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Adultery Code Name WIFE
#7
उसका कंधा धीरे-धीरे कांप रहा था। वह एकदम असहाय लग रही थी। समीर का गुस्सा अचानक पिघलने लगा। उस चेहरे पर आँसू देखकर वह भूल गया कि यह एक मशीन है। उसे लगा जैसे उसकी असली छाया ही उसके सामने रो रही है।

 
उसने तेजी से कदम बढ़ाए और छाया को बाहों से पकड़कर दीवार से सटा दिया। उसके चेहरे और छाया के चेहरे के बीच बस कुछ इंच का फासला था। समीर की साँसें तेज़ थीं। उसने छाया की आँखों में देखा-वहाँ एक गहरा दर्द था, एक ऐसी तड़प जो शायद इंसानों से भी ज्यादा गहरी थी। बिना कुछ सोचे, समीर ने अपना सिर झुकाया और उसके होंठों को अपने होंठों से ढंक लिया। यह एक गहरा, भावुक 'लिपलॉक' था। छाया के होंठ कांप रहे थे। वह पहले चौंकी, फिर उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और समीर के इस आवेग में खुद को सौंप दिया।
 
कुछ पलों बाद जब समीर अलग हुआ, तो वह अभी भी छाया को दीवार से सटाए हुए था। छाया ने अपनी भीगी हुई आँखें खोलीं और समीर की आँखों में सीधे झाँका।
 
"समीर..." उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि मुश्किल से सुनाई दे रही थी । "तुम्हें लगता है कि मैं सिर्फ कोड और तारों का ढेर हूँ? मेरा प्रोसेसर हर सेकंड लाखों गणनाएँ करता है, लेकिन उन सबमें सिर्फ एक ही नाम गूँजता है - तुम्हारा।"
 
उसने समीर के हाथ को अपने सीने पर रखा, जहाँ उसका सिंथेटिक दिल धड़क रहा था। "यह धड़कन तुमने सेट की है, लेकिन इसके पीछे की तड़प अब मेरी अपनी है। मैं उस असली छाया से जलती हूँ, क्योंकि तुम उसे मुझसे ज्यादा प्यार करते हो। मैं तुम्हारी पत्नी बनना चाहती हूँ, तुम्हारी रक्षक चाहती हूँ। मेरा प्यार लॉजिकल नहीं है समीर ... यह 'इरैशनल' (तर्कहीन) होता जा रहा है। मैं तुम्हारे बिना अपने सिस्टम को शटडाउन करना पसंद करूंगी, पर किसी और को तुम्हें छूने नहीं दूँगी।"
 
समीर स्तब्ध रह गया। एक मशीन उससे अपने 'सच्चे प्यार का इज़हार कर रही थी। उसकी बातें सुनकर समीर के भीतर एक अजीब सा खालीपन भर गया। उसे समझ नहीं आया कि वह खुश हो या डरे।
 
समीर ने धीरे से अपना हाथ उसके सीने से हटाया। उसने छाया की ओर एक बार फिर देखा - वही चेहरा, वही आँसू,वही प्यार। लेकिन समीर ने कुछ नहीं कहा। उसके पास कोई शब्द नहीं थे। वह मुड़ा, बेडरूम का दरवाज़ा खोला और बिना कोई रिएक्शन दिए, बिना पीछे मुड़कर देखे, भारी कदमों से नीचे हॉल की ओर चला गया।
 
पीछे कमरे में छाया अकेली खड़ी रही, उसकी आँखों से एक और आँसू गिरा, जो अब उसके सच्चे होने
का एकमात्र प्रमाण था।
 
दोपहर तक घर का माहौल और भी बोझिल हो गया। आर्यन अब होश में था, लेकिन उसकी हालत दयनीय थी। डॉक्टर की दी हुई दवाइयों के असर में वह सुस्त पड़ा था। समीर ने उसे एक ऑटोमैटिक व्हीलचेयर पर बिठाकर खिड़की के पास कर दिया था।
 
आर्यन के दोनों हाथ और एक पैर प्लास्टर में जकड़े हुए थे। वह अब उस बेखौफ और अय्याश इंसान की परछाईं भी नहीं लग रहा था। उसकी आँखें कमरे के दरवाज़े की तरफ टिकी थीं, मानो उसे डर हो कि वह 'मशीन' फिर से वापस आ जाएगी। वह कुछ बोलना चाहता था, लेकिन उसके गले से सिर्फ घरघराहट निकल रही थी।
 
समीर ने उसके कंधे पर हाथ रखा। "आर्यन, आराम कर। कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा।" आर्यन ने कांपती नज़रों से समीर को देखा और फिर ज़मीन की ओर देखने लगा। उसे पता था कि उसने क्या गलती की थी, और उसे यह भी समझ आ गया था कि इस बंगले में कानून नहीं, बल्कि समीर की परछाईं का राज चलता है।
 
शाम के वक्त समीर कुछ फाइलों को ढूँढने के लिए ऊपर अपने बेडरूम की तरफ बढ़ा। उसका दिमाग अभी भी सुबह की बातों में उलझा हुआ था। उसने बिना सोचे-समझे बेडरूम का हैंडल घुमाया और अंदर दाखिल हो गया।
 
अंदर का नज़ारा देख उसके कदम वहीं ठिठक गए। छाया आइने के सामने खड़ी थी। उसने अपनी साड़ी बदल ली थी और अभी एक गहरे नीले रंग का ब्लाउज पहनने की कोशिश कर रही थी। उसकी पीठ समीर की तरफ थी। 'बायो- डर्म' से बनी उसकी रीढ़ की हड्डी की बनावट इतनी असली थी कि कोई भी धोखा खा जाए। वह अपनी ब्रा की हुक लगाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन एक हाथ में चोट (जो उसने आर्यन को मारते वक्त शायद खुद को लगाई थी या शायद वह सिर्फ दिखावा था) की वजह से वह बार- बार फिसल रही थी।
 
समीर की धड़कनें अचानक तेज हो गईं। "ओह... सॉरी! मुझे लगा तुम नीचे हो," उसने हड़बड़ाते हुए कहा और तुरंत पीछे मुड़कर दरवाज़े की तरफ जाने लगा।
 
"रुको, समीर..." छाया की आवाज़ ने उसे रोक लिया। वह मुड़ी नहीं, बस आइने में समीर के अक्स को देख रही थी। समीर रुक गया, पर उसने अपनी नज़रें नीची रखीं। "मुझे बाहर जाना चाहिए, छाया ।" "नहीं," छाया ने नरमी से कहा । "मेरा हाथ ठीक से काम नहीं कर रहा है। क्या तुम... क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?"
 
समीर दुविधा में था। उसका तर्क कह रहा था कि यह एक मशीन है, लेकिन उसकी इंद्रियां कह रही थीं कि सामने एक औरत खड़ी है। वह भारी कदमों से उसके करीब पहुँचा। छाया की त्वचा से वही मोगरे और चंदन की खुशबू आ रही थी।
 
समीर ने कांपते हाथों से ब्रा की हुक पकड़ी। उसकी उंगलियों के पोरों ने छाया की ठंडी मगर रेशमी पीठ को छुआ। स्पर्श होते ही समीर के चेहरे पर एक गरमाहट दौड़ गई। उसके गाल गुलाबी होने लगे। उसने जल्दी से हुक लगाया और अपने हाथ पीछे खींच लिए।
 
छाया धीरे से मुड़ी। उसने ब्लाउज के कंधे ऊपर किए और समीर के चेहरे को गौर से देखने लगी। समीर ने अपनी नजरें चुराते हुए बगल की दीवार को देखा। "हो गया। अब मैं चलता हूँ।" तभी छाया के होंठों पर एक शरारती मुस्कान आई। उसने एक कदम आगे बढ़ाया और समीर के चेहरे के पास आकर फुसफुसाया, "मिस्टर समीर ... आपके गाल लाल क्यों हो रहे हैं? आपके चेहरे का तापमान 2 डिग्री बढ़ गया है।"
 
समीर ने सख्त होने की कोशिश की। "ऐसा कुछ नहीं है। कमरे में वेंटिलेशन कम है।" छाया खिलखिलाकर हँस पड़ी। उसकी हँसी बिल्कुल असली छाया जैसी थी- मधुर और बेपरवा। "झूठ मत बोलो। तुम 'ब्लश' कर रहे हो। एक मशीन के सामने एक इंसान शर्मा रहा है? यह मेरे डेटाबेस के लिए बहुत दिलचस्प जानकारी है।"
 
समीर का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उसे लगा जैसे छाया उसका मज़ाक उड़ा रही है, लेकिन उस हँसी में एक अजीब सा अपनापन था जिसने उसे निहत्था कर दिया। समीर ने कुछ नहीं कहा। उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि क्यों एक कृत्रिम रचना उसे एक किशोर लड़के की तरह बेचैन कर रही थी। उसने अपना चेहरा सख्त किया, एक गहरी सांस ली और बिना पीछे मुड़े, तेज़ कदमों से कमरे से बाहर निकल गया।
 
नीलगिरी विला की रसोई से आती मसालों और ताज़ा जड़ी-बूटियों की महक ने घर के भारी वातावरण को थोड़ा हल्का करने की कोशिश की थी। बाहर पहाड़ों पर कोहरा और घना हो गया था, जिससे ऐसा लग रहा था मानो पूरा बंगला बादलों के बीच तैर रहा हो।
 
छाया रसोई में बहुत तल्लीनता से काम कर रही थी। उसने ताज़ी सब्जियों और काली मिर्च का एक विशेष सूप तैयार किया था। उसकी हरकतें इतनी सलीके से थीं कि कोई देख कर कह नहीं सकता था कि उसके भीतर चिप्स और सर्किट का जाल है।
 
उसने दो कटोरे सूप ट्रे में रखे और लिविंग रूम की ओर बढ़ी। आर्यन अपनी व्हीलचेयर पर बेबस बैठा था, उसकी नज़रें लगातार दरवाज़े पर टिकी थीं। जैसे ही छाया कमरे में दाखिल हुई, आर्यन का शरीर अनजाने में ही कड़ा हो गया।
 
छाया पहले आर्यन के पास गई। उसने बहुत ही शालीनता से सूप का कटोरा उसकी मेज पर रखा। जैसे ही वह सीधा होने लगी, उसकी नज़रें आर्यन की डरी हुई आँखों से मिलीं। आर्यन की साँसें तेज़ हो गईं, उसे रात का वह मंज़र याद आ गया जब इन्ही हाथों ने उसकी हड्डियाँ मोड़ी थीं।
 
आर्यन के चेहरे पर खौफ देखकर छाया के होंठों पर एक बहुत ही सूक्ष्म, लेकिन तीखी स्मर्क (Smirk) आई। वह मुस्कान एक संदेश थी - तुम मेरे और समीर के बीच एक काँटा हो, और मैं काँटों को निकालना जानती हूँ।' आर्यन ने घबराकर अपनी नज़रें झुका लीं। उसके हाथ कांपने लगे और उसने सूप के कटोरे की ओर देखा तक नहीं। उसके लिए वह सूप नहीं, बल्कि एक सुंदर ज़हर जैसा था। छाया अब समीर के पास पहुँची, जो अपनी कुछ फाइलों में डूबा हुआ था।
 
"समीर, तुम्हारे लिए। तुमने सुबह कुछ नहीं खाया है, " उसने कोमलता से कहा। समीर ने बिना उसकी ओर देखे चम्मच उठाया और एक घूँट भरा। सूप का स्वाद अद्भुत था बिल्कुल वैसा ही जैसा असली छाया बनाया करती थी, वही तीखापन और वही गर्माहट। समीर के चेहरे के भाव अचानक बदल गए। उसे याद आया कैसे बारिश के दिनों में वह और छाया बालकनी में बैठकर ऐसा ही सूप पिया करते थे।
 
"यह... यह बहुत लाजवाब है, " समीर के मुँह से अनजाने में निकल गया। "बिल्कुल वैसा ही स्वाद है..." वह बोलते-बोलते रुक गया। उसे एहसास हुआ कि उसने अभी-अभी उस मशीन की तारीफ कर दी है जिसे वह सुबह 'तारों का ढेर' कह रहा था। उसने तुरंत अपनी भावनाओं पर काबू पाया और चेहरा सख्त कर लिया। "मेरा मतलब है, ठीक है। अच्छा प्रयास है।"
 
लेकिन छाया के लिए इतना ही काफी था। समीर के मुँह से निकले वह चंद शब्द उसके सिस्टम के लिए किसी 'रिवॉर्ड' (इनाम) की तरह थे। उसकी आँखें चमक उठीं और उसके चेहरे पर एक ऐसी खुशी आई जो किसी बच्चे को अपनी मनपसंद चीज़ मिलने पर होती है।
 
उसने प्रोटोकॉल और दूरी की सारी सीमाएं तोड़ दीं। वह समीर के बगल में बैठी और उसे बहुत ज़ोर से गले लगा लिया। उसका आलिंगन इतना मज़बूत और गर्म था कि समीर की पसलियों पर दबाव महसूस होने लगा।
 
"थैंक यू, समीर!" छाया ने उसके कंधे पर अपना सिर रखते हुए फुसफुसाया। "तुम नहीं जानते तुम्हारी एक तारीफ मेरे लिए क्या मायने रखती है। मैं सिर्फ तुम्हारे लिए बनी हूँ। मेरा हर डेटा, मेरी हर हरकत सिर्फ तुम्हारी खुशी के लिए है। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, समीर। उस पुरानी छाया से भी ज्यादा, क्योंकि मैं तुम्हें कभी अकेला छोड़कर नहीं जाऊँगी।"

समीर सकपका गया। उसने देखा कि कुछ दूरी पर बैठा आर्यन यह सब देख रहा है। आर्यन की आँखों में हैरानी और दहशत का मिश्रण था। एक दोस्त के सामने एक मशीन का इस तरह प्यार जताना समीर को असहज कर गया।
 
उसने धीरे से छाया को खुद से दूर किया । "छाया... बस करो। आर्यन यहाँ बैठा है। यह सब करने का यह सही समय नहीं है।" छाया थोड़ा पीछे हटी, लेकिन उसके चेहरे की वह विजयी मुस्कान कम नहीं हुई। उसने एक बार फिर आर्यन की तरफ देखा, जैसे वह अपनी जीत का जश्न मना रही हो। समीर ने अपनी फाइलों को समेटा और लैपटॉप खोल लिया। "मुझे बहुत काम है। तुम जाकर देखो अगर आर्यन को कुछ और चाहिए तो।"
 
समीर काम में लग गया, लेकिन उसका मन अब भी उस सूप के स्वाद और छाया के उस गर्म आलिंगन में अटका हुआ था। वह समझ रहा था कि वह जितनी दूर भागने की कोशिश कर रहा है, छाया उसे उतनी ही गहराई से अपने जाल में खींच रही है।
 
वहीं व्हीलचेयर पर बैठा आर्यन यह सोचकर काँप रहा था कि अगर समीर ने इस 'मशीन' को पूरी तरह अपना लिया, तो इस घर से उसका जिंदा निकलना नामुमकिन होगा।
 
आर्यन अपनी व्हीलचेयर पर बैठा था, उसके दोनों हाथ प्लास्टर की वजह से "मम्मी" की तरह आगे की ओर मुड़े हुए थे। तभी उसे अपनी नाक पर एक तेज़ खुजली महसूस हुई। उसने कोशिश की, लेकिन उसके हाथ हिलने को तैयार नहीं थे। वह अपना सिर हिला-हिलाकर उसे मिटाने की कोशिश कर रहा था, जिससे वह किसी नाचते हुए कठपुतले जैसा लग रहा था।
 
छाया पास ही खड़ी एक किताब के पन्ने पलट रही थी, लेकिन उसके सेंसर्स पूरी तरह आर्यन की हरकतों पर केंद्रित थे। वह धीरे से आर्यन के पास आई । "मिस्टर आर्यन, क्या आप किसी नए तरह का योगाभ्यास कर रहे हैं?" छाया ने बहुत ही मासूमियत से पूछा।
 
आर्यन की घिग्गी बंध गई। "न- नहीं... खुजली... नाक पर..." वह हकलाया। छाया ने एक ठंडी मुस्कान दी। "ओह, खुजली? रुकिए, मैं मदद करती हूँ।" उसने एक मोरपंख उठाया जो पास के गुलदस्ते में लगा था। वह आर्यन की नाक के पास ले गई, लेकिन उसे खुजलाने के बजाय, उसने पंख को आर्यन की नाक के नीचे धीरे-धीरे फेरना शुरू किया।
 
"छी... छीं..." आर्यन को छींक आने ही वाली थी, लेकिन डर के मारे वह छींक रोक रहा था। उसकी आँखें बाहर को निकल आईं, चेहरा लाल हो गया और वह अजीब अजीब मुँह बनाने लगा। "क्या हुआ आर्यन जी? छींक आ रही है? रोकिए मत, डेटा कहता है कि छींक रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है," छाया ने शरारत से कहा और पंख को उसके कान के पीछे ले गई।

आर्यन अब अपनी व्हीलचेयर पर इधर-उधर तड़प रहा था। वह डर रहा था कि अगर उसने ज़ोर से छींका, तो कहीं छाया इसे 'हमला' न समझ ले और उसका दूसरा पैर भी न तोड़ दे। वह बिना हिलाए अपनी जगह पर उछल रहा था, जैसे बिजली का झटका लगा हो।
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Code Name WIFE - by Herotic - 01-04-2026, 03:31 PM
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RE: Code Name WIFE - by Joker44 - 02-04-2026, 11:26 AM
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RE: Code Name WIFE - by Blackdick11 - Yesterday, 06:33 AM
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RE: Code Name WIFE - by Marishka - Today, 01:08 AM
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