10-04-2026, 04:08 AM
अध्याय 3
बाथरूम के भीतर से कपड़ों की सरसराहट थमी और कुंडी खुलने की आवाज़ आई। अम्मी ने अपना एक सफेद हाथ बाहर निकाला ताकि मुझसे वह काला अबाया वापस ले सकें और उसे अपनी नीली सिल्क की नाइटगाउन के ऊपर पहन सकें। वह अंदर की गंदगी और बदबू से इतनी परेशान थीं कि जल्द से जल्द बाहर निकलना चाहती थीं।
मगर जैसे ही दरवाज़ा थोड़ा सा खुला, उन भेड़ियों में से एक अपनी जगह से उछला और दरवाज़े के पास जा पहुँचा।
उस शख्स ने अपनी गंदी नज़रों को अम्मी के उस नीले रेशमी लिबास पर गड़ा दिया, जो उनके बदन से चिपक कर उनके पुष्ट सीने और कूल्हों की नुमाइश कर रहा था। वह बड़े बेशर्म लहजे में मुस्कुराते हुए बोला:
"अरे मैडम, इतनी जल्दी क्या है? अंदर बड़ी घुटन है, आप बाहर ही आ जाइए और आराम से यहीं अपना अबाया पहन लीजिए। हमें भी तो ज़रा कुदरत का यह नूरानी बदन जी भर के देखने दीजिए। हम बस आपको ठीक से देखना चाहते हैं, कोई गुनाह तो नहीं कर रहे!"
अम्मी यह सुनकर सन्न रह गईं। उनके चेहरे का रंग सफेद पड़ गया। उन्होंने घबराकर दरवाज़ा ज़ोर से बंद करने की कोशिश की, ताकि वह उन वासना से भरी नज़रों से बच सकें।
मगर वह आदमी शातिर था। जैसे ही अम्मी ने पल्ला खींचा, उसने फुर्ती से अपना भारी जूता दरवाज़े की दरार में फँसा दिया। लोहे का दरवाज़ा उसके पैर से टकराकर रुक गया और बंद नहीं हो सका। अम्मी ने अंदर से पूरी ताक़त लगाई, लेकिन उस हट्टे-कट्टे मर्द के पैर के सामने उनकी नर्म बाहें बेबस थीं।
"प्लीज... दरवाज़ा छोड़ो! साहिल! देखो ये क्या कर रहे हैं!" अम्मी की आवाज़ में रोनी सी चीख थी।
साहिल अम्मी की तरफ बढ़ने की कोशिश करने लगा और चिल्लाया, "मेरी अम्मी को छोड़ दो!" उसे पकड़े हुए एक शख्स ने उसके पेट में घूँसा जड़ दिया और बोला, "ज्यादा बहादुर मत बन।"
साहिल दर्द से दोहरा हो गया, लेकिन फिर भी अम्मी की ओर बढ़ने की कोशिश करता रहा। उसे फिर से पेट में एक और घूँसा पड़ा।
उस शख्स ने दरवाज़े पर अपना हाथ टिका दिया और झुककर अंदर झाँकने की कोशिश करने लगा, जहाँ अम्मी उस पारदर्शी नीली सिल्क में अपनी इज़्ज़त बचाने की जद्दोजहद कर रही थीं। उसने बड़े इत्मीनान से कहा:
"अरे मैडम, घबराती क्यों हैं? आप ज़रा बाहर तो आइए। देखिए, आपका लाडला बेटा भी तो यहीं बाहर खड़ा है। हम कोई पराये थोड़े ही हैं, बस आपकी इस कातिलाना खूबसूरती के कायल हो गए हैं।"
"ज़रा ये दरवाज़ा खोलिए, देखिए, आपका बेटा आपको पुकार रहा है, शायद वह भी अपनी अम्मी को देखना चाहता है।"
मैं उन दो लड़कों के बीच जकड़ा हुआ था, मेरे पेट में असहनीय दर्द हो रहा था। मैं दर्द और अपमान के मारे रो रहा था, तभी एक लड़के ने कहा, "अगर तुमने ज़बान खोली तो अंजाम बुरा होगा," और इतना कहते ही उसने एक रामपुरी चाकू निकाला और मेरी गर्दन पर टिका दिया।
मेरी आँखों के सामने मेरी अम्मी, जो मेरी दुनिया थीं, उस तंग नाइटगाउन में कांप रही थीं। उनके मखमली और भरे हुए अंगों का उभार उस नीले कपड़े के नीचे साफ़ झलक रहा था, जिसे वे दरिंदे अपनी नज़रों से नोच रहे थे।
मुझे अपनी सुरक्षा का भी डर था, पर अम्मी की वह बेबसी देखकर मेरा कलेजा मुँह को आ रहा था। वह दरवाज़ा अब खुला हुआ था, और उन लोगों की पहुँच और अम्मी के दूधिया बदन के बीच अब सिर्फ चंद इंच का फासला बचा था।
"छोड़ दो उन्हें... प्लीज," मेरे मुँह से बस एक कमज़ोर सी आवाज़ निकली, जिसे उन लोगों ने एक ज़ोरदार ठहाके के साथ उड़ा दिया।
अम्मी की आँखें मुझसे मदद मांग रही थीं, और मैं अपनी ही अम्मी के उस सेक्सी और बेपनाह हुस्न को सरेआम नीलाम होते देख रहा था।
जैसे ही अम्मी ने दरवाज़ा बंद करने की आखिरी कोशिश की, उस शख्स ने अपनी पूरी ताक़त लगा दी।
उसने झटके से अम्मी का वह गोरा और नर्म हाथ पकड़ा और उन्हें बाहर की तरफ खींच लिया। वह ज़ोर इतना ज़बरदस्त था कि अम्मी खुद को संभाल नहीं पाईं और सीधे उस दरिंदे की बाहों में जा गिरीं।
वह आदमी करीब 5 फीट 8 इंच का था, जिसका रंग गहरा सांवला और बदन गठा हुआ था। उसने सिर्फ एक काली बनियान और ट्राउजर पहन रखा था, जिससे उसकी पसीने से तरबतर बाहें और चौड़ा सीना साफ़ दिख रहा था। जब अम्मी का दूधिया सफेद और कोमल बदन उस काले बनियान वाले शख्स के सीने से टकराया, तो वह नज़ारा किसी भी देखने वाले की धड़कन रोक देने के लिए काफी था।
अम्मी उस नीली सिल्क की नाइटगाउन में उसके हाथों में कैद थीं। झटके की वजह से उनका संतुलन बिगड़ गया था और उनके भरे हुए सीने का उभार उस आदमी की सख्त छाती से ज़ोर से सट गया था। सिल्क का वह पतला कपड़ा उन दोनों के जिस्म की गर्मी को एक-दूसरे तक पहुँचा रहा था। अम्मी का वह नूरानी और सेक्सी रूप उस सांवले शख्स की गिरफ्त में और भी ज़्यादा नाजुक और कीमती लग रहा था।
उस शख्स ने अपनी मज़बूत बाहें अम्मी की पतली कमर के गिर्द लपेट लीं, उसकी उंगलियाँ उस नीले रेशम के ऊपर से अम्मी की मखमली त्वचा को महसूस कर रही थीं।
"उफ़... मैडम, आप तो वाकई रुई की तरह नर्म हैं। इतनी जल्दी क्या थी अंदर भागने की? देखिए, अब तो आप खुद ही हमारी बाहों में आ गईं।"
उसने अम्मी के गोरे और नंगे कंधों के पास झुककर एक गहरी साँस ली, जैसे वह उनके बदन की खुशबू को अपने अंदर उतार लेना चाहता हो। अम्मी की आँखें दहशत से फटी रह गई थीं, उनके गुलाबी होंठ थरथरा रहे थे और वह अपनी जान बचाने के लिए उस शख्स के सीने पर अपने दोनों गोरे हाथ रखकर उसे पीछे धकेलने की नाकाम कोशिश कर रही थीं।
मैं यह सब देख रहा था—अपनी अम्मी को एक अजनबी, गंदे आदमी की बाहों में इस तरह अर्धनग्न और बेबस हालत में। उन दो लड़कों ने मुझे अभी भी जकड़ रखा था। मेरे अंदर एक तरफ तो अम्मी को बचाने का पागलपन सवार था, और दूसरी तरफ उनके उस कातिलाना और कामुक बदन की यह नुमाइश मुझे सुन्न कर रही थी।
अम्मी की वह नीली नाइटगाउन उनके सुडौल कूल्हों पर थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी, जिससे उनके गोरे पैरों की सफेदी उस अंधेरी गैलरी में चमक रही थी।
वह शख्स अब धीरे-धीरे अपना हाथ उनके कूल्हों की तरफ नीचे ले जा रहा था, और उसके साथियों की गंदी हँसी पूरे डिब्बे में गूँज रही थी।
"साहिल! बचा मुझे... साहिल!" अम्मी की वह बेबस पुकार सीधे मेरे कलेजे को चीर गई। पर फिर अम्मी की निगाह मेरी तरफ गई और उन्होंने देखा कि मेरी गर्दन पर एक रामपुरी चाकू टिका हुआ है। फिर वह अपनी हालत भूल गईं और गिड़गिड़ाते हुए बोलीं, "मेरे बेटे को छोड़ दो, मैं आपकी हर बात मानूँगी।"
वहाँ कोई नहीं था जो हमारी मदद कर सके। नानी सो रही थीं, और रास्ता उन रऊडी लड़कों ने ब्लॉक कर रखा था। मैं अपनी अम्मी की इज़्ज़त को उन गंदे हाथों में बिखरते देख रहा था।
उस सांवले, काली बनियान वाले शख्स की गिरफ्त अम्मी की मखमली कमर पर और मज़बूत हो गई। अम्मी खौफ के मारे पत्थर बन चुकी थीं, उनकी आँखें फटी की फटी रह गई थीं और साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं, जिससे उनकी नीली सिल्क की नाइटगाउन उनके भरे हुए सीने पर ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे हो रही थी।
उस सांवले शख्स ने कहा, "वह तो तुम मानोगी ही मेरी जान।"
उस शख्स ने अपनी नज़रों को अम्मी की लंबी सुराहीदार गर्दन पर टिकाया, जहाँ पसीने की एक नन्हीं बूंद चमक रही थी। उसने अपना गंदा मुँह झुकाया और अपनी जीभ अम्मी की उस सफेद गर्दन पर फेर दी।
वह शख्स: (हवस भरी आवाज़ में चाटते हुए) "उफ़... कितनी मीठी है तू! कसम से, चीनी जैसी सफेदी और शहद जैसी मिठास।"
अम्मी के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। उन्होंने अपनी आँखें ज़ोर से बंद कर लीं और उनके मुँह से एक दबी हुई सिसकी निकली। वह घिनौना स्पर्श उनके नर्म त्वचा पर किसी ज़हर की तरह लग रहा था।
वह शख्स: "डर मत जान... हम कुछ नहीं करेंगे। हम बस तुझे अच्छी तरह से देखना चाहते हैं। इतना कातिलाना हुस्न खुदा ने सिर्फ पर्दों में छुपाने के लिए थोड़े ही बनाया है।"
यह कहते हुए, उसने अम्मी को झटके से ट्रेन के टॉयलेट वाले कॉरिडोर के बीच में धकेल दिया, जहाँ रोशनी थोड़ी ज़्यादा थी। उसने अम्मी को बीच में खड़ा कर दिया ताकि वह एक तमाशा बन जाएँ। अब घेराबंदी ऐसी थी कि अम्मी का नूरानी बदन हर तरफ से देखा जा सकता था।
सामने का मंज़र: दो लड़के अम्मी के ठीक सामने खड़े थे, उनकी भूखी नज़रें अम्मी के नीले रेशमी गाउन के नीचे छिपे उनके पुष्ट स्तनों और उनके मखमली पेट के उभारों को ताक रही थीं। अम्मी ने अपने दोनों हाथ अपने सीने पर रख लिए थे, मगर वह रेशमी कपड़ा इतना पतला था कि उनकी बेबसी छिप नहीं पा रही थी।
पीछे का मंज़र: बाकी के दो लड़के (जिन्होंने मुझे पकड़ रखा था) अम्मी की पीठ की तरफ थे। उन्हें अम्मी की वह नंगी गोरी पीठ और उस तंग नाइटगाउन में कैद उनके सुडौल कूल्हों का पूरा नज़ारा मिल रहा था।
मैं अपनी अम्मी को इस तरह चार दरिंदों के बीच एक खिलौने की तरह नुमाइश बनते देख रहा था। मेरे कंधे पर रखा वह हाथ अब और नीचे सरक रहा था, जैसे वह मुझे डरा रहा हो। अम्मी उस नीली सिल्क में किसी अप्सरा जैसी लग रही थीं, पर उनकी आँखों में जो बेबसी थी, उसने मेरा कलेजा छलनी कर दिया था।
उन लड़कों की गंदी फुसफुसाहट और उनकी सीटियाँ उस बंद गलियारे में गूँज रही थीं। वे अम्मी के बदन के एक-एक हिस्से पर गंदे कमेंट्स कर रहे थे।
"देख भाई, क्या सुडौल बनावट है... पीछे से तो एकदम कयामत लग रही है!" एक ने अम्मी के कूल्हों की तरफ इशारा करते हुए कहा। मैंने न चाहते हुए भी उस तरफ देखा, अम्मी की नाइटी उनके कूल्हों से चिपकी हुई थी और उनके उभारों को साफ़ बयां कर रही थी। मेरे साथ वाला लड़का बोला, "क्या मस्त गांड है, आज तो मारने का मज़ा आ जाएगा।"
अम्मी रो रही थीं, उनका चेहरा लाल पड़ गया था और वह बस दीवार से सटकर खुद को छोटा करने की कोशिश कर रही थीं। पर वह तंग नाइटगाउन उनके हर कामुक कर्व को धोखेबाज़ की तरह ज़माने के सामने पेश कर रहा था। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा था, बस अपनी ही अम्मी के उस सेक्सी और बेपनाह हुस्न को इन भेड़ियों की नज़रों से नीलाम होते देख रहा था।
उस काली बनियान वाले शख्स ने अम्मी की पतली कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली, उसकी उंगलियाँ नीले सिल्क के कपड़े को मरोड़ते हुए अम्मी के नर्म त्वचा में धंस रही थीं।
उसने अम्मी के कान के पास झुककर अपनी भारी और घिनौनी आवाज़ में आदेश दिया:
"चल अब धीरे से घूम जा... ताकि सबको अच्छे से तू नज़र आ सके। आगे का नज़ारा तो देख लिया, अब ज़रा पीछे की वह कातिलाना ढलान भी दिखा दे सबको।"
अम्मी पत्थर की मूरत बन गई थीं। उनकी आँखों से आँसू बहकर उनके दूधिया गालों पर लुढ़क रहे थे। उन्होंने इनकार में धीरे से सिर हिलाया, उनकी रूह कांप रही थी। पर उस काली बनियान वाले दरिंदे को 'ना' सुनने की आदत नहीं थी।
उसने अम्मी को कंधे से पकड़ा और ज़ोर का झटका देकर उन्हें गोल घुमा दिया। अम्मी की नीली सिल्क की नाइटगाउन हवा में एक लहर की तरह लहराई, जिससे उनके गोरे और सुडौल पैरों की सफेदी घुटनों तक नुमाया हो गई।
अब अम्मी की पीठ उस काली बनियान वाले शख्स की तरफ थी, और उनके शरीर का पिछला हिस्सा पूरी तरह उसके सामने था। उस डीप नेक नाइटगाउन में अम्मी की नंगी सफेद पीठ किसी संगमरमर की सिल्ली की तरह चमक रही थी। रीढ़ की हड्डी के पास जो पसीने की चमक थी, वह रोशनी में किसी हीरे जैसी लग रही थी। मगर उस भेड़िये की नज़रें तो नीचे टिकी थीं, जहाँ वह रेशमी कपड़ा अम्मी के पुष्ट कूल्हों पर इस कदर चिपका था कि उनके जिस्म की हर लचक साफ़ दिखाई दे रही थी।
इस घुमाव के कारण, अम्मी का सामने का पूरा हिस्सा अब मेरी और मेरे साथ खड़े उन दो रऊडी लड़कों की तरफ हो गया था। उस तंग और झीने नीले रेशमी कपड़े के नीचे अम्मी के रसीले और भरे हुए मम्मे अपनी पूरी गोलाई और उभार के साथ साफ़ नज़र आ रहे थे। वे कयामत ढा रहे थे। उन दोनों लड़कों की आँखें हवस से फैल गईं और वे अम्मी के उस बेपनाह और कामुक हुस्न को एक-टक निहारने लगे। अम्मी ने शर्म के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने दूधिया हाथों से अपने सीने को ढंकने की नाकाम कोशिश करने लगीं, पर उनकी बेबसी उस पारदर्शी कपड़े के आर-पार साफ़ झलक रही थी।
अम्मी ने शर्म के मारे अपना चेहरा दीवार की तरफ कर लिया था, पर उनका वह कातिलाना बदन अब सबके लिए एक खुली किताब बन चुका था।
एक लड़का: (सीटी बजाते हुए) "वाह भाई! क्या गज़ब की बनावट है। कसम से, ऐसी सुडौल गाँड तो मैंने आज तक नहीं देखी। ये पीला सूट उतारकर इस नीले रेशम में तो मैडम एकदम परी लग रही हैं।"
मैं यह सब देख रहा था—अपनी अम्मी को एक बाज़ारू चीज़ की तरह गोल-गोल घूमते हुए। मेरा दिल चीख रहा था, पर उन दो लड़कों ने मुझे अपनी गिरफ्त में इस कदर जकड़ रखा था कि मैं हिल भी नहीं पा रहा था। एक तरफ अम्मी की वह बेबसी और दूसरी तरफ उनके उस सेक्सी और कामुक रूप की यह नुमाइश मेरे किशोर मन में एक ऐसा तूफ़ान खड़ा कर रही थी जिसे मैं समझ नहीं पा रहा था।
वह सांवला शख्स अब अम्मी की पीठ पर अपनी उंगलियाँ फेर रहा था, जैसे वह उस दूधिया सफेदी का अंदाज़ा लगा रहा हो। अम्मी की सिसकियाँ तेज़ हो गई थीं, और वह उस तंग बाथरूम के दरवाज़े की चौखट को अपनी मखमली उंगलियों से ज़ोर से पकड़े हुए थीं, जैसे वही उनका आखिरी सहारा हो।
वही काली बनियान वाला सांवला शख्स, अम्मी के मखमली और पुष्ट बदन को अपनी गिरफ्त में लिए हुए एक शैतानी मुस्कान के साथ खड़ा था। फिर उसने अम्मी के कूल्हों पर धक्का मारा, अम्मी की आँखें डर से फैल गईं क्योंकि उन्हें अहसास हो गया था कि उन्होंने अभी अपनी गांड के बीच क्या महसूस किया है।
उनके मुँह से एक लंबी सिसकी निकली, "नहीं!"
तभी मुझे जकड़े हुए उस राजू नाम के लड़के ने अपनी लार टपकाते हुए सलीम की तरफ देखकर आवाज़ लगाई।
राजू: "ओ सलीम भाई! ज़रा इसके हाथ तो ऊपर करवाओ। इस हूर की परी ने अपने मर्मरी हाथों से अपने रसीले मम्मे ढंक रखे हैं। बाहर से उभार तो दिख रहा है, पर ढंग से दीदार नहीं हो पा रहा। ज़रा पर्दा तो हटाओ!"
राजू की बात सुनकर सलीम ज़ोर से ठहाका मारकर हँसा, उसकी गंदी हँसी उस तंग गलियारे में ज़हर की तरह गूँजी। उसने अम्मी के गोरे और कांपते हुए कन्धों पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली।
सलीम: (कमीनी मुस्कान के साथ) "अच्छा! तो हमारे राजू भाई को मम्मे देखने हैं? क्यों बे, क्या अभी से दूध पीने का मन कर रहा है क्या? बड़े रसीले और भरे हुए लग रहे हैं न इस नीली सिल्क के नीचे?"
सलीम ने फिर मेरी तरफ एक हिकारत भरी नज़र डाली, जैसे वह मुझे नीचा दिखाना चाहता हो।
सलीम: "क्यों छोटे? तूने तो अपनी अम्मी का दूध पिया ही होगा यहाँ से? अब ज़रा अपने भाईयों को भी तो देखने दे कि कुदरत ने इन्हें कितना सुडौल और भारी बनाया है!"
अम्मी यह सुनकर शर्म और ज़िल्लत से जैसे ज़मीन में गड़ गईं। उनके दूधिया गाल खौफ और अपमान से लाल पड़ गए थे। उन्होंने अपने दोनों हाथों को अपने भरे हुए सीने पर और भी ज़ोर से भींच लिया, जिससे उनकी नीली सिल्क की नाइटगाउन उनके उरोजों की गोलाई पर और भी ज़्यादा तन गई।
सलीम ने अम्मी के दोनों हाथों को झटके से उनके सिर के ऊपर उठा दिया। इस हरकत ने अम्मी के नीले रेशमी लिबास को उनके जिस्म पर और भी ज़्यादा तान दिया। हाथ ऊपर होने की वजह से उनका भरा हुआ सीना और भी बाहर की तरफ उभर आया, जैसे वह उस पतले कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब हो।
उस नीली सिल्क के पारदर्शी खिंचाव के नीचे अम्मी के कठोर और उभरे हुए निप्पल्स साफ़ नज़र आने लगे, जो डर और ठंड की वजह से और भी नुमाया हो गए थे।
अम्मी का वह रसीला और पुष्ट उभार अब सीधे मेरी और उस राजू की नज़रों के सामने था। राजू की आँखों में हवस की चमक बढ़ गई और वह अम्मी के उन मखमली मम्मों को अपनी गंदी नज़रों से टटोलने लगा। अम्मी की आँखें शर्म के मारे बंद थीं, और उनका गोरा चेहरा ऊपर की तरफ खिंच गया था, जिससे उनकी सुराहीदार गर्दन और भी लंबी और दिलकश लग रही थी।
सलीम, जो अम्मी के पीछे खड़ा था, उनकी उन नंगी कलाइयों को ऊपर थामे हुए था। अम्मी की वह नंगी सफेद पीठ उस डीप नेक नाइटगाउन में पूरी तरह बेपर्दा थी। सलीम ने अपनी हवस भरी निगाहें उस संगमरमर जैसी पीठ पर गड़ाईं और अपना गंदा मुँह नीचे झुकाया।
सलीम ने अपनी जीभ अम्मी की उस दूधिया सफेद और चिकनी पीठ पर फेर दी। उसने उनकी रीढ़ की हड्डी के पास चमकते पसीने को चाटते हुए एक गहरी आवाज़ निकाली।
सलीम: "उफ़... खुदा की कसम! कितनी चिकनी और गरम पीठ है तेरी। मन करता है बस यहीं पिघल जाऊँ।"
अम्मी के पूरे वजूद में एक बिजली सी कौंधी। वह अपने हाथ छुड़ाने के लिए छटपटाईं, जिससे उनके उभरे हुए सीने की हरकत और भी तेज़ हो गई और उस नीले रेशम के नीचे उनके मखमली अंगों की लचक ने राजू और उसके साथी को पागल कर दिया।
राजू: (लार टपकाते हुए) "भाई! क्या गज़ब की चीज़ है। इसके मम्मे तो एकदम कयामत हैं। देख तो सही कैसे ऊपर-नीचे हो रहे हैं!"
मैं यह सब देख रहा था—अपनी अम्मी के उस बेपनाह और सेक्सी बदन को इस तरह सरेआम नीलाम होते हुए। उनके उठे हुए निप्पल्स और वह नंगी गोरी पीठ... वह नज़ारा किसी भी मर्द के होश उड़ा देने के लिए काफी था, पर एक बेटे के तौर पर मेरी रूह इस ज़िल्लत से छलनी हो रही थी। अम्मी बस बेबसी में अपना सिर हिला रही थीं, और उनकी सिसकियाँ उस खौफनाक रात की खामोशी को चीर रही थीं।
उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ को समेटा और कांपते हुए लबों से विनती की।
अम्मी: (रुँधे हुए गले से) "खुदा के वास्ते... अब तो जाने दो। देख लिया न तुमने... अब बस करो, हमें अपनी सीट पर जाने दो।"
उनकी आवाज़ में इतनी बेबसी थी कि कोई पत्थर दिल भी पिघल जाए, मगर उन भेड़ियों पर हवस का भूत सवार था। सलीम एक बार फिर अम्मी के सामने आकर खड़ा हो गया। उसने अम्मी की आँखों में आँखें डालीं और बड़े इत्मीनान से अपना काला हाथ उठाया।
उसने अपनी उंगलियाँ अम्मी के उन गुलाबी और कांपते हुए होंठों पर रख दीं।
सलीम: (फुसफुसाते हुए) "अभी कहाँ जान... अभी तो पार्टी शुरू हुई है। ज़रा ठहरो तो सही, इतनी जल्दी भी क्या है?"
उसकी उंगलियाँ अम्मी के मखमली लबों पर रेंग रही थीं। अम्मी ने खौफ के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं, और उनके गोरे गालों पर शर्म की सुर्खी दौड़ गई।
सलीम: "बस थोड़ा सा टच करने दो... कसम से, अपनी इन आँखों पर यकीन नहीं होता कि खुदा ने किसी को इतना दूधिया और बेदाग गोरा भी बनाया होगा। मन करता है बस इस सफेदी को चख लूँ।"
यह कहते हुए उसने अपना दूसरा हाथ अम्मी के नंगे और सुडौल कंधे पर रख दिया। वह हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर सरकने लगा, उस नीली सिल्क की नाइटगाउन के कॉलर की तरफ, जहाँ से अम्मी के भरे हुए सीने की गहरी ढलान शुरू होती थी।
अम्मी का पूरा बदन थर-थर कांप रहा था। उनका वह कातिलाना बदन उस तंग नीले लिबास में हर धड़कन के साथ उभरकर सामने आ रहा था।
बाकी लड़के: (पीछे से देखते हुए) "हाँ भाई, ज़रा देख तो सही... ये रंग असली है या कोई जादू है! ऐसी मखमली काया तो सिर्फ ख्वाबों में होती है।"
मैं अपनी अम्मी को इस तरह नीलाम होते देख रहा था। मेरे कंधे पर रखा हाथ अब मुझे और ज़ोर से भींच रहा था।
मेरी नज़रें अम्मी के उस उभरे हुए सीने और सलीम के काले हाथों पर टिकी थीं। एक तरफ अम्मी की इज़्ज़त का सवाल था, और दूसरी तरफ उनकी वह बेपनाह और सेक्सी खूबसूरती जो इस वक्त पूरी दुनिया के सामने बेपर्दा थी।
Deepak Kapoor
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