05-04-2026, 12:40 PM
पार्ट--12
गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
रात 9 बजे राजासाहब मेनका और उसके माता-पिता के साथ उनके महल मे बैठे खाना खा रहे थे। उनलोगो ने ज़िद करके राजासाहब को आज रात महल मे रुक कल सुबह राजपुरा जाने के लिए तैयार कर लिया था।
खाने के बाद राजासाहब को एक नौकर उनके लिए तैयार किए गये कमरे मे ले आया। थोड़ी ही देर बाद मेनका भी वहा एक नौकर के साथ आई,"लाओ ग्लास हमे दो,शंभू।",ग्लास थामा वो नौकर कमरे से बाहर चला गया।
"ये लीजिए दूध पीकर सो जाइए।"
राजासाहब ने एक हाथ बढ़ा ग्लास लिया और दूसरा उसकी कमर मे डाल उसे अपने पास खींच लिया,"हमे ये नही वो दूध चाहिए।",उनका इशारा उसकी छातियो की तरफ था।
"क्या कर रहे हो?कोई आ जाएगा,छोडो ना!",मेनका घबरा के उनकी गिरफ़्त से छूटने की नाकाम कोशिश करने लगी। मैत्री की प्रस्तुति.
"कोई नही आएगा,चलो हमे अपना दूध पिलाओ।",उन्होने उसके एक गाल पे चूम लिया।
"प्लीज़ यश! कोई देख लेगा ना!"
"जब तक नही पिलाओगी,नही छोड़ेंगे।",उन्होने उसके होंठ चूम लिए।
"अच्छा बाबा,पहले ये ग्लास ख़तम करो।।जल्दी!",उसने उनके हाथ से ग्लास ले उनके मुँह से लगा दिया। राजासाहब ने एक घूँट मे ही उसे ख़तम कर दिया।,"चलो अब अपना दूध पिलाओ।"
"शंभू!",मेनका ने नौकर को पुकारा।
"जी!राजकुमारी।",नौकर की आवाज़ सुनते ही राजासाहब अपनी बहू से अलग हो गये।
"ये ग्लास ले जाओ।",और उसके पीछे-पीछे वो भी कमरे से बाहर जाने लगी,दरवाज़े पे रुक के मूड के उसने शरारत से राजासाहब की तरफ देखा और जीभ निकाल कर चिढ़ते हुए अंगूठा दिखाया और चली गयी। राजासाहब मन मसोस कर रह गये। उनका खड़ा लंड उन्हे बहुत परेशान कर रहा था।उसे शांत करने की गाराज़ से वो कमरे से बाहर आ टहलने लगे। तभी उन्हे रानी साहिबा,मेनका की मा आती दिखाई दी।
"क्या हुआ राजासाहब? कोई तकलीफ़ तो नही?"
"जी बिल्कुल नही। सोने के पहले थोड़ा टहलने की आदत है बस इसीलिए यहा घूम रहे हैं, बुरा मत मानीएगा पर ये दवा! किसी की तबीयत खराब है क्या?",उन्होने उनके हाथों की तरफ इशारा किया।
"अरे नही,राजासाहब बुरा क्यू मानेंगे। हमारी नींद की गोलिया हैं,कभी-कभार लेनी पड़ जाती हैं।" मैत्री की रचना.
इसके बाद थोड़ी सी और बातें हुई और फिर दोनो अपने-अपने कमरो मे चले गये पर राजासाहब के आँखों मे नींद कहा थी। जब तक अपनी बहू के अंदर वो 2-3 बार अपना पानी नही गिरा देते थे,उन्हे नींद कहा आती थी। मेनका के जिस्म की चाह कुछ ज़्यादा भड़कने लगी तो उन्होने उस पे से ध्यान हटाने के लिए दूसरी बातें सोचना शुरू किया।
बने रहिये दोस्तों..............
गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
रात 9 बजे राजासाहब मेनका और उसके माता-पिता के साथ उनके महल मे बैठे खाना खा रहे थे। उनलोगो ने ज़िद करके राजासाहब को आज रात महल मे रुक कल सुबह राजपुरा जाने के लिए तैयार कर लिया था।
खाने के बाद राजासाहब को एक नौकर उनके लिए तैयार किए गये कमरे मे ले आया। थोड़ी ही देर बाद मेनका भी वहा एक नौकर के साथ आई,"लाओ ग्लास हमे दो,शंभू।",ग्लास थामा वो नौकर कमरे से बाहर चला गया।
"ये लीजिए दूध पीकर सो जाइए।"
राजासाहब ने एक हाथ बढ़ा ग्लास लिया और दूसरा उसकी कमर मे डाल उसे अपने पास खींच लिया,"हमे ये नही वो दूध चाहिए।",उनका इशारा उसकी छातियो की तरफ था।
"क्या कर रहे हो?कोई आ जाएगा,छोडो ना!",मेनका घबरा के उनकी गिरफ़्त से छूटने की नाकाम कोशिश करने लगी। मैत्री की प्रस्तुति.
"कोई नही आएगा,चलो हमे अपना दूध पिलाओ।",उन्होने उसके एक गाल पे चूम लिया।
"प्लीज़ यश! कोई देख लेगा ना!"
"जब तक नही पिलाओगी,नही छोड़ेंगे।",उन्होने उसके होंठ चूम लिए।
"अच्छा बाबा,पहले ये ग्लास ख़तम करो।।जल्दी!",उसने उनके हाथ से ग्लास ले उनके मुँह से लगा दिया। राजासाहब ने एक घूँट मे ही उसे ख़तम कर दिया।,"चलो अब अपना दूध पिलाओ।"
"शंभू!",मेनका ने नौकर को पुकारा।
"जी!राजकुमारी।",नौकर की आवाज़ सुनते ही राजासाहब अपनी बहू से अलग हो गये।
"ये ग्लास ले जाओ।",और उसके पीछे-पीछे वो भी कमरे से बाहर जाने लगी,दरवाज़े पे रुक के मूड के उसने शरारत से राजासाहब की तरफ देखा और जीभ निकाल कर चिढ़ते हुए अंगूठा दिखाया और चली गयी। राजासाहब मन मसोस कर रह गये। उनका खड़ा लंड उन्हे बहुत परेशान कर रहा था।उसे शांत करने की गाराज़ से वो कमरे से बाहर आ टहलने लगे। तभी उन्हे रानी साहिबा,मेनका की मा आती दिखाई दी।
"क्या हुआ राजासाहब? कोई तकलीफ़ तो नही?"
"जी बिल्कुल नही। सोने के पहले थोड़ा टहलने की आदत है बस इसीलिए यहा घूम रहे हैं, बुरा मत मानीएगा पर ये दवा! किसी की तबीयत खराब है क्या?",उन्होने उनके हाथों की तरफ इशारा किया।
"अरे नही,राजासाहब बुरा क्यू मानेंगे। हमारी नींद की गोलिया हैं,कभी-कभार लेनी पड़ जाती हैं।" मैत्री की रचना.
इसके बाद थोड़ी सी और बातें हुई और फिर दोनो अपने-अपने कमरो मे चले गये पर राजासाहब के आँखों मे नींद कहा थी। जब तक अपनी बहू के अंदर वो 2-3 बार अपना पानी नही गिरा देते थे,उन्हे नींद कहा आती थी। मेनका के जिस्म की चाह कुछ ज़्यादा भड़कने लगी तो उन्होने उस पे से ध्यान हटाने के लिए दूसरी बातें सोचना शुरू किया।
बने रहिये दोस्तों..............


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)