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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
#1
यह कोई श्रद्धा या भक्ति की कथा नहीं, बल्कि एक ऐसे पाखंडी चेहरे का पर्दाफाश है, जो मासूम लोगों की आस्था और मजबूरी का फायदा उठाकर अपने स्वार्थ पूरे करता रहा। यह कहानी उस सच को सामने लाने का प्रयास है, जो अक्सर भीड़, विश्वास और अंधभक्ति के पीछे छिप जाता है।

 
 
यह प्रस्तावना अंधविश्वास के प्रति एक चेतावनी का काम करती है, जो बिना कोई सवाल पूछे, इंसानों को सीधे भगवान का दर्जा दे देता है। आगे के अध्यायों में, बाबा के सभी कुकर्मों का पर्दाफ़ाश किया जाएगा, क्योंकि उनके धोखे, विश्वासघात और स्वार्थ की परतें एक-एक करके खुलती जाएँगी। यह सिर्फ़ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के उस पहलू का आईना है जहाँ सच अक्सर अंधविश्वास के बोझ तले दबकर रह जाता है।
 
यह कहानी मनोरंजन के साथ-साथ सिर्फ़ एक उदाहरण है; आपने ऐसे कई और मामले पढ़े होंगे या आगे पढ़ेंगे भी। इनमें से कुछ मामलों में तो माननीय अदालतों ने सज़ा भी सुनाई है।
 
ऐसे पाखंड से बाहर निकलने का एकमात्र आसान उपाय आपकी अपनी विवेक बुह्धि और समझदारी (common sense) ही है। मेरी समझदारी मुझे यही बताती है कि ऐसे लोगों के पास जाने की कोई ज़रूरत नहीं है; जो होना है, वह तो होकर ही रहेगा। और यही एकमात्र सच है। सच को कोई नहीं बदल सकता। कभी-कभी तो भगवान भी उसे नहीं बदल सकते। फिर इंसान का तो कोई वजूद ही नहीं।


अभी फिलहाल इस कहानी को आपके मनोरंजन के लिए ले इसके अलावा यहाँ और कोई विषय नहीं है


चलिए अब कहानी शुरू करते है
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सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM



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