08-04-2026, 01:21 PM
जब दुष्यंत वर्मा का फोन राजासाहब के पास आया तो वो अपने वकील को अपनी नयी वसीयत जिसमे उन्होने अपना सब कुछ मेनका के नाम कर दिया था,लिखवा रहे थे। मैत्री की प्रस्तुति.
"यार,यश! तेरे कहे मुताबिक केवल मनीष उसके पीछे है। मैं उसकी मदद के लिए किसी और को नही भेज रहा हू। ऐसे काम मे बहुत ख़तरा होता है। तुम कहो तो मैं कुछ और लोगो को भी इस काम पे लगा देता हू।"
"नही,दुष्यंत,ऐसा नही करना। फ़िक्र मत करो,मनीष को मैं किसी भी तरह के ख़तरे मे नही पड़ने दूँगा। तुम मुझे उसका नंबर दो, मैं उस से बात कर के आगे की प्लॅनिंग करता हूँ।"
"ओके,यश,ये ले उसका नंबर।"
कल्लन का ऑटो एक ट्रॅफिक सिग्नल पर खड़ा था। उसके दो गाड़ियाँ पीछे मनीष और पूजा भी बाइक पे थे,"पूजा,तुम यहा से ऑटो लेकर घर चली जाओ। पता नही ये आदमी कहा जा रहा है।आगे ख़तरा भी हो सकता है।"
"मनीष,मुझे बहुत डर लग रहा है। मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगी।"
"बात समझो,पूजा,मुझे कुछ नही होगा। तुम घर जाओ। मैं तुम्हे फोन करूँगा। चलो, वो देखो वो ऑटो खाली है...जाओ।"
"मनीष।"
"मुझे कुछ नही होगा,डार्लिंग,फ़िक्र मत करो,देखो बत्ती हरी होने वाली है। चलो जल्दी से वो ऑटो पकड़ो।"
"ठीक है। मैं तुम्हारे फोन का इंतेज़ार करूँगी।"
मनीष अब अकेला ही कल्लन का पीछा करने लगा। मोबाइल बजा तो उसने हेंड्सस्फ्री ऑन कर दिया,"हेलो।"
"हम,यशवीरसिंग बोल रहे हैं,मनीष,तुम इस वक़्त कहा हो?"
"नमस्ते,सर, लगता है ये आदमी चोवोक बाज़ार की ओर जा रहा है। मैं बाइक से उसके ऑटो का पीछा कर रहा हू।"
"ठीक है,हम भी वही पहुँचते हैं।",और फोन काट गया।
थोड़ी देर बाद मनीष राजासाहब के साथ उनकी स्कॉर्पियो मे बैठा था, गाड़ी 'फियेस्टा' केफे केसाम्ने खड़ी थी जहा थोड़ी देर पहले कल्लन गया था। थोड़ी देर बाद एक कार रुकी और मलिका उसमे से उतर कर केफे के अंदर चली गयी।
"सर,ये तो..मादरचोद-" मैत्री की रचना.
"हा,मनीष। अब तो शक़ नही पक्का यकीन है कि ये इंसान जब्बार का साथी है और हमारे बेटे की मौत मे इसका हाथ है।",तभी दोनो केफे से बाहर आकर मलिका की कार मे बैठ के कही जाने लगे। मनीष दौड़ कर अपनी बाइक पे चला गया और वो और राजासाहब एक बार फिर कल्लन का पीछा करने लगे। मलिका ने कार एक सस्ते से होटेल के सामने रोक दी और कल्लन के साथ होटल के अंदर चली गयी।
होटेल के कमरे के अंदर मलिका और कल्लन एक दूसरे के कपड़े उतारते हुए पागलों की तरह चूम रहे थे। कितना तड़पी हू ज़ालिम तेरे लिए।",मलिका ने कल्लन की पॅंट एक झटके मे उतार दी और झुक कर उसका लंड अपने मुँह मे भर लिया। कल्लन खड़े-खड़े ही उसके सर को पकड़ उसका मुँह चोदने लगा। मलिका ने लंड चूस्ते हुए उसकी कमर को अपनी बाहों मे कस लिया और अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद मे डाल दी।
बने रहिये आगे जारी है...................
"यार,यश! तेरे कहे मुताबिक केवल मनीष उसके पीछे है। मैं उसकी मदद के लिए किसी और को नही भेज रहा हू। ऐसे काम मे बहुत ख़तरा होता है। तुम कहो तो मैं कुछ और लोगो को भी इस काम पे लगा देता हू।"
"नही,दुष्यंत,ऐसा नही करना। फ़िक्र मत करो,मनीष को मैं किसी भी तरह के ख़तरे मे नही पड़ने दूँगा। तुम मुझे उसका नंबर दो, मैं उस से बात कर के आगे की प्लॅनिंग करता हूँ।"
"ओके,यश,ये ले उसका नंबर।"
कल्लन का ऑटो एक ट्रॅफिक सिग्नल पर खड़ा था। उसके दो गाड़ियाँ पीछे मनीष और पूजा भी बाइक पे थे,"पूजा,तुम यहा से ऑटो लेकर घर चली जाओ। पता नही ये आदमी कहा जा रहा है।आगे ख़तरा भी हो सकता है।"
"मनीष,मुझे बहुत डर लग रहा है। मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगी।"
"बात समझो,पूजा,मुझे कुछ नही होगा। तुम घर जाओ। मैं तुम्हे फोन करूँगा। चलो, वो देखो वो ऑटो खाली है...जाओ।"
"मनीष।"
"मुझे कुछ नही होगा,डार्लिंग,फ़िक्र मत करो,देखो बत्ती हरी होने वाली है। चलो जल्दी से वो ऑटो पकड़ो।"
"ठीक है। मैं तुम्हारे फोन का इंतेज़ार करूँगी।"
मनीष अब अकेला ही कल्लन का पीछा करने लगा। मोबाइल बजा तो उसने हेंड्सस्फ्री ऑन कर दिया,"हेलो।"
"हम,यशवीरसिंग बोल रहे हैं,मनीष,तुम इस वक़्त कहा हो?"
"नमस्ते,सर, लगता है ये आदमी चोवोक बाज़ार की ओर जा रहा है। मैं बाइक से उसके ऑटो का पीछा कर रहा हू।"
"ठीक है,हम भी वही पहुँचते हैं।",और फोन काट गया।
थोड़ी देर बाद मनीष राजासाहब के साथ उनकी स्कॉर्पियो मे बैठा था, गाड़ी 'फियेस्टा' केफे केसाम्ने खड़ी थी जहा थोड़ी देर पहले कल्लन गया था। थोड़ी देर बाद एक कार रुकी और मलिका उसमे से उतर कर केफे के अंदर चली गयी।
"सर,ये तो..मादरचोद-" मैत्री की रचना.
"हा,मनीष। अब तो शक़ नही पक्का यकीन है कि ये इंसान जब्बार का साथी है और हमारे बेटे की मौत मे इसका हाथ है।",तभी दोनो केफे से बाहर आकर मलिका की कार मे बैठ के कही जाने लगे। मनीष दौड़ कर अपनी बाइक पे चला गया और वो और राजासाहब एक बार फिर कल्लन का पीछा करने लगे। मलिका ने कार एक सस्ते से होटेल के सामने रोक दी और कल्लन के साथ होटल के अंदर चली गयी।
होटेल के कमरे के अंदर मलिका और कल्लन एक दूसरे के कपड़े उतारते हुए पागलों की तरह चूम रहे थे। कितना तड़पी हू ज़ालिम तेरे लिए।",मलिका ने कल्लन की पॅंट एक झटके मे उतार दी और झुक कर उसका लंड अपने मुँह मे भर लिया। कल्लन खड़े-खड़े ही उसके सर को पकड़ उसका मुँह चोदने लगा। मलिका ने लंड चूस्ते हुए उसकी कमर को अपनी बाहों मे कस लिया और अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद मे डाल दी।
बने रहिये आगे जारी है...................


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