ बाबा के हाथों में रख दिए। । यह उनका पहला स्किन टू स्किन कोंटेक्ट था।
बाबा: “तुम्हे यह कहना होगा के तुम अपने पति से बहुत प्रेम करती हो। और बाद में जो मैं कहूँ मेरे पीछे-पीछे बोलना।“
पूजा: “जी बाबाजी।
पूजा का हाथ बाबा के हाथ में था। मैत्रि की रचना.
बाबा: “मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ।“
पूजा: “मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ।“
बाबा: “मैं उन पर अपना तन और मन न्योछावर करती हूँ।“
पूजा: “मैं उन पर अपना तन और मन न्योछावर करती हूँ।“
बाबा: “अब पत्ता मेरे साथ अग्नि में डाल दो।“
दोनो ने हाथ में हाथ लेके पत्ता आग में डाल दिया।
बाबा: “अब मैं तुम्हारे चरण धोऊंगा। तुम्हारे चरण यहाँ साइड में करो। ”
पूजा ने अपने पेर साइड में किए। बाबा ने एक गिलास में से थोडा पानी हाथ में भरा और पूजा के पैरो को अपने हाथों से धोने लगा।
बाबा: “तुम अपने पति का ध्यान करो।”
पूजा आँखें बंद करके पति का ध्यान करने लगी।
पूजा इस वक़्त टाँगें ऊपर की तरफ़ मोड़ के बैठी थी।
बाबा ने उसके पेर थोड़े से उठाए और हाथों में लेकर पेर धोने लगा।
टाँग उठने से पूजा की साडी के अंदर का नज़ारा दिखने लगा। उसकी थाइस दिख रही थी और साडी के अंदर के अंधेरे में हल्की-हल्की उसकी वाइट कच्छी भी दिख रही थी। लेकिन पूजा की आँखें बंद थी। वह तो अपने पति का ध्यान कर रही थी, और बाबा का ध्यान उसकी साडी के अंदर के नज़ारे पर था। बाबा के मूह में पानी आ रहा था। लेकिन वह कुछ करने से डरता था। सो उसने सोचा लड़की को गरम किया जाए।
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बने रहिये दोस्तों.................
बाबा: “आओ पुत्री, समय पर आ गई हो तुम, मैं बस हवन की तैयारी ही कर रहा था।”
पूजा ने पहले बाबा के पेर छुए। मैत्री की पेशकश.
बाबा: “पुत्री,किसी को ख़बर तो नहीं हुई! किसी को बता के तो नहीं आई न।”
पूजा: “नहीं बाबाजी, मेरे पापा-मम्मी जा चुके हैं। और जो रास्ता आपने बताया था, मैं उसी रास्ते से आई हूँ। किसी ने नहीं देखा।”
बाबा ने दरवाज़ा बंद किया।
बाबा: “चलो फिर शुद्धि क्रिया आरंभ करें!”
बाबा का कमरा ज़्यादा बड़ा ना था। उसमें एक खाट थी । बड़ा शीशा था। कमरे में सिर्फ़ एक 40 वॉट का बल्ब ही जल रहा था। बाबा ने टिपिकल स्टाइल में आग जलाई, और सामग्री लेके दोनों बैठ गये। पूजा ने वही सुबेह वाली साडी और ब्लाउस पहना था ।
बाबा: “यह पत्ता दोनों हाथों में लो।”
पूजा और बाबा साथ-साथ बैठे थे । दोनों चौकड़ी मार के बैठे थे। दोनों की टाँगें एक दूसरे को टच कर रही थी।
पूजा ने दोनों हाथ आगे कर के पत्ता ले लिया। । बाबा ने फिर उस पत्ते में थोड़े चावल डाले। फिर थोड़ी चीनी। फिर थोडा दूध। ....फिर उसने पूजा से कहा:
बाबा: “पुत्री, अब तुम अपने हाथ मेरे हाथ में रखों। तुम अपने पति का ध्यान करना।”
पूजा ने अपने हाथ बाबा के हाथों में रख दिए। । यह उनका पहला स्किन टू स्किन कोंटेक्ट था।
बाबा: “तुम्हे यह कहना होगा के तुम अपने पति से बहुत प्रेम करती हो। और बाद में जो मैं कहूँ मेरे पीछे-पीछे बोलना।“
पूजा: “जी बाबाजी।
पूजा का हाथ बाबा के हाथ में था। मैत्रि की रचना.
बाबा: “मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ।“
पूजा: “मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूँ।“
बाबा: “मैं उन पर अपना तन और मन न्योछावर करती हूँ।“
पूजा: “मैं उन पर अपना तन और मन न्योछावर करती हूँ।“
बाबा: “अब पत्ता मेरे साथ अग्नि में डाल दो।“
दोनो ने हाथ में हाथ लेके पत्ता आग में डाल दिया।
बाबा: “अब मैं तुम्हारे चरण धोऊंगा। तुम्हारे चरण यहाँ साइड में करो। ”
पूजा ने अपने पेर साइड में किए। बाबा ने एक गिलास में से थोडा पानी हाथ में भरा और पूजा के पैरो को अपने हाथों से धोने लगा।
बाबा: “तुम अपने पति का ध्यान करो।”
पूजा आँखें बंद करके पति का ध्यान करने लगी।
पूजा इस वक़्त टाँगें ऊपर की तरफ़ मोड़ के बैठी थी।
बाबा ने उसके पेर थोड़े से उठाए और हाथों में लेकर पेर धोने लगा।
टाँग उठने से पूजा की साडी के अंदर का नज़ारा दिखने लगा। उसकी थाइस दिख रही थी और साडी के अंदर के अंधेरे में हल्की-हल्की उसकी वाइट कच्छी भी दिख रही थी। लेकिन पूजा की आँखें बंद थी। वह तो अपने पति का ध्यान कर रही थी, और बाबा का ध्यान उसकी साडी के अंदर के नज़ारे पर था। बाबा के मूह में पानी आ रहा था। लेकिन वह कुछ करने से डरता था। सो उसने सोचा लड़की को गरम किया जाए।
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बने रहिये दोस्तों.................


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