11-04-2026, 01:42 PM
एक लड़की है पूजा, बिल्कुल सीधी साधी, भोली-भाली, अनफॉर्चुनेट्ली, शादी के 1 साल बाद ही उसके पति का स्कूटर एक्सीडेंट हो गया और वह ऊपर चला गया। तब से पूजा अपने पापा-मम्मी के साथ रहने लगी। अभी उसका कोई बच्चा नहीं था।उसकी उम्र 24 थी। उसके पापा मम्मी ने उसे दूसरी शादी के लिए कहा, लेकिन पूजा ने फिलहाल मना कर दिया था। वह अभी अपने पति को नहीं भुला पायी थी, जिसका देहांत गये हुए आज 6 महीने हो गये थे ।
पूजा फिज़िकल अपीयरेन्स में कोई बहुत ज़्यादा अट्रॅक्टिव नहीं थी, लेकिन उसकी सूरत बहुत भोली थी, वह ख़ुद भी बहुत भोली थी, ज़्यादा टाइम चुप ही रहती थी। उसकी हाइट लगभग 5 फुट 4 इंच थी, रंग गोरा था, बॉल काफ़ी लंबे थे, फेस गोल था । उसके बूब्स इंडियन औरतों जैसे बड़े थे, कमर लगभग 31-32 इंच थी, हिप्स गोल और बड़े थे, यही कोई 37 इंच। मैत्री की पेशकश.
वो हमेशा वाइट या फिर बहुत लाइट कलर की साडी पहनती थी।
उसके पापा सरकारी दूफ़्तर में काम करते थे । उनका हाल ही में दूसरे शहर में ट्रान्स्फर हुआ था। नये शहर में आकर पूजा की मम्मी ने भी एक कॉलेज में टीचर की जॉब ले ली। पूजा का कोई भाई नहीं था और उसकी बड़ी बहन की शादी 6 साल पहले हो गयी थी।
नये शहर में आकर उनका घर छोटी-सी कॉलोनी में था जो के शहर से थोड़ी दूर थी। रोज़ सुबेह पूजा के पापा अपने दूफ़्तर और उसकी मम्मी कॉलेज चले जाते तह। पापा शाम 6 बजे और मम्मी 4 बजे वापस आती थी।
उनके घर के पास ही एक छोटा सा देवस्थल था। देवस्थल में एक पुजारी था, यह ही कोई 36 साल का। देखने में गोरा और बॉडी भी मस्क्युलर, हाइट 5 फुट 9 इंच। सूरत भी ठीक ठाक थी। बाल बहुत छोटे छोटे थे। देवस्थल में उसके अलावा और कोई ना था। देवस्थल में ही बिल्कुल पीछे उसका कमरा था। देवस्थल के मुख्य द्वार के अलावा पुजारी के कमरे से भी एक दरवाज़ा कॉलोनी की पिछली गली में जाता था। वो गली हमेशा सुन-सान ही रहती थी क्यूंकी उस गली में अभी कोई घर नहीं था।
बाबा को किसी ने बताया था एक पास में ही कोई नयी फॅमिली आई है और जिनकी 24 साल की बेटी विधवा है।
पूजा पहले दिन देवस्थल गयी। सुबेह 5 बजे कमरे में और कोई ना था। सिर्फ़ बाबा था। पूजा ने वाइट साडी ब्लाउस पहन रखा था।
पूजा बाबा के पास आई। उसने बाबा के पेर छुए।
बाबा: “जीती रहो पुत्री, तुम यहाँ नयी आई हो ना?” मैत्री की रचना.
पूजा: “जी बाबाजी!”
बाबा: “पुत्री। तुम्हारा नाम क्या है?”
पूजा: “जी, पूजा।”
बाबा: “तुम्हारे माथे की लकीरों ने मुझे बता दिया है कि तुम पर क्या दुख आया है। लेकिन पुत्री, उपरवाले के आगे किसकी चलती है!”
पूजा: “बाबाजी, मेरा भगवान पर अटूट विश्वास है। लेकिन फिर भी उसने मुझसे मेरा सुहाग छीन लिया।” पूजा की आँखों में आंसू आ गये।
बाबा: “पुत्री, जिसकी जितनी लिखी है, वह उतना ही जीता है। इसमें हम तुम कुछ नहीं कर सकते। उसकी मर्ज़ी के आगे हमारी नहीं चल सकती। क्यूंकी वह सर्वोच्च है। इसलिए उसके निर्णय को स्वीकार करने में ही समझदारी है।“
बने रहिये दोस्तों...............
मैत्री.
पूजा फिज़िकल अपीयरेन्स में कोई बहुत ज़्यादा अट्रॅक्टिव नहीं थी, लेकिन उसकी सूरत बहुत भोली थी, वह ख़ुद भी बहुत भोली थी, ज़्यादा टाइम चुप ही रहती थी। उसकी हाइट लगभग 5 फुट 4 इंच थी, रंग गोरा था, बॉल काफ़ी लंबे थे, फेस गोल था । उसके बूब्स इंडियन औरतों जैसे बड़े थे, कमर लगभग 31-32 इंच थी, हिप्स गोल और बड़े थे, यही कोई 37 इंच। मैत्री की पेशकश.
वो हमेशा वाइट या फिर बहुत लाइट कलर की साडी पहनती थी।
उसके पापा सरकारी दूफ़्तर में काम करते थे । उनका हाल ही में दूसरे शहर में ट्रान्स्फर हुआ था। नये शहर में आकर पूजा की मम्मी ने भी एक कॉलेज में टीचर की जॉब ले ली। पूजा का कोई भाई नहीं था और उसकी बड़ी बहन की शादी 6 साल पहले हो गयी थी।
नये शहर में आकर उनका घर छोटी-सी कॉलोनी में था जो के शहर से थोड़ी दूर थी। रोज़ सुबेह पूजा के पापा अपने दूफ़्तर और उसकी मम्मी कॉलेज चले जाते तह। पापा शाम 6 बजे और मम्मी 4 बजे वापस आती थी।
उनके घर के पास ही एक छोटा सा देवस्थल था। देवस्थल में एक पुजारी था, यह ही कोई 36 साल का। देखने में गोरा और बॉडी भी मस्क्युलर, हाइट 5 फुट 9 इंच। सूरत भी ठीक ठाक थी। बाल बहुत छोटे छोटे थे। देवस्थल में उसके अलावा और कोई ना था। देवस्थल में ही बिल्कुल पीछे उसका कमरा था। देवस्थल के मुख्य द्वार के अलावा पुजारी के कमरे से भी एक दरवाज़ा कॉलोनी की पिछली गली में जाता था। वो गली हमेशा सुन-सान ही रहती थी क्यूंकी उस गली में अभी कोई घर नहीं था।
बाबा को किसी ने बताया था एक पास में ही कोई नयी फॅमिली आई है और जिनकी 24 साल की बेटी विधवा है।
पूजा पहले दिन देवस्थल गयी। सुबेह 5 बजे कमरे में और कोई ना था। सिर्फ़ बाबा था। पूजा ने वाइट साडी ब्लाउस पहन रखा था।
पूजा बाबा के पास आई। उसने बाबा के पेर छुए।
बाबा: “जीती रहो पुत्री, तुम यहाँ नयी आई हो ना?” मैत्री की रचना.
पूजा: “जी बाबाजी!”
बाबा: “पुत्री। तुम्हारा नाम क्या है?”
पूजा: “जी, पूजा।”
बाबा: “तुम्हारे माथे की लकीरों ने मुझे बता दिया है कि तुम पर क्या दुख आया है। लेकिन पुत्री, उपरवाले के आगे किसकी चलती है!”
पूजा: “बाबाजी, मेरा भगवान पर अटूट विश्वास है। लेकिन फिर भी उसने मुझसे मेरा सुहाग छीन लिया।” पूजा की आँखों में आंसू आ गये।
बाबा: “पुत्री, जिसकी जितनी लिखी है, वह उतना ही जीता है। इसमें हम तुम कुछ नहीं कर सकते। उसकी मर्ज़ी के आगे हमारी नहीं चल सकती। क्यूंकी वह सर्वोच्च है। इसलिए उसके निर्णय को स्वीकार करने में ही समझदारी है।“
बने रहिये दोस्तों...............
मैत्री.


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