07-04-2026, 02:22 PM
"ठीक है।"
कहते हैं कि शातिर से शातिर मुजरिम से भी एक ग़लती कर देता है और यहा तो कल्लन ने 3-3 ग़लतिया कर दी थी। पहली ग़लती उसने उस दिन की थी जब बॅंगलुर से आने के बाद मलिका ने उसे फोन किया और उसने उसे अपना शहर का ठिकाना बताया। वो कुछ दीनो मे अपने ठिकाने बदल देता था,पर मलिका उस से चुद ने के लिए लगभग उसके हर ठिकाने पे आ चुकी थी। दूसरी ग़लती उसने ये की,कि अपना जाना कल पे टाल दिया।
इन दोनो ग़लतियो का उसे खामियाज़ा नही भुगतना पड़ता अगर वो तीसरी ग़लती नही करता और तीसरी ग़लती थी कि वो चोवोक बाज़ार के मल्टिपलेक्स मे 11:30 बजे का फिल्म शो देखने चला गया। आपको लग रहा होगा कि कल्लन कोई कॉलेज स्टूडेंट तो नही है जो बंक मार कर फिल्म देखना उसकी ग़लती हो गयी। पर नही दोस्तो,देखिए कैसे उस फिल्म के चलते कल्लन अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल मे फँसता है।
दुष्यंत वर्मा का जासूस मनीष अपनी गर्लफ्रेंड पूजा के साथ फिल्म देख रहा था या यू कहें पूजा को चूमने-चाटने के बीच वो फिल्म भी देख रहा था। "आहह...इंटर्वल होने वाला है,लाइट्स जल जाएँगी,अब छोडो ना!",पूजा ने उसे परे धकेल दिया। मैत्री की रचना.
"अच्छा बाबा!",तभी लाइट्स जल गयी,"क्या लॉगी कोल्ड ड्रिंक या कॉफी?",मनीष खड़ा होकर नीचे उतरने लगा।उनकी सीट्स सबसे आख़िरी रो की कॉर्नर मे थी।
"कोल्ड ड्रिंक ले आना और साथ में पॉपकॉर्न भी।"
"ओके।"
शो हाउसफुल जा रहा था और रेफ्रेशमेंट काउंटर्स पे भी काफ़ी भीड़ थी। मनीष एक लाइन मे खड़ा अपनी बारी आने का इंतेज़ार करता हुआ इधर-उधर देख रहा था कि तभी उसकी नज़र साथ वाली लाइन मे खड़े एक लंबे शख्स पे पड़ी। ये तो वही आदिवासी के मोबाइल की फोटो वाला इंसान लग रहा था जिसकी उसे तलाश थी। इसने अपना हुलिया बदला हुआ है। ये फ्रेंच कट दाढ़ी रख ली है....ये वही है। मैत्री की पेशकश.
पर फिर उसे लगा कि पहले बात कन्फर्म करनी चाहिये। उसने तुरंत दुष्यंत वर्मा को फोन लगाया,इस केस के बारे मे एजेन्सी मे बस यही दोनो इस केस के बारे मे जानते थे,"सर,मैं मनीष।।"और उसने पूरी बात बता दी।
"मनीष,किसी भी तरह उस आदमी का फोटो अपने मोबाइल केमरे से ले के मुझे भेजो। मैं यहा मुबई के ऑफीस मे हू। यही से दोनो फोटोस चेक कर के तुम्हे बताता हू।"
"मनीष पूजा के साथ फिर से फिल्म देखने लगा। वो शख्स उनसे 3 रो नीचे साथ वाले सीट्स के ब्लॉक की सेंटर कॉर्नर सीट पे बैठा था। मनीष पूजा को बाहों मे भर प्यार कर रहा था पर उसकी नज़र लगातार उस शख्स पे बनी हुई थी। उसका फोन बजा,"एस सर?"
"तुम सही हो मनीष,ये वही इंसान है। अब तुम एक काम करो। मैं तो वहा हू नही। अब तुम्हे ही सब संभालना है। मैं अभी यशवीर को खबर करता हू कि वो शहर पहुँचे और तुम साए की तरह इस आदमी के पीछे लगे रहो। मैं यश को तुम्हारा नंबर भी दे देता हू। ऑफीस फोन करता हू,एक आदमी हॉल के बाहर शो ख़त्म होने के बाद वो किट तुम्हे दे जाएगा,ठीक है? सब काफ़ी सावधानी से संभालना बेटा। इस आदमी को हमे अपनी पकड़ मे लेना है। पोलीस के पास नही जा सकते क्यूकी हमारे पास एक भी पुख़्ता सबूत नही है। इसीलिए पहले हमे ही इस से सब उगलवाना होगा,ओके,बेटा,बेस्ट ऑफ लक!"
"थॅंक्स,सर।" मैत्री की प्रस्तुति.
"क्या यहा भी काम की बातें कर रहे हो?"
"सॉरी,डार्लिंग।",मनीष ने नाराज़ पूजा को बाहों मे भर के चूमा और उसके टॉप के उपर से ही उसकी चूचिया दबा दी।
"अफ....बदमाश....चुतिया",पूजा मज़े मे फुसफुसा,दोनो इसी तरह फिल्म ख़त्म होने तक एक दूसरे से चिपते रहे।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ.
तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत.
कहते हैं कि शातिर से शातिर मुजरिम से भी एक ग़लती कर देता है और यहा तो कल्लन ने 3-3 ग़लतिया कर दी थी। पहली ग़लती उसने उस दिन की थी जब बॅंगलुर से आने के बाद मलिका ने उसे फोन किया और उसने उसे अपना शहर का ठिकाना बताया। वो कुछ दीनो मे अपने ठिकाने बदल देता था,पर मलिका उस से चुद ने के लिए लगभग उसके हर ठिकाने पे आ चुकी थी। दूसरी ग़लती उसने ये की,कि अपना जाना कल पे टाल दिया।
इन दोनो ग़लतियो का उसे खामियाज़ा नही भुगतना पड़ता अगर वो तीसरी ग़लती नही करता और तीसरी ग़लती थी कि वो चोवोक बाज़ार के मल्टिपलेक्स मे 11:30 बजे का फिल्म शो देखने चला गया। आपको लग रहा होगा कि कल्लन कोई कॉलेज स्टूडेंट तो नही है जो बंक मार कर फिल्म देखना उसकी ग़लती हो गयी। पर नही दोस्तो,देखिए कैसे उस फिल्म के चलते कल्लन अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल मे फँसता है।
दुष्यंत वर्मा का जासूस मनीष अपनी गर्लफ्रेंड पूजा के साथ फिल्म देख रहा था या यू कहें पूजा को चूमने-चाटने के बीच वो फिल्म भी देख रहा था। "आहह...इंटर्वल होने वाला है,लाइट्स जल जाएँगी,अब छोडो ना!",पूजा ने उसे परे धकेल दिया। मैत्री की रचना.
"अच्छा बाबा!",तभी लाइट्स जल गयी,"क्या लॉगी कोल्ड ड्रिंक या कॉफी?",मनीष खड़ा होकर नीचे उतरने लगा।उनकी सीट्स सबसे आख़िरी रो की कॉर्नर मे थी।
"कोल्ड ड्रिंक ले आना और साथ में पॉपकॉर्न भी।"
"ओके।"
शो हाउसफुल जा रहा था और रेफ्रेशमेंट काउंटर्स पे भी काफ़ी भीड़ थी। मनीष एक लाइन मे खड़ा अपनी बारी आने का इंतेज़ार करता हुआ इधर-उधर देख रहा था कि तभी उसकी नज़र साथ वाली लाइन मे खड़े एक लंबे शख्स पे पड़ी। ये तो वही आदिवासी के मोबाइल की फोटो वाला इंसान लग रहा था जिसकी उसे तलाश थी। इसने अपना हुलिया बदला हुआ है। ये फ्रेंच कट दाढ़ी रख ली है....ये वही है। मैत्री की पेशकश.
पर फिर उसे लगा कि पहले बात कन्फर्म करनी चाहिये। उसने तुरंत दुष्यंत वर्मा को फोन लगाया,इस केस के बारे मे एजेन्सी मे बस यही दोनो इस केस के बारे मे जानते थे,"सर,मैं मनीष।।"और उसने पूरी बात बता दी।
"मनीष,किसी भी तरह उस आदमी का फोटो अपने मोबाइल केमरे से ले के मुझे भेजो। मैं यहा मुबई के ऑफीस मे हू। यही से दोनो फोटोस चेक कर के तुम्हे बताता हू।"
"मनीष पूजा के साथ फिर से फिल्म देखने लगा। वो शख्स उनसे 3 रो नीचे साथ वाले सीट्स के ब्लॉक की सेंटर कॉर्नर सीट पे बैठा था। मनीष पूजा को बाहों मे भर प्यार कर रहा था पर उसकी नज़र लगातार उस शख्स पे बनी हुई थी। उसका फोन बजा,"एस सर?"
"तुम सही हो मनीष,ये वही इंसान है। अब तुम एक काम करो। मैं तो वहा हू नही। अब तुम्हे ही सब संभालना है। मैं अभी यशवीर को खबर करता हू कि वो शहर पहुँचे और तुम साए की तरह इस आदमी के पीछे लगे रहो। मैं यश को तुम्हारा नंबर भी दे देता हू। ऑफीस फोन करता हू,एक आदमी हॉल के बाहर शो ख़त्म होने के बाद वो किट तुम्हे दे जाएगा,ठीक है? सब काफ़ी सावधानी से संभालना बेटा। इस आदमी को हमे अपनी पकड़ मे लेना है। पोलीस के पास नही जा सकते क्यूकी हमारे पास एक भी पुख़्ता सबूत नही है। इसीलिए पहले हमे ही इस से सब उगलवाना होगा,ओके,बेटा,बेस्ट ऑफ लक!"
"थॅंक्स,सर।" मैत्री की प्रस्तुति.
"क्या यहा भी काम की बातें कर रहे हो?"
"सॉरी,डार्लिंग।",मनीष ने नाराज़ पूजा को बाहों मे भर के चूमा और उसके टॉप के उपर से ही उसकी चूचिया दबा दी।
"अफ....बदमाश....चुतिया",पूजा मज़े मे फुसफुसा,दोनो इसी तरह फिल्म ख़त्म होने तक एक दूसरे से चिपते रहे।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ.
तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत.


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)