10-04-2026, 03:36 PM
मनीष अब अकेला ही कल्लन का पीछा करने लगा। मोबाइल बजा तो उसने हेंड्सस्फ्री ऑन कर दिया,"हेलो।"
"हम,यशवीरसिंग बोल रहे हैं,मनीष,तुम इस वक़्त कहा हो?"
"नमस्ते,सर, लगता है ये आदमी चोवोक बाज़ार की ओर जा रहा है। मैं बाइक से उसके ऑटो का पीछा कर रहा हू।"
"ठीक है,हम भी वही पहुँचते हैं।",और फोन काट गया।
थोड़ी देर बाद मनीष राजासाहब के साथ उनकी स्कॉर्पियो मे बैठा था, गाड़ी 'फियेस्टा' केफे केसाम्ने खड़ी थी जहा थोड़ी देर पहले कल्लन गया था। थोड़ी देर बाद एक कार रुकी और मलिका उसमे से उतर कर केफे के अंदर चली गयी।
"सर,ये तो..मादरचोद-" मैत्री की रचना.
"हा,मनीष। अब तो शक़ नही पक्का यकीन है कि ये इंसान जब्बार का साथी है और हमारे बेटे की मौत मे इसका हाथ है।",तभी दोनो केफे से बाहर आकर मलिका की कार मे बैठ के कही जाने लगे। मनीष दौड़ कर अपनी बाइक पे चला गया और वो और राजासाहब एक बार फिर कल्लन का पीछा करने लगे। मलिका ने कार एक सस्ते से होटेल के सामने रोक दी और कल्लन के साथ होटल के अंदर चली गयी।
होटेल के कमरे के अंदर मलिका और कल्लन एक दूसरे के कपड़े उतारते हुए पागलों की तरह चूम रहे थे। कितना तड़पी हू ज़ालिम तेरे लिए।",मलिका ने कल्लन की पॅंट एक झटके मे उतार दी और झुक कर उसका लंड अपने मुँह मे भर लिया। कल्लन खड़े-खड़े ही उसके सर को पकड़ उसका मुँह चोदने लगा। मलिका ने लंड चूस्ते हुए उसकी कमर को अपनी बाहों मे कस लिया और अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद मे डाल दी।
"एयेए,आहह।",कल्लन जोश मे कराहा। उसने अपनी कमर और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया। मलिका ने उसका लंड छोड़ दिया और उसे बिस्तर पे धकेल दिया और फिर उसकी छाती पे चढ़ अपनी चूत उसके मुँह पर रख दी और एक बार फिर उसका लंड अपने मुँह मे ले चूसने लगी। कल्लन ने उसकी गांड को मसल्ते हुए अपनी जीभ उसकी चूत मे डाल दी और लगा उसके दाने को चाटने। मैत्री की प्रस्तुति.
मलिका जोश मे अपनी कमर हिलाने लगी और मस्त होकर आहें भरने लगी। कल्लन ने उसे मज़बूती से थाम रखा था और अपनी जीभ तेज़ी से उसकी चूत मे फिरा रहा था। अचानक मलिका ने अपनी चूत उसके चेहरे पे दबा दी अपने मुँह से लंड निकाल अपना चेहरा उसकी झांटो मे छुपा लिया,वो झड़ गयी थी। कल्लन उसकी चूत के छोड़े हुए पानी को चाट रहा था। मलिका थोड़ा होश मे आई तो उसने उसके लंड को पकड़ ज़ोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया और लंड के सुपारे को अपनी जीभ से छेदने लगी। अब कल्लन की बारी थी,उसकी कमर अपने आप हिलने लगी। मलिका ने उसके अंडो को हाथो मे भर कर दबाया और उसका पूरा लंड अपने मुँह मे भर लिया। लंड उसके मुँह से होता हुआ उसके कंठ तक चला गया तो वो मुँह उपर-नीचे कर अपने मुँह को चोदने लगी।
मलिका के हाथो का अंडो पे दबाव और उसके मुँह की हरकतों ने तुरंत ही कल्लन का पानी निकाल दिया,जिसे मलिका ने खुशी से निगल लिया। थोड़ी देर तक दोनो वैसे ही पड़े रहे,कल्लन उसकी गांड सहलाता रहा और मलिका उसके लंड को हौले से चाटती रही। कुछ ही देर मे लंड फिर से खड़ा होने लगा तो मलिका घूम कर अब कल्लन के उपर लेट गयी और उसे चूमने लगी। कल्लन ने उसकी नंगी पीठ और कमर को सहलाने लगा।
उसने उसे बाहों मे भरा और करवट ले उसके उपर चढ़ गया। उसकी गर्दन चूमते हुए उसने अपने हाथों मे उसकी चूचिया भर ली और दबाने लगा। उसने उनके निपल्स को अपनी उंगलियो मे भर कर मसला औरफिर एक चूची को अपने मुँह मे भर लिया साथ दूसरे से उसकी दूसरी चूची मसलने लगा।
"..ऊ..ऊओह...और दबा ज़ालिम...और ज़ोर से...अब इसवाली को चूस ना।",उसने अपने हाथो से अपनी एक चूची उसके मुँह मे डाल दी।
"आनन्न...आनन्नह...हान्न्न...ऐसे ही ...",मलिका ने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत पे लगा लिया और घुसाने लगी। कल्लन ने एक धक्का मारा और लंड आधा अंदर चला गया।,"आईईयईी।।।",मलिका चीखी। फनलवर रचित.
दूसरे धक्के मे लंड पूरा अंदर चला गया और फिर कल्लन ने उसकी चुदाई शुरू कर दी। दोनो एक दूसरे से चिपटे एक दूसरे को चूम रहे थे। कल्लन कभी उसके चेहरे तो कभी उसकी चूचियो को चूमता और दबाता और मलिका भी अपने नाखूनओ को उसकी पीठ और गांड मे गाडती हुई उसकी किस का जवाब देती। मलिका कल्लन की गांड जोरो से मार रही थी। उसने अपनी टांगे उसकी कमर पे लपेट ली थी और कमर हिलाकर उसके धक्कों की ताल से ताल मिलाते हुए चुद रही थी।
धक्कों की रफ़्तार बढ़ने लगी और थोड़ी ही देर मे मलिका की चूत ने पानी छोड़ दिया। कल्लन ने जोश मे उसकी एक चूची पे अपने होंठ कस दिए और उसकी कमर झटके खाने लगी और उसका लंड मलिका की चूत को अपने पानी से भरने लगा।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
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दोस्तों आज के लिए बस यही तक. फिर मिलेंगे एक नए अध्याय के साथ. तब तक के लिए मैत्री की ओर से...................
जय भारत.
"हम,यशवीरसिंग बोल रहे हैं,मनीष,तुम इस वक़्त कहा हो?"
"नमस्ते,सर, लगता है ये आदमी चोवोक बाज़ार की ओर जा रहा है। मैं बाइक से उसके ऑटो का पीछा कर रहा हू।"
"ठीक है,हम भी वही पहुँचते हैं।",और फोन काट गया।
थोड़ी देर बाद मनीष राजासाहब के साथ उनकी स्कॉर्पियो मे बैठा था, गाड़ी 'फियेस्टा' केफे केसाम्ने खड़ी थी जहा थोड़ी देर पहले कल्लन गया था। थोड़ी देर बाद एक कार रुकी और मलिका उसमे से उतर कर केफे के अंदर चली गयी।
"सर,ये तो..मादरचोद-" मैत्री की रचना.
"हा,मनीष। अब तो शक़ नही पक्का यकीन है कि ये इंसान जब्बार का साथी है और हमारे बेटे की मौत मे इसका हाथ है।",तभी दोनो केफे से बाहर आकर मलिका की कार मे बैठ के कही जाने लगे। मनीष दौड़ कर अपनी बाइक पे चला गया और वो और राजासाहब एक बार फिर कल्लन का पीछा करने लगे। मलिका ने कार एक सस्ते से होटेल के सामने रोक दी और कल्लन के साथ होटल के अंदर चली गयी।
होटेल के कमरे के अंदर मलिका और कल्लन एक दूसरे के कपड़े उतारते हुए पागलों की तरह चूम रहे थे। कितना तड़पी हू ज़ालिम तेरे लिए।",मलिका ने कल्लन की पॅंट एक झटके मे उतार दी और झुक कर उसका लंड अपने मुँह मे भर लिया। कल्लन खड़े-खड़े ही उसके सर को पकड़ उसका मुँह चोदने लगा। मलिका ने लंड चूस्ते हुए उसकी कमर को अपनी बाहों मे कस लिया और अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद मे डाल दी।
"एयेए,आहह।",कल्लन जोश मे कराहा। उसने अपनी कमर और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया। मलिका ने उसका लंड छोड़ दिया और उसे बिस्तर पे धकेल दिया और फिर उसकी छाती पे चढ़ अपनी चूत उसके मुँह पर रख दी और एक बार फिर उसका लंड अपने मुँह मे ले चूसने लगी। कल्लन ने उसकी गांड को मसल्ते हुए अपनी जीभ उसकी चूत मे डाल दी और लगा उसके दाने को चाटने। मैत्री की प्रस्तुति.
मलिका जोश मे अपनी कमर हिलाने लगी और मस्त होकर आहें भरने लगी। कल्लन ने उसे मज़बूती से थाम रखा था और अपनी जीभ तेज़ी से उसकी चूत मे फिरा रहा था। अचानक मलिका ने अपनी चूत उसके चेहरे पे दबा दी अपने मुँह से लंड निकाल अपना चेहरा उसकी झांटो मे छुपा लिया,वो झड़ गयी थी। कल्लन उसकी चूत के छोड़े हुए पानी को चाट रहा था। मलिका थोड़ा होश मे आई तो उसने उसके लंड को पकड़ ज़ोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया और लंड के सुपारे को अपनी जीभ से छेदने लगी। अब कल्लन की बारी थी,उसकी कमर अपने आप हिलने लगी। मलिका ने उसके अंडो को हाथो मे भर कर दबाया और उसका पूरा लंड अपने मुँह मे भर लिया। लंड उसके मुँह से होता हुआ उसके कंठ तक चला गया तो वो मुँह उपर-नीचे कर अपने मुँह को चोदने लगी।
मलिका के हाथो का अंडो पे दबाव और उसके मुँह की हरकतों ने तुरंत ही कल्लन का पानी निकाल दिया,जिसे मलिका ने खुशी से निगल लिया। थोड़ी देर तक दोनो वैसे ही पड़े रहे,कल्लन उसकी गांड सहलाता रहा और मलिका उसके लंड को हौले से चाटती रही। कुछ ही देर मे लंड फिर से खड़ा होने लगा तो मलिका घूम कर अब कल्लन के उपर लेट गयी और उसे चूमने लगी। कल्लन ने उसकी नंगी पीठ और कमर को सहलाने लगा।
उसने उसे बाहों मे भरा और करवट ले उसके उपर चढ़ गया। उसकी गर्दन चूमते हुए उसने अपने हाथों मे उसकी चूचिया भर ली और दबाने लगा। उसने उनके निपल्स को अपनी उंगलियो मे भर कर मसला औरफिर एक चूची को अपने मुँह मे भर लिया साथ दूसरे से उसकी दूसरी चूची मसलने लगा।
"..ऊ..ऊओह...और दबा ज़ालिम...और ज़ोर से...अब इसवाली को चूस ना।",उसने अपने हाथो से अपनी एक चूची उसके मुँह मे डाल दी।
"आनन्न...आनन्नह...हान्न्न...ऐसे ही ...",मलिका ने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत पे लगा लिया और घुसाने लगी। कल्लन ने एक धक्का मारा और लंड आधा अंदर चला गया।,"आईईयईी।।।",मलिका चीखी। फनलवर रचित.
दूसरे धक्के मे लंड पूरा अंदर चला गया और फिर कल्लन ने उसकी चुदाई शुरू कर दी। दोनो एक दूसरे से चिपटे एक दूसरे को चूम रहे थे। कल्लन कभी उसके चेहरे तो कभी उसकी चूचियो को चूमता और दबाता और मलिका भी अपने नाखूनओ को उसकी पीठ और गांड मे गाडती हुई उसकी किस का जवाब देती। मलिका कल्लन की गांड जोरो से मार रही थी। उसने अपनी टांगे उसकी कमर पे लपेट ली थी और कमर हिलाकर उसके धक्कों की ताल से ताल मिलाते हुए चुद रही थी।
धक्कों की रफ़्तार बढ़ने लगी और थोड़ी ही देर मे मलिका की चूत ने पानी छोड़ दिया। कल्लन ने जोश मे उसकी एक चूची पे अपने होंठ कस दिए और उसकी कमर झटके खाने लगी और उसका लंड मलिका की चूत को अपने पानी से भरने लगा।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
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दोस्तों आज के लिए बस यही तक. फिर मिलेंगे एक नए अध्याय के साथ. तब तक के लिए मैत्री की ओर से...................
जय भारत.


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