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Incest खेल ससुर बहु का
वो जब्बार से बदला लेने के बारे मे सोचने लगे। उनका दिल तो कर रहा था की उस नीच इंसान को अपने हाथो से चीर के रख दे पर ऐसा करने से वो क़ानून की नज़रो मे गुनेहगार बन जाते। अगर वो क़ानून का सहारा लेते तो जब्बार शर्तिया बच जाता क्यूकी कोई भी सबूत नही था जोकि उसे विश्वा का कातिल साबित करता। उसे सज़ा देने के लिए उन्हे उसी के जैसी चालाकी से काम लेना होगा,ये उन्हे अच्छी तरह से समझ मे आ गया था। मगर कैसे! वो ऐसी चाल चलना चाहते थे जिस से साँप भी मार जाए और लाठी भी ना टूटे। पहले की बात होती तब शायद वो इतना नही सोचते और अभी तक जब्बार उनके हाथो मर भी चुका होता पर अब मेनका की ज़िंदगी भी उनके साथ जुड़ी थी और वो कोई ऐसा कदम नही उठना चाहते थे जिस से उसे कोई परेशानी उतनी पड़े। उसका ख़याल आते ही उनका लंड फिर से खड़ा होने लगा।


वो फिर से बेचैन हो उठे। एक बार तो उन्होने सोचा कि लंड को हाथ से ही शांत कर दे पर फिर उनके दिल ने कहा कि लानत है राजा यशवीर सिंग! तुम्हारी दिलरुबा बस चंद कदमो के फ़ासले पे है और तुम खुद को मूठ मार कर शांत करोगे! वो तुरंत उठ खड़े हुए और कमरे से निकल गये। बाहर अंधेरा था,वो दबे पाँव मेनका के कमरे की ओर गये और धीरे से दरवाज़े पे हाथ रखा।

मेनका को भी कहा नींद आ रही थी। उसे अपने ससुर के लंड की ऐसी लत लगी थी की रात होते ही बस वो उनकी मज़बूत बाहों मे क़ैद हो उनसे जम कर चुदवाना चाहती थी। वो बिस्तर पे करवते बदल रही थी और उसकी बगल मे उसकी मा गहरी नींद मे सो रही थी। उसकी चूत राजासाहब के लंड के लिए बावली होने लगी तो वो नाइटी के उपर से ही उसे दबाने लगी। तभी उसकी नज़र दरवाज़े पे गयी जोकि आहिस्ते से खुला और उसे उसमे उसके ससुर नज़र आए।

बने रहिये दोस्तों .........
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 05-04-2026, 12:43 PM



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