09-04-2026, 10:57 PM
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नादिर साहब की आंखें दीदी को इस तरह की ड्रेस में देख कर चमक गई। अनहोन दीदी को वॉशरूम में भेजा और बोले-
नादिर साहब: तुम नहा लो, मैं कोई कपड़े ले कर आता हूँ।
फिर नादिर साहब ने लड़की को कॉल किया और बोले-
नादिर साहब: आज तो वो कयामत लग रही है बारिश में भीग कर। अब उसको कोई ड्रेस देना है चेंज करने के लिए। क्या ड्रेस दूँ?
लड़की (मैं): कोई लेडीज़ ड्रेस है तुम्हारे पास?
नादिर साब: नहीं, मेरे पास लेडीज़ ड्रेस का क्या काम?
लड़की (मैं): फिर तुमने सोचा है कोन सी ड्रेस दोगे?
नादिर साहब: कोई अपना सूट दे देता है।
लड़की (मैं): तुम ऐसा करो, सिर्फ अपनी सफेद शर्ट देना। और उसके साथ अपना कोई छोटा निक्कर दे दो।
नादिर साहब: ठीक है.
फिर नादिर साहब ने दीदी को अपनी शर्ट और निक्कर दे दिया। दीदी ने जब वो शर्ट और निक्कर पहना तो दीदी बहुत हॉटलग रही थी। शर्ट का कपड़ा काफी पतला था और गीलेपन की वजह से दीदी के शरीर से चिपक गया था। दीदी का पूरा जिस्म लगभग आर पार नज़र आ रहा था।
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दीदी ने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए उनके स्तन साफ दिख रहे थेऔर निप्पल एक दम टाइट खड़े थे । और निक्कर भी सिर्फ आधी टाँगो पर आ रहा था चूत से बस 2 इंच नीचे। दीदी ने वो ड्रेस पहन कर अंजलि को मैसेज किया, और सारी बात बताई।
दीदी: अब मुझको काफी शर्म आ रही है इस ड्रेस में. मेरा सब कुछ नज़र आ रहा है।
अंजलि (मैं): शरम छोड़ो, और उस बुड्ढे को जा कर अपने जिस्म का दीदार कराओ।
दीदी: और अगर वो मुझको देख कर अपना होश खो बैठे, फिर क्या करू?
अंजलि (मैं): फिर तुझे क्या करना, जो करेगा वो खुद करेगा।
दीदी: बहुत शरारती हो गई है तू. इसमें मेरे स्तन साफ नजर आ रहे हैं। इनको कैसे छुपाऊ?
अंजलि (मैं): अपने बालों को आगे करके स्तन कवर कर ले।
दीदी: ठीक है.
फिर दीदी रूम से बाहर आ गई, और नादिर साहब के पास बैठ गई। दीदी ने अपने बालों से अपने स्तन कवर किये थे।
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नादिर साहब की नज़र दीदी के जिस्म पर थी, और दीदी ने भी ये बात नोट कर ली थी।
नादिर साहब: ठण्ड लग रही होगी, तुम्हे चाय पीनी चाहिए ।
दीदी: ठीक कहा आपने. मैं बना कर लाती हूं चाय.
फिर दीदी किचन की तरफ चली गई, तो नादिर साहब की नज़र दीदी की गांड पर थी। दीदी की गांड एक दम साफ़ दिख रही थी उस निक्कर में। नादिर साहब ने लड़की को कॉल मिलायी।
नादिर साहब: बड़ी कयामत लग रही है वो इन कपड़ो में। उसके बड़े बड़े बूब्स साफ़ नज़र आ रहे हैं।
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लड़की (मैं): अब कहाँ है वो?
नादिर साहब: वो किचन में चाय बना रही है।
लड़की (मैं): ठीक है अब कुछ करो उसके साथ।
नादिर साहब: ठीक है.
5 मिनट के बाद दीदी चाय लेकर आईं, तो दीदी नादिर साहब के पास बैठ कर चाय पीने लगी। चाय पी कर नादिर साहब ने दीदी के जाँघों पर हाथ रख दिया, और सहलाने लगे। दीदी को शर्म महसूस हो रही थी, क्योंकि पहली बार दीदी किसी गैर मर्द के पास बैठी हुई थी।अब उनके जिस्म की गर्मी बहार आने को बेताब लग रही थी।
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दीदी नादिर साब को मना नहीं कर रही थी। बल्कि दीदी ने अपनी आंखें बंद कर ली थी। फिर नादिर साहब ने दीदी का गाल पकड़ लिया और सहलाने लगे , फिर धीरे से अपने काले काले होंठ दीदी के होंठो के ऊपर ले गए और हल्के से अपने होंठ दीदी के होंठ से जोड़ दिए। इससे दीदी के बदन में एक दम सिहरन दौड़ गयी, जिसे फील करते ही नादिर साहब ने होंठो को हलके से चाटना शुरू किया और फिर दीदी के होठों को अपने होठों में लेकर चूमने लगे।दीदी ने नादिर साब के गले को पकड़ लिया, और वो भी नादिर साब का साथ देने लगी।


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