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Adultery एक रंडी की दास्तान-The story of a corporate whore
#6
चैताली की सांसें तेज हो रही थीं जब उसने अचानक अपना पूरा वजन लड़के के कंधों पर डाल दिया और धक्का देकर अलग कर दिया। "रुको," उसने कहा, अपनी सांसों को थोड़ा सँभालते हुए। उसकी उंगलियाँ अपने छोटे काले पर्स के अंदर तलाश करने लगीं, जब तक कि उन्हें वह चिकना, चमकदार पैकेट नहीं मिल गया जिसकी उसे तलाश थी।

"ये लो," उसने कहा, अपने दाँतों से प्लास्टिक रैपर को फाड़ते हुए, जिसकी आवाज़ ऑटो के अंदर की खामोशी में गूँज उठी। उसकी हथेली में चिकने रबर का छल्ला गर्माहट छोड़ रहा था जब उसने धीरे से लड़के के सख्त, नसों से उभरे हुए लंड को अपने हाथों में लिया। उसकी उंगलियों के नीचे उसकी धड़कन महसूस हो रही थी जब उसने कंडोम को सावधानी से रोल करते हुए नीचे की ओर खींचा, हर इंच को अपनी नर्म उंगलियों से सहलाते हुए।

चैताली ने अपनी स्कर्ट की चुन्नट को उठाते हुए एक लंबी सांस ली, जिससे उसकी नंगी जांघों की चमकती त्वचा ऑटो की डिम लाइट में झिलमिला उठी। वह ड्राइवर सीट पर पीछे की ओर लेट गई, अपने घुटनों को मोड़कर छत की तरफ उठाते हुए। "देखो मत," उसने हंसते हुए कहा जब लड़के की निगाहें उसके गीले, गुलाबी चूत की तरफ आकर्षित हो गईं, जो अब पूरी तरह से उजागर था, "बस... आओ।" उसने अपनी तर्जनी से लुभावना इशारा किया।

लड़का एक पल के लिए हिचकिचाया, उसकी आँखों में संदेह और इच्छा का मिश्रण था। "पक्का?" उसने पूछा, उसका स्वर भारी हो गया था।
"हाँ, अब और नहीं रुकना," चैताली ने जवाब दिया, अपनी एड़ियों से उसकी पीठ को खींचते हुए। जैसे ही वह निकट आया, उसने अपने हाथों से लड़के के कूल्हों को पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचा, उसके गर्म, सख्त लंड का सिरा अपने नम चूत  के संपर्क में आते ही दोनों के होठों से एक साथ कराह निकली।

धीरे से दबाव डालते हुए, चैताली ने अपनी योनि की मांसपेशियों को आराम दिया जब लड़के का लंड धीरे-धीरे अंदर की ओर सरकने लगा। "ओह...," वह कराही, अपनी उंगलियों से उसकी पसलियों को पकड़ते हुए जब उसने पूरी तरह से अंदर प्रवेश किया।

लड़के ने शुरुआती धक्के धीरे-धीरे दिए, हर थ्रस्ट के साथ उसकी गति बढ़ाते हुए। चैताली ने अपना सिर पीछे की ओर झुकाया, उसकी लंबी, गीली चोटी ऑटो की सीट पर फैल गई। उसकी आँखें बंद हो गईं जब उसने अपने पैरों को लड़के की कमर के चारों ओर लपेट लिया, उसे और गहराई तक खींचते हुए। "और... और जोर से," वह हांफती हुई बोली, अपनी एड़ियों से उसकी पीठ को खरोंचने लगी।

लड़के के धक्कों का ताल तेज हो गया, ऑटो की सीट उनके वजन के नीचे चरमरा उठी। चैताली ने अपनी आँखें खोलीं और लड़के की पसीने से तर आँखों में देखा जब वह उसके अंदर चल रहा था। उसने अपने हाथों से उसके कंधों को पकड़ लिया, उसे और नीचे की ओर खींचते हुए जब अचानक लड़के का शरीर अकड़ गया। "मैं... मैं..." वह हांफता हुआ बोला, उसकी आँखें बंद हो गईं जब उसका वीर्य कंडोम में भरने लगा।

कुछ क्षणों के बाद, जब उसकी सांसें सामान्य होने लगीं, लड़के ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, कंडोम से ढका हुआ उसका अंग अब नरम पड़ चुका था। उसने इसे बंद करते हुए एक मुड़ा हुआ गांठ बना ली और बाहर झाड़ियों में फेंक दिया।

चैताली ने बिना कुछ कहे अपनी स्कर्ट को सीधा किया, उसके हाथ थोड़ा कांप रहे थे। वह ऑटो की पिछली सीट पर सरक गई, अपने बालों को संवारते हुए। ड्राइवर ने इंजन स्टार्ट किया, और ऑटो धीरे से चल पड़ा, उनके पीछे धूल का एक बादल छोड़ता हुआ।
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RE: एक रंडी की दास्तान - by MohdIqbal - 03-04-2026, 03:30 AM



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