07-04-2026, 09:48 PM
अलग अहसास
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दरअसल,
आशा वॉशरूम में गीले बालों को सँवार भी रही थी…. शालिनी पीछे खड़ी थी और चंदन की भीनी खुशबू उसके अंदर कुछ जगा रही थी. नारंगी साड़ी और डीप 'यू' कट ब्लाउज से झाँकती आशा की गोरी, बेदाग़ पीठ, जो उसके बालों की नमी से थोड़ी भीग चुकी थी, देखकर शालिनी खुद पर नियंत्रण न रख सकी…. उसकी साँसें तेज़ हो गईं.
एक पल की हिचकिचाहट के बाद, शालिनी ने धीरे से अपना दायाँ हाथ उठाया और अपनी तर्जनी ऊँगली की लंबी नाख़ून को आशा की पीठ पर टिकाया. हल्का-सा दबाव देते हुए, उसने ऊँगली को उस भीगी हुई सतह पर धीरे से ऊपर - नीचे सरकाया.
स्पर्श इतना अनपेक्षित था कि आशा के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई. वह अवाक, वहीं जम-सी गई.
शालिनी ने फिर उसके कमर तक आते काले लम्बे बालों को हटाया और अपनी उंगली के पोरों और नाख़ून की नोक से उसकी पूरी पीठ को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया.
आशा को समझ नहीं आ रहा था कि इस अचानक और अजीब से स्पर्श पर उसकी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए. वह हतप्रभ सी, कुछ देर तक बस स्थिर खड़ी रही.
सिंगल मदर होने के कारण यौन आकांक्षाओं को अपने अंदर ही मार देना उसने अपनी नियति समझ ली थी.
पर ये भी सत्य है कि;
ज़रा सा उत्तेजक बात या ऐसी कोई बात हो जाए जिसमें यौनता प्रमुख हो --- तो वह तुरंत ही कामाग्नि में जल उठती थी.
और आज, अभी ऐसा ही हो रहा है….
उससे कम उम्र की, उसी की सहकर्मी, कॉलेज की एक टीचर, उसे यौनेत्तेजक रूप से छू रही है और उसे रोकने के बजाए उल्टे आशा मज़े लेने लगी.
करीब पांच मिनट तक ऐसे ही करते रहने के बाद, शालिनी दोनों हाथों की तर्जनी ऊँगली के नाख़ून से आशा के गदराए मांसल पीठ को सहलाने लगी और फ़िर तीन मिनट बाद दोनों हाथों की तर्जनी और अँगूठे से आशा के कंधे पर से ब्लाउज के बॉर्डर को पकड़ कर बहुत ही धीरे से कंधे पर से सरका दी!!
आशा की अब तक आँखें बंद हो आई थीं….
कहीं और ही खो गई थी अब तक वो --- अतः उसे शालिनी की करतूत की ओर ध्यान न गया --- वो तो बस अपनी पीठ पर शालिनी के नुकीले नाखूनों से मिलने वाली गुदगुदी और आराम को भोग करने में लगी थी.
पल्लू चमचमाते फर्श पर लोटने लगी और आशा रोम रोम में उठने वाले यौन उत्तेजना की अनुभूति करने में खो गई. ये देख कर शालिनी ने अब पूरे नंगे कंधे से होकर गर्दन के पीछे वाले हिस्से तक नाखूनों से सहलाते हुए हल्की साँसें छोड़ने लगी --- और इसी के साथ ही बीच - बीच में दोनों हाथों की अपनी लंबी तर्जनी ऊँगली को गर्दन से नीचे उतारते हुए आशा की उन्नत चूचियों के ऊपरी गोलाईयों के अग्र फूले हिस्सों पर, जो ब्लाउज के “वी” कट से ऊपर की ओर निकले हुए थे; पर हल्के दबावों से दबाने लगी..!
और ऐसा करते ही आशा एक मादक कराह दे बैठी -----
शालिनी के लंबी उँगलियों के हल्के पड़ते दबाव एक मीठी सी गुदगुदी दौड़ा दे रही थी आशा के पूरे जिस्म में --- पूरे दिल से वह रोकना चाहती है फ़िलहाल शालिनी को; पर पता नही ऐसी कौन सी चीज़ है तो जो आशा के हाथों और होंठों को थामे हुए है --- मना कर रही है उसे कि जो हो रहा है उसे होने दो --- ऐसे पल बार बार नहीं मिलते --- जस्ट एन्जॉय द फ़ील --- द मोमेंट!
करीब दस मिनट ऐसे ही हल्के दबाव देते देते शालिनी की चूत भी पनिया गई --- वो आशा से प्रतिद्वंद्विता का भाव अवश्य रखती है मन में ; पर फ़िलहाल मन के साथ साथ चूत में भी चींटियों की सी रेंगती गुदगुदी ने उसके अंदर की स्वाभाविक कामुकता को इतना बढ़ा दिया कि वह लगभग भूल ही चुकी है की वो और आशा फ़िलहाल कॉलेज के वाशरूम में हैं और क्लासेज स्टार्ट होने में कुछ ही मिनट रह गए हैं.
शालिनी ने ब्लाउज के बॉर्डर वाले सिरों को तर्जनी और अंगूठे से थाम कंधे से और नीचे उतार दी...!
और,
अपने दोनों हाथों को कन्धों के ऊपर से ही ले जाते हुए, थोड़ा हिम्मत करते हुए, काँपते हाथों से ; ब्लाउज के प्रथम हुक को आहिस्ते से खोल दी,
और बिना कोई समय गंवाते हुए,
शालिनी ने अपने पतले लंबे ऊँगलियों से, खुले हुए ब्लाउज के ऊपरी दोनों सिरों को प्रथम हुक समेत ज़रा सा मोड़ते हुए अंदर कर दी --- मतलब आशा के पुष्टकर, नर्म, फूले हुए बूब्स की ओर अंदर कर दी दोनों ऊपरी उन्मुक्त सिरों को --- इससे ब्लाउज की नेकलाइन और गहरी हो गई और गहरी क्लीवेज और भी अधिक दर्शनीय हो गई ---- बिना कोई अतिरिक्त या विशेष जतन किए | क्लीवेज के गहराई में शालिनी की ऊँगलियों की छूअन ने आशा को और भी मस्ती में भर दिया और अब वह अपने शरीर को थोड़ा ढीला छोड़ते हुए अपना भार, खुद को पीछे करते हुए शालिनी के जिस्म से टिका कर छोड़ दी.
शालिनी ने भी कोई और मौका गंवाए बिना, फट से आशा के बगलों से होते हुए उसके बड़े बूब्स को पकड़ ली ;
और पकड़ते ही उसके विशाल चूचियों की नरमी का एक सुखद अहसास हुआ.
और यह अहसास ऐसा था कि पकड़ने के साथ ही आधे से अधिक दुश्चिन्ताओं को शालिनी खड़े खड़े ही भूल गई --- टेंशन फ्री ---- और अपने भीतर एक हल्कापन फ़ील होते ही शालिनी ने मस्ती में नर्म चूचियों को दो-तीन बार लगातार ज़ोर से दबा दी....
आशा एक मीठा ‘आह्ह्ह’ कर उठी;
पर शालिनी तीन बार चूची दबाने के बाद ही अचानक से रुक गई....
आश्चर्य से उसकी आँखें बड़ी होती चली गई.
कारण,
उसके हाथों ने कुछ महसूस किया किया अभी - अभी,
और वो यह कि आशा ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी है, और उसके खड़े निप्पल जैसे शालिनी की ऊँगलियों को एक मौन उत्तेजक आमन्त्रण दे रहे हों --- कि,
‘आओ, और प्लीज खेलो हमसे’
ना जाने इसी तरह पकड़े, चूचियों से कितनी ही देर खेलती रही वह--- बीच बीच में खुद की चूचियों को भी आगे तान कर आशा की पीठ से लगा देती,
और आशा भी शालिनी की कोमल वक्षों के नर्म स्पर्श पाते ही अपनी पीठ और अधिक पीछे की ओर ले जाती जिससे की शालिनी की चूचियाँ उसके पीठ से टकरा - टकरा कर दबतीं और शालिनी के साथ साथ..
आशा के मज़े को दोगुना कर देती है.
एक प्रतिष्ठित कॉलेज के बंद वाशरूम में दो मादाओं का एक अलग ही खेल चल रहा था --- जोकि निःसंदेह उन दोनों को अपने अपने गदराए जिस्म का परम आनंद देने वाला एक 'अलग एहसास' करा रहा था !!
शालिनी को हैरानी तो बहुत जबरदस्त हुई; क्यूंकि आम तौर पर कोई भी बड़े और भरे स्तनों वाली महिला बिना ब्रा के ब्लाउज पहनती नहीं है,
और आशा के तो काफ़ी अच्छे साइज़ के स्तन हैं, तो फिर इसके ब्रा न पहनने का कारण??!!
शालिनी सोचती रही --- पर नर्म चूचियों के स्पर्श का आनंद अपने मन से निकाल न सकी--- और सोचते हुए ही दबाते रही --- ब्लाउज कप के पतले कपड़े के ऊपर से ही दोनों निप्पल्स को पकड़ ली और बड़े प्यार से उमेठने लगी --- निप्पल अब तक सख्त हो कर खड़े भी हो चुके थे --- अतः ब्लाउज के ऊपर से पकड़ने में कोई ख़ास मशक्कत नहीं करनी पड़ी शालिनी को.
आशा सिवाय एक मीठी ‘आह्ह... उम्म्म...’ के और कुछ न कह सकी --- आँखें अब भी बंद हैं उसकी.
एक और बड़ी हैरानी वाली बात ये घटी शालिनी के साथ की चूचियों और निप्पल को दबाते दबाते उसके हाथ, उँगलियाँ कुछ भीगी भीगी, चिपचिपी सी हो गई थी….!
शालिनी कन्फर्म थी की इतनी भी पसीने से न आशा नहाई थी और न ही शालिनी ख़ुद --- तो फ़िर ऐसा क्यों लग रहा है??
इतने में ही अचानक से घंटी की आवाज़ सुनाई दी….
इस आवाज़ के साथ ही दोनों हड़बड़ा उठी.
शालिनी जल्दी से पीछे हटी और अब तक आशा भी आंखें खोल, ख़ुद को ऐसी स्थिति में देख शर्म से दोहरी हो जल्दी - जल्दी कपड़े ठीक कर अपना बैग उठा कर वहाँ से निकल गई --- बिना शालिनी की ओर देखे ----
और,
यहीं नियति भी एक बार के लिए 'काश' कह बैठी, कि वह एक बार पलट कर शालिनी की ओर एक बार अच्छे से देख लेती…. कपड़े ठीक करते वक़्त….
इस पूरे घटनाक्रम के यूँ घटने से शालिनी भी ख़ुद को संभाल नहीं पाई थी और अब आशा के वाशरूम से निकल जाने के बाद ख़ुद को इत्मीनान से व्यवस्थित करने में लग गई --- करीब दस मिनट लगे उसे अपने उखड़ती साँसों पर काबू पाने में --- ‘जागुआर’ टैप खोल कर गिरते पानी के जोर के छींटे लिए उसने अपने चेहरे पर --- कम से कम दस बार --- फ़िर सीधे, आईने में खुद को देखी….
कुछ देर पहले घटी घटना उसे फ़िर धीरे-धीरे याद आने लगी.
सिर झटकते हुए नजर दूसरी ओर करना चाहती ही थी कि तभी उसे टैप के पीछे, दीवार से सटे, थोड़ी तिरछी हो कर खड़ी रखी उसकी मोबाइल दिखी.
वीडियो रिकॉर्डिंग चालू था !!
हाथ पोंछ कर सावधानी से मोबाइल उठाई,
रिकॉर्डिंग बंद की,
गैलरी में गई,
वीडियो पर टैप की,
वीडियो प्ले होना शुरू हुआ….
ज्यों - ज्यों वीडियो प्ले होता गया, त्यों - त्यों शालिनी के चेहरे में एक चमक और होंठों पर एक बड़ी ही कमीनी सी मुस्कान फैलती गई!!
जारी रहेगा......
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