05-04-2026, 12:45 PM
वो जल्दी से उठ दबे पाँव भागते हुई दरवाज़े पे आई,"क्या कर रहे हो?तुम बिल्कुल पागल हो! जाओ यहा से! मा सो रही हैं यहा।",वो फुसफुसा।
"चले जाएँगे पर तुम भी साथ चले।"
"ऑफ..ओह! तुम सच मे पागल हो गये हो रात मे माँ उठ गयी तो क्या होगा?!"
"ठीक है तो हम ही यहा आ जाते हैं।",राजासाहब अंदर आए और दरवाज़ा बंद कर दिया।
"यश...यहा....जाओ ना...मा उठ जाएँगी!" मैत्री की पेशकश.
"नही उठेंगी! नींद की गोलिया उन्हे उठने नही देंगी।",उन्होने उसे बाहों मे भर के चूम लिया।
"नही...प्लीज़!",मेनका कसमसाई पर राजासाहब ने उसे पागलो की तरह चूमना शुरू कर दिया था। चाहिए तो उसे भी यही था पर उसकी मा के कमरे मे होने की वजह से उसे बहुत डर लग रहा था। राजासाहब भी जानते थे कि सब कुछ जल्दी करना होगा। उन्होने उसकी नाइटी नीचे से उठा अपने हाथ अंदर घुसा दिए। मेनका ने नाइटी के नीचे कुछ भी नही पहना था और अब राजासाहब के हाथों मे उसकी भरी-भरी गांड मसली जा रही थी।
उसकी आँखे बंद हो गयी,"...ना...ही...यश...मा...जाग जा...एँ....गी...!"
राजासाहब उसे चूमते हुए दीवार से लगे एक छोटे शेल्फ के पास ले गये और उसे उसपे बिठा दिया। उनका एक हाथ उसकी छातिया दबा रहा था और दूसरा चूत मे घुसने था। मेनका हवा मे उड़ने लगी। उसने अपनी आँखें खोल अपनी मा की तरफ देखा,वो बेख़बर सो रही थी,उसे बहुत डर लग रहा था पर साथ ही मज़ा भी बहुत आ रहा था। पकड़े जाने का डर उसे एक अलग तरह का मज़ा दे रहा था।
राजासाहब की उंगलिया उसके चूत के दाने को छेड़ने लगी तो उसकी चूत बस पानी पे पानी छोड़ने लगी। बड़ी मुश्किल से उसने अपनी आहों पे काबू रखा था। उसने भी अपने हाथ राजासाहब के कुर्ते मे घुसा उनकी पीठ नोचना शुरू कर दिया। राजासाहब ने जैसे ही महसूस किया कि मेनका उनके चूत रगड़ने से झड़ कर पूरी तरह गीली हो चुकी है,उन्होने हाथ पीछे ले जाके उसकी नाइटी का ज़िप खोल उसे नीचे कर दिया। अब नाइटी उसकी कमर पे थी और उसकी चुचियाँ और चूत नंगे थे। मैत्री की प्रस्तुति.
बने रहिये दोस्तों ...........
"चले जाएँगे पर तुम भी साथ चले।"
"ऑफ..ओह! तुम सच मे पागल हो गये हो रात मे माँ उठ गयी तो क्या होगा?!"
"ठीक है तो हम ही यहा आ जाते हैं।",राजासाहब अंदर आए और दरवाज़ा बंद कर दिया।
"यश...यहा....जाओ ना...मा उठ जाएँगी!" मैत्री की पेशकश.
"नही उठेंगी! नींद की गोलिया उन्हे उठने नही देंगी।",उन्होने उसे बाहों मे भर के चूम लिया।
"नही...प्लीज़!",मेनका कसमसाई पर राजासाहब ने उसे पागलो की तरह चूमना शुरू कर दिया था। चाहिए तो उसे भी यही था पर उसकी मा के कमरे मे होने की वजह से उसे बहुत डर लग रहा था। राजासाहब भी जानते थे कि सब कुछ जल्दी करना होगा। उन्होने उसकी नाइटी नीचे से उठा अपने हाथ अंदर घुसा दिए। मेनका ने नाइटी के नीचे कुछ भी नही पहना था और अब राजासाहब के हाथों मे उसकी भरी-भरी गांड मसली जा रही थी।
उसकी आँखे बंद हो गयी,"...ना...ही...यश...मा...जाग जा...एँ....गी...!"
राजासाहब उसे चूमते हुए दीवार से लगे एक छोटे शेल्फ के पास ले गये और उसे उसपे बिठा दिया। उनका एक हाथ उसकी छातिया दबा रहा था और दूसरा चूत मे घुसने था। मेनका हवा मे उड़ने लगी। उसने अपनी आँखें खोल अपनी मा की तरफ देखा,वो बेख़बर सो रही थी,उसे बहुत डर लग रहा था पर साथ ही मज़ा भी बहुत आ रहा था। पकड़े जाने का डर उसे एक अलग तरह का मज़ा दे रहा था।
राजासाहब की उंगलिया उसके चूत के दाने को छेड़ने लगी तो उसकी चूत बस पानी पे पानी छोड़ने लगी। बड़ी मुश्किल से उसने अपनी आहों पे काबू रखा था। उसने भी अपने हाथ राजासाहब के कुर्ते मे घुसा उनकी पीठ नोचना शुरू कर दिया। राजासाहब ने जैसे ही महसूस किया कि मेनका उनके चूत रगड़ने से झड़ कर पूरी तरह गीली हो चुकी है,उन्होने हाथ पीछे ले जाके उसकी नाइटी का ज़िप खोल उसे नीचे कर दिया। अब नाइटी उसकी कमर पे थी और उसकी चुचियाँ और चूत नंगे थे। मैत्री की प्रस्तुति.
बने रहिये दोस्तों ...........


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