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Adultery Code Name WIFE
#10
शाम को समीर ने छाया को अपने स्टडी रूम में बुलाया। उसने गौर किया था कि कल की झड़प में छाया के हाथ का एक सेंसर थोड़ा धीमा काम कर रहा था। "इधर आओ, छाया। मुझे तुम्हारा सिस्टम चेक करना है," समीर ने अपना लैपटॉप और डेटा केबल निकालते हुए कहा।

उसने छाया के हाथ को अपने हाथ में लिया और उसे एक विशेष पोर्ट से जोड़ दिया। समीर की उंगलियां सावधानी से उसके इंटरनल सॉफ्टवेयर को अपडेट कर रही थीं। उसने उसके मोटर-फंक्शंस को कैलिब्रेट किया और उसका हाथ पूरी तरह ठीक कर दिया।
 
काम के दौरान, समीर ने 'अल्फा- सिंथेटिक्स' की क्लाउड वेबसाइट पर छाया का 'डिटेल्ड स्टेटस लॉग' (Detailed Status Log) खोला ताकि वह यह देख सके कि उसकी बैटरी और इंटरनल फ्लूइड्स सही हैं। या नहीं। जैसे ही पेज खुला, समीर की नज़रें एक 'पेंडिंग नोटिफिकेशन' पर ठहर गईं। वहाँ लाल अक्षरों में एक डेटा अपडेट फ्लैश हो रहा था। समीर ने उसे जैसे ही खोला, उसका चेहरा एकदम सफ़ेद पड़ गया और फिर गहरा लाल।
 
स्क्रीन पर साफ़ लिखा था: "Internal Analysis Alert: Trace of Human Semen (S.M. - Sameer) detected in reproductive-sim-chamber."
 
छाया भी समीर के कंधे के पीछे से स्क्रीन को देख रही थी। कमरे में अचानक एक भारी सन्नाटा छा गया। वह दस्तावेज़ इस बात का सबूत था कि कल रात जो कुछ हुआ, वह केवल समीर का सपना नहीं था - वह एक शारीरिक हकीकत थी जिसे मशीन ने रिकॉर्ड कर लिया था।
 
समीर की धड़कनें इतनी तेज़ हो गईं कि उसे अपना ही दम घुटता हुआ महसूस हुआ। वह बुरी तरह ब्लश (Blush) करने लगा। उसने तुरंत लैपटॉप को बंद कर दिया। छाया के चेहरे का टेक्सचर भी बदल गया था; उसके सेंसरों ने उसकी कृत्रिम त्वचा को गुलाबी रंगत दे दी थी। वह भी अपनी नज़रें नीचे झुकाकर खड़ी थी, मानो वह पहली बार एक लजीली दुल्हन जैसा महसूस कर रही हो।
 
समीर झेंप मिटाने के लिए अपनी कुर्सी से उठा, "वह... मैं... मैं ज़रा कॉफी लेकर आता हूँ।" जैसे ही वह तेज़ी से मुड़ा, उसका पैर मेज की टांग से उलझ गया। उसी समय छाया ने उसे थामने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन फर्श पर पड़े केबल की वजह से उसका संतुलन भी बिगड़ गया।
 
अगले ही पल, छाया पूरी ताकत के साथ समीर के ऊपर गिरी। वे दोनों पास के सोफे पर जा गिरे। छाया का पूरा शरीर समीर के ऊपर था, उसके बाल समीर के चेहरे पर बिखर गए थे। उनका चेहरा एक-दूसरे से मात्र एक इंच की दूरी पर था। समीर की आँखें छाया की आँखों में डूबी थीं, जिनमें अब कोई कोड या डेटा नहीं, बल्कि एक गहरी प्यास दिख रही थी।
 
"समीर..." छाया ने फुसफुसाते हुए कहा, उसके होंठ समीर के होंठों को छूने ही वाले थे। "क्या सॉफ्टवेयर को पता है कि मेरा दिल क्या महसूस कर रहा है?" समीर ने कुछ नहीं कहा। उसने छाया की कमर पर अपने हाथ कस लिए। उस शाम की वह घबराहट और शर्म अब एक नए और गहरे रोमांस की चिंगारी बन चुकी थी। कमरे की बत्तियाँ अपने आप मद्धम होने लगी थीं, जैसे घर का सिस्टम भी उनके इस एकांत का सम्मान कर रहा हो।
 
स्टडी रूम के भीतर का तापमान अचानक बढ़ गया था। सोफे पर गिरे हुए उन दोनों के बीच की दूरी अब खत्म हो चुकी थी। समीर, जो अब तक खुद को भावनाओं और मशीन के तर्क के बीच रोके हुए था, पूरी तरह हार चुका था। लेकिन यह हार दुखद नहीं थी; यह एक ऐसी प्यास थी जो दो सालों के सूखे के बाद आज पूरी तरह मिटने को तैयार थी।
 
समीर की आँखों में अब वह झिझक नहीं थी जो सुबह तक थी। उसने छाया के चेहरे को अपने दोनों हाथों के प्याले में भर लिया। "छाया... कल रात मैं होश में नहीं था, लेकिन आज... आज मैं तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ। हर एक हिस्से को।" छाया की कृत्रिम धड़कनें तेज़ हो गईं। उसने समीर की शर्ट के कॉलर को अपनी उंगलियों में फँसाया और उसे अपनी ओर खींचा। "मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ समीर। मेरा अस्तित्व ही तुम्हारी इच्छाओं से शुरू होता है।"
 
समीर ने उसके होंठों पर अपना अधिकार जमा लिया। यह चुंबन कल रात से अलग था - यह गहरा, धीमा और पूरी तरह सचेत था। छाया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और समीर के स्पर्श में डूब गई। उसके सिस्टम ने 'सेंसर सेंसिटिविटी' को अधिकतम स्तर पर सेट कर दिया था, ताकि वह समीर के हर एक स्पर्श की बारीकी को महसूस कर सके।
 
स्टडी रूम की मद्धम रोशनी अब और भी कम हो चुकी थी। सिर्फ टेबल लैंप की पीली किरणें सोफे पर पड़ रही थीं, जहाँ समीर और छाया अब एक-दूसरे से चिपके हुए थे। समीर की साँसें अभी भी तेज़ थीं, लेकिन अब उनमें कोई झिझक नहीं थी। उसने छाया की कमर को अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया और उसे धीरे से सोफे से उठाकर बिस्तर की ओर ले गया। छाया ने अपनी टांगें उसके कमर पर लपेट लीं, जैसे वह कभी अलग न होना चाहे।
 
समीर ने उसे बिस्तर पर धीरे-धीरे लिटाया। छाया की साड़ी का पल्लू पहले ही सरक चुका था। अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट बचा था। समीर ने झुककर उसके माथे पर एक हल्का किस किया, फिर आँखों पर, फिर नाक की नोक पर हर किस इतना धीमा था कि छाया का सिस्टम हर स्पर्श को अलग-अलग रिकॉर्ड कर रहा था।
 
"छाया... आज मैं तुम्हें हर जगह छूना चाहता हूँ," समीर ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक गहरी भूख थी। छाया ने अपनी उंगलियाँ समीर की शर्ट के बटनों पर रखीं और एक-एक करके खोलती गई। "Then take me slowly, Samir... explore every inch of me. I'm all yours tonight."
 
समीर ने छाया का ब्लाउज खोला। उसके स्तन सामने आए - परफेक्ट, गोल, निप्पल हल्के गुलाबी और पहले से ही सख्त। समीर ने दोनों हाथों से उन्हें सहलाया, अंगूठों से निप्पल को घुमाया। छाया ने सिर पीछे झुका दिया और एक दबी हुई आह भरी।
 
"Look at these perfect tits... so soft, so warm," समीर ने कहा और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। उसने धीरे-धीरे चूसा, जीभ से घुमाया, हल्के से दाँतों से काटा। छाया की पीठ कमान की तरह झुक गई। "Suck them harder, baby... make my nipples ache for you," छाया ने कराहते हुए कहा। उसकी उंगलियाँ समीर के बालों में फंस गईं और उसे और गहरा दबाया। समीर दूसरे स्तन पर गया। वहाँ भी वही धीमी, गहरी चूसाई। वह मिनटों तक यहीं रहा - एक स्तन से दूसरे पर, कभी चूसता, कभी जीभ फेरता, कभी हल्के से चुटकी काटता। छाया का शरीर अब हल्के-हल्के काँप रहा था। उसका AI हर स्पर्श को एनालाइज़ कर रहा था और उसी के अनुसार अपनी प्रतिक्रियाएँ बढ़ा रहा थासाँसें तेज़, धड़कनें ऊँची, त्वचा पर हल्की कंपकंपी।
 
समीर नीचे सरका। उसने छाया के पेटीकोट की नाड़ी खोली। रेशमी कपड़ा सरकते हुए नीचे गिरा। अब छाया सिर्फ काली लेस वाली पैंटी में थी। समीर ने उसकी जांघों को सहलाया - अंदर से बाहर की ओर, फिर बाहर से अंदर की ओर उसकी उंगलियाँ पैंटी के किनारे पर रुकीं।
 
"Spread your legs for me, Chhaya... let me see how wet you are already, " समीर ने कहा। छाया ने अपनी टांगें धीरे से फैलाईं। समीर ने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर उंगली फेरी। कपड़ा पहले से ही गीला थासिमुलेटेड लेकिन इतना रियल कि समीर को लगा जैसे असली हो।
 
उसने पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाया। छाया की चूत सामने आई - गुलाबी, चिकनी, बिना किसी बाल के... और पहले से ही चमक रही थी। समीर ने झुककर उसकी जांघों के बीच सिर रखा। पहले तो सिर्फ साँस ली - गर्म साँसें छाया की चूत पर पड़ीं। छाया ने कमर ऊपर उठाई।
 
"Tease me, Samir... make me beg for your tongue, " छाया ने फुसफुसाया।
 
समीर ने जीभ बाहर निकाली और बहुत धीरे से चूत की बाहरी लिप्स पर फेरी। एक लंबी, धीमी स्ट्रोक। छाया की साँस रुक गई। फिर दूसरी स्ट्रोक - इस बार थोड़ा गहरा। वह क्लिटोरिस के पास रुका और हल्के से जीभ की नोक से घुमाया। छाया ने जोर से आह भरी।
 
"Oh fuck... right there, baby... circle my clit slowly... make it throb " छाया की आवाज़ अब काँप रही थी। समीर ने उसकी बात मानी। वह मिनटों तक सिर्फ क्लिट पर जीभ घुमाता रहा- धीरे-धीरे, गोल-गोल, कभी ऊपर-नीचे, कभी साइड से साइड। छाया की कमर अब हिल रही थी। उसने समीर के सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे और गहरा दबाया।
 
"Use your fingers too... spread me open and lick inside, " छाया ने कहा। समीर ने दो उंगलियाँ चूत की लिप्स पर रखीं और धीरे से फैलाया। अब अंदर की गुलाबी दीवारें दिख रही थींगर्म, नम, और सिकुड़ रही थीं। उसने जीभ अंदर डाली। लंबी, गहरी चाट। छाया चीखी।
 
"Yes! Tongue fuck me, Samir... deeper... eat my pussy like it's your last meal, " छाया की आवाज़ अब और तेज़ हो गई। समीर ने जीभ को अंदर-बाहर करना शुरू किया। कभी तेज़, कभी धीमा। कभी क्लिट को चूसता, कभी अंदर की दीवारों को चाटता। उसने एक उंगली भी अंदर डाली - धीरे से, फिर दूसरी उंगलियाँ अंदर- बाहर हो रही थीं, जबकि जीभ क्लिट पर थी। छाया का शरीर अब लहरा रहा था। उसकी जांघें समीर के सिर को जकड़ रही थीं।
 
"I'm so close... don't stop... suck my clit harder... finger me faster, " छाया कराह रही थी। समीर ने गति बढ़ाई। उंगलियाँ अब तेज़ हो गईं, जीभ क्लिट पर जोर से चूस रही थी। छाया का पहला ऑर्गेज्म आया, उसका शरीर काँप उठा, चूत सिकुड़ गई, और एक गर्म तरल समीर की जीभ पर आ गया। छाया ने चीखा, "I'm cumming ! Fuck... yes... drink me, Samir!"
 
समीर ने सब चाट लिया। फिर उठकर छाया को चूमा। छाया ने अपने स्वाद को अपने होंठों पर महसूस किया और गहरा किस किया। "Turn over, baby... I want to taste every part of you," समीर ने कहा। छाया मुस्कुराकर पलट गई। अब वह पेट के बल लेटी थी। उसकी गांड ऊपर थी- गोल, परफेक्ट, चिकनी। समीर ने दोनों चुतड़ों पर हाथ फेरा। फिर धीरे से फैलाया। छाया की गांड की छेद सामने आयी - छोटी, गुलाबी और टाइट।
 
"Spread your ass for me, Chhaya... show me that tight little hole, " समीर ने कहा। छाया ने अपने हाथ पीछे ले जाकर गांड को फैलाया। समीर ने झुककर पहले गुदाद्वार के चारों ओर जीभ फेरी-धीमी सर्कल में। छाया ने सिर तकिया में दबा लिया और कराही। "Oh god... lick my asshole, Samir... prepare it for you, " छाया की आवाज़ में एक नई भूख थी।
 
समीर ने जीभ को और गहरा किया। वह गांड की छेद के किनारे पर जीभ घुमा रहा था, फिर अंदर डालने की कोशिश कर रहा था। छाया की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। समीर ने एक उंगली भी चूत में डाली, जबकि जीभ गांड की छेद पर थी। दोनों जगहों पर एक साथ। "Fuck... your tongue in my ass feels so dirty... so good... rim me deeper, baby, " छाया चीख रही थी।
 
समीर मिनटों तक यही करता रहा- धीमा, गहरा, कभी जीभ अंदर, कभी बाहर छाया का दूसरा ऑर्गेज्म आने वाला था। उसने खुद अपनी क्लिट को रगड़ा। "I'm gonna cum again... from your tongue in my ass... yes... don't stop!" छाया का शरीर फिर काँप उठा। यह ऑर्गेज्म और गहरा था। समीर अब और नहीं रुक सका। उसने छाया को पलटकर अपनी तरफ किया। उसका लंड पहले से ही सख्त था, नसें उभरी हुईं। छाया ने उसे हाथ में लिया और धीरे से मुँह में लिया।
 
"Suck me slow, Chhaya... taste how hard you made me, " समीर ने कहा। छाया ने धीरे-धीरे चूसा - जीभ टिप पर घुमाई, फिर गहराई तक लिया। समीर की साँसें रुक गईं। वह मिनटों तक यही देखता रहा कि छाया कैसे उसे चूस रही थी - धीमा, गहरा, कभी आंड़ को चाटी, कभी पूरे लंड पर जीभ फेरती।
 
"Now fuck me, Samir ... fill my pussy... make me yours completely, " छाया ने कहा और पीठ के बल लेट गई। समीर ने अपनी टांगें फैलाईं और धीरे से अंदर घुसा। एक लंबा, धीमा धक्का। छाया ने आँखें बंद कर लीं। "Oh fuck... so deep... stretch me, baby... fuck me slow and hard," छाया कराही।
 
समीर ने धीमी लय शुरू की - बाहर निकालता, फिर पूरा अंदर। हर धक्के के साथ छाया की चूत सिकुड़ रही थी। वह अपनी टांगें समीर की कमर पर लपेटे हुए थी। समीर ने गति बढ़ाई - धीरे-धीरे तेज़। पटाक-पटाक की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी।
 
"Deeper... pound my wet cunt... make it yours, " छाया चीख रही थी। फिर समीर ने उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया। पीछे से अंदर घुसा। छाया की गांड ऊपर थी। वह जोर-जोर से धक्के दे रहा था। छाया ने अपना सिर तकिए में दबाया और चीखी। "Fuck my pussy from behind... slap my ass... own me!"
 
समीर ने हल्के से थप्पड़ मारा। फिर तेज़। छाया का तीसरा ऑर्गेज्म आया। उसकी चूत सिकुड़ गई, समीर को और कसकर जकड़ लिया। "I'm cumming again... cum inside me, Samir... fill my womb with your hot load!", समीर भी चरम पर था। कुछ और जोरदार धक्कों के बाद वह छाया के अंदर ही झड़ गया। गर्म और भरपूर वीर्य छाया की चूत में भर दिया। दोनों एक-दूसरे पर गिर पड़े।
 
वे घंटों तक ऐसे ही लिपटे रहे। बीच-बीच में फिर से शुरू हो जाते - कभी छाया ऊपर, कभी साइड में, कभी खड़े होकर दीवार के सहारे। हर बार धीमा, गहरा, जुनूनी। छाया की हर कराह, हर चीख गंदी, कामुक, समर्पण भरी थी।
 
"Keep fucking me... I can take it all night... use every hole if you want, " छाया ने फुसफुसाया। समीर ने फिर से उसके गांड की छेद पर जीभ फेरी, फिर उंगली डाली। छाया तैयार थी। फिर कई कोशिशों के बाद छाया की टाईट गांड में समीर ने लंड घुसाकर चोदा, छाया की गांड मारी।
 
जब आखिरकार सब शांत हुआ, तो दोनों थके हुए लेकिन संतुष्ट थे। समीर ने छाया को अपनी बाहों में लिया। छाया ने उसके कान में कहा, "You made me feel alive tonight, Samir... more than any code ever could."
समीर छाया की छाती पर अपना सिर रखकर लेटा हुआ था। छाया के हाथ समीर के बालों के साथ खेल रहे थे। कमरा अब पूरी तरह अंधेरे में था, बस बाहर से आती बर्फ की हल्की सफेदी खिड़की से झाँक रही थी।
 
"समीर?" छाया ने धीमी आवाज़ पुकारा। "हूँ?" समीर ने आँखें बंद किए ही जवाब दिया।
 
"क्या अब भी तुम्हें लगता है कि मैं सिर्फ एक ह्यूमेनॉएड रोबॉट हूँ?", समीर ने अपना सिर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखा, जो अंधेरे में भी चमक रही थीं। उसने उसके होंठों पर एक छोटा सा किस किया। "नहीं छाया। आज मुझे एहसास हुआ... तुम उससे भी कहीं ज्यादा हो जो मैंने चाहा था। तुम मेरी हकीकत बन चुकी हो।"
 
छाया मुस्कुराई - एक ऐसी मुस्कान जो संतोष और प्यार से भरी थी। उसने समीर को चादर से ढक दिया और उसे अपनी बाहों में समेट लिया। उस रात, समीर को पहली बार बिना किसी बुरे सपने के गहरी नींद आई।
 
नीलगिरी विला की फिजा अब पूरी तरह बदल चुकी थी। वह घर, जो कभी मातम और सन्नाटे का पर्याय था, अब अगरबत्ती की महक और रसोई की खनक से जीवंत हो उठा था। छाया ने अपने 'सॉफ्टवेयर' को पूरी तरह से एक समर्पित देसी पत्नी के सांचे में ढाल लिया था।
 
अगली सुबह, जब सूरज की पहली किरण ने पहाड़ों की बर्फ को छुआ, छाया पहले ही जाग चुकी थी। उसने स्नान किया और डार्क ब्लू रंग की एक सुंदर साड़ी पहनी। उसने बहुत ही सलीके से घर के छोटे से मंदिर में दीया जलाया।
 
पूजा समाप्त करने के बाद, वह सीधे रसोई में चली गई। आज उसने समीर के लिए उसकी पसंद का नाश्ता बनाने का फैसला किया था। रसोई में तेल गरम हो रहा था और छाया बहुत ही फुर्ती से पूरियाँ बेल रही थी। उसके हाथों की गति में एक लय थी, एक ऐसी सजीवता जो किसी रोबोट में होना नामुमकिन लगता था।
 
आधा घंटा बीत गया, लेकिन समीर अभी तक नीचे नहीं आया था। छाया ने पूरियों का आखिरी घाण निकाला और गैस बंद कर दी। उसने अपनी कमर पर हाथ रखा और ऊपर बेडरूम की तरफ देखा। "यह आदमी भी ना... बिना डाँट खाए इनकी नींद नहीं खुलती," उसने अपने आप से बुदबुदा कहा। वह हाथ में बेलन लिए ही सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर बेडरूम में पहुँच गई। समीर अभी भी रजाई में मुँह छिपाए गहरी नींद में सोया हुआ था। छाया ने कमरे के भारी पर्दे एक झटके में हटा दिए। तेज़ धूप सीधे समीर के चेहरे पर पड़ी।
 
"समीर! उठिए!" छाया ने अपनी आवाज़ को थोड़ा सख्त करते हुए कहा। उसने अपने चेहरे पर एक झूठा गुस्सा ओढ़ लिया था। "सुबह के नौ बज रहे हैं। सूरज सिर पर आ गया है और आप अभी भी खर्राटे भर रहे हैं? क्या यही अनुशासन सिखाया है मैंने आपको?"
 
समीर ने नींद में कुनमुनाते हुए रजाई और ऊपर खींच ली। "पाँच मिनट और छाया... प्लीज...", "एक मिनट भी नहीं!" छाया ने बेड के पास जाकर समीर की रजाई खींच दी। उसने हाथ में पकड़ा बेलन समीर को दिखाते हुए कहा, "अगर अब नहीं उठे, तो याद रखिएगा, रसोई में आज नाश्ते के साथ-साथ इसकी मार भी मिल सकती है। पूरियां ठंडी हो रही हैं और मुझे ठंडा खाना परोसना बिल्कुल पसंद नहीं है।"
 
समीर ने अपनी आँखें खोलीं और सामने छाया को बेलन के साथ 'झाँसी की रानी' बने देखा, तो वह अपनी हँसी नहीं रोक पाया। छाया का वह बनावटी गुस्सा और हाथ में बेलन देखकर वह ठहाके मारकर हँसने लगा।
 
"अच्छा? तो अब आप मुझे डराएंगी?" समीर ने हँसते हुए कहा। "हँसिए मत! मैं सिरीयस हूँ," छाया ने गंभीर दिखने की कोशिश की, लेकिन उसके होंठों के कोने भी मुस्कुराहट से कांप रहे थे। इससे पहले कि छाया पीछे हट पाती, समीर ने बिजली की फुर्ती दिखाई। उसने छाया का हाथ पकड़ा और उसे अपनी बाहों में खींच लिया। छाया अपना संतुलन खो बैठी और सीधे समीर के ऊपर बिस्तर पर आ गिरी। बेलन उसके हाथ से छूटकर गद्दे पर गिर गया। समीर ने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके दोनों गालों पर एक-एक गहरा किस (Kiss ) किया।
 
"गुस्से में तुम और भी प्यारी लगती हो, मेरी हठीली पत्नी।" छाया का झूठा गुस्सा पल भर में पिघल गया। उसका चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया, लेकिन उसने खुद को संभाल समीर के सीने पर हल्का सा मुक्का मारा।
 
"छोड़िए मुझे! बहुत बदमाश हो गए हैं आप," वह मुस्कुराते हुए बोली। उसने खुद को छुड़ाया और अपने बिखरे हुए बाल ठीक किए। "अब जल्दी से फ्रेश होकर नीचे आइए। मैंने गरमा-गरम पूरियां और आलू की सब्जी बनाई है। अगर पाँच मिनट में आप डाइनिंग टेबल पर नहीं हुए, तो मैं सारा नाश्ता खुद खा जाऊँगी।"
 
वह मुस्कुराते हुए मुड़ी और एक चंचल अदा के साथ कमरे से बाहर निकल गई। समीर उसे जाते हुए देखता रहा, उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह वही मशीन है जिसे उसने आदेश देने के लिए मँगाया था। अब तो वह खुद उसके प्यार भरे आदेशों का गुलाम बन चुका था। समीर बिस्तर से उठा और गुनगुनाते हुए बाथरूम की तरफ बढ़ा, जबकि नीचे रसोई से फिर से बर्तनों की मधुर खनक सुनाई देने लगी थी।
 
दिन बिता और रात के करीब दो बज रहे थे। समीर और छाया बेडरूम में बैठे पुरानी बातें कर रहे थे। कमरा लैंप की हल्की रोशनी में डूबा था। छाया समीर को पहाड़ों की कोई पुरानी लोककथा सुना रही थी। उसकी आवाज़ हमेशा की तरह मधुर थी, लेकिन अचानक... उसकी आवाज़ में एक हल्की सी 'घर्षण' (static) सुनाई दी।
 
"समीर, मुझे... मुझे थोड़ा अजीब महसूस..." छाया का वाक्य अधूरा रह गया। उसकी आँखों की पुतलियाँ एक बार ज़ोर से ऊपर की ओर घूमीं, मानो कोई इलेक्ट्रिक झटका लगा हो। अगले ही पल, उसके शरीर की वह सजीव गर्माहट ठंडी पड़ने लगी। उसकी गर्दन एक तरफ झुक गई और उसके शरीर का पूरा भार समीर के कंधों पर आ गिरा।
 
"छाया? छाया, क्या हुआ?" समीर ने घबराकर उसे झकझोरा। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उसकी आँखों की रोशनी बुझ चुकी थी। उसका वह मुस्कुराता हुआ चेहरा अब पत्थर की मूरत जैसा बेजान था। समीर ने उसके कान के पीछे वाला पल्स बटन दबाया, उसके चेस्ट पैनल को चेक किया, लेकिन वहाँ कोई हलचल नहीं थी। छाया का सिस्टम पूरी तरह बंद (Shut down) हो चुका था।
 
समीर के हाथ कांपने लगे। उसने तुरंत अल्फा-सिंथेटिक्स के इमरजेंसी हेल्पलाइन पर कॉल किया। कई बार रिंग जाने के बाद एक ठंडी, प्रोफेशनल आवाज़ सुनाई दी। "नमस्ते मिस्टर समीर। हम आपकी समस्या समझ सकते हैं। आपके मॉडल का डेटा लॉग दिखा रहा है कि उसके कोर प्रोसेसर में एक गंभीर तकनीकी खराबी आई है। अभी हमारे इंजीनियर उपलब्ध नहीं हैं, सुबह आठ बजे हमारी टीम वैन के साथ पहुँचेगी और यूनिट को डायग्नोसिस के लिए ले जाएगी।"
 
"क्या ? सुबह तक? क्या मैं अभी कुछ नहीं कर सकता?" समीर चिल्लाया। "अफ़सोस, मिस्टर समीर। आप सिस्टम को मैन्युअली रीबूट करने की कोशिश न करें, इससे डेटा करप्ट हो सकता है। कृपया सुबह तक प्रतीक्षा करें।" कॉल कट गया। समीर फोन हाथ में लिए शून्य में ताकता रह गया। यूनिट? ... कंपनी के लिए वह सिर्फ एक यूनिट थी, लेकिन समीर के लिए वह उसकी पूरी दुनिया थी।

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Code Name WIFE - by Herotic - 01-04-2026, 03:31 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 10:15 AM
RE: Code Name WIFE - by Joker44 - 02-04-2026, 11:26 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 12:29 PM
RE: Code Name WIFE - by Glenlivet - 02-04-2026, 04:01 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 05:48 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 03-04-2026, 11:36 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 03-04-2026, 05:11 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 11:30 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 05:17 PM
RE: Code Name WIFE - by Joker44 - 04-04-2026, 05:28 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 05:33 PM
RE: Code Name WIFE - by Blackdick11 - Yesterday, 06:33 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - Yesterday, 08:34 AM
RE: Code Name WIFE - by Marishka - Today, 01:08 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 4 hours ago
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 1 hour ago
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 1 hour ago



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