03-04-2026, 01:19 PM
"तुमने उसकी शक्ल देखी थी?"
"कुछ ठीक से याद नही साहब।बहुत अंधेरा था...नाटा,काला सा आदमी था।"
राजासाहब पूरी तैयारी के साथ आए थे,"क्या ये था?",अपना ब्रीफकेस खोल जब्बार की तस्वीर निकाल गार्ड के सामने कर उन्होने पूछा।
"पक्का नही कह सकते,साहब...पर हां इसी तरह का था।" मैत्री की पेशकश.
राजासाहब के लिए इतना काफ़ी था। थोड़ी देर बाद वो पोलीस स्टेशन मे विश्वा के केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर के सामने बैठे थे," उस रात शायद बिजली भी गयी थी उस इलाक़े की?"
"जी,ऐसा बहुत कामन है उस एरिया मे। नया बसा है ना! होते रहते हैं पावरकट्स और वैसे भी उस रात बिजली ठीक करने वाला आदमी बेस्कॉम की यूनिफॉर्म और वन के साथ था। मैने सारे रेकॉर्ड्स चेक किए थे बेस्कॉम की कोई भी वॅन गायब या चोरी की रिपोर्ट नही थी। सो,मुझे लगता है कि वो आंगल नही है। मुझे पक्का यकीन है गार्ड सो रहा था और आपका बेटा निकल गया और उसकी बदक़िस्मती की ग़लत लोगो के हथ्थे चढ़ गया।"
"ह्म्म,एनीवे,थॅंक यू ऑफीसर। आपने जो भी किया है उसके लिए मैं ज़िंदगी भर आपका आभारी रहूँगा।",राजासाहब ने अपना हाथ ऑफीसर की ओर बढ़ाया।
"जस्ट डूयिंग माइ जॉब,राजासाहब। मेरा भरोसा करिए,मुजरिम को तो मैं पकड़ कर रहूँगा।",उसने राजासाहब से हाथ मिलाया। मैत्री की प्रस्तुति.
राजासाहब उस से विदा ले एरपोर्ट चल पड़े, उनका काम हो गया था। गार्ड से बात करके उन्हे यकीन हो गया था कि जब्बार ही उनके बेटे का कातिल है। उन्होने जानबूझ कर ऑफीसर को जब्बार का फोटो या उस पे शक़ होने की बात नही बताई थी। अब वो जब्बार को अपने हाथो से सज़ा देने की ठान चुके थे। एरपोर्ट पहुँच कर उन्होने मेनका को फोन मिलाया,"हमारा काम हो गया है।हम अगली फ्लाइट से आ रहे हैं।"
"सीधा हमे लेने आना।"
"ठीक है,मेरी जान।"
मेनका के माता-पिता चाहते तो नही थे कि उनकी बेटी इतनी जल्दी वापस जाए पर मेनका ने ऑफीस मे ज़रूरी काम का बहाना बना दिया था। उसके माता-पिता को भी लगा कि उनकी विधवा बेटी का मन काम के बहाने ही सही बहल तो रहा है,सो उन्होने ने भी उसे रोकने के लिए ज़्यादा ज़िद नही की। अब मेनका अपने मायके मे बेसब्री से राजासाहब का इंतेज़ार कर रही थी।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ. तब तक के लिए मैत्री की ओर से.
जय भारत.
"कुछ ठीक से याद नही साहब।बहुत अंधेरा था...नाटा,काला सा आदमी था।"
राजासाहब पूरी तैयारी के साथ आए थे,"क्या ये था?",अपना ब्रीफकेस खोल जब्बार की तस्वीर निकाल गार्ड के सामने कर उन्होने पूछा।
"पक्का नही कह सकते,साहब...पर हां इसी तरह का था।" मैत्री की पेशकश.
राजासाहब के लिए इतना काफ़ी था। थोड़ी देर बाद वो पोलीस स्टेशन मे विश्वा के केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर के सामने बैठे थे," उस रात शायद बिजली भी गयी थी उस इलाक़े की?"
"जी,ऐसा बहुत कामन है उस एरिया मे। नया बसा है ना! होते रहते हैं पावरकट्स और वैसे भी उस रात बिजली ठीक करने वाला आदमी बेस्कॉम की यूनिफॉर्म और वन के साथ था। मैने सारे रेकॉर्ड्स चेक किए थे बेस्कॉम की कोई भी वॅन गायब या चोरी की रिपोर्ट नही थी। सो,मुझे लगता है कि वो आंगल नही है। मुझे पक्का यकीन है गार्ड सो रहा था और आपका बेटा निकल गया और उसकी बदक़िस्मती की ग़लत लोगो के हथ्थे चढ़ गया।"
"ह्म्म,एनीवे,थॅंक यू ऑफीसर। आपने जो भी किया है उसके लिए मैं ज़िंदगी भर आपका आभारी रहूँगा।",राजासाहब ने अपना हाथ ऑफीसर की ओर बढ़ाया।
"जस्ट डूयिंग माइ जॉब,राजासाहब। मेरा भरोसा करिए,मुजरिम को तो मैं पकड़ कर रहूँगा।",उसने राजासाहब से हाथ मिलाया। मैत्री की प्रस्तुति.
राजासाहब उस से विदा ले एरपोर्ट चल पड़े, उनका काम हो गया था। गार्ड से बात करके उन्हे यकीन हो गया था कि जब्बार ही उनके बेटे का कातिल है। उन्होने जानबूझ कर ऑफीसर को जब्बार का फोटो या उस पे शक़ होने की बात नही बताई थी। अब वो जब्बार को अपने हाथो से सज़ा देने की ठान चुके थे। एरपोर्ट पहुँच कर उन्होने मेनका को फोन मिलाया,"हमारा काम हो गया है।हम अगली फ्लाइट से आ रहे हैं।"
"सीधा हमे लेने आना।"
"ठीक है,मेरी जान।"
मेनका के माता-पिता चाहते तो नही थे कि उनकी बेटी इतनी जल्दी वापस जाए पर मेनका ने ऑफीस मे ज़रूरी काम का बहाना बना दिया था। उसके माता-पिता को भी लगा कि उनकी विधवा बेटी का मन काम के बहाने ही सही बहल तो रहा है,सो उन्होने ने भी उसे रोकने के लिए ज़्यादा ज़िद नही की। अब मेनका अपने मायके मे बेसब्री से राजासाहब का इंतेज़ार कर रही थी।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ. तब तक के लिए मैत्री की ओर से.
जय भारत.


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