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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
#9
पूजा आंसू पोंछ कर बोली: “मुझे हर पल मेरे पति की याद आती है ऐसा लगता है जैसे वह यहीं कहीं हैं  बाबाजी, जब मैं अकेली होती हूँ, तो मुझे डर-सा लगता है, पता नहीं क्यूँ? मैत्री की रचना.

 
बाबा: “तुम्हारे घर में और कोई नहीं है?
 
पूजा: हैं, पापा मम्मी, लेकिन सुबह-सुबह ही पापा अपने दफ्तर और मम्मी कॉलेज चली जाती हैं  फिर मम्मी 4 बजे आती हैं, इस दौरान मैं अकेली रहती हूँ और मुझे बहुत डर-सा लगता है ऐसा क्यूँ है बाबाजी?
 
बाबा: “पुत्री, तुम्हारे पति के स्वर्गवास के बाद तुमने शुद्धि (आत्मा की शुद्धि का हवन) क्रिया तो करवाई थी ना?
 
पूजा: “नहीं! क्यों?”
 
बाबा: “तुम्हारे पति की आत्मा की शांति के लिए, यह बहुत आवश्यक होता है। और यह प्रक्रिया है, मुझे नहीं मालुम की कैसे तुम्हारे माता-पिता इस प्रक्रिया को भूल गए!”
 
पूजा: “हमें किसी ने बताया नहीं बाबाजी।”
 
बाबा: “यदि तुम्हारे पति की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी, तो वह तुम्हारे आस-पास ही भटकती रहेगी  और इसीलिए तुम्हें अकेले में डर लगता है।”
 
पूजा: “बाबाजी, कृपया, आप कुछ कीजिए जिस से मेरे पति की आत्मा को शांति मिले।”
 
पूजा ने भावुक होकर बाबा के चरण पकड़ लिए और अपना सिर उनके पैरों में झुका दिया। उस क्षण उसकी श्रद्धा और असहायता साफ झलक रही थी। बाबा ने एक नज़र उस पर डाली और मन ही मन कुछ सोचने लगे।
 
उन्होंने धीरे से पूजा के सिर पर हाथ रखा और गंभीर स्वर में बोले,
पुत्री, यदि तुम मेरे बताए अनुसार चलोगी, तो तुम्हारे पति की आत्मा को अवश्य शांति मिलेगी। हमारा कर्तव्य है प्रयास करना।
 
पूजा ने तुरंत सिर उठाया, हाथ जोड़कर बोली,
बाबाजी, आप जैसा कहेंगे, मैं वैसा ही करूँगी। कृपया बताइए, मुझे क्या करना होगा?”
 
उसकी आँखों में अटूट विश्वास थामानो बाबा ही उसके लिए भगवान का रूप हों। मैत्री की प्रस्तुति है.
 
बाबा ने कुछ क्षण रुककर कहा,
पुत्री, इसके लिए शुद्धि क्रिया करनी होगी। यह एक विशेष विधि है, जिसे कुछ दिनों तक लगातार करना पड़ता है। लेकिन इसमें एक नियम हैइस क्रिया में केवल स्वर्गवासी की पत्नी और गुरु ही सम्मिलित होते हैं। किसी तीसरे व्यक्ति को इसकी जानकारी नहीं होनी चाहिए।
 
उन्होंने अपनी बात को और गंभीर बनाते हुए कहा,
यदि यह बात किसी को पता चल गई, तो आत्मा को कभी शांति नहीं मिलेगी। फिर हमें पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ सकती हैऔर वह बहुत कठिन होती है। इसलिए सोच-समझकर निर्णय लेना।
 
पूजा ने बिना हिचकिचाए कहा,
बाबाजी, आप मेरे गुरु हैं। मैं पूरी श्रद्धा से आपकी हर बात मानूँगी। कृपया बताइए, कब से शुरू करना है और क्या-क्या सामग्री चाहिए?”
 
बाबा बोले,
उसकी चिंता मत करो, सारा प्रबंध मैं कर लूँगा।
 
तो फिर बाबाजी, शुरुआत कब से करें?” पूजा ने उत्सुकता से पूछा।
 
बाबा ने उत्तर दिया,
यह क्रिया ऐसे समय में होगी जब कोई बाधा न हो। दोपहर 12:30 से 4 बजे तक यह स्थान बंद रहता है, इसलिए यही समय उपयुक्त रहेगा। तुम आज 12:45 बजे आ जानाऔर साथ में एक नारियल लेकर आना।
 
थोड़ा रुककर उन्होंने आगे कहा,
मुख्य द्वार बंद रहेगा, इसलिए मैं तुम्हें एक दूसरा मार्ग दिखाता हूँजिसे मैं केवल अपने विशेष भक्तों को ही बताता हूँ।मैत्री रचित कहानी.
 
यह कहकर बाबा उठे और पूजा को अपने पीछे आने का संकेत किया। वे उसे अपने कक्ष में ले गए, जहाँ से एक दरवाज़ा पीछे की सुनसान गली में खुलता था। उन्होंने उसे पूरा रास्ता समझा दिया।
 
पुत्री, अब तुम रास्ता समझ गई ना?” बाबा ने पूछा।
 
जी बाबाजी, सब समझ गई हूँ। मैं इसी रास्ते से आऊँगी और जाऊँगी, ताकि किसी को कुछ पता न चले,” पूजा ने विश्वास से कहा।
 
बाबा ने गंभीरता से कहा,
ध्यान रखना, यह सब गुप्त रहना चाहिए। तभी यह क्रिया सफल होगी।
 
पूजा ने दृढ़ स्वर में कहा,
आप निश्चिंत रहें बाबाजी, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी। मैं ठीक 12:45 बजे पहुँच जाऊँगी।
 
ठीक है पुत्री,” बाबा ने कहा, “पूरी श्रद्धा और शुद्ध मन से इस पूजा के लिए आना।
 
जी गुरूजी,” पूजा ने विनम्रता से उत्तर दिया,
आप भी सारी आवश्यक तैयारी कर लीजिए, ताकि कोई बाधा न आए।
 
इतना कहकर पूजा वहाँ से अपने घर की ओर चल पड़ी
बाबा उसकी रसीली गांड को मटकते हुए अपनी नजरो से दूर होती देख रहा। और अपने लंड को सहलाके मना रहा था की कुछ देर और रुक जा मेरे बंधू, मस्त माल का नजारा दिखाऊंगा तुझे। उनके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान उभर आई।
 
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आज के लिए बस यही तक दोस्तों.


कृपया आप पढ़े और अपने मंतव्यो दे.

फिर मिलेंगे वक नए एपिसोड के साथ तब तक मैत्री की तरफ से जय भारत.
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सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 11-04-2026, 01:50 PM



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