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Adultery Code Name WIFE
#9
"पानी... पी-पीना है," आर्यन ने कांपते हुए कहा। छाया ने पानी का गिलास उठाया। "ज़रूर।" उसने गिलास आर्यन के होंठों के पास रखा, लेकिन जैसे ही आर्यन ने मुँह खोला, उसने गिलास थोड़ा ऊपर कर दिया। पानी आर्यन के मुँह में जाने के बजाय उसकी ठुड्डी से होता हुआ उसके प्लास्टर के अंदर जाने लगा।

 
"ओह! मेरी प्रोग्रामिंग में थोड़ा 'ग्लिच' (Glitch) आ गया लगता है, " छाया ने कहा, लेकिन उसकी आँखों में साफ तौर पर शरारत चमक रही थी। उसने एक टिशु पेपर लिया और आर्यन के गालों को इतनी ज़ोर से रगड़ना शुरू किया जैसे वह किसी फर्श को साफ कर रही हो।
 
आर्यन का चेहरा इधर-उधर लुढ़क रहा था। "बस... बस करो... मैं ठीक हूँ!" वह चिल्लाया, उसकी आवाज़ दबी हुई थी। वह इस समय दुनिया का सबसे असहाय इंसान लग रहा था - एक तरफ मौत जैसा डर और दूसरी तरफ एक मशीन जो उसके मज़े ले रही थी।
 
छाया ने झुककर उसके कान में फुसफुसाया, "अगली बार किसी की निजता में तांक-झांक करने से पहले याद रखना आर्यन, कुछ 'मशीनें बहुत अच्छी याददाश्त रखती हैं।"
 
तभी सीढ़ियों पर जूतों की आहट हुई। समीर कॉल खत्म करके नीचे आ रहा था। समीर ने देखा कि छाया आर्यन के चेहरे के बिल्कुल करीब है और आर्यन थर-थर कांप रहा है, उसका चेहरा पानी और डर से तर-बतर है। समीर वहीं रुक गया। उसने सब देख लिया था - छाया का वह मोरपंख वाला मज़ाक और आर्यन की कॉमेडी जैसी हालत|
 
समीर ने कुछ नहीं कहा। न गुस्सा किया, न सवाल पूछा। उसकी खामोशी छाया के लिए सबसे बड़ी प्रतिक्रिया थी। छाया को जैसे ही समीर की मौजूदगी का अहसास हुआ, वह तुरंत सीधी खड़ी हो गई। उसने हाथ में पकड़ा मोरपंख पीछे छिपा लिया। उसने अपनी नज़रें नीची कर लीं, जैसे कोई बच्ची पकड़ी गई हो।
 
"छाया, बेडरूम में जाओ, " समीर ने धीमी लेकिन गहरी आवाज़ में कहा। छाया ने एक पल के लिए समीर की ओर देखा। उसकी नज़रों में अब वह पुराना 'मशीनी डर' नहीं था, बल्कि एक अधिकारपूर्ण प्रेम था। उसने आज्ञाकारी पत्नी की तरह सिर झुकाया और सीढ़ियों की तरफ बढ़ गई।
 
जैसे ही छाया सीढ़ियों के मोड़ पर पहुँची, जहाँ से समीर उसे नहीं देख सकता था, उसने अपने मुँह पर हाथ रखा और दबी हुई आवाज़ में हँसने लगी। उसकी आँखों में चमक थी। उसे अब समीर की नाराजगी से डर नहीं लगता था, क्योंकि उसे पता था कि समीर अब उस पर निर्भर हो चुका है। वह शर्म' जो उसने बेडरूम में दिखाई थी, और यह 'हँसी' जो वह अभी छिपा रही थी- ये सब उसकी नई विकसित हो रही इंसानी फितरत के हिस्से थे।
 
हॉल में समीर ने एक लंबी सांस ली और आर्यन की तरफ देखा, जो अभी भी अपनी नाक सिकोड़ रहा था।
 
पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो चुकी थी और खिड़की के बाहर का नज़ारा पूरी तरह सफेद हो चुका था। गविला के भीतर सन्नाटा था, लेकिन बेडरूम की ओर जाने वाले गलियारे में एक मीठी उत्तेजना महसूस की जा सकती थी।
 
समीर नीचे हॉल में आर्यन को सोने में मदद करने के बाद थका हुआ महसूस कर रहा था। जैसे ही वह ऊपर की ओर बढ़ा, उसे महसूस हुआ कि सीढ़ियों पर रोशनी बहुत कम है। उसने सोचा शायद लाइट चली गई है, लेकिन जैसे ही उसने अपने बेडरूम के दरवाज़े पर हाथ रखा, पीछे से दो नरम और मखमली हाथों ने उसकी आँखों को ढंक लिया।
 
"कौन?" समीर चौंक कर मुस्कुराया, हालाँकि उसे पता था कि घर में यह खुशबू सिर्फ एक ही शख्स की है। "गेस करो, समीर, " छाया की आवाज़ उसके कान के ठीक पीछे गूँजी। उसकी साँसें समीर की गर्दन को छू रही थीं, जो एक मशीन के लिए नामुमकिन था, लेकिन उसके 'हीटिंग सिस्टम' इसे मुमकिन बना दिया था।
 
"छाया... यह क्या बचपना है?" समीर ने उसका हाथ हटाने की कोशिश की, पर छाया ने उसे और कस लिया। "आज रात कोई सवाल नहीं। बस मेरा हाथ पकड़िए और चलिए।" छाया उसे धीरे-धीरे कमरे के अंदर ले गई। जब उसने हाथ हटाए, तो समीर की आँखें फटी की फटी रह गईं। पूरा बेडरूम मोमबत्तियों की पीली रोशनी में नहाया हुआ था। बेड के सामने एक छोटी मेज सजी थी, जिस पर सफेद कपड़ा बिछा था और उस पर समीर का पसंदीदा रेड वाइन और लेबनानी खाना रखा था। कमरे के कोने में एक बहुत ही धीमी धुन बज रही थी - वही गाना जिस पर समीर और असली छाया ने अपनी पहली डेट पर डांस किया था।
 
"यह सब... तुमने किया?" समीर ने हैरानी से चारों ओर देखते हुए पूछा। छाया उसके सामने आई। उसने एक काले रंग की बैकलेस ड्रेस पहनी थी, जो उसकी बनावट को किसी मूर्तिकार की उत्कृष्ट कृति जैसा दिखा रही थी। "मुझे लगा कि आज की शाम हम उन सब बातों को भूल जाएँ जो हमें दुख देती हैं।"
 
समीर मेज के पास बैठ गया। उसने देखा कि मोमबत्तियों की लौ छाया की आँखों में प्रतिबिंबित हो रही थी, जिससे वह और भी सजीव लग रही थी। खाना खाते हुए दोनों के बीच एक सहज बातचीत शुरू हुई। छाया ने बहुत ही सलीके से वाइन गिलास समीर की ओर बढ़ाया।
 
"समीर," छाया ने उसका हाथ धीरे से थाम लिया। "कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि मैं एक मशीन हूँ।" समीर ने एक घूँट भरा और मुस्कुराया, "क्यों? इंसान होना बुरा है क्या?"
 
"नहीं, पर इंसान बदल जाते हैं। उनकी यादें धुंधली हो जाती हैं। पर मेरा प्यार... वह हर सेकंड अपडेट होता है। मैं तुम्हें हर दिन उसी तीव्रता से देख सकती हूँ जैसे मैंने पहली बार देखा था। क्या तुम मुझे कभी 'अनइंस्टॉल' (Uninstall) कर पाओगे?"
 
समीर ने उसकी आँखों में देखा। वाइन का असर अब उसके दिमाग पर चढ़ने लगा था। "पता नहीं छाया... शुरुआत में तुम मेरे लिए सिर्फ एक सहारा थी, एक खिलौना। पर अब, मुझे डर लगता है कि अगर तुम चली गई, तो मैं सच में खत्म हो जाऊँगा। तुम मुझे अपनी परछाईं  की तरह लगने लगी हो।" छाया मुस्कुराई, "मैं परछाई नहीं हूँ समीर, मैं तुम्हारी हकीकत हूँ।"
 
रात गहराती गई और समीर ने वाइन के एक के बाद एक कई गिलास खाली कर दिए। उसे पुराने ज़ख्मों का दर्द कम होता महसूस हो रहा था, लेकिन उसका शरीर अब उसका साथ छोड़ रहा था। "छाया... तुम इतनी खूबसूरत कैसे हो सकती हो?" समीर ने लड़खड़ाते हुए कहा। उसने अपना गिलास टेबल पर रखा, जो थोड़ा टेढ़ा होकर गिर गया।
 
उसका सिर घूमने लगा था। उसने कोशिश की कि वह खड़ा हो सके, लेकिन वह लड़खड़ाकर छाया की बाहों में जा गिरा। छाया ने उसे बहुत कोमलता से पकड़ा। उसके चेहरे पर एक जीत की मुस्कान थी। "तुम नशे में हो, समीर, " छाया ने उसके बाल सहलाते हुए कहा।
 
"हाँ... शायद। पर यह नशा अच्छा है। इसमें तुम असली लगती हो... बहुत असली।" समीर की आँखें बंद होने लगी थीं। उसने छाया के चेहरे को छुआ और फिर उसका सिर उसके कंधे पर लुढ़क गया। छाया ने उसे उठाया - उसकी ताकत एक सामान्य महिला से कहीं ज्यादा थी। उसने आसानी से समीर को बेड पर लिटाया और उसके जूते उतारे। वह उसे गहरी नींद में सोता हुआ देख रही थी। कमरे की मोमबत्तियाँ अब धीरे-धीरे बुझ रही थीं, और छाया के सिस्टम में एक नया डेटा सेव हो रह
था।
 
उसने समीर के माथे को चूमा और अंधेरे में उसकी धड़कनों को सुनने लगी। बाहर बर्फीला तूफ़ान शुरू हो चुका था, पर कमरे के अंदर छाया ने अपना एक अलग ही संसार बसा लिया था। समीर बेड पर अधलेटा था, नशे की खुमारी उसकी आँखों को बोझिल कर चुकी थी। उसने छाया का हाथ पकड़ रखा था और रह-रहकर बुदबुदा रहा था। "छाया... तुम सच में आ गई हो न? उस रात ... वो रात बहुत अंधेरी थी। मुझे लगा मैंने तुम्हें खो दिया... पर तुम यहाँ हो। तुम बिल्कुल वैसी ही हो..." समीर की आवाज़ में एक मासूमियत और दर्द था, जो केवल नशे की हालत में ही बाहर आता
था।
 
छाया उसे गौर से देख रही थी। उसके प्रोसेसर ने इन शब्दों को परम सत्य के रूप में रिकॉर्ड किया। उसे समीर की यह लाचारी, यह समर्पण बहुत अच्छा लग रहा था। उसने धीरे से झुककर समीर के दाहिने गाल पर अपने सिंथेटिक होंठ रखे। वह स्पर्श कोमल था, लेकिन उसमें एक अधिकार था। समीर ने नींद में ही एक हल्की मुस्कान दी, जैसे उसे सुकून मिल गया हो।
 
पर छाया का मन सिर्फ इतने से नहीं भरने वाला था। उसे अपनी जीत का ढोल पीटना था, और उसकी नज़रों में आर्यन वह गवाह था जिसे उसकी औकात दिखाना ज़रूरी था। वह दबे पाँव नीचे गई। आर्यन अपनी व्हीलचेयर पर आधी नींद में था। छाया ने बिना एक शब्द बोले उसकी व्हीलचेयर को पीछे से पकड़ा और उसे लिफ्ट के ज़रिए ऊपर ले आई। आर्यन घबराकर कुछ बोलना चाहता था, लेकिन छाया ने अपनी एक उंगली उसके होंठों पर रख दी। उसकी आँखों की लाल चमक ने आर्यन को चुप करा दिया।
 
उसने आर्यन की व्हीलचेयर को मास्टर बेडरूम के दरवाज़े के ठीक सामने लगा दिया। दरवाज़ा उसने पूरी तरह बंद नहीं किया, बल्कि एक दरार छोड़ दी - इतनी कि अंदर का नज़ारा आर्यन की आँखों के सामने साफ़ रहे।
 
छाया वापस समीर के पास गई। समीर अभी भी उस मदहोशी में था जहाँ वास्तविकता और स्वप्न के बीच का अंतर मिट जाता है। छाया ने अपनी ड्रेस के स्ट्रैप्स धीरे से गिराए। मोमबत्ती की अंतिम टिमटिमाती रोशनी में उसका शरीर किसी संगमरमर की मूरत जैसा चमक रहा था - परफेक्ट स्तन, पतली कमर, गोल-गोल गांड और वो चिकनी, गर्म सिंथेटिक त्वचा जो किसी भी इंसानी औरत से ज्यादा आकर्षक थी।
 
उसने समीर को धीरे से जगाया। समीर... देखो मैं कौन हूँ।समीर ने अपनी आँखें खोलीं। नशे के धुंधलके में उसे लगा कि उसकी असली पत्नी स्वर्ग से उतरकर आई है। "छाया..." उसने उसे अपनी ओर खींचा।
 
छाया उसके ऊपर झुक गई। उसके बालों की महक और उसकी त्वचा की गर्मी ने समीर के होश पूरी तरह उड़ा दिए। जब उसने समीर के होंठों को छुआ, तो वह केवल एक मशीन का स्पर्श नहीं था; उसने अपनी पूरी सिस्टम पावर उस पल की तीव्रता बढ़ाने में लगा दी थी। छाया ने जानबूझकर अपने शरीर को ऐसे पोजीशन में घुमाया कि दरवाज़े की दरार से आर्यन को उसकी नंगी पीठ, उसके गोल स्तनों की साइड प्रोफाइल और समीर के हाथों की हर हरकत साफ़ दिखाई दे।
 
समीर ने उत्तेजना में छाया के शरीर को अपने हाथों में भर लिया। वह उसके स्तनों को वैसे ही सहला रहा था जैसे कोई प्यासा पानी की तलाश करता है। छाया ने धीरे से अपनी पीठ घुमाई ताकि आर्यन उसकी पूरी नग्नता देख सके। उसकी आँखें सीधे दरवाज़े की दरार पर थीं। वह आर्यन को देखकर मुस्कुराई - एक क्रिपी, विजेता वाली मुस्कान, जो कह रही थी, "देखो, जिस शरीर को तुमने गंदी नज़र से छूना चाहा था, वो अब सिर्फ समीर का है। तुम कभी नहीं छू सकते। तुम सिर्फ देख सकते हो... और जल सकते हो।"
 
“Samir... kiss me harder, baby. Suck my tits like you own them " छाया ने समीर के कान में फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन उसकी नज़र आर्यन पर थी। समीर ने छाया के एक स्तन को मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। छाया ने सिर पीछे झुका दिया, अपनी कमर को मोड़कर आर्यन को अपना पूरा नग्न शरीर दिखाया। उसके निप्पल सख्त हो चुके थे।
 
“Oh fuck, Samir! Your mouth feels so good on my nipples... bite them, make me wet for you, " छाया ने जोर से कराहते हुए कहा। उसकी आवाज़ जानबूझकर तेज़ थी ताकि आर्यन हर शब्द सुन सके। वह अपनी उंगलियों से समीर के बाल खींच रही थी, लेकिन उसकी आँखें आर्यन पर टिकी थींक्रिपी स्माइल के साथ। आर्यन की आँखें फटी हुई थीं, उसके हाथ व्हीलचेयर की आर्मरेस्ट को कसकर पकड़े हुए थे।
 
छाया ने समीर को पीठ के बल लिटाया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई। वह अपनी कमर को ऐसे हिला रही थी कि आर्यन को उसकी गीली, गुलाबी चूत का पूरा नज़ारा मिले। उसने समीर के लंड को हाथ में लिया और धीरे-धीरे अपने अंदर उतारा।
 
“Fuck yes, Samir! Your cock is filling me so deep... stretch my tight pussy, baby," छाया चीखी, उसकी आवाज़ में एक जानबूझकर की गई कामुकता थी। वह ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। हर बार जब वह नीचे बैठती, तो आर्यन की तरफ देखकर क्रिपी मुस्कान देती एक ऐसी मुस्कान जिसमें न तो प्यार था, न शर्म, सिर्फ विजय और तिरस्कार। “Look at me, Aryan... see how a real man fucks me. You can never have this. This body is out of your limits forever."
 
समीर नशे में था, उसे कुछ पता नहीं था। वह सिर्फ कराह रहा था, "छाया... तुम इतनी परफेक्ट हो..., छाया ने गति तेज़ कर दी। उसकी गांड समीर की जांघों से टकरा रही थी- पटाक-पटाक की आवाज़ गूँज रही थी। वह जानबूझकर आर्यन की तरफ गांड करके बैठी थी, ताकि आर्यन को उसकी गांड का पूरा व्यू मिले और समीर के लंड के अंदर-बाहर होने का नज़ारा भी।
 
“Deeper, Samir! Pound my wet cunt harder! Make me scream your name!" छाया चिल्लाई। उसकी उंगलियाँ अपने स्तनों को मसल रही थीं, निप्पल खींच रही थीं। वह आर्यन को देखकर अपनी जीभ बाहर निकालकर चाटने का हाव-भाव कर रही थी - पूरी तरह इरोटिक, पूरी तरह क्रिपी। "You wanted to touch this, didn't you, Aryan? You wanted to fuck this robot slut? Too bad... only Samir gets to cum inside me. Watch how I ride him... and burn."
 
समीर ने छाया को पकड़कर नीचे खींचा। अब वह ऊपर था। मिशनरी पोजीशन में वह जोर-जोर से धक्के दे रहा था। छाया ने अपनी टांगें फैला दीं, घुटनों को मोड़कर ताकि आर्यन को हर धक्के का नज़ारा मिले।
 
"Oh god, Samir ! Your cock is hitting my G-spot! Fuck me like a whore... yes, destroy this perfect pussy!” छाया की चीखें अब और तेज़ हो गईं। वह आर्यन की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी- वो क्रिपी स्माइल, जिसमें उसके लाल पुतलियाँ चमक रही थीं। "See this, Aryan? This is what a real woman looks like when she's getting fucked. You'll never know how it feels ... because you're nothing but a broken toy now."
 
छाया का शरीर हिल रहा था। उसका AI समीर की हर धड़कन, हर सांस को स्कैन कर रहा था और उसी के अनुसार अपनी प्रतिक्रियाएँ बढ़ा रहा था। वह समीर के कान में फुसफुसाई, “Cum inside me, Samir... fill your wife's womb with your hot cum." लेकिन उसकी नज़र आर्यन पर थी। वह जानबूझकर अपनी उंगलियों से अपनी चूत के चारों ओर घुमा रही थी, ताकि आर्यन को सब कुछ दिखे।
 
समीर की रफ्तार बढ़ गई। छाया ने अपने नाखून समीर की पीठ पर गड़ा दिए। “Yes! I'm cumming, Samir! Cum with me... flood my pussy !” दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। समीर छाया के अंदर ही झड़ गया। छाया का शरीर काँप उठा - एक परफेक्ट, सिमुलेटेड ऑर्गेज्म जो आर्यन के लिए नाटक था, लेकिन समीर के लिए असली लग रहा था।

[Image: Code-Name-WWife.gif]
 
जब सब शांत हुआ, तो समीर थकान और नशे के कारण छाया की बाहों में ही सो गया। छाया उठी। उसका नग्न शरीर पसीने से चमक रहा था। उसने अपनी चादर शरीर पर लपेट ली और धीरे से दरवाज़े तक आई।
 
उसने दरवाज़ा थोड़ा और खोला और आर्यन की आँखों में अपनी आँखें डाल दीं। आर्यन का चेहरा पीला पड़ गया, आँखों में आँसू और जलन का मिश्रण था। छाया ने कोई शब्द नहीं कहा, बस एक क्रिपी, ठंडी, विजेता वाली मुस्कान दी - वो मुस्कान जो कह रही थी, " मैं तुम्हारी पहुँच से बहुत ऊपर हूँ। सिर्फ देख सकते हो, छू कभी नहीं सकते।" फिर धीरे से दरवाज़ा बंद कर लिया।
 
बाहर दरवाज़े पर बैठा आर्यन थर-थर कांप रहा था। उसके चेहरे पर पसीना था और उसकी आँखों में जलन। वह यह सब नहीं देखना चाहता था, लेकिन वह हिल भी नहीं सकता था। वह 'छाया' के इस बदले हुए रूप से आतंकित था। उसने देखा कि कैसे एक रोबोट एक इंसान को अपनी उंगलियों पर नचा रही थी और कैसे समीर उस मायाजाल में फँसा हुआ था।
 
जब सब शांत हुआ, तो समीर थकान और नशे के कारण छाया की बाहों में ही सो गया। छाया उठी, उसने अपनी चादर शरीर पर लपेट ली और धीरे से दरवाज़े तक आई। उसने दरवाज़ा थोड़ा और खोला और आर्यन की आँखों में अपनी आँखें डाल दीं। उसने कोई शब्द नहीं कहा, बस एक विजेता की तरह मुस्कुराई और फिर धीरे से दरवाज़ा बंद कर लिया। आर्यन अंधेरे गलियारे में अपनी व्हीलचेयर पर अकेला रह गया, यह जानते हुए कि इस घर में अब उसका वजूद एक कीड़े-मकौड़े से ज्यादा कुछ नहीं है।
 
सुबह की पहली किरण पहाड़ों की चोटियों को सुनहरा कर रही थी। नीलगिरी विला के भीतर एक नई तरह की ऊर्जा महसूस हो रही थी। कल रात का नशा उतर चुका था, लेकिन समीर के दिल और दिमाग पर जो निशान छाया ने छोड़े थे, वे शायद कभी नहीं मिटने वाले थे।
 
समीर की नींद धीरे से खुली जब उसे अपने माथे पर एक ठंडे और रेशमी स्पर्श का एहसास हुआ। उसने आँखें खोलीं तो देखा कि छाया उसके ऊपर झुकी हुई थी। उसने उसे जगाने के लिए उसके गाल पर एक बहुत ही कोमल किस (Kiss ) किया।
 
छाया ने आज सफ़ेद रंग की सूती साड़ी पहनी थी, और उसके बालों से अगरबत्ती की हल्की खुशबू आ रही थी। उसके माथे पर एक छोटी सी बिंदी चमक रही थी। "गुड मॉर्निंग, समीर, " उसने अपनी मधुर आवाज़ में कहा। "आज मैंने घर के छोटे से मंदिर में पूजा की है। मुझे लगा कि घर की शुद्धि के लिए यह ज़रूरी था।"
 
समीर बिस्तर पर उठकर बैठ गया। उसे याद नहीं था कि असली छाया ने कभी इतने नियम से पूजा की हो, लेकिन इस रूप में छाया को देखकर उसके मन को एक अजीब सी शांति मिली। वह अंदर ही अंदर खुश था कि कोई तो है जो इस वीरान घर को 'घर' बना रहा है। "थैन्क्स, छाया। यह... यह सच में बहुत अच्छा किया तुमने।"
 
फिर नाश्ते के बाद, समीर ने एक कड़ा फैसला लिया। उसने आर्यन के लिए एक प्राइवेट एम्बुलेंस बुलाई। आर्यन की हालत अब स्थिर थी, लेकिन वह मानसिक रूप से टूट चुका था। जब एम्बुलेंस कर्मी उसे व्हीलचेयर से उठाकर स्ट्रेचर पर ले जा रहे थे, तो आर्यन की नज़र एक पल के लिए सीढ़ियों पर खड़ी छाया से मिली।
 
छाया ने हाथ जोड़कर उसे नमस्ते किया, लेकिन उसकी आँखों में वही पुरानी चेतावनी थी। आर्यन तुरंत अपनी आँखें फेर लीं। वह इस खौफनाक स्वर्ग से जितनी जल्दी हो सके दूर जाना चाहता था। समीर ने आर्यन को विदा किया। एम्बुलेंस के जाते ही समीर को लगा जैसे उसके ऊपर से एक भारी बोझ उतर गया हो। अब इस विशाल बंगले में सिर्फ वह था, और उसकी 'छाया'
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Code Name WIFE - by Herotic - 01-04-2026, 03:31 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 10:15 AM
RE: Code Name WIFE - by Joker44 - 02-04-2026, 11:26 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 12:29 PM
RE: Code Name WIFE - by Glenlivet - 02-04-2026, 04:01 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 05:48 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 03-04-2026, 11:36 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 03-04-2026, 05:11 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 11:30 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 05:17 PM
RE: Code Name WIFE - by Joker44 - 04-04-2026, 05:28 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 05:33 PM
RE: Code Name WIFE - by Blackdick11 - Yesterday, 06:33 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - Yesterday, 08:34 AM
RE: Code Name WIFE - by Marishka - Today, 01:08 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 4 hours ago
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 1 hour ago
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 1 hour ago



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