11-04-2026, 01:17 PM
राजासाहब ने एक किमी पीछे अपनी कर रोड से उतार कर लगाई,किट उठाई और कार से उतर कर पहले मकान के पीछे चले गये और दौड़ते हुए कल्लन के मकान के पिछवाड़े पहुँच गये। कार रुकी थी और कल्लन कार से उतर कर ड्राइवर साइड पे आ ड्राइविंग सीट पे बैठी मलिका से बात कर रहा था। राजासाहब मकान की बगल मे आ खड़े हो उन्हे छिप कर देखने लगे। मैत्री की पेशकश।
"आज तो बिल्कुल मन नही भरा, तू क्यू जा रहा है? रुक जा ना, सारी रात मज़ा करते हैं।"
"फिर कभी,बस 1-2 महीनो की बात है। अभी जाना ज़रूरी है।", उसने झुक कर मलिका को चूमा और एक हाथ उसके टॉप मे डाल कर उसकी छातियो को दबा दिया,"चल अब निकल।"
"तू बहुत ज़ालिम है।",उसने कल्लन का लंड पॅंट के उपर से ही दबाया और कार स्टार्ट कर घुमा दी। उसके जाते ही कल्लन घूम कर अपने घर के दरवाज़े पे आया और ताला खोलने लगा।
"एक्सक्यूस मी,सर।",आवाज़ सुन कर जैसे ही वो घुमा एक मज़बूत हाथ ने उसकी नाक पे एक कपड़ा दबा दिया। वो उस आदमी को परे धकेलने लगा पर उसे लग रहा था कि जैसे उसके बदन मे ताकत ही नही है,फिर भी उसने अपना पूरा ज़ोर लगा कर उस आदमी को धकेल दिया।
कल्लन का दिल दहल गया, राजासाहब जैसा ही था और वो उन्ही की तरह ताकतवर भी था। उसके धक्के से राजासाहब गिर पड़े। कल्लन ने पास पड़ी एक ईंट उठा कर उन पर फेंकी पर वो उसका वार बचा गये और अपनी एक लात उसकी टांगो पे मारी,कल्लन चारो खाने चित हो गया तो राजासाहब उसकी छाती पे चढ़ बैठे और क्लॉरोफॉर्म से भीगा नॅपकिन उसकी नाक पे लगा दिया। कल्लन अब पूरी तरह से बेहोश था।
राजा सहब ने उठ कर चारो तरफ देखा-कोई नही था। उन्होने अपनी कमर पे बँधी किट से हथकड़ी निकली और कल्लां को पेट के बल लिटा कर उसके हाथ पीछे लाकर उस से बाँध दिए। फिर वो दौस कर गये और अपनी कार ले आए और कल्लन को उसमे डाल कर वहा से निकल गये। मैत्री की प्रस्तुति।
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रात के 12 बज रहे थे और मेनका अपने बिस्तर पे पड़ी हुई थी,नींद उसकी आँखो से कोसो दूर थी। उसे राजासाहब की याद सता रही थी। उसने करवट लेकर आँखे बंद कर सोने की कोशिश की तो उसे कल रात की अपने माएके मे हुई उसकी चुदाई याद आ गयी। कैसे उसके ससुर ने उसकी मा के होते हुए उसे पूरी तरह से चोदा था। उनकी चुदाई याद करते ही उसकी चूत मचल उठी और उसने अपनी उंगली उस मे डाल दी। अपनी जांघे एक साथ रगड़ते हुए वो अपनी चूत मे उंगली अंदर-बाहर करने लगी। उसे अपने बदन पे अब ये नाइटी भी भारी लग रही थी। वो उठी और उसे उतार दिया,फिर एक बड़े से तकिये से चिपक कर उस पे अपनी छातिया दबाते हुए अपनी चूत के दाने को अपनी उंगली से रगड़ते हुए अपने जिस्म की आग को ठंडा करने लगी।
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जब कल्लन को होश आया तो उसने खुद को एक कमरे मे रस्सियों से बँधा हुआ और पूरा नंगा पाया। उसके सामने एक कुर्सी पे राजा यशवीर बैठे थे।
"आ गया होश! जब्बार के कुत्ते। चल अब भौंकना शुरू कर दे वरना तेरा बहुत बुरा हश्र करूँगा।"
"ये धमकी कही और देना राजा। मुझ पे ये सब खोखली बातें असर नही करती।"
"अच्छा! ठीक है।",राजासाहब उठे और एक सिगरेट जला ली।
कल्लन हँसने लगा,"कही भी इस से दाग दो राजा पर मैं अपना मुँह नही खोलूँगा।"
*****************
बने रहिये दोस्तों...............
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत।।
"आज तो बिल्कुल मन नही भरा, तू क्यू जा रहा है? रुक जा ना, सारी रात मज़ा करते हैं।"
"फिर कभी,बस 1-2 महीनो की बात है। अभी जाना ज़रूरी है।", उसने झुक कर मलिका को चूमा और एक हाथ उसके टॉप मे डाल कर उसकी छातियो को दबा दिया,"चल अब निकल।"
"तू बहुत ज़ालिम है।",उसने कल्लन का लंड पॅंट के उपर से ही दबाया और कार स्टार्ट कर घुमा दी। उसके जाते ही कल्लन घूम कर अपने घर के दरवाज़े पे आया और ताला खोलने लगा।
"एक्सक्यूस मी,सर।",आवाज़ सुन कर जैसे ही वो घुमा एक मज़बूत हाथ ने उसकी नाक पे एक कपड़ा दबा दिया। वो उस आदमी को परे धकेलने लगा पर उसे लग रहा था कि जैसे उसके बदन मे ताकत ही नही है,फिर भी उसने अपना पूरा ज़ोर लगा कर उस आदमी को धकेल दिया।
कल्लन का दिल दहल गया, राजासाहब जैसा ही था और वो उन्ही की तरह ताकतवर भी था। उसके धक्के से राजासाहब गिर पड़े। कल्लन ने पास पड़ी एक ईंट उठा कर उन पर फेंकी पर वो उसका वार बचा गये और अपनी एक लात उसकी टांगो पे मारी,कल्लन चारो खाने चित हो गया तो राजासाहब उसकी छाती पे चढ़ बैठे और क्लॉरोफॉर्म से भीगा नॅपकिन उसकी नाक पे लगा दिया। कल्लन अब पूरी तरह से बेहोश था।
राजा सहब ने उठ कर चारो तरफ देखा-कोई नही था। उन्होने अपनी कमर पे बँधी किट से हथकड़ी निकली और कल्लां को पेट के बल लिटा कर उसके हाथ पीछे लाकर उस से बाँध दिए। फिर वो दौस कर गये और अपनी कार ले आए और कल्लन को उसमे डाल कर वहा से निकल गये। मैत्री की प्रस्तुति।
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रात के 12 बज रहे थे और मेनका अपने बिस्तर पे पड़ी हुई थी,नींद उसकी आँखो से कोसो दूर थी। उसे राजासाहब की याद सता रही थी। उसने करवट लेकर आँखे बंद कर सोने की कोशिश की तो उसे कल रात की अपने माएके मे हुई उसकी चुदाई याद आ गयी। कैसे उसके ससुर ने उसकी मा के होते हुए उसे पूरी तरह से चोदा था। उनकी चुदाई याद करते ही उसकी चूत मचल उठी और उसने अपनी उंगली उस मे डाल दी। अपनी जांघे एक साथ रगड़ते हुए वो अपनी चूत मे उंगली अंदर-बाहर करने लगी। उसे अपने बदन पे अब ये नाइटी भी भारी लग रही थी। वो उठी और उसे उतार दिया,फिर एक बड़े से तकिये से चिपक कर उस पे अपनी छातिया दबाते हुए अपनी चूत के दाने को अपनी उंगली से रगड़ते हुए अपने जिस्म की आग को ठंडा करने लगी।
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जब कल्लन को होश आया तो उसने खुद को एक कमरे मे रस्सियों से बँधा हुआ और पूरा नंगा पाया। उसके सामने एक कुर्सी पे राजा यशवीर बैठे थे।
"आ गया होश! जब्बार के कुत्ते। चल अब भौंकना शुरू कर दे वरना तेरा बहुत बुरा हश्र करूँगा।"
"ये धमकी कही और देना राजा। मुझ पे ये सब खोखली बातें असर नही करती।"
"अच्छा! ठीक है।",राजासाहब उठे और एक सिगरेट जला ली।
कल्लन हँसने लगा,"कही भी इस से दाग दो राजा पर मैं अपना मुँह नही खोलूँगा।"
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बने रहिये दोस्तों...............
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत।।


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