07-04-2026, 01:58 AM
फिर उसने अपना मोटा, गर्म लन्ड धीरे से चैताली की नम चूत के प्रवेश द्वार पर टिका दिया। उसके लन्ड की नसें फड़क रही थीं, और चैताली की चूत के होंठों को महसूस करते ही उसका शरीर एक अजीब सी बेचैनी से भर गया। चैताली की चूत के गुलाबी होंठ उसके लन्ड को चूम रहे थे, जैसे उसे अंदर बुला रहे हों। चैताली का शरीर एक अजीब सी उत्तेजना से भर रहा था - वह चाहती थी कि वह उसे भीतर डाले, पर साथ ही उसके मन में एक डर भी था कि कहीं यह ज्यादा दर्दनाक न हो जाए।
अचानक कूरियर वाले ने एक गहरा, मजबूत धक्का दिया। उसका मोटा लन्ड चैताली की चूत की तंग गुफा में सरक गया, जैसे कोई तलवार मांस में घुस रही हो। चैताली के मुँह से एक हल्की सी चीख निकली - उसका शरीर इस अचानक आक्रमण के लिए तैयार नहीं था। उसकी चूत की मांसपेशियाँ तन गईं, और उसका लन्ड चैताली के भीतर कसकर फँस गया, जैसे कोई चट्टानी गुफा अपने भीतर घुसे शिकार को जकड़ ले। चैताली ने अपने दाँत भींच लिए।
फिर कूरियर वाले ने धीरे-धीरे अपने धक्के शुरू किए। हर धक्के के साथ, चैताली के शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी, जैसे कोई गर्म तेल उसकी नसों में बह रहा हो। उसका मोटा लन्ड चैताली की चूत की कोमल दीवारों को रगड़ रहा था, हर आगे-पीछे के साथ एक नई उत्तेजना पैदा कर रहा था। चैताली का शरीर अब उस रुकावट को स्वीकार करने लगा था, और हर धक्के के साथ उसकी चूत की मांसपेशियाँ थोड़ी और ढीली हो रही थीं। उसके नितंबों से पसीना बह रहा था, और उसकी साँसें तेज हो चुकी थीं - उसका शरीर अब इस आक्रमण का आनंद लेने लगा था।
"अहह... उहह..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं।
कूरियर वाले ने अपनी गति बढ़ाई। उसके धक्के तेज़ और गहरे होते गए। चैताली के मम्मे उछल रहे थे, और उसके बाल मेज़ पर फैले हुए थे। उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होंठ खुले हुए थे।
"और तेज़... आह..." चैताली की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी थी।
कूरियर वाले ने उसकी बात सुनी, और उसने अपनी गति और तेज़ कर दी। उसके धक्के इतने तेज़ थे कि मेज़ हल्की सी हिल रही थी। चैताली के शरीर में एक अजीब सी ऐंठन हो रही थी, और उसे लगा जैसे वह किसी और दुनिया में जा रही हो।
"आहहह... हाँ... हाँ..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, जो अब बेकाबू थीं।
कूरियर वाले ने एक गहरा धक्का दिया, और उसका शरीर चैताली के शरीर पर गिर गया। उसके लन्ड ने चैताली की चूत के भीतर एक अजीब सी गर्माहट फैलाई। चैताली के शरीर में एक तेज़ झटका लगा, और उसके शरीर से एक गाढ़ा, चिपचिपा द्रव निकला। वह थरथरा गई, और उसके शरीर में एक अजीब सी शांति फैल गई।
कूरियर वाला चैताली के ऊपर लेटा रहा, उसकी साँसें तेज़ थीं। चैताली ने अपनी आँखें खोलीं, और उसने कूरियर वाले के चेहरे को देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी।
"वाह, मैडम," उसने फुसफुसाया। "आप तो कमाल की हैं।"


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