12-04-2026, 05:39 PM
राजासाहब उसके सामने आकर बैठ गये और सिगरेट मुँह से निकल कर उसके अंडो पे लगा दी। कल्लन दर्द से चिल्ला उठा।
"अब मैं तुम्हे भौंकने के लिए नही कहूँगा। बस ऐसे ही बहुत धीरे-धीरे तुम्हे मौत के पास पहुचाऊंगा। एक बात अच्छी तरह से समझ लो,अगर तुमने अपना मुँह नही खोला तो मैं तुम्हे मार दूँगा पर वो मौत इतनी आसान नही होगी। मैं तुम्हे इतना तडपा के मारूँगा कि मौत भी घबरा जाएगी।" और सिगरेट उसके आंडो पे दबा के बुझा दी। फिर वो उठे और बगल की टेबल से एक चाकू उठा कर फिर उसके सामने बैठ गये।
करीब आधे घंटे के बाद कल्लन एक पालतू तोता की तरह राजासाहब के सामने गा रहा था। राजासाहब को अब सारी बात पता चल गयी थी,उनके दिल मे बस एक ही ख़याल था-जब्बार की मौत। वो चाहते थे कि अभी जाकर उसे और मलिका को मौत की नींद सुला दे,पर उनके बाद उनकी मेनका का क्या होता। उन्हे बदला लेना था पर ये सब बड़ी चालाकी से करना होगा ताकि उनपे कोई शक़ भी ना करे और वो मेनका के साथ ज़िंदगी का लुत्फ़ उठा सके। पूरी रात वो यही सोचते रहे और सवेरा होने तक उनके दिमाग़ मे एक प्लान तैयार हो चुका था। मैत्री की पेशकश.
उन्होने कल्लन को बेहोश कर उसे कपड़े पहनाए और बाँध कर कार मे डाला। 4:30 बज रहे थे। वो 6 बजे तक मेनका के जागने से पहले महल पहुँच जाना चाहते थे। उन्होने कार अपने शहर के एक मकान से निकली और दौड़ा दी राजपुरा की ओर।
ड्राइव करते वक़्त उनके दिमाग़ मे विश्वा का ख़याल आ रहा था। इन दरिंदो ने उसकी कमज़ोरी का फ़ायदा उठा कर उनसे बदला लेने के लिए उसकी जान ले ली। वो इन तीनो का बहुत बुरा हाल करेंगे।
**************
उनकी कार अब राजपुरा के पहले पड़ने वाली पहाड़ी चढ़ रही थी।इसी रास्ते पे यूधवीर का आक्सिडेंट हुआ था। क्या उसमे भी इन लोगो का हाथ था? यही अगले मोड़ पे उसकी कार नीचे खाई मे जा गिरी थी। जब्बार को मारने से पहले वो इस सवाल का जवाब माँगेंगे।
कल्लन को होश आ गया था। उसने देखा कि वो एक कार मे है। उसे रात की बात याद आई। राजा अभी भी उसे मार देगा। उसे यहा से निकलना ही होगा। उसके हाथ पीछे ले जाकर रस्सी से बाँधे गये थे और वो बॅक्सीट पे औंधे मुँह पड़ा था। मौत के ख़याल से वो काँप उठा और उचक कर उसने आगे की सीट पे अपने सर से धक्का मारा। राजासाहब अचानक मारे इस धक्के से हिल गये और कार उनके कंट्रोल से थोड़ा बाहर हुई और पहाड़ी के किनारे उतर गयी। कल्लन ने एक और धक्का मारा तो राजासाहब फिर से हिल गये और कार पहाड़ी से नीचे उतरने लगी। राजासाहब कार कंट्रोल करने की नाकाम कोशिश कर रहे थे कि तभी कार एक चट्टान से टकराई और मूड कर खाई मे गिर गयी, गिरती कार का पीछे का दरवाज़ा खुला और उसमे से बँधा कल्लन भी कार के साथ नीचे हवा मे गिरने लगा।
थोड़ी देर तक उस पहाड़ी पे सन्नाटा छाया रहा, बस चिड़ियो के चहकने की आवाज़ थी और फिर एक ज़ोर का धमाका हुआ,नीचे खाई मे राजासाहब की कार धू-धू करके जल रही थी। धीरे-धीरे सवेरा हो रहा था पर राजकुल का सूर्या अस्त हो चुका था। मैत्री की रचना.
मेनका बुत बनी अपने कमरे मे बैठी हुई थी। आज राजासाहब की मौत को एक महीना हो गया था। दुनिया की नज़रो मे तो वो उस दिन विधवा हो गयी थी जब विश्वा मरा था पर उसके लिए तो उसका वैधव्य राजासाहब की मौत से शुरू हुआ था। उस मनहूस सुबह जब पोलीस राजासाहब की कार के खाई मे बुरी तरह जाली हालत मे मिलने के बाद महल आई और उसे ये बताया कि कार मे एक जली लाश भी है जिसकी शिनाख्त के लिए उसे चलना पड़ेगा तो वो बेहोश हो गयी थी।
होश आने पे वो हॉस्पिटल पहुँची और जब उस लाश को देखा तो उसकी चीख निकल गयी। चेहरा पूरी तरह जल कर खाक हो चुका था और बाकी बदन भी,बस दाएँ हाथ और कलाई का कुछ हिस्सा अधजला सा रह गया था जिसपे उसका दिया ब्रेस्लेट अभी भी चमक रहा था। उसी से उसने राजासाहब की लाश को पहचाना था। उसके बाद क्या हुआ उसे कुछ होश नही। उसके माता-पिता फ़ौरन उसके पास पहुँच गये थे और उसकी माँ तो अभी भी उसके साथ थी। लोग जो कहते वो बस चुप-चाप करती जाती। किसी ज़िंदा लाश की तरह।
वो एक हाथ मे राजासाहब का ब्रेस्लेट लिए,कुछ काग़ज़ों को देख रही थी,ये वसीयत थी जिसमे राजासाहब ने सारी जायदाद उसके नाम कर दी थी और आज से वो कुँवारानी नही रानी साहिबा हो गयी थी। उसने उन काग़ज़ों को देखा और आज राजासाहब की मौत के बाद पहली बार ऑफीस जाने का फ़ैसला किया।
-------------------------------------------------------------------------------
बने रहिये दोस्तों..............
"अब मैं तुम्हे भौंकने के लिए नही कहूँगा। बस ऐसे ही बहुत धीरे-धीरे तुम्हे मौत के पास पहुचाऊंगा। एक बात अच्छी तरह से समझ लो,अगर तुमने अपना मुँह नही खोला तो मैं तुम्हे मार दूँगा पर वो मौत इतनी आसान नही होगी। मैं तुम्हे इतना तडपा के मारूँगा कि मौत भी घबरा जाएगी।" और सिगरेट उसके आंडो पे दबा के बुझा दी। फिर वो उठे और बगल की टेबल से एक चाकू उठा कर फिर उसके सामने बैठ गये।
करीब आधे घंटे के बाद कल्लन एक पालतू तोता की तरह राजासाहब के सामने गा रहा था। राजासाहब को अब सारी बात पता चल गयी थी,उनके दिल मे बस एक ही ख़याल था-जब्बार की मौत। वो चाहते थे कि अभी जाकर उसे और मलिका को मौत की नींद सुला दे,पर उनके बाद उनकी मेनका का क्या होता। उन्हे बदला लेना था पर ये सब बड़ी चालाकी से करना होगा ताकि उनपे कोई शक़ भी ना करे और वो मेनका के साथ ज़िंदगी का लुत्फ़ उठा सके। पूरी रात वो यही सोचते रहे और सवेरा होने तक उनके दिमाग़ मे एक प्लान तैयार हो चुका था। मैत्री की पेशकश.
उन्होने कल्लन को बेहोश कर उसे कपड़े पहनाए और बाँध कर कार मे डाला। 4:30 बज रहे थे। वो 6 बजे तक मेनका के जागने से पहले महल पहुँच जाना चाहते थे। उन्होने कार अपने शहर के एक मकान से निकली और दौड़ा दी राजपुरा की ओर।
ड्राइव करते वक़्त उनके दिमाग़ मे विश्वा का ख़याल आ रहा था। इन दरिंदो ने उसकी कमज़ोरी का फ़ायदा उठा कर उनसे बदला लेने के लिए उसकी जान ले ली। वो इन तीनो का बहुत बुरा हाल करेंगे।
**************
उनकी कार अब राजपुरा के पहले पड़ने वाली पहाड़ी चढ़ रही थी।इसी रास्ते पे यूधवीर का आक्सिडेंट हुआ था। क्या उसमे भी इन लोगो का हाथ था? यही अगले मोड़ पे उसकी कार नीचे खाई मे जा गिरी थी। जब्बार को मारने से पहले वो इस सवाल का जवाब माँगेंगे।
कल्लन को होश आ गया था। उसने देखा कि वो एक कार मे है। उसे रात की बात याद आई। राजा अभी भी उसे मार देगा। उसे यहा से निकलना ही होगा। उसके हाथ पीछे ले जाकर रस्सी से बाँधे गये थे और वो बॅक्सीट पे औंधे मुँह पड़ा था। मौत के ख़याल से वो काँप उठा और उचक कर उसने आगे की सीट पे अपने सर से धक्का मारा। राजासाहब अचानक मारे इस धक्के से हिल गये और कार उनके कंट्रोल से थोड़ा बाहर हुई और पहाड़ी के किनारे उतर गयी। कल्लन ने एक और धक्का मारा तो राजासाहब फिर से हिल गये और कार पहाड़ी से नीचे उतरने लगी। राजासाहब कार कंट्रोल करने की नाकाम कोशिश कर रहे थे कि तभी कार एक चट्टान से टकराई और मूड कर खाई मे गिर गयी, गिरती कार का पीछे का दरवाज़ा खुला और उसमे से बँधा कल्लन भी कार के साथ नीचे हवा मे गिरने लगा।
थोड़ी देर तक उस पहाड़ी पे सन्नाटा छाया रहा, बस चिड़ियो के चहकने की आवाज़ थी और फिर एक ज़ोर का धमाका हुआ,नीचे खाई मे राजासाहब की कार धू-धू करके जल रही थी। धीरे-धीरे सवेरा हो रहा था पर राजकुल का सूर्या अस्त हो चुका था। मैत्री की रचना.
मेनका बुत बनी अपने कमरे मे बैठी हुई थी। आज राजासाहब की मौत को एक महीना हो गया था। दुनिया की नज़रो मे तो वो उस दिन विधवा हो गयी थी जब विश्वा मरा था पर उसके लिए तो उसका वैधव्य राजासाहब की मौत से शुरू हुआ था। उस मनहूस सुबह जब पोलीस राजासाहब की कार के खाई मे बुरी तरह जाली हालत मे मिलने के बाद महल आई और उसे ये बताया कि कार मे एक जली लाश भी है जिसकी शिनाख्त के लिए उसे चलना पड़ेगा तो वो बेहोश हो गयी थी।
होश आने पे वो हॉस्पिटल पहुँची और जब उस लाश को देखा तो उसकी चीख निकल गयी। चेहरा पूरी तरह जल कर खाक हो चुका था और बाकी बदन भी,बस दाएँ हाथ और कलाई का कुछ हिस्सा अधजला सा रह गया था जिसपे उसका दिया ब्रेस्लेट अभी भी चमक रहा था। उसी से उसने राजासाहब की लाश को पहचाना था। उसके बाद क्या हुआ उसे कुछ होश नही। उसके माता-पिता फ़ौरन उसके पास पहुँच गये थे और उसकी माँ तो अभी भी उसके साथ थी। लोग जो कहते वो बस चुप-चाप करती जाती। किसी ज़िंदा लाश की तरह।
वो एक हाथ मे राजासाहब का ब्रेस्लेट लिए,कुछ काग़ज़ों को देख रही थी,ये वसीयत थी जिसमे राजासाहब ने सारी जायदाद उसके नाम कर दी थी और आज से वो कुँवारानी नही रानी साहिबा हो गयी थी। उसने उन काग़ज़ों को देखा और आज राजासाहब की मौत के बाद पहली बार ऑफीस जाने का फ़ैसला किया।
-------------------------------------------------------------------------------
बने रहिये दोस्तों..............


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)