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Adultery एक रंडी की दास्तान-The story of a corporate whore
#10
"जल्दी," उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक आदेश था, लेकिन भीतर से वह काँप रही थी।

कूरियर वाला मुस्कुराया। उसने अपना कूरियर बैग ज़मीन पर पटका। उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बस एक भूखी वासना थी। वह चैताली की ओर बढ़ा।

"तो मैडम, शुरू करें?" उसने चैताली के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखा। चैताली के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, लेकिन उसने खुद को पीछे नहीं खींचा। यह उसका काम था, उसकी मजबूरी।

कूरियर वाले ने चैताली के कंधे पर हाथ फेरा, फिर धीरे से उसकी साड़ी के पल्लू को एक तरफ़ किया। चैताली ने अपनी पलकें झुकाईं। उसने अपनी नज़रें ज़मीन पर गड़ा दीं, जैसे वह इस पल को जी ही नहीं रही थी।

कूरियर वाला उसकी साड़ी के पल्लू को धीरे-धीरे उसके शरीर से हटाता गया। चैताली ने अपने हाथों को कसकर बाँध लिया, जैसे वह अपनी इज़्ज़त को बचाने की कोशिश कर रही हो, जो पहले ही नीलाम हो चुकी थी। साड़ी का पल्लू उसके वक्ष से सरका, फिर उसकी कमर से। उसका ब्लाउज़ और पेटीकोट अब स्पष्ट दिख रहे थे। कूरियर वाले की आँखें उसकी भरी हुई छाती पर टिक गईं।

"क्या माल है, मैडम," उसने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ में एक गहरी इच्छा थी। चैताली के शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई, जो डर और वासना का एक मिला-जुला एहसास था।

उसने चैताली को अपनी ओर खींचा। चैताली ने कोई विरोध नहीं किया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। कूरियर वाले ने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए। एक तेज़, चुंबन। चैताली ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसके मुँह में कूरियर वाले की साँसों की गर्मी महसूस हुई, उसके होठों का खुरदुरापन।

उसने अपना मुँह चैताली के मुँह से हटाया, उसकी साँसें तेज़ थीं। उसने चैताली की साड़ी को उसकी कमर से नीचे सरकाना शुरू किया। रेशमी कपड़ा ज़मीन पर ढेर हो गया। चैताली अब सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी। उसकी साँसें अनियमित हो गईं।

कूरियर वाला अपनी पैंट की ज़िप खोलने लगा। उसकी आँखें चैताली के शरीर पर टिकी थीं, हर वक्र को निहार रही थीं। उसने अपनी पैंट नीचे की। उसका कड़ा, मोटा लन्ड बाहर निकला, गुलाबी और उत्तेजित। चैताली ने एक पल के लिए उस पर नज़र डाली, फिर अपनी नज़रें हटा लीं। उसे यह सब देखना पड़ता था, हर रात।

कूरियर वाला लड़का धीरे-धीरे चैताली के करीब आया। उसने अपने बड़े हाथों से चैताली के ब्लाउज़ के हुकों को खोलना शुरू किया। उसकी उंगलियाँ बड़ी ही कुशलता से काम कर रही थीं, एक के बाद एक हुक आवाज़ करते हुए खुलते गए। जैसे ही आखिरी हुक खुला, चैताली का ब्लाउज़ धीरे से खुल गया, और उसकी लेस वाली ब्रा का नज़ारा सामने आया।

कूरियर वाले की सांसें तेज़ हो गईं जब उसने देखा कि चैताली के भरे हुए मम्मे ब्रा के कपड़े से बाहर निकलने को बेताब हैं। उसने धीरे से ब्रा के कपड़े को नीचे खिसकाया, और चैताली के बोबा पूरी तरह से बाहर आ गए। उसकी गहरे भूरे रंग की निपल्स पहले से ही कड़क हो चुकी थीं, मानो वे इस पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हों।

कूरियर वाले ने अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे चैताली के निपल्स पर घुमाया, पहले एक पर, फिर दूसरे पर। फिर अचानक उसने अपने दोनों हाथों से उसके स्तनों को जोर से भर लिया, उन्हें अपनी मुट्ठियों में नचाते हुए। चैताली की एक हल्की सी कराह निकल गई जब उसने महसूस किया कि कूरियर वाला कितनी मजबूती से उसे पकड़े हुए है।

"आह..." चैताली के मुँह से एक धीमी आवाज़ निकली। यह दर्द या सुख, कुछ भी हो सकता था।
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RE: एक रंडी की दास्तान - by MohdIqbal - 07-04-2026, 01:38 AM



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