03-04-2026, 01:07 PM
अगली सुबह दोनो मेनका के मायके के लिए रवाना हो गये। राजासाहब ने उसे वहा छोडा और वहा से कार से शहर आकर बॅंगलुर की फ्लाइट पकड़ ली। शाम 7 बजे वो बॅंगलुर मे थे। पहुँचते ही उन्होने डॉक्टर पुरन्दारे से अगले दिन का अपायंटमेंट ले लिया। मैत्री की पेशकश.
अगले दिन सुबह दस बजे राजासाहब डॉक्टर पुरन्दारे के कॅबिन मे उनके सामने बैठे थे।
"राजासाहब,जो भी हुआ उसके लिए मैं आपसे माफी चाहता हू।"
"डॉक्टर साहब आप हमे शर्मिंदा कर रहे हैं। जो भी हुआ उसमे आपकी कोई ग़लती नही थी। प्लीज़ अब आप खुद को दोष देना छोड़ दीजिए।"
"पर राजासाहब विश्वजीत मेरा पेशेंट था। मेरी ज़िम्मेदारी था। मुझे तो समझ नही आता ये सब आख़िर हुआ कैसे!"
"डॉक्टर साहब आपका मानना है कि विश्वा काफ़ी हद तक ठीक हो गया था, इसीलिए वो यहा से ड्रग्स लेने के लिए भागने जैसी हरकत नही कर सकता। राइट?"
"राइट, मैने अपनी पूरी ज़िंदगी लोगो को ये लत छुडवाते बिता दी और मैं दावे के साथ कह सकता हू कि विश्वा ऐसा काम नही कर सकता था।"
"तो फिर वो किसी और कारण से यहा से निकला होगा....ऐसा कौन सा कारण हो सकता है..?"
"यकीन मानिए,राजासाहब यही सवाल मुझे भी परेशान कर रहा है और एक दिन भी ऐसा नही गुज़रा होगा जब मैने इसका जवाब तलाशने की कोशिश ना की हो।"
"डॉक्टर साहब, मुझे भी इस सवाल का जवाब मिलता नज़र नही आता। अच्छा उस रात यहा कौन-कौन था?"
"जी,मरीज़ो के अलावा नाइट ड्यूटी के 2 डॉक्टर्स और गेट पे गार्ड।"
"आपकी इजाज़त हो तो मैं उनसे बात कर सकता हू?"
"ज़रूर राजासाहब। आप इस सेंटर मे जिस से चाहे, जो चाहे पूछ सकते हैं और जब जी चाहे आ-जा सकते हैं।"
"थॅंक यु वेरी मच,डॉक्टर। तो प्लीज़ मुझे उन डॉक्टर्स और गार्ड से मिलवा दीजिए।"
"अभी लीजिए।",कह के डॉक्टर पुरन्दारे ने इंटरकोम का रिसीवर अपने कान से लगा लिया। मैत्री की प्रस्तुति.
डॉक्टर्स से राजासाहब को कुछ खास बात नही पता चली। इस वक़्त वो सेंटर के लॉन मे एक चेर पे बैठे थे और उनके सामने उस रात की ड्यूटी वाला गार्ड खड़ा था,"हुज़ूर, हमने सचमुच विश्वजीत साहब को बाहर जाते हुए नही देखा था और ना ही हम गेट से हीले थे या सोए थे।"
"देखो,हम तुम पे कोई इल्ज़ाम लगाने नही आए हैं,हम तो बस ये जानना चाहते हैं कि उस रात क्या हुआ था।"
गार्ड ने उन्हे वही सब बातें बताई जो डॉक्टर पुरन्दारे,उनका स्टाफ और पोलिसेवाले कह रहे थे।
"...तो उस रात कुछ भी ऐसा नही घटा था जिस से की किसी अनहोनी की आशंका होती।"
"जी नही,साहब। बस थोड़ी देर के लिए बिजली गयी थी जिसे बेस्कॉम वाले ठीक कर गये थे।"
"क्या? बिजली गयी थी! पूरी बात बताओ।"
गार्ड ने उन्हे पूरा किस्सा सुना दिया।
"तुमने ये बात पोलीस को बताई थी।?"
"जी,साहब।"
"ह्म्म। अच्छा,जेनरेटर ठीक करने जो आदमी बेसमेंट मे गया था,क्या तुम भी उस के साथ गये थे?" मैत्री ने आप तक पहुचाया.
"नही,साहब। उसने हमे माना कर दिया। कहने लगा कि हम परेशान ना हो,वो काम कर देगा बस छोटी सी गड़बड़ है। साहब, हमने उस वक़्त भी गेट नही छोडा था,और बिजली ठीक करने भी वॅन के साथ बस एक आदमी आया था और दस मिनिट मे चला भी गया था..और जाते वक़्त वो अकेला ही था।"
अगले दिन सुबह दस बजे राजासाहब डॉक्टर पुरन्दारे के कॅबिन मे उनके सामने बैठे थे।
"राजासाहब,जो भी हुआ उसके लिए मैं आपसे माफी चाहता हू।"
"डॉक्टर साहब आप हमे शर्मिंदा कर रहे हैं। जो भी हुआ उसमे आपकी कोई ग़लती नही थी। प्लीज़ अब आप खुद को दोष देना छोड़ दीजिए।"
"पर राजासाहब विश्वजीत मेरा पेशेंट था। मेरी ज़िम्मेदारी था। मुझे तो समझ नही आता ये सब आख़िर हुआ कैसे!"
"डॉक्टर साहब आपका मानना है कि विश्वा काफ़ी हद तक ठीक हो गया था, इसीलिए वो यहा से ड्रग्स लेने के लिए भागने जैसी हरकत नही कर सकता। राइट?"
"राइट, मैने अपनी पूरी ज़िंदगी लोगो को ये लत छुडवाते बिता दी और मैं दावे के साथ कह सकता हू कि विश्वा ऐसा काम नही कर सकता था।"
"तो फिर वो किसी और कारण से यहा से निकला होगा....ऐसा कौन सा कारण हो सकता है..?"
"यकीन मानिए,राजासाहब यही सवाल मुझे भी परेशान कर रहा है और एक दिन भी ऐसा नही गुज़रा होगा जब मैने इसका जवाब तलाशने की कोशिश ना की हो।"
"डॉक्टर साहब, मुझे भी इस सवाल का जवाब मिलता नज़र नही आता। अच्छा उस रात यहा कौन-कौन था?"
"जी,मरीज़ो के अलावा नाइट ड्यूटी के 2 डॉक्टर्स और गेट पे गार्ड।"
"आपकी इजाज़त हो तो मैं उनसे बात कर सकता हू?"
"ज़रूर राजासाहब। आप इस सेंटर मे जिस से चाहे, जो चाहे पूछ सकते हैं और जब जी चाहे आ-जा सकते हैं।"
"थॅंक यु वेरी मच,डॉक्टर। तो प्लीज़ मुझे उन डॉक्टर्स और गार्ड से मिलवा दीजिए।"
"अभी लीजिए।",कह के डॉक्टर पुरन्दारे ने इंटरकोम का रिसीवर अपने कान से लगा लिया। मैत्री की प्रस्तुति.
डॉक्टर्स से राजासाहब को कुछ खास बात नही पता चली। इस वक़्त वो सेंटर के लॉन मे एक चेर पे बैठे थे और उनके सामने उस रात की ड्यूटी वाला गार्ड खड़ा था,"हुज़ूर, हमने सचमुच विश्वजीत साहब को बाहर जाते हुए नही देखा था और ना ही हम गेट से हीले थे या सोए थे।"
"देखो,हम तुम पे कोई इल्ज़ाम लगाने नही आए हैं,हम तो बस ये जानना चाहते हैं कि उस रात क्या हुआ था।"
गार्ड ने उन्हे वही सब बातें बताई जो डॉक्टर पुरन्दारे,उनका स्टाफ और पोलिसेवाले कह रहे थे।
"...तो उस रात कुछ भी ऐसा नही घटा था जिस से की किसी अनहोनी की आशंका होती।"
"जी नही,साहब। बस थोड़ी देर के लिए बिजली गयी थी जिसे बेस्कॉम वाले ठीक कर गये थे।"
"क्या? बिजली गयी थी! पूरी बात बताओ।"
गार्ड ने उन्हे पूरा किस्सा सुना दिया।
"तुमने ये बात पोलीस को बताई थी।?"
"जी,साहब।"
"ह्म्म। अच्छा,जेनरेटर ठीक करने जो आदमी बेसमेंट मे गया था,क्या तुम भी उस के साथ गये थे?" मैत्री ने आप तक पहुचाया.
"नही,साहब। उसने हमे माना कर दिया। कहने लगा कि हम परेशान ना हो,वो काम कर देगा बस छोटी सी गड़बड़ है। साहब, हमने उस वक़्त भी गेट नही छोडा था,और बिजली ठीक करने भी वॅन के साथ बस एक आदमी आया था और दस मिनिट मे चला भी गया था..और जाते वक़्त वो अकेला ही था।"


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