03-04-2026, 12:39 PM
रात का सन्नाटा और अंधेरे की जुर्रत
रात के सन्नाटे में दवा का नशा मीरा के शरीर में दहक रहा था। प्यास के मारे उसका गला सूख रहा था, पर यह प्यास सिर्फ पानी की नहीं थी। बदहवासी में वह बिस्तर से उठी और बिना अपना नाइटरोब पहने, सिर्फ उस तंग और छोटे नाइटगाउन में ही कमरे से बाहर निकल गई।
वह काला नाइटगाउन उसकी ऊपरी जांघों तक ही था, जो उसके चलने के साथ-साथ ऊपर सरक रहा था। उसके सुडौल बदन की हर लकीर उस पतले रेशम के आर-पार झलक रही थी।
शेर हॉल के अंधेरे कोने में बैठा था। जैसे ही उसने मीरा को उस हालत में देखा, उसकी साँसें रुक गईं। चाँदनी की मद्धिम रोशनी में मीरा का गोरा बदन और वे नंगी जांघें किसी कयामत से कम नहीं लग रही थीं।
मीरा ने किचन में जाकर ठंडे पानी का गिलास भरा और गट-गट करके पीने लगी। पानी की कुछ बूंदें उसके गले से फिसलकर उसके वक्षस्थल की गहराई में समा गईं। शेर की आँखें वहीं गड़ी थीं।
जैसे ही मीरा मुड़ी और अपने कमरे की तरफ कदम बढ़ाए, शेर ने अपना दांव खेला। उसने दबे पाँव पीछे से आकर मीरा को अपनी फौलादी बाहों में जकड़ लिया। इससे पहले कि मीरा चीख पाती, शेर का सख्त हाथ उसके मुँह पर था।
शेर: (मीरा के कान में बिल्कुल सटकर, एक डरावनी और कामुक फुसफुसाहट में) "कौन है? इस वक्त... इस घर में चोरी करने आई है क्या?"
मीरा का बदन झटके से शेर के सख्त जिस्म से टकराया। नाइटरोब न होने की वजह से मीरा का मखमली बदन और शेर की शर्ट के बीच कोई पर्दा नहीं था। शेर ने उसे पीछे से इतनी ज़ोर से भींचा कि मीरा के नितम्ब शेर की जांघों के बीच की सख्ती को साफ़ महसूस करने लगे।
मीरा: (मुँह दबा होने के कारण सिर्फ सिसकियाँ ले पा रही थी) "मम्म्... मम्म्..."
वह तड़पने लगी, पर शेर उसे हिलने का मौका नहीं दे रहा था। उसका इरादा चोर पकड़ना नहीं, बल्कि उस रेशमी बदन को अपनी रगों में उतारना था। उसका हाथ मीरा के मुँह पर था, पर उसकी उंगलियाँ मीरा के गालों और गर्दन को बड़ी बेरहमी से सहला रही थीं।
शेर [आंतरिक संवाद]: 'उफ़... मेमसाब, क्या बदन पाया है आपने। इस पतले से कपड़े के नीचे आपकी ये धड़कनें... मेरे हाथ को जला रही हैं। चोरी का इल्जाम तो बस बहाना है, असल में तो इस शेर को आपकी इस जवानी की चोरी करनी है। कितनी गरम हैं आप... कितनी प्यासी।'
शेर ने अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली। उसका हाथ अब मीरा के मुँह से थोड़ा सरक कर उसकी ठुड्डी को ज़ोर से दबाने लगा, जिससे मीरा का सिर पीछे की तरफ झुक गया और उसकी गर्दन शेर के लिए पूरी तरह बेनकाब हो गई।
शेर: "चुप रहो! अगर ज़रा भी आवाज़ की, तो अंजाम बुरा होगा। बताओ... क्या चुराने आई हो?"
मीरा की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि शेर वाकई उसे नहीं पहचान पा रहा है । पर उस स्पर्श की गर्मी और शेर के जिस्म की वहशी ताक़त मीरा के भीतर की दवा को और भड़का रही थी।
शेर का दूसरा हाथ मीरा के पेट से नीचे फिसलकर उसकी नंगी जांघों की तरफ बढ़ने लगा।
मीरा ने पूरी ताकत लगाकर खुद को शेर की गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश की, उसकी जांघें शेर की जांघों से रगड़ खा रही थीं। लेकिन शेर ने इस छटपटाहट का फायदा उठाकर उसे और भी बेरहमी से पीछे से जकड़ लिया।
शेर: (भारी और डरावनी आवाज़ में, मीरा के कान के पास फुसफुसाते हुए) "इतनी जल्दी क्या है? चोरी करके भागने की कोशिश मत कर... इस घर से कोई चीज़ बाहर नहीं जाएगी, और तू भी नहीं!"
मीरा का मुँह अभी भी शेर की हथेली के नीचे दबा हुआ था, उसकी सिसकियाँ गले में ही घुट रही थीं। शेर ने अपनी बायीं बाँह मीरा के पेट के ऊपर से घुमाकर उसे पीछे की तरफ खींचा, जिससे मीरा के नितम्ब शेर के सख्त उभार पर पूरी तरह पिस गए।
तभी, शेर ने अपना दूसरा हाथ बड़ी शातिरता से ऊपर उठाया। उसने मीरा के कंधे से उस पतले नाइटगाउन की पट्टी को एक झटके में नीचे सरका दिया। गोरा और मखमली कंधा अंधेरे में चमक उठा।
शेर [आंतरिक संवाद]: 'उफ़... मेमसाब, ये खाल है या मलाई? आज इस 'चोरी' के बहाने मैं आपकी रूह तक को लूट लूँगा। तड़पिए... जितना तड़पेंगी, ये शेर उतना ही भूखा होगा।'
शेर की उंगलियाँ अब ज़रा भी संकोच नहीं कर रही थीं। उसने अपना हाथ उस ढीले हुए नाइटगाउन के भीतर डाला और सीधे मीरा के उस भारी और सुडौल स्तन को अपनी मुट्ठी में भर लिया।
मीरा: "मम्म्म्म... आआह!"
मीरा की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह सजीव स्पर्श... वह हथेली जब उसके रेशमी और गरम स्तन पर कसी, तो उसके पूरे बदन में करंट दौड़ गया। दवा के असर ने उस दर्द और ज़बरदस्ती को एक तीखी उत्तेजना में बदल दिया था। उसे महसूस हुआ कि शेर का अंगूठा उसके सख्त निप्पल को बड़ी बेरहमी से कुचल रहा है।
शेर: (अपनी पकड़ और मज़बूत करते हुए) "क्या हुआ? दर्द हो रहा है? ये तो बस शुरुआत है... इस घर के माल पर हाथ डाला है, तो कीमत तो चुकानी होगी।"
शेर ने मीरा के स्तन को अपनी उंगलियों के बीच ऐसे भींचा जैसे वह उसे मसल देना चाहता हो। मीरा का सिर पीछे की तरफ लटक गया और उसकी नंगी गर्दन शेर के लिए पूरी तरह बेनकाब हो गई। शेर ने अपनी नाक मीरा की गर्दन में गड़ा दी और उसकी पसीने भरी खुशबू को फेफड़ों में भर लिया।
मीरा [मन ही मन]: 'हे भगवान... ये क्या हो रहा है? ये शेर है... पर ये इतना वहशी कैसे हो गया? और मेरा बदन... क्यों मैं इसे धक्का नहीं दे पा रही? क्यों ये जलन मुझे अच्छी लग रही है? वो हाथ... वो मुझे कितनी बुरी तरह भींच रहा है... आह!'
शेर का हाथ अब स्तन को छोड़ नहीं रहा था, बल्कि वह उसे मरोड़ते हुए मीरा को अपनी तरफ और ज़ोर से खींच रहा था। मीरा की नंगी जांघें शेर की लुंगी के कपड़े से रगड़ खाकर सुलग रही थीं।
अंधेरे गलियारे की वो खामोशी अब शेर की दरिंदगी और मीरा की बेबसी की गवाह बन चुकी थी। शेर ने मीरा को पीछे से इतनी ज़ोर से भींचा कि उसकी पैंट के भीतर फड़कता हुआ वह सख्त लंड मीरा के नितम्बों की दरार में किसी लोहे की छड़ की तरह फंस गया। दवा के असर और उस वहशी दबाव ने मीरा के होश फाख्ता कर दिए थे।
शेर ने अपनी पकड़ और भी हिंसक कर दी। उसका हाथ मीरा के मुँह पर इतनी ज़ोर से जमा था कि मीरा की साँसें उखड़ने लगी थीं।
शेर: (घिनौनी फुसफुसाहट में, मीरा के कान को काटते हुए) "अपनी गांड़ मेरे ऊपर रगड़ के सोच रही है कि तू भाग जाएगी? मैं सब समझता हूँ... मैं जानता हूँ तूने जान-बूझकर अपना ये मम्मूँ मेरे हाथ में दिया है ताकि मेरा ध्यान भटक जाए और तू बच निकले।"
शेर ने मीरा के स्तन को अपनी उंगलियों के बीच और भी बेरहमी से भींचा, जैसे वह उस गोरे मांस को मरोड़ देना चाहता हो।
शेर: "पर तू नहीं जानती... मैं मीरा मेमसाब का वफादार नौकर हूँ! उनकी चीज़ों पर हाथ डालने वाली चोरनी को मैं ऐसे नहीं जाने दूँगा। तू जितना अपनी जवानी मुझ पर रगड़ेगी, मेरा हाथ उतना ही सख्त होता जाएगा।"
मीरा बदहवास होकर अपना सिर हिलाने की कोशिश कर रही थी। वह चिल्लाना चाहती थी—'मैं ही तुम्हारी मेमसाब हूँ!'—लेकिन शेर का फौलादी हाथ उसके मुँह को किसी ताले की तरह बंद किए हुए था। शेर की उंगलियाँ उसके स्तन की कोमलता को किसी दुश्मन की तरह कुचल रही थीं।
मीरा [मन ही मन]: 'नहीं... आह! ये क्या कह रहा है? ये मुझे पहचान नहीं रहा या... या ये सब जान-बूझकर कर रहा है? पर वो हाथ... वो उंगलियाँ... मेरे मम्मूँ को कितनी बुरी तरह मसल रही हैं। और नीचे... वो सख्त चीज़... उफ़, मेरा बदन... मेरी योनि इतनी क्यों सुलग रही है? मुझे नफरत करनी चाहिए, पर ये रगड़... ये मुझे पागल कर रही है!'
दवा का ज़हरीला असर शेर के हर वार को मीरा के लिए और भी कामुक बना रहा था। शेर की रगड़ और उसके हाथों का वहशीपन मीरा के जिस्म में अनचाही लहरें पैदा कर रहा था। उसके निप्पल शेर की हथेली के नीचे पत्थर की तरह कड़े हो चुके थे, जो शेर को और भी उकसा रहे थे।
शेर [आंतरिक संवाद]: 'तड़प मेमसाब! आज इस 'चोरी' के खेल में मैं आपकी इज़्ज़त के हर कतरे को अपनी उंगलियों से चखूँगा। आपके ये भारी पहाड़... उफ़, मेरे हाथ में पूरी तरह समा भी नहीं रहे। और आपकी ये गांड़... ये जिस तरह मेरे लंड पर पिस रही है, मेरा सारा ज़हर अभी निकलने को बेताब है।'
शेर ने अपनी कमर को एक ज़ोरदार झटका दिया, जिससे उसका वह सख्त लंड मीरा की जांघों के बीच और गहराई से धँस गया। मीरा की आँखों से आँसू निकल आए, पर वे आँसू डर के थे या उस असहनीय उत्तेजना के, यह वह खुद भी नहीं समझ पा रही थी।
गलियारे के उमस भरे अंधेरे में शेर की साज़िश और मीरा की बेबसी एक भयानक मोड़ ले चुकी थी। शेर ने मीरा को पीछे से इतनी मजबूती से जकड़ा हुआ था कि उसका पूरा बदन शेर के सख्त जिस्म के सांचे में ढल गया था। शेर का 'चोरी रोकने' का बहाना उसे वह सब करने की आज़ादी दे रहा था, जिसकी उसने सिर्फ कल्पना की थी।
शेर की फौलादी बाँहें मीरा के पेट और छाती के इर्द-गिर्द किसी अजगर की तरह लिपटी हुई थीं। दवा की सुलगती गर्मी मीरा के रोम-रोम में ज़हर घोल रही थी, जिससे शेर का हर वार उसे और भी बेहाल कर रहा था।
मीरा: (मुँह दबा होने के कारण सिसकते हुए) "म्म्म... म्म्म्म... आआह!"
मीरा के मुँह से निकली उन दबी हुई कराहों ने शेर के भीतर के जानवर को और भी उकसा दिया। उसने अपनी पकड़ को और भी हिंसक बना लिया।
शेर: (घिनौनी फुसफुसाहट में, मीरा के कान के पास अपनी गरम साँसें छोड़ते हुए) "अरे! ये क्या? सिसकियाँ ले रही है? साली रांडी चोर... मुझे अपनी इन आवाज़ों से भटकाना चाहती है? लग रहा है तुझे भी इस वफादार के हाथों की पकड़ में मज़ा आ रहा है।"
मीरा ने अपनी पूरी ताक़त लगाकर अपना सिर हिलाया। वह चिल्लाकर कहना चाहती थी कि वह चोर नहीं, इस घर की मालकिन मीरा है, लेकिन शेर का हाथ उसके मुँह पर किसी पत्थर की तरह जमा हुआ था।
शेर: "चल अच्छा है... अगर तुझे इतना ही मज़ा आ रहा है, तो थोड़ा मज़ा मैं भी ले लेता हूँ। आखिर मेहनत तो मैं भी कर रहा हूँ तुझे भागने से रोकने में।"
कहते ही शेर ने अपनी गर्दन झुकाई और मीरा की पसीने से भीगी सुराहीदार गर्दन पर अपनी जीभ फिरा दी। उसने मीरा की उस मखमली खाल को बड़ी बेरहमी से चाटा।
शेर [आंतरिक संवाद]: 'उफ़... मेमसाब, ये गर्दन नहीं, साक्षात् जन्नत है। आपकी ये मलाई जैसी खाल... मेरे ज़हर को और भड़का रही है। तड़पिए... जितना तड़पेंगी, ये शेर उतना ही वहशी होगा। आज इस 'चोरी' के बहाने मैं आपके जिस्म के हर कोने को अपनी उंगलियों से चखूँगा।'
तभी शेर ने नाइटगाउन के भीतर फँसे मीरा के उस सख्त और उभरे हुए निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच ज़ोर से भींच दिया।
मीरा: (असहनीय दर्द और तीखी उत्तेजना से तड़प उठी) "म्म्म्म्म... उफ़!"
दवा के असर ने उस चुटकी को किसी करंट की तरह मीरा के पूरे बदन में दौड़ा दिया। उसे अपनी जांघों के बीच एक गर्म सैलाब महसूस हुआ। उसकी योनि अब पूरी तरह से गीली होकर उस पतले नाइटगाउन को भिगो चुकी थी।
शेर: "क्या हुआ? कड़क हो गई? तू जितना अपनी ये गांड़ मेरे लंड पर रगड़ेगी, मैं उतना ही इस मम्मूँ को मसलूँगा। बोल... और मज़ा चाहिए?"
शेर ने मीरा को पीछे से अपनी जांघों पर और ज़ोर से दबाया। अब शेर का वह सख्त 7 इंच का लंड सीधे मीरा के नितम्बों की दरार में धँसकर उसे चुनौती दे रहा था। मीरा का बदन अब धीरे-धीरे ढीला पड़ने लगा था—दवा और शेर के स्पर्श ने उसे एक ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया था जहाँ नफरत और चाहत के बीच की लकीर मिट चुकी थी।
उसने 'चोरी' के उस झूठे इल्जाम को ढाल बनाकर मीरा के वजूद को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया था।
मीरा की सिसकियों और मदहोश कराहों ने शेर के भीतर के जानवर को और भी भड़का दिया था। उसने अपनी पकड़ और भी हिंसक कर ली।
शेर: (घिनौनी हँसी के साथ, मीरा के कान में फुसफुसाते हुए) "बहुत आवाज़ें निकाल रही है... अपनी इन सिसकियों से मुझे बहकाना चाहती है? साली चोर कहीं की! रुक, अभी तेरा मुँह पूरी तरह बंद करता हूँ ताकि तू अपनी इस जवानी का जादू मुझ पर न चला सके।"
शेर ने पास ही पड़ा एक कपड़ा उठाया और बड़ी बेरहमी से मीरा के मुँह में ठूँस दिया। मीरा की आवाज़ अब सिर्फ एक घुटती हुई कराह बनकर रह गई। उसने अपने हाथ आज़ाद करने की कोशिश की, पर शेर ने झपटकर उसकी दोनों कलाइयों को पकड़ लिया और उन्हें उसकी पीठ के पीछे मोड़ दिया।
शेर: "साली... भागने की कोशिश कर रही है? तुझे क्या लगा, इस वफादार के चंगुल से इतनी आसानी से छूट जाएगी?"
कहते ही शेर ने अपनी फुर्ती दिखाई। उसने अपनी लुंगी खोली और उसी कपड़े से मीरा के दोनों हाथों को उसकी पीठ के पीछे बड़ी मज़बूती से बांध दिया। मीरा अब पूरी तरह बेबस थी, उसका उभरा हुआ सीना और भी तंग होकर बाहर की तरफ तन गया था। शेर यहीं नहीं रुका, उसने पास पड़ा एक काला कपड़ा उठाया और मीरा की आँखों पर पट्टी बांध दी।
मद्धिम नाइटबल्ब की रोशनी में शेर ने अपनी 'पकड़' को गौर से देखा। नज़ारा किसी दरिंदे की भूख को और बढ़ाने वाला था। मीरा का एक सुडौल और दूधिया स्तन उस नाइटगाउन की पट्टी सरकने की वजह से पूरी तरह बाहर आ चुका था, जिस पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। उसके हाथ पीछे बंधे थे, जिससे उसका जिस्म और भी ज़्यादा कामुक तरीके से धनुष की तरह तन गया था। आँखों पर काली पट्टी और मुँह में ठूँसा हुआ कपड़ा उसकी बेबसी की गवाही दे रहे थे।
उसका वह छोटा नाइटगाउन अब उसकी जांघों के ऊपरी हिस्से तक चढ़ चुका था, जिससे उसकी मखमली जांघें और उसके कूल्हों की गोलाई शेर की भूखी नज़रों के सामने बिल्कुल बेपर्दा थी।
शेर [आंतरिक संवाद]: 'उफ़... मेमसाब! क्या कयामत लग रही हैं आप। हाथ बंधे हुए, आँखें बंद और ये एक नंगा मम्मूँ... जिसे देखकर मेरा सारा ज़हर उबल रहा है। आपकी ये नंगी जांघें... और ये गांड़ जो मेरी लुंगी खुलने के बाद अब सीधे मेरे लट्ठे को छू रही है। आज इस 'चोरी' की सज़ा आपकी रूह याद रखेगी।'
शेर ने अपनी नंगी जांघों को मीरा के नितम्बों से सटाया। लुंगी हटने के बाद अब मीरा की कोमल खाल और शेर के उस 7 इंच के सख्त लंड के बीच सिर्फ उस नाइटगाउन का एक पतला सा पर्दा रह गया था। दवा की सुलगती गर्मी में मीरा का बदन अब पागलों की तरह कांप रहा था।
मीरा की आँखें बंद थीं, हाथ पीछे बंधे थे और मुँह में कपड़ा ठुंसा हुआ था। वह पूरी तरह से शेर के रहमोकरम पर थी। शेर ने अपनी नंगी छाती को मीरा की नंगी पीठ से सटाया और उसे पीछे से इतनी ज़ोर से भींचा कि मीरा का दम घुटने लगा।
शेर ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उस आज़ाद हो चुके दूधिया स्तन को अपनी मुट्ठी में भर लिया। उसने उसे इतनी बेरहमी से मसला कि मीरा के मुँह से कपड़े के भीतर ही एक चीख दबकर रह गई।
शेर: (मीरा की नंगी पीठ पर अपनी जीभ फिराते हुए और फिर उसके कान में ज़हरीली फुसफुसाहट के साथ) "अब आया न असली मज़ा! देख... अब तू हिल भी नहीं सकती। तेरा ये बदन... उफ़! बिल्कुल हमारी मीरा मेमसाब जैसा ही कयामत है।"
मीरा का बदन उस अपमान और उत्तेजना के दोहरे वार से कांप उठा। दवा का असर उसे अपनी सुध-बुध खोने पर मजबूर कर रहा था।
शेर: "पर कहाँ वो सती-सावित्री मेमसाब... और कहाँ तू नीच चोरनी! कहाँ तू यहाँ पराये मर्द की बाहों में सिसकियाँ ले रही है, और कहाँ वो... जो अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द के बारे में सपने में भी नहीं सोचती होंगी। अगर उन्हें पता चल जाए कि उनकी हमशक्ल चोरनी आज इस वफादार कुत्ते के लंड पर अपनी गांड़ रगड़ रही है, तो वो शर्म से मर जाएंगी।"
शेर ने मीरा के स्तन को और भी ज़ोर से भींचा और उसके निप्पल को अपने नाखूनों से खरोंचा।
शेर [आंतरिक संवाद]: 'तड़पिए मेमसाब! आपकी इस सती-सावित्री वाली छवि की धज्जियाँ तो मैंने उसी दिन उड़ा दी थीं जब मैंने उस दूध में हवस का ज़हर मिलाया था। आज आपकी ये सिसकियाँ गवाही दे रही हैं कि आपकी रूह इस 'वफादार' के स्पर्श की गुलाम हो चुकी है। आपकी ये नंगी जांघें... और ये तड़पता हुआ बदन... आज ये शेर सब कुछ चखकर ही दम लेगा।'
शेर ने अपनी कमर को एक ज़ोरदार धक्का दिया। लुंगी हटने के बाद, अब शेर का वह 7 इंच का सख्त और फड़कता हुआ लंड सीधे मीरा के कूल्हों की दरार में धँस गया।
शेर: "लेकिन तेरा जिस्म... सच कहूँ तो वाकई बड़ा कड़क है। इतना गरम और इतना रसीला... कि मेरा सारा ज़हर अभी बाहर आने को बेताब है। बोल... इस चोरी की और क्या सज़ा दूँ तुझे?"
मीरा ने अपना सिर पीछे की तरफ झुका दिया। उसकी आँखों पर बंधी पट्टी आंसुओं से नम हो चुकी थी, लेकिन उसके शरीर के निचले हिस्से में उठती वह सुलगती हुई लहर उसे शेर के और भी करीब खींच रही थी। वह चाहकर भी नफरत नहीं कर पा रही थी।
Deepak Kapoor
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