07-04-2026, 02:17 PM
मलिका कमरे मे लेटी अपनी चूत मे उंगली कर रही थी,जब्बार 2 दीनो से बाहर गया हुआ था और वो 2 दीनो से चुदी नही थी। तभी उसका फोन बजा,"हेलो।"
"हा,मैं देल्ही मे हू। कल सवेरे 10 बजे तक वापस आऊंगा।",ये जब्बार था।
थोड़ी देर तक बात करने के बाद मलिका ने फोन किनारे रखा और फिर से चूत रगड़ने लगी। वो लंड के लिए पागल हो रही थी। तभी उसे कल्लन का ख़याल आया तो उसने फोन उठा कर उसका नंबर डायल किया।
"हेलो!",कल्लन ने फोन उठाया।
"क्या कर रहा है,ज़ालिम?" मैत्री की पेशकश है.
"बस यहा से जाने की तैयारी मे हू।",जब्बार ने कल ही कल्लन के अकाउंट मे उसके हिस्से के बाकी पैसे जमा कराए थे। कल्लन का काम हो गया था और अब वो किसी और चक्कर मे 2-3 महीनो के लिए बाहर जा रहा था।
"मुझे यहा तड़पता छोड़ कहा जा रहा है? मादरचोद साला, जब्बार देल्ही मे है,यहा आ के मेरी आग बुझा दे ना।"
"मैं वहा आने का चान्स नही ले सकता। अगर किसी ने देख लिया तो सारा भंडा फूटने मे देर नही लगेगी,वैसे तू चाहती है तो तू यहा आ जा,मैं कल चला जाऊँगा।",कल्लन भी मलिका को चोदने का लालच हो आया था।
"अच्छा ठीक है, भोसदीके,मैं ही आती हू। वो कमीना तो कल सुबह आएगा। मैं आती हू पर कहा आना है?"
"शहर के चोवोक बाज़ार मे वो 'फियेस्टा' केफे है ना,वही पहुँच जाना। मैं वहा से तुम्हे अपने घर ले चलूँगा। कितने बजे आओगी?"
"मैं 3 बजे तक 'फियेस्टा' पहुँच जाऊंगी।",उसने दीवार-घड़ी की तरफ देखा।
बने रहिये दोस्तों.................
"हा,मैं देल्ही मे हू। कल सवेरे 10 बजे तक वापस आऊंगा।",ये जब्बार था।
थोड़ी देर तक बात करने के बाद मलिका ने फोन किनारे रखा और फिर से चूत रगड़ने लगी। वो लंड के लिए पागल हो रही थी। तभी उसे कल्लन का ख़याल आया तो उसने फोन उठा कर उसका नंबर डायल किया।
"हेलो!",कल्लन ने फोन उठाया।
"क्या कर रहा है,ज़ालिम?" मैत्री की पेशकश है.
"बस यहा से जाने की तैयारी मे हू।",जब्बार ने कल ही कल्लन के अकाउंट मे उसके हिस्से के बाकी पैसे जमा कराए थे। कल्लन का काम हो गया था और अब वो किसी और चक्कर मे 2-3 महीनो के लिए बाहर जा रहा था।
"मुझे यहा तड़पता छोड़ कहा जा रहा है? मादरचोद साला, जब्बार देल्ही मे है,यहा आ के मेरी आग बुझा दे ना।"
"मैं वहा आने का चान्स नही ले सकता। अगर किसी ने देख लिया तो सारा भंडा फूटने मे देर नही लगेगी,वैसे तू चाहती है तो तू यहा आ जा,मैं कल चला जाऊँगा।",कल्लन भी मलिका को चोदने का लालच हो आया था।
"अच्छा ठीक है, भोसदीके,मैं ही आती हू। वो कमीना तो कल सुबह आएगा। मैं आती हू पर कहा आना है?"
"शहर के चोवोक बाज़ार मे वो 'फियेस्टा' केफे है ना,वही पहुँच जाना। मैं वहा से तुम्हे अपने घर ले चलूँगा। कितने बजे आओगी?"
"मैं 3 बजे तक 'फियेस्टा' पहुँच जाऊंगी।",उसने दीवार-घड़ी की तरफ देखा।
बने रहिये दोस्तों.................


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